Friday, September 30, 2011

अंदाज ए मेरा: बुआ जी की विदाई

अंदाज ए मेरा: बुआ जी की विदाई: साहित्‍य वाचस्‍पति श्री पदुमलाल पुन्‍नालाल बख्‍शी की द्वितीय कन्‍या श्रीमती सरस्‍वती देवी श्रीवास्‍तव का पिछले दिनों निधन हो गया। सरस्‍वत...

Thursday, September 29, 2011

क्या यह विज्ञापन है?

पूरा लेख यहाँ पर क्लिक करके पढ़ें क्या यह विज्ञापन है?

दोस्तों, आज आपको एक हिंदी ब्लॉगर की कथनी और करनी के बारें में बता रहा हूँ. यह श्रीमान जी हिंदी को बहुत महत्व देते हैं. इनके दो ब्लॉग आज ब्लॉग जगत में काफी अच्छी साख रखते हैं. अपनी पोस्टों में हिंदी का पक्ष लेते हुए भी नजर आते हैं. लेकिन मैंने पिछले दिनों हिंदी प्रेमियों की जानकारी के लिए इनके एक ब्लॉग पर निम्नलिखित टिप्पणी छोड़ दी. जिससे फेसबुक के कुछ सदस्य भी अपनी प्रोफाइल में हिंदी को महत्व दे सके, क्योंकि उपरोक्त ब्लॉगर भी फेसबुक के सदस्य है. मेरा ऐसा मानना है कि-कई बार हिंदी प्रेमियों का जानकारी के अभाव में या अन्य किसी प्रकार की समस्या के चलते मज़बूरी में हिंदी को इतना महत्व नहीं दें पाते हैं, क्योंकि मैं खुद भी काफी चीजों को जानकारी के अभाव में कई कार्य हिंदी में नहीं कर पाता था. लेकिन जैसे-जैसे जानकारी होती गई. तब हिंदी का प्रयोग करता गया और दूसरे लोगों भी जानकारी देता हूँ.जिससे वो भी जानकारी का फायदा उठाये. लेकिन कुछ व्यक्ति एक ऐसा "मुखौटा" पहनकर रखते हैं. जिनको पहचाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती हैं. आप आप स्वयं देखें कि-इन ऊँची साख रखने वाले ब्लॉगर के क्या विचार है उपरोक्त टिप्पणी पर. मैंने उनको जवाब भी दे दिया है. आप जवाब देकर मुझे मेरी गलतियों से भी अवगत करवाए. किसी ने कितना सही कहा कि-आज हिंदी की दुर्दशा खुद हिंदी के चाहने वालों के कारण ही है. मैं आपसे पूछता हूँ कि-क्या उपरोक्त टिप्पणी "विज्ञापन" के सभी मापदंड पूरे करती हैं. मुझे सिर्फ इतना पता है कि मेरे द्वारा दी गई उपरोक्त जानकारी से अनेकों फेसबुक के सदस्यों ने अपनी प्रोफाइल में अपना नाम हिंदी में लिख लिया है. अब इसको कोई "विज्ञापन' कहे या स्वयं का प्रचार कहे. बाकी आपकी टिप्पणियाँ मेरा मार्गदर्शन करेंगी.
नोट: मेरे विचार में एक "विज्ञापन" से विज्ञापनदाता को या किसी अन्य का हित होना चाहिए और जिस संदेश से सिर्फ देशहित होता हो. वो कभी विज्ञापन नहीं होता हैं. 
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सस्ता लैपटाप मुहैया

तमाम झंझावातों और बाधाओं को पार करते हुए छात्रों के लिए सस्ता लैपटाप मुहैया कराने की सरकार की योजना, परिकल्पना के छह वर्ष बाद मुकाम तक पहुंच गई और अक्टूबर के प्रारंभ से यह सस्ता लैपटाप छात्रों को उपलब्ध होगा।


इसकी कीमत करीब 1,500 रुपए निर्धारित की गई थी लेकिन यह बढ़कर करीब 2,200 रुपए हो गई है। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा, 35 डॉलर का टैबलेट पीसी तैयार करने की योजना ने मूर्त रूप ले लिया है और अक्टूबर से छात्रों को सस्ता लैपटाप उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि इसका नाम भी रख दिया गया है लेकिन इसे अभी जाहिर नहीं किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि हमने अगले तीन वर्षो में देश की सभी ग्राम पंचायतों को फाइवर आप्टिक से जोड़ने की योजना बनाई है क्योंकि हमारा मानना है कि सूचना एवं प्रौद्योगिकी की शिक्षा के आयामों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका है। इस दिशा में यह सस्ता टैबलेट पीसी समाज के सभी वर्ग के लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच बनाने में कारगर सिद्ध होगा।
सरकार के इस अति महत्वकांक्षी परियोजना के तहत पेश किए जा रहे लैपटाप में हार्ड डिस्क तो नहीं है लेकिन इसे 32 जीबी के बाहरी हार्ड ड्राइव से जोड़ा जा सकता है। इस लिनक्स आधारित उपकरण में ब्राडबैंड इंटरनेट, वीडियो कांफ्रेंसिग, मीडिया प्लेयर भी उपलब्ध है।

स्रोत :
http://www.livehindustan.com/news/desh/mustread/article1-laptop-332-332-192979.html

Wednesday, September 28, 2011

आपके अंदर के अपराधी को मार सकती है शादी


शोध में लोगों में होने वाले इस बदलाव की प्रमुख वजह भी खोज ली गई है। विवाह से लोगों के आत्म-नियंत्रण में महत्वपूर्ण सुधार होता है।

'क्रिमनोलॉजी एंड क्रिमिनल जस्टिस' जर्नल के मुताबिक फॉरेस्ट कहते हैं कि अपराध में सक्रिय लोगों में आने वाले बदलावों में आत्म-नियंत्रण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि विवाह के बाद लोग जोखिम लेने से बचना चाहते हैं और अपने आवेगों पर नियंत्रण रखने की कोशिश करते हैं।

यह अध्ययन 1997 के 'नेशनल लांगीट्यूडिनल सर्वे ऑफ यूथ' के विश्लेषण पर आधारित था। इस सर्वेक्षण में अमेरिकी किशोर व वयस्क शामिल थे। ज्यादातर अपराधविज्ञानियों को मानना है कि विवाह से अपराध कम करने में इसलिए मदद मिलती है क्योंकि विवाहित लोग महसूस करते हैं कि अपराध को अंजाम देकर वे बहुत कुछ खो सकते हैं।

http://www.livehindustan.com/news/lifestyle/jeevenjizyasa/article1-story-50-51-192821.html
अंदाज ए मेरा: बमलई देवी.....: .छत्‍तीसगढ राज्‍य की सबसे ऊंची चोटी पर विराजमान मां बम्‍लेश्‍वरी की धरा पर आज से पूरे आठ दिनों तक आस्‍था का सैलाब उमडेगा। साल भर मां के दर...

Tuesday, September 27, 2011

ब्लॉग प्रहरी का रूख अब अंग्रेजी की ओर

आम तौर पर लोग यह शिकायत करते हैं कि सरकार हिंदी के प्रति उपेक्षा का भाव रखती है लेकिन जो लोग इस तरह की चिंताएं जताया करते हैं उनमें से अक्सर खुद हिंदी के प्रति उदासीन हैं। ऐसे लोगों की उदासीनता के चलते ही हिंदी की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट 'ब्लॉग प्रहरी' को अब अंग्रेजी की ओर रूख करना पड  रहा है।
समय समय पर कनिष्क कश्यप जी से हमारी बातें होती रही हैं और उनकी मेहनत और लगन देखकर हमेशा ही एक अहसास हुआ कि आखिर लोग एक रचनात्मक काम में भी उनका साथ क्यों नहीं दे रहे हैं ?
क्या सिर्फ इसलिए कि वे किसी गुट का हिस्सा नहीं हैं ?
इस गुटबंदी ने हिंदी ब्लॉगिंग का बेड़ा गर्क करके रख दिया है।
हरेक सकारात्मक काम इस गुटबंदी की भेंट चढ  गया है लेकिन ये गुटबाज  अपनी हरकतों से बाज नहीं आते और दुख की बात यह है कि ये बड़े  ब्लॉगर भी कहलाते हैं।

महिलाओं के लिए अघोषित आरक्षण ?

अभी कुछ दिन पहले एक महिला ने अपने लेख मे लिखा की, "ट्रैफ़िक पुलिस वाले, लड़कियों को नियम तोड़ने पर कुछ नही बोलते हैं.  महिला वर्ग से इतनी क्या सहानुभूति हैं? क्या पुलिस वाले इनकी बाइक या स्कूटी से इतने प्रभावित हो जाते हैं कि, इनको ट्रैफ़िक नियमों और विनियमों का आभास करवाना भी भूल जाते हैं. जुर्माना लगाना तो दूर की बात हैं !"
एक लेखिका ने लिखा की " मैं महिलाओं को टिकट बुकिंग काउंटर पर व पब्लिक ट्रांस्पोर्टेशन सिस्टम में मिलने वाले किसी भी तरह के आरक्षण का समर्थन करती हूं"   मगर ये मामला पब्लिक ट्रांसपोर्ट,  ATM मशीन,  ट्रफ़िक नियम, बुकिंग काउंटर तक ही सीमित नही है, बल्कि इस अघोषित आरक्षण का दायरा बढ़ता ही जा रहा है,
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आज से अनचाही कॉल, एसएमएस से निजात

मोबाइल पर अनचाही कॉल और एसएमएस अब आपके सुकून भरे पलों में खलल नहीं डाल सकेंगे। टेलीमार्केटिंग कंपनियों का दिन भर ग्राहकों को फोन और एसएमएस कर परेशान करने का दौर अब खत्म हो जाएगा। मंगलवार से दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की ओर बनाया गया नियम लागू होगा। इस नियम के मुताबिक किसी ऑपरेटर को एक सिम से रोजाना 100 से ज्यादा एसएमएस भेजने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
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Monday, September 26, 2011

सोमवार, हिंदी ब्लॉग जगत में 'ब्लॉगर्स मीट वीकली' के लिए

एक शायर असद रज़ा के शब्दों में

सहयूनी तशददुद ओ मज़ालिम की वजह से
हालात अगरचे हैं वहां पर बड़े संगीन
ये अज्म से 'अब्बास' के होने लगा है ज़ाहिर
अब जल्द ही हो जाएगा आज़ाद फिलिस्तीन


सहयूनी तशददुद - यहूदियों की हिंसा , मज़ालिम - जुल्म का बहुवचन,


आज सोमवार है और यह दिन हिंदी ब्लॉग जगत में 'ब्लॉगर्स मीट वीकली' के लिए जाना जाता है।

Sunday, September 25, 2011

एक हिंदी प्रेमी की नाराजगी

पूरा  लेख यहाँ पर क्लिक करके पढ़ें. एक हिंदी प्रेमी की नाराजगी 
दोस्तों, उपरोक्त वार्तालाप द्वारा एक हिंदी प्रेमी की नाराजगी को देखें. आज हुई उपरोक्त वार्तालाप यहाँ डालने का उद्देश्य किसी अपमान करना नहीं है. केवल सिर्फ हिंदी चाहने वालों की "कथनी और करनी" को दर्शाने की मात्र एक छोटी-सी कोशिश है. फिर भी इस प्रतिक्रिया से कोई भी आहत होता है. तब उसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ. गोपनीयता को देखते हुए एक हिंदी प्रेमी का नाम जाहिर नहीं कर रहा हूँ.
सिरफिरा : नमस्कार जी,क्या आप नाराज है हमसे
एक हिंदी प्रेमी: नहीं जी। नाराज क्यों होंगे? नमस्कार
सिरफिरा : दो दिन वार्तालाप के हमारे सारे प्रयास असफल हो गए थें. आप कैसे है.
एक हिंदी प्रेमी: ठीक हैं। हाँ, इधर फ़ेसबुक से दूर रह रहा हूँ। मैंने खुद को दोनों समूहों* से अलग कर लिया, क्योंकि दो दिन तक मैंने इन्तजार किया. लेकिन किसी ने अपना नाम तक देवनागरी में अपनी प्रोफाइल में नहीं लिखा। मुझे तो पहले से अन्दाजा था कि गम्भीर लोग कम ही आते हैं इन साइटों पर.
सिरफिरा : कोई बात नहीं लोगों को थोड़ा समय देना पड़ता है फिर बच्चा पैदा होते ही बोलने नहीं लग जाता है.बाकी आपकी मर्जी.
एक हिंदी प्रेमी : बच्चे की बात? भाषा पर मैं खूब जानता हूँ लोगों को। लोग गीत हिन्दी के सुनेंगे, फ़िल्म देखेंगे जी। गम्भीर नहीं होंगे। कई दिग्गज ब्लागरों से पाला पड़ा है.रमेश भाई, एक काम करें। रात में बात करते हैं।
सिरफिरा : ठीक है.
 
नोट: हिंदी के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से बनाये दो समूह "हम है अनपढ़ और गँवार जी" और "अनपढ़ और गँवार" की बात हो रही है.  
यहाँ पर कितने ब्लॉगर अपनी फेसबुक/ऑरकुट/गूगल की अपनी प्रोफाइल में अपना नाम देवनागरी हिंदी लिपि में लिखना पसंद करते/इच्छुक हैं?
1. मुझे हिंदी में लिखने पर खुशी होगी.....
2. हिंदी में लिखना जरुरी नहीं है....

3. हिंदी में लिखने पर परेशानी होती है...
4. हिंदी में लिखने की जानकारी नहीं है....
5. मुझे कुछ नहीं कहना है........
6. हिंदी में नाम लिखने से स्टेट्स घटता है.....
7. हिंदी में नाम लिखने पर लोग हमें "अनपढ़" समझते हैं......

(वैसे फेसबुक की अपनी प्रोफाइल में अपना नाम देवनागरी हिंदी लिपि में नाम लिखने की जानकारी और समस्या का समाधान यहाँ http://www.facebook.com/groups/anpadh/doc/172380636175360/ इस लिंक पर किया हुआ है)

रोटी का तर्क और गर्भपात

हाल की एक खबर में यह आया कि उत्तर प्रदेश में करीब 40 हजार सिपाहियों की भर्ती होनी है। भर्ती का यह मौका वहां के लोगों के लिए इसलिए भी बड़ा है कि इनमें महिला-पुरुष दोनों के लिए बराबर का मौका  है।
प्रदेश में बेराजगारी का आलम यह है कि गर्भवती युवतियां अपनी कोख के साथ खिलवाड़ कर नौकरी की इस होड़ में शामिल होना चाहती हैं। धन्य हैं वे डॉक्टर भी जो अपने पेशागत धर्म को भूलकर एक अमानवीय और बर्बर ठहराए जाने वाले कृत्य को मदद पहुंचा रहे हैं। महज नौकरी की लालच में बड़े पैमाने पर गर्भपात कराने का ऐसा मामला देश-दुनिया में शायद ही इससे पहले कभी सुना गया हो।

अंदाज ए मेरा: जब जानवर कोई इंसान को मारे.... वहशी उसे कहते हैं स...

अंदाज ए मेरा: जब जानवर कोई इंसान को मारे.... वहशी उसे कहते हैं स...: 1706। ये अधिकृत आंकडा था आज दोपहर करीब सवा दो बजे से पहले। जी हा ! भारत में बाघ यानि राष्‍ट्रीय पशु की मौजूदगी का आंकडा। सवा दो बजे के बा...

अनपढ़ और गंवारों के समूह में शामिल होने का आमंत्रण पत्र

दोस्तों, क्या आप सोच सकते हैं कि "अनपढ़ और गँवार" लोगों का भी कोई ग्रुप इन्टरनेट की दुनिया पर भी हो सकता है? मैं आपका परिचय एक ऐसे ही ग्रुप से करवा रहा हूँ. जो हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु हिंदी प्रेमी ने बनाया है. जो अपना "नाम" करने पर विश्वास नहीं करता हैं बल्कि अच्छे "कर्म" करने के साथ ही देश प्रेम की भावना से प्रेरित होकर अपने आपको "अनपढ़ और गँवार" की संज्ञा से शोभित कर रहा है.अगर आपको विश्वास नहीं हो रहा, तब आप इस लिंक पर "हम है अनपढ़ और गँवार जी" जाकर देख लो. वैसे अब तक इस समूह में कई बुध्दिजिवों के साथ कई डॉक्टर और वकील शामिल होकर अपने आपको फक्र से अनपढ़ कहलवाने में गर्व महसूस कर रहे हैं. क्या आप भी उसमें शामिल होना चाहेंगे?  फ़िलहाल इसके सदस्य बहुत कम है, मगर बहुत जल्द ही इसमें लोग शामिल होंगे. कृपया शामिल होने से पहले नियम और शर्तों को अवश्य पढ़ लेना आपके लिए हितकारी होगा.एक बार जरुर देखें.
हिंदी मैं नाम लिखने की भीख मांगता एक पत्रकार- 
मुझ "अनपढ़ और गँवार" नाचीज़(तुच्छ) इंसान को ग्रुप/समूह के कितने सदस्य अपनी प्रोफाइल में अपना नाम पहले देवनागरी हिंदी में लिखने के बाद ही अंग्रेजी लिखकर हिंदी रूपी भीख मेरी कटोरे में डालना चाहते है.किसी भी सदस्य को अपनी प्रोफाइल में नाम हिंदी में करने में परेशानी हो रही हो तब मैं उसकी मदद करने के लिए तैयार हूँ. लेकिन मुझे प्रोफाइल में देवनागरी "हिंदी" में नाम लिखकर "हिंदी" रूपी एक भीख जरुर दें. आप एक नाम दोंगे खुदा दस हजार नाम देगा. आपके हर सन्देश पर मेरा "पंसद" का बटन क्लिक होगा. दे दो मुझे दाता के नाम पे, मुझे हिंदी में अपना नाम दो, दे दो अह्ल्ला के नाम पे, अपने बच्चों के नाम पे, अपने माता-पिता के नाम पे. दे दो, दे दो मुझे हिंदी में अपना नाम दो. पूरा लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.

Friday, September 23, 2011

मालिनी मुर्मु की ख़ुदकुशी

Girl kills self as boyfriend dumps her on Facebook

आधुनिकता के नाम पर लड़के और लड़कियां बिना विवाह किए ही संबंध बना रहे हैं और जब दिल भर जाता है तो फिर संबंध तोड़ भी रहे हैं।
इन संबंधों से दोनों को कुछ वक्त के लिए सुकून भी मिलता है और ख़ुशी भी लेकिन जब ये रिश्ते टूटते हैं तो तकलीफ़  भी देते हैं और ज़िल्लत का अहसास भी कराते हैं। बहुत लोग ज़िल्लत और शर्मिंदगी का अहसास लेकर जीते रहते हैं और जो जी नहीं पाते वे ख़ुदकुशी करके मर जाते हैं।
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Wednesday, September 21, 2011

अनुराग शर्मा जी की मशहूर पोस्ट

"यह ग़ददारी के बजाय भूल भी तो हो सकती है, सब की न सही लेकिन कुछ की तरफ़ से तो यह वास्तव में ही भूल है."
डा. दिव्या श्रीवास्तव जी की पोस्ट से पता चला कि वे किन्हीं अनुराग शर्मा जी के लेख से आहत होकर ब्लॉगिंग छोड  रही हैं।
हमें जिज्ञासा हुई कि भई ऐसा कौन सा ब्लॉगर है जो लोहे को भी पिघला सकता है ?
गूगल की मदद भी ली लेकिन कुछ पता न चला।
आज डा. दराल साहब की ताज़ा पोस्ट पर उनका कमेंट देखा।
http://tsdaral.blogspot.com/2011/09/blog-post_20.html
बस फिर क्या था, हमने उस कमेंट की दुम ऐसे पकड  ली जैसे वैतरणी पार करने वाले गय्‌या की दुम थामने की सोचते हैं। पीछा करते करते पूरे ४-५ ब्लॉग देख डाले, तब जाकर वह यादगार पोस्ट नज र आई।
पोस्ट तो ख़ैर अपनी जगह लेकिन वहां कुछ विशिष्ट लोगों के कमेंट भी नज र आए। वहां ऐसे लोग भी नज र आए जो डा. दिव्या जी के भाई बहन होने का आभास देते आ रहे हैं।
हमें लगता है कि पोस्ट ने उन्हें आहत नहीं किया बल्कि अपने भाई बहनों को वहां अपने विरोधी के साथ 'ठठ्‌ठे मारते देखना' वह सहन नहीं कर पाईं।
आप भी देखिए वह मशहूर पोस्ट और उस पर भाई-बहनों के कमेंट्‌स।
बड़ी मुश्किल से लाया हूं आपके लिए

अब कुपोस्ट से आगे क्या होगा ?

“इस्लामी आतंकवाद” की फ़र्ज़ी धारणा को तोड़ती पुस्तक


Hindi translation of bestseller "Who Killed Karkare?"
Book:
 करकरे के हत्यारे कौन ?



भारत में आतंकवाद का असली चेहरा



एस. एम. मुशरिफ़
by S.M. Mushrif
[Former, IG Police, Maharashtra]
368 pages p/b
Price: Rs 250 / US $15  $20
ISBN-10: 81-7221-038-8
ISBN-13: 978-81-7221-038-0
Year: 2010
Publishers: Pharos Media Publishing Pvt Ltd
368 पन्‍नों की यह पुस्तक भारत में “इस्लामी आतंकवाद” की फ़र्ज़ी धारणा को तोड़ती है।

यह उन शक्‍तियों के बारे में पता लगाती है जिनका महाराष्ट्र ए टी एस के प्रमुख हेमंत करकरे ने पर्दाफ़ाश करने की हिम्मत की और आख़िरकार अपने साहस, और सत्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की क़ीमत अपनी जान देकर चुकाई।

एक पुस्तक जो साफ़ तौर पर यह कहती है कि ये “ब्राह्‌मणवादियों” का “ब्राह्‌मणवादी आतंकवाद” है, इस्लामवादियों का “इस्लामी आतंकवाद” नहीं...

See More : http://hbfint.blogspot.com/2011/09/blog-post_689.html

Tuesday, September 20, 2011

चिश्ती साबरी दरवेश गेरूआ रंग भी इस्तेमाल करते हैं

तारकेश्वर गिरी जी जानते तो यह बात न लिखते कि गेरूआ वस्त्र पहनने पर फ़तवा जारी हो जाता।
तारकेश्वर गिरी जी को पता होना चाहिए कि मुसलमान मौलाना सफ़ेद लिबास पहनते हैं और चिश्ती साबरी दरवेश गेरूआ रंग भी इस्तेमाल करते हैं। हिंदू आचार्य और सन्यासी भी इन दोनों रंगों को इस्तेमाल करते हैं और दोनों ने ही आज तक इन दोनों रंगों को लेकर कोई फतवा जारी नहीं किया है।
मोदी भाई साहब ने मुस्लिम टोपी नहीं ली तो उनकी इच्छा।
इसमें मुसलमानों को नाराज  नहीं होना चाहिए।
वैसे भी नाराज  तो उससे हुआ जाता है जिससे प्यार का कोई रिश्ता हो।
हम तो उनसे नाराज  हैं जो टोपियां पहन पहन कर वहां गए, मोदी जी को 'टोपी पहनाने'।
http://taarkeshwargiri.blogspot.com/2011/09/blog-post.html

ब्लॉगर्स मीट वीकली (9) में डॉ. दराल जी का आना


ये मन ये पागल मन मेरा ---

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हमारी मान्यता, हमारे कर्म और हमारी प्रार्थना में समन्वय होना अनिवार्य है , तभी हमारा कल्याण होगा और ऐसा सामूहिक रूप से होना ज़रूरी है . लोग निष्पक्ष हो कर तथ्यों पर विचार करें तो वे सत्य को पा सकते हैं.

सत्य के सूत्र और संकेत हरेक शास्त्र में मौजूद है.
जो लोग किसी शास्त्र में विश्वास रखते हैं और फिर उसके विरुद्ध चलते हैं वे अपनी आत्मा का हनन करते हैं . ऐसे लोग कभी अच्छे लोग नहीं कहलाये जा सकते ., शास्त्रों को आदर देना ही पर्याप्त नहीं है , उनके अनुसार आचरण करना भी ज़रूरी है ., यही वह बात है जिसकी अनदेखी आज सबसे ज्यादा की जा रही है ., विश्व साहित्य में गीता एक अलग और विशिष्ट स्थान रखती है.
निष्पक्ष हो कर तथ्यों पर विचार करें तो सत्य को पा सकते हैं
ब्लॉगर्स मीट वीकली (9) में डॉ. दराल जी का आना अच्छा रहा .,

एक सवाल ?


क्या हमारी आत्मा में बसा है भ्रष्टाचार ? -सौरभ सुमन, गलियां


सुना है आजकल शहद और नारियल पानी की देश में मांग बढ़ गई है। शायद साउथ के किसानों के चेहरों पर शहद और नारियल पानी में पाए जाने वाले प्राकृतिक चीजों का असर भी शायद अब दिखने लगे। मांग में तेजी के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। वजह भ्रष्टाचार के खिलाफ 13 दिन तक अन्ना बाबा का अनशन। 

Monday, September 19, 2011

प्रस्थान या पलायन ? Escape

डा. दिव्या श्रीवास्तव जी अपने ब्लॉग ‘ज़ील‘ पर शायद अब और न लिखेंगी,
कारण उन्होंने यह बताया है कि किन्हीं अनुराग शर्मा जी ने एक पोस्ट लिखकर उनका अपमान कर दिया है और मर्धन्य से ब्लॉगर्स ने उनकी हां में हां मिलाई है।
यहां तक कि पाबला जी ने भी लिख डाला
‘छील कर रख दिया‘
बस यही बातें उन्हें खा गईं और वे हौसला हार बैठीं।
औरत ख़ुद को कितना ही ‘आयरन लेडी‘ लिख ले , लेकिन वास्तव में उसका दिल होता है मोम जैसा ही, जो एक आंच से ही पिघल जाता है और औरत का ही क्या ख़ुद मर्द का दिल भी ऐसा ही होता है चाहे वह कितना कह ले कि मर्द को दर्द नहीं होता।
दर्द भी होता है और टीस भी उठती है।
जो आदमी अपने रब की रज़ा की ख़ातिर उसका पैग़ाम आम करता है, सिर्फ़ वही इस दुख दर्द को ख़ातिर में नहीं लाता, वर्ना तो हरेक आदमी इसके सामने आखि़रकार घुटने टेक ही देता है।
समाज सुधारक बनना कोई हंसी खेल नहीं है।
जो इस राह पर चले वह चलने से पहले ही सोच ले कि
‘इक आग का दरिया है और डूब कर जाना है‘

Saturday, September 17, 2011

एक वीडियो कन्या भ्रूण रक्षा के लिए

एक आवाज़ कन्या भ्रूण रक्षा के लिए 
http://hbfint.blogspot.com/2011/09/against-female-feticide.html
यह हम सब की ज़िम्मेदारी है कि सही बात को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाएं और ऐसे पहुंचाएं कि सुनने वाले क़ायल हों और अपने ज़ुल्म से तौबा करें।
कन्या भ्रूण हत्या इस ज़मीन का बदतरीन जुर्म है।
दुख की बात है कि इसे शिक्षित लोग अंजाम दे रहे हैं।
देखिए एक वीडियो
youtube.com – Played on ETV urdu presented by samahath sama, bangalore

Tuesday, September 13, 2011

क्या इसे बौद्धिक बेईमानी नहीं कहा जाएगा ?

कैसे बनाया जाए हिंदी को जनभाषा ?

‘ऐ मुहब्बत , ज़िंदाबाद‘
अगर ये हिंदी गाने हैं तो फिर उर्दू गाने किसे कहा जाएगा ?
क्या इसे बौद्धिक बेईमानी नहीं कहा जाएगा ?

http://hbfint.blogspot.com/2011/09/blog-post_9014.html

आनलाइन हिंदी लिखने का नया टूल गेट 2 होम

आनलाइन हिंदी लिखने का यह नया टूल गेट2होम बड़ा ही क्रांतिकारी अविष्कार है। दुनिया की तमाम भाषाओं में इसमें न सिर्फ लिखना आसान होता है बल्कि वहीं से सीधे आप इसे ट्विटर, फेसबुक पर पोस्ट कर सकते हैं। इसे आप सीधे मेल भी कर सकते हैं। शेयर कर सकते हैं और जीप्लस पर भी पोस्ट कर सकते हैं। खुद ही आजमाकर देखिए। इसका लिंक है- http://gate2home.com/Hindi-Keyboard
  इसमें जाकर दाहिनी तरफ ऊपर अपनी मनचाही भाषा बदल सकते हैं।

गूगल, ऑरकुट और फेसबुक के दोस्तों, पाठकों, लेखकों और टिप्पणिकर्त्ताओं के नाम एक बहुमूल्य संदेश

दोस्तों, मैं हिंदी में लिखी या की हुई टिप्पणी जल्दी से पढ़ लेता हूँ और समझ भी जाता हूँ. अगर वहां पर कुछ लिखने का मन करता है. तब टिप्पणी भी करता हूँ और कई टिप्पणियों का प्रति उत्तर भी देता हूँ या "पसंद" का बटन दबाकर अपनी सहमति दर्ज करता हूँ. अगर मुझे आपकी बात समझ में ही नहीं आएगी. तब मैं क्या आपकी विचारधारा पर टिप्पणी करूँगा या "पसंद" का बटन दबाऊंगा? कई बार आपके सुन्दर कथनों और आपकी बहुत सुन्दर विचारधारा को अंग्रेजी में लिखे होने के कारण पढने व समझने से वंचित रह जाता हूँ. इससे मुझे बहुत पीड़ा होती है, फिर मुझे बहुत अफ़सोस होता है.अत: आपसे निवेदन है कि-आप अपना कमेंट्स हिंदी में ही लिखने का प्रयास करें.
 आइये दोस्तों, इस बार के "हिंदी दिवस" पर हम सब संकल्प लें कि-आगे से हम बात हिंदी में लिखेंगे/बोलेंगे/समझायेंगे और सभी को बताएँगे कि हम अपनी राष्ट्र भाषा हिंदी (और क्षेत्रीय भाषाओँ) को एक दिन की भाषा नहीं मानते हैं. अब देखते हैं, यहाँ कितने व्यक्ति अपनी हिंदी में टिप्पणियाँ करते हैं? अगर आपको हिंदी लिखने में परेशानी होती हो तब आप यहाँ (http://www.google.co.in/transliterate) पर जाकर हिंदी में संदेश लिखें .फिर उसको वहाँ से कॉपी करें और यहाँ पर पेस्ट कर दें. आप ऊपर दिए लिंक पर जाकर रोमन लिपि में इंग्लिश लिखो और स्पेस दो.आपका वो शब्द हिंदी में बदल जाएगा.जैसे-dhanywad = धन्यवाद.  पूरा लेख पढने के लिए यहाँ क्लिक करें

Sunday, September 11, 2011

अंदाज ए मेरा: अध्‍ययन यात्रा बनाम दारू पार्टी.... !!!!!

अंदाज ए मेरा: अध्‍ययन यात्रा बनाम दारू पार्टी.... !!!!!: दारू जो कराए कम है ! और दारू की लत.... पूछो मत ! ! लोग अपना मान सम्‍मान और बाकी सब भूलकर दारू के लिए सब कुछ करने तैयार हो जाते हैं ! ! ...

Thursday, September 8, 2011

NBT ने दिया ऑटो पब्लिश का अधिकार

यह एक ख़ुशख़बरी है कि हमें नवभारत टाइम्स की तरफ़ से यह अधिकार मिल गया है कि हम अपनी पोस्ट जब चाहे तब पब्लिश कर सकते हैं।
हमारी नॉलिज में यह अधिकार हमें ही मिला है और अगर किसी और मिला होगा तो तो वह हमारी नॉलिज में नहीं है।
बहरहाल अब शुरूआत हो ही गई है तो अब धीरे धीरे दूसरे ब्लॉगर्स को भी यह अधिकार मिल जाएगा।
फ़िलहाल आप नभाटा पर देख सकते हैं हमारा ब्लॉग 'बुनियाद'
और साथ में 

Wednesday, September 7, 2011

एक किताब का विमोचन दो बार ?

केवल सम्मानित होने और सम्मानित करने के शौक़ में
और इसी के साथ हिंदी ब्लॉगर्स की पतली जेब से मोटी रक़म भी निकाल लेंगे राइट ब्रदर्स।
कौन हैं ये राइट ब्रदर्स ?
दुनिया इन्हें जिस नाम से भी जाने हम तो इन्हें अवि-रवि की जोड़ी के नाम से जानते हैं।
इनकी ठगी की पूरी दास्तान, नहीं पूरी नहीं बल्कि अधूरी दास्तान देखिए हमारे ब्लॉग पर , 

बड़ा ब्लॉगर वह है जो कमाता है


और डेल कारनेगी ने कहा है कि ‘आदमी को सबसे प्यारी आवाज़ उसके नाम की आवाज़ लगती है‘
ठग इस बात को जानते हैं और वे लोगों की इसी कमज़ोरी का फ़ायदा उठाकर अपनी रददी को किताब के भाव बेच भागते हैं।

देखिये कमाने के कुछ जायज़ तरीके (वीडियो)

कमाईये डॉलर ही डॉलर

गूगल एडसेंस के ज़रिये
और इसके लिए देखिए आप हमारा नया ब्लॉग
‘रीडर ब्लाग्स नवभारत टाइम्स इंडिया टाइम्स‘
पर कुछ वीडियो
http://navbharattimes-indiatimes.blogspot.com/


आतंकवाद रोकने के लियें देश में अलग से आतंकवाद निरोधक मंत्रालय स्थापित करना आवश्यक


दोस्तों देश में सभी सुरक्षा प्रयासों के बाद भी अगर आये दिन अचानक बम विस्फोट से निर्दोषों की म़ोत होने लगे और यह सिलसिला इतने शक्तिशाली परमानुधारक देश में रोज़ की घटना बन जाए तो फिर तो हमे नींद से जागना होगा देश के आतंकवाद कारण जानकार उसकी तह तक पहुंच कर या तो आतंकवाद पनपने के कारणों को बातचीत से खत्म करना होगा और जो लोग बातचीत की भाषा नहीं जानते हैं उन्हें हमारे देश में हो तो यहाँ और दुसरे देश में हों तो वहां खोज खोज कर मारना होगा ........दोस्तों हमारा देश और हमारे देश के लोग रोज़ रोज़ के इस युद्ध से तंग आ गये हैं पर्दे के पीछे रहकर निर्दोषों की हत्या एक जघन्य काण्ड है और यह माफ़ी के लायक नहीं .........हमारे देश में आतंकवाद और दूसरी खबरों की पूर्व सूचनाये एकत्रित करने के लियें कई जांच एजेंसिया कार्यरत हैं उनका कार्य घटनाओं को क्रियान्वित करने के प्रयासों को निष्फल करने के लियें सूचनाये एकत्रित करना और ऐसे लोगों को धर दबोचना है लेकिन आप और हम जानते हैं के यह एजेंसियां अब राजनितिक उतार चढाव और आन्दोलन कारियों उनके मुद्दों और उनके नतीजों पर भी आंकड़े और सूचनाये एकत्रित करने में लग गये हैं इनका उपयों राष्ट्र के लियें कम और देश की सत्ताधारी पार्टी के लियें अधिक होगया है एक तो इस राष्ट्रिय अपराध को सबसे पहले रोकना जरूरी है दुसरे हमारे देश में आतंकवाद क्या है .यह विभिन्न समाजों में अचानक क्यूँ पनप रहा है इसके कारण क्या है इसका निस्तारण केसे हो सकता है आतंकवाद से प्रभावित लोग कोन है उन्हें पुनर्वासित करने के लियें क्या योजना है आतंकवाद के दोषी लोगों को सज़ा दिलवाने के लियें सरकार और अधिकारीयों की क्या भूमिका है और आतंकवाद के लियें ज़िम्मेदार कारणों को केसे खत्म कर सकारात्मक माहोल बनाया जाए इन सभी प्रयासों के बाद भी अगर कोई समूह अपनी आतंकवादी हरकतों से बाज़ नहीं आता है तो उसे केसे जड मूल से नष्ट किया जाए ..अगर इसकी जड़े विदेश में हो तो वहां घुस कर आतंकवादियों को और आतंकवाद को पनाह देने वालों को केसे तबाह किया जाए इस पर विचार और कार्य के लियें देश में एक प्रथक से आतंकवाद मंत्रालय की स्थापना करना जरूरी हो गया हैं ...... हमारे कुरान में एक आयत सुरे तोबा है जिसको पढने के पहले बिस्मिला हिर्रहमा निर्राहीम नहीं पढ़ा जाता है यानी इस आयत को पढने के पहले खुदा का नाम नहीं लिया जाता है उसमे दुश्मन से केसे निपटना चाहिए उसका तरीका बताया गया है .श्री भगवत गीता में भी दुश्मन कोई भी हो उसका नरसंहार केसे किया जाए उस बारे आदेश दिया गया है ..तो दोस्तों हमारे नेताओं और अमेरिका के आगे नोकरों की तरह से घुग्घू बन कर रहने वाले लोगों को कुरान और गीता का पाठ पढ़ाया जाना जरूरी है अगर हमारा देश का दुश्मन किसी भी देश में जा कर छुपा हो और वोह देश हमे उस दुश्मन को ना दे तो उस देश से युद्ध करने उसे बर्बाद कर उस दुश्मन को सजा देने का कानून हमारे देश में पारित किया जाए और फिर इस काम में जो भी देश बाधा बने उसे भी दुश्मन मानकर खत्म कर दिया जाए ऐसा एलान हमे विश्व में करना होगा तब कहीं जाकर हमारे देश के लोग सुकून से जी सकेंगे हमारे देश के दुश्मन पाकिस्तान में छुपे हो हमे उनकी सारी करतूतों की जानकारी हो हमारे पास सबूत हों और हम अमेरिका से पूंछे के देख लोग उसे समझा लो और अमेरिका हमे समझाए के बातचीत से मामला सुलझा लोग और चुप बेठ जाए अगर ऐसा होता रहा तो फिर हमे ऐसे हमलों से सिर्फ भगवान खुदा ही बचा सकता है ..तो दोस्तों हमे मजबूत होना होगा हमें ताकतवर बन कर विश्वव्यापी एलान करना होगा के अगर हमारे देश के किसी भी दुश्मन को किसी भी दुसरे देश ने पनाह दी तो उस देश का नक्शा हम मिटा देंगे और ऐसे एक दो करिश्मे कर के हमे बताना भी होंगे तब कहीं हम सुरक्षित रह पाएंगे वरना अमेरिका के आगे घुटने देख कर हम अगर अमन और सुकून की भीख मांगेंगे तो हमे सिर्फ और सिर्फ ठोकरों के सिवा कुछ ना मिलेगा ........अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

जेल भेज दिए गये संसद पर कलंक लगाने के मुल्ज़िम

कल हमने एक लेख लिखा था
क्या शैतानों की जमात है बीजेपी ?
और कल ही भाजपा के दो पूर्व सांसद जेल भेज दिए गये।
इन पर भारतीय संसद के इतिहास में कलंक कहलाने वाले ‘कैश फ़ॉर वोट‘ कांड में शामिल होने का आरोप है।
ये दोनों मुल्ज़िम हैं महावीर भगोड़ा और फग्गन सिंह कुलस्ते। इनके साथ ठाकुर अमर सिंह जी भी तिहाड़ भेज दिए गए हैं।
गंदी राजनीति के कारण ये लोग जेल गए हैं और अब इनकी गिरफ़्तारी के बाद भी इनके हिमायतियों के द्वारा गंदी राजनीति की जाएगी।
यही लोग देश को अपने निजी स्वार्थ के लिए बर्बाद कर रहे हैं।
Go to : http://hbfint.blogspot.com/2011/09/blog-post_1863.html

Tuesday, September 6, 2011

विक्लिंक्स के असान्जे और पागलखाना ......


देश और विदेश में इन दिनों घर ग्रस्ति और निजी जिंदगी की जोस बनी विक्लिंक्स वेबसाईट ने कई लोगों का जीना हराम कर दिया है होना भी चाहिए वोह उन सब खबरों को उजागर कर रहा है जो मेनेज कर के हमारे देश में रोक लो जाती हैं .पत्रकारिता से जुड़े सभी आप और हम लोग जानते हैं के किस तरह से एक पत्रकार कड़ी महनत के बाद एक खबर निकला कर अख़बार या टी वी चेनल के लियें ले जाता है और फिर वोह अख़बार या टी वी चेनल के मालिक अपने सम्पादक को इशारा कर उस खबर की हत्या करवा देते हैं खबर बनाने वाला और खबर देने वाला तो उस खबर को अख़बार और मीडिया में ढूंढ़ता ही रह जाता है ..............लेकिन विक्लिंक्स अंतर्राष्ट्रीय वेबसाईट ने हमारे भारत देश के उन सम्पादकों और उन अख़बार..चेनल मालिकों के मुंह पर तमाचा जड दिया है जो उन खबरों को आज अपने अख़बारों में अपने टी वी चेनलों में प्रमुखता से दिखने को तय्यार है जो खबरें वोह कभी उनके पास लाने रिपोर्टर का मजाक उड़ा कर कचरे में डाल चुके थे .........दोस्तों भारत में परम्परा है अपना कहे तो कोई नहीं मानता और अगर पराया कहे तो उसकी बात पर जल्दी विशवास किया जाता है हम जानते हैं के हमारा देश किस बात पर भरोसा करेगा और किस बात पर नहीं इसीलियें हम आज विक्लिंक्स जेसे लिंक को देश में ज्यादा हवा दे रहे हैं .........दोस्तों जरा सोचों अगर आज हमारे देश में विक्लिंक्स जो खुलासे कर रहा है उसकी बुनियाद में अगर हम जाएँ तो यह बात तो तय है के विदेश के कुछ लोग हैं जो हमारे देश के कुछ लोगों को शामिल कर हमारे देश के लोगों ख़ास कर विशिष्ठ लोगों की जासूसी कर रहे हैं और यह सब होने के बाद भी हमारा देश सतर्क नहीं है ऐसे अस्टिन में छुपे जासूसों को पकड़ने के देश में कोई प्रयास नहीं हुए हैं ......दूसरी बात देश में आज मानहानि कानून है लेकिन वोह देश वासियों पर ही लागू होना अगर विक्लिंक्स कोई अपमानकारी खुलासा भी करता है तो फिर हमारे देश के लोग उसके खिलाफ कोई भी कार्यवाही कर पाने में सक्षम नहीं हैं लेकिन विक्लिंक्स की खबरें जिस तरह से रिप्रोड्यूस कर मिडिया द्वारा दुबारा परोसी जा रही है उससे इस देश में ऐसे मिडिया कर्मियों को एक दिन उलझना पढ़ेगा और अगर किसी ने ऐसे मीडिया के खिलाफ देश में देश के मानहानिकारक कानून के तहत कार्यवाही कर लो तो बस इन लोगों को दिन में तारे नज़र आ जायेंगे ....यही हाल आजकल ब्लोगिंग का भी है वहां भी कुछ लोग विक्लिंग के किस्से रिप्रोद्युज़ कर रहे हैं जो ठीक नहीं है .....अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

क्या बीजेपी शैतानों की जमात है ?

Please see
http://hbfint.blogspot.com/2011/09/blog-post_06.html
क्या बीजेपी शैतानों की जमात है ?

यह बात बिना किसी के बताए मुसलमानों के दिमाग़ में पहले से ही है और समय समय पर इस धारणा को बीजेपी लीडर्स ख़ुद ही पुष्ट करते रहते हैं।
झारखंड के मुस्लिम गवर्नर ने अपने काम की शुरूआत अल्लाह के नाम से की तो उसे सराहने के बजाय विवाद पैदा करके वे मुसलमानों के दिलों में अपने लिए मौजूद संदेह को और ज़्यादा गहरा कर रहे हैं।
मज़ारों पर चादरें भेजना या रमज़ान में अफ़्तार पार्टियों का आयोजन ये लोग मुसलमानों को केवल धोखा देने के लिए करते हैं।
भगवा रंग और राम नाम का इस्तेमाल भी ये लोग इसी मक़सद से करते हैं।
ये रहीम के नहीं हैं तो क्या, ये तो राम के भी न हुए।
इसीलिए ये न घर के हुए और न घाट के रहे।

इनका यही अमल जारी रहा तो ये बीच में घूमने लायक़ भी नहीं बचेंगे।
(बहवाला - राष्ट्रीय सहारा उर्दू दैनिक मुख पृष्ठ दिनांक 6 सितंबर 2011 दिल्ली)



यह है बीजेपी की असलियत ?

पाठक ढेर सारे और साथ में इन्कम भी

1074 पाठकों ने आज पढ़ी हमारी पोस्ट
नवभारत टाइम्स की वेबसाइट पर हमारे  ब्लॉग बुनियाद ने  आजकल कामयाबी के झंडे गाड़ रखे हैं । इसी ब्लॉग की 5 पोस्ट्स इस समय सबसे चर्चित मानी गई हैं और दो को सुपरहिट भी क़रार दिया गया है।
आज पाठक संख्या 1074 रही। अभी हमने कुल 36 पोस्ट इस ब्लॉग पर लिखी हैं और 562 कमेंट इन सब पर हुए हैं।
कोई भी हिंदी एग्रीगेटर अपने पंजीकृत सदस्यों को एक दिन में इतने पाठक नहीं देता है।
जो लोग हमें पढ़ना चाहते हैं, वे हमारे लेख अब इस वेबसाइट पर भी देख सकते हैं।
देखिए
बुनियाद , नभाटा पर

...और एक ख़ुशख़बरी
हमारा एड सेंस अकाउंट काम कर रहा है लेकिन यह एक अंग्रेज़ी वेबसाइट है

Monday, September 5, 2011

नवभारत टाइम्स पर 7 जगह अनवर जमाल



जी हां, दोस्तो , हमारी 2 पोस्ट को सुपरहिट और 5 पोस्ट्स को सबसे चर्चित पोस्ट क़रार दिया है नभाटा ने।
आप भी देखिए निम्न लिंक पर जाकर।
http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/
थोड़ी जगह हमने दूसरों के लिए भी छोड़ दी है।
ज़रा अच्छा सा नहीं लगता कि सारी पोस्ट्स वहां एक ही आदमी की नज़र आएं।
आप भी अपनी पोस्ट लगाइये नभाटा पर और पाइये नए पाठकों से जुड़ने का सुखद अहसास।
---शांति को समर्पित एक साईट 
 

मुसलमान विशेष रूप से हाजी जी के अमल से प्रेरणा लें ...


हाजी अब्दुल रहीम अंसारी साहब
कागज़ी समाजसेवी सबक़ लें ... 

 समाचार पत्रों में आप अक्सर समाजसेवियों के बारे में पढ़ते रहते है. किन्तु जो समाजसेवी समाचार पत्रों की सुर्खियाँ बनते है उसके पीछे कितनी सतनी सच्चाई होती है. शायद हर पत्रकार जानता है. ऐसे समाजसेवियों को आईना दिखने के लिए हैं.  हाजी अब्दुल रहीम अंसारी, एक ऐसा नाम जो उन लोंगो के लिए के लिए प्रेरणा श्रोत है जो खुद को समाजसेवी कहलाने के लिए परेशान रहते है किन्तु समाजसेवा का कोई कार्य नहीं करते. 

मूलतः संत रविदासनगर भदोही जनपद के काजीपुर मुहल्ले के रहने वाले अब्दुल रहीम अंसारी नगर के अयोध्यापुरी प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर कई वर्षो तक  कार्यरत रहे. २००७ में वे इसी विद्यालय से अवकाश प्राप्त किये, दो दिन घर पर रहने के बाद उन्हें एहसास हुआ की वे घर पर खाली नहीं रह सकते. लिहाजा फिर पहुँच गए उसी स्कूल जहाँ बच्चो को पढ़ाते थे, उन्हें देखते ही बच्चे चहक उठे. उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य से पढ़ाने की इच्छा जाहिर की और नियमित रूप से विद्यालय आकर पढ़ाने लगे. यही नहीं विद्यालय का लेखा जोखा पहले उन्ही के पास रहता था, दुबारा यह जिम्मेदारी उन्हें फिर सौंप दी गयी.  २००९ में उन्होंने हज भी किया. पांच वक़्त के नमाज़ी अब्दुल रहीम अभी तक नियमित रूप से विद्यालय  आकर बच्चो को शिक्षा देते रहते है. उन्हीं के दिशा निर्देश पर पूरा विद्यालय परिवार चलता है. एक बार विद्यालय के प्रधानाद्यापक और सहायक अध्यापक राजीव श्रीवास्तव ने उन्हें अपने वेतन से कुछ पारिश्रमिक देने की बात कही तो वे  भड़क उठे.  कहा आज भी सरकार उन्हें आधी तनख्वाह देती है. हराम का लेना उन्हें पसंद नहीं जब तक शरीर साथ देगा वे बच्चों को नियमित शिक्षा देंगे. यही नहीं वे होमियोपैथिक के अच्छे जानकर भी है. विद्यालय के बच्चे जब बीमार होते हैं तो वही दवा देते हैं.. यही नहीं जो भी उनके पास इलाज के लिए पहुँचता है. उसे भी दवा देते है. और इस दवा का वे कभी एक पैसा तक नहीं लेते. आज वे अपने मुहल्ले में वे सम्मान की दृष्टि से देखे जाते है.  आज जहा लोग पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते है. ऐसे में वे सम्मान जनक पात्र ही नहीं वरन पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत  है.
सच इंसानियत, समाजसेवा का जज्बा हर इन्सान में होना चाहिए चाहे वह किसी भी धर्म का हो. ऐसे महान व्यक्तित्व को मैं सलाम करता हूँ. यदि ऐसे लोंगो का अनुसरण लोग करें तो जरा सोचिये समाज का क्या स्वरूप होगा. 

हाजी अब्दुल रहीम साहब के बारे में हमें यह सारी जानकारी हमारे मित्र हरीश सिंह जी ने दी है जो कि ख़ुद भदोही में ही रहते हैं। यह जानकर अच्छा लगता है कि हमारे बीच  अभी ऐसे  लोग मौजूद हैं जो कि अपने फ़र्ज़ पहचानते हैं और उसे अदा करते हैं और यह तो सोने पर सुहागे जैसा सुखद है कि यह सब करने वाला एक मुसलमान है।
हमारी दुआ है कि मुसलमानों को विशेष रूप से हाजी जी के अमल से प्रेरणा मिले और यूं तो वह हरेक के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं ही।
ब्लॉगर्स मीट वीकली में आज सबसे पहले हाजी अब्दुल रहीम साहब का ही ज़िक्र किया गया है। जिसे आप इस लिंक पर देख सकते हैं- 

Sunday, September 4, 2011

भाई दिनेश राय जी दिविवेदी को आज उनके जन्म दिन पर हार्दिक बधाई


भाई दिनेश राय जी दिविवेदी को आज उनके जन्म दिन पर हार्दिक बधाई ..ब्लोगिग्न की दुनिया के सिरमोर कहे जाने वाले भाई दिनेश जी का जन्म आज ही के दिन बारां में एक सिद्धांतवादी अध्यापक परिवार के यहाँ हुआ था ...मजेदार बात यह है के कल टीचर्स दे है और आज भाई दिनेश जी का जन्म
दिन है .....पेशे से वकालत कर रहे भाई दिनेश जी पत्रकार लेखक और कवि भी रहे हैं और अभी विभिन्न साह्तियिक संस्थाओं से जुड़ कर साहित्य के सेवा और हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार कर रहे हैं ...........हिंदी ब्लोगिंग में कई वर्षों से जुड़ कर हिंदी ब्लोगिग्न को सजाने संवारने और कई बेहिसाब सेद्धान्तिक और रचनात्मक पोस्टें लिख कर अपना विशिष्ठ स्थान बनाने वाले द्विवेदी जी अनवरत ब्लॉग के लेखक है और कई ब्लॉग के रचयिता.मार्ग दर्शक भी रहे हैं वर्तमान में विधि मामलात के उलझे सवालातों पर देश भर में पीड़ित लोगों को विधिक रूप से साक्षर कर भाई द्विवेदी जी ने विविध आयाम स्थापित किये हैं .....वकालत में बुलंदी और सियासत में कोमरेड गिरी ने भाई दिनेश को हर दिल अज़ीज़ बना दिया है पढना और पढ़ाना इनका काम है और इन दिनों हमारी वाणी ब्लॉग एग्रीगेटर के सम्पादक के रूप में आप महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं अनछुए पहलुओं को बहतरीन अंदाज़ में लिखना और प्रस्तुत करना दिनेश जी की प्रतिभा में चार चाँद लगा देता है और यही वजह के ब्लोगर्स इनके ब्लॉग पर टिप्पणियाँ करना अपना मान सम्मान समझते हैं ऐसे महान ब्लोगर भाई दिनेश द्विवेदी को उनके जन्म दिन पर मेरा सलाम .........................अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

पुनीत कुमार गर्ग -a new blog

ब्लॉग-स्वामी का नाम-श्री पुनीत कुमार गर्ग
ब्लॉग-स्वामी का परिचय-मेरा फोटो

PuNeeT KuMaR GarG

मेरे बारे में

एहसास के दमन में आंसू गिरा कर देखो, दोस्ती कितनी सची है अजमा कर देखो, दोस्तों को भूल कर क्या होगी दिल की हालत, किसी आईने को ज़मी पे गिरा के देखो
* मेरी राय -सुन्दर भावाभिव्यक्ति -सार्थक विषय चयन
आप भी इस ब्लॉग का भ्रमण कर नए ब्लोगर का उत्साहवर्धन करें .आपका दिन शुभ व् मंगलमय हो
शिखा कौशिक

Saturday, September 3, 2011

BLOG PAHELI-3परिणाम आने में बचे हैं कुछ ही घंटे



ब्लॉग पहेली -3 आ चुकी है आपके सामने .विजेता बनने का मौका मत चूकिए .जल्दी से दीजिये सही जवाब .कहीं कोई और आगे न निकल जाएँ !परिणाम आने में बचे हैं कुछ ही घंटे .आप भी आजमायें अपना ज्ञान ब्लॉग जगत के बारे में

मेरी शुभकामनायें तो हैं ही आपके साथ .

शिखा कौशिक

http://blogpaheli.blogspot.com

[चित्र फोटो सर्च से साभार ]




1200 हिट्स नवभारत टाइम्स की साइट पर

जी हां, आज एनबीटी की वेबसाइट पर बने हुए अपने ब्लॉग ‘बुनियाद‘ पर एक नई पोस्ट सबमिट करने गया तो देखा कि हमारी पोस्ट पर 1200 से ज़्यादा हिट्स हुए हैं।
हमारी दो पोस्ट सुपरहिट और सबसे चर्चित पोस्ट क़रार दी गई हैं जिनका ज़िक्र मिलेगा आपको नीचे दिए गए इस लिंक पर

कट्टरपंथी कौन होता है ?

Friday, September 2, 2011

इंटरनेट के अपराधियों को सज़ा मिलना चाहिए .............अब क्रमवार कम्प्यूटर और इंटरनेट के बारे में जानकारी पढिये


दोस्तों इंटरनेट हमारे देश और विश्व के लियें एक विकास क्रान्ति है तो दूसरी तरफ सरकारों के इसे नियंत्रित नहीं कर पाने के कारण यह विकास क्रान्ति विनाश क्रान्ति साबित हो रही है .हम भारत देश को ही लें यहाँ प्रतिदिन करोड़ों लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं..लेकिन कई इस माद्यम से आतंकवाद फेला रहे हैं तो कई वायरस फेला रहे हैं कई जासूसी कर रहे हैं तो कई लोग है के इस इंटरनेट के माध्यम से नफरत और साप्रदायिकता फेला रहे है एक दुसरे का अपमान कर रहे हैं .दंगे फसादात भड़का रहे है नेताओं की खिल्ली उड़ा रहे हैं और हमारा देश है के देश के साइबर कानून के तहत यह सब कठोर दंडात्मक अपराध होने के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बेठा है ...अफ़सोस की बात है के देश में इन्फोर्मेशन टेक्नोलोजी अलग से मंत्रालय होने के बाद भी यहाँ साइबर अपराध को रोकने और तलाशने के लियें कोई निट्टी नहीं बनी है हमारे देश में साइबर थाने भी ठीक तरह से नहीं बनाये गए है जो थाने हैं वोह देश के सभी कम्प्यूटर्स और आई डी पर नज़र रखने में अक्षम है ..देश में कोन व्यक्ति फर्जी आई डी बना कर लोगों को परेशान कर रहा है कोन व्यक्ति फर्जी आई डी से अपराध कर रहा है इसकी निगरानी सरकार करना ही नहीं चाहती है लेकिन अगर सरकार इसके प्रति गंभीर नहीं रही तो देश में इंटरनेट जो एक विकास क्रान्ति का प्रतीक है एक दुसरे से तुरंत जुड़ने और सुचना आदान प्रदान का मनोरंजक साधन है वही देश के अपराधी मानसिकता वालों के लियें एक स्वर्ग बन जाएगा इसलियें में कम्प्यूटर क्या है इसके तकनीकी माध्यम किया हैं सभी मामलों को आप लोगों के समक्ष क्रमवार रखने का प्रयास करूंगा में जानता हूँ मुझे इस काम के लियें कोई शाबाशी या तिपनियाँ मिलने वाली नहीं लेकिन यकीन मानिये जब भी मेरी यह श्रंखला पूरी होगी आप सभी बेसाख्ता सरकार से कह पढ़ेंगे के हाँ सरकार को इंटरनेट के माध्यम से अपराध फेलाने वालों ..नफरत फेलाने वालों के खिलाफ उनकी फर्जी आई डी तलाश कर दंडित करना चाहिए ........................अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

Thursday, September 1, 2011

Types of corruption

क्या हैं रूटीन करप्‍शन और प्‍लैन्‍ड करप्‍शन

जयती गोयल 
(http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/jayablogs/entry/%E0%A4%95-%E0%A4%AF-%E0%A4%B9-%E0%A4%B0-%E0%A4%9F-%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%AA-%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AA-%E0%A4%B2-%E0%A4%A8-%E0%A4%A1-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%AA-%E0%A4%B6%E0%A4%A8)

देश में दो तरह का भ्रष्‍टाचार है।  एक तो आम जनता से जुड़ा जिससे जनता रोज मर्रा की जिंदगी में जूझती है यानी  'रूटीन करप्‍शन' । दूसरा, सत्‍ता सुख भोगने वाले नेताओं की सोची-समझी योजना के तहत किया जाने वाला भ्रष्‍टाचार यानी  'प्‍लैन्‍ड करप्‍शन' .
 
रूटीन करप्‍शन के तहत---- राशन कार्ड बनाने, जाति प्रमाण पत्र जारी करने, बिजली कनेक्‍शन जारी करने, स्‍कूल-कॉलेज में दाखिला आदि आते हैं / इसमें सरकारी नौकरशाहों का फायदा ज्यादा होता है अनुमान के तौर पर करीब ६०-७०% की रकम इनलोगों की जेब में जाती है इस भरष्टाचार से /

प्‍लैन्‍ड करप्‍शन  के तहत ---- 2जी घोटाला, सीडब्‍ल्‍यूजी घोटाला, खाद्यान्‍न घोटाला, नोएडा जमीन घोटाला आदि आते  हैं। 

 दोनों ही तरह के करप्‍शन में बढ़ोतरी हो रही है। रूटीन करप्‍शन में रिश्‍वत की रकम बढ़ रही है, तो प्‍लैन्‍ड करप्‍शन में घोटालों के नए-नए तरीके ईजाद हो रहे हैं।

‘तुम मुझे कमेंट दो मैं तुम्हें धन्यवाद दूंगा‘- अनवर जमाल

कल एक ख़बर पढ़ने में आई कि आईआईटी में लड़कियों की तादाद कम देखकर उन्हें प्रोत्साहन देने के मक़सद से यह तय किया गया है कि लड़कियों को दाखि़ले के लिए फ़ॉर्म मुफ़्त मिलेंगे हालांकि लड़कों के लिए फ़ीस बढ़ा दी गई है।
कुछ हिन्दी ब्लॉगर्स के संग रचना जी को भी यह फ़ैसला सही नहीं लगा।
इस पर हमने यह राय दी है कि
बात यह नहीं है कि फ़ॉर्म की फ़ीस के पैसे न देने से कुल कितनी रक़म की बचत हुई और वह कितनी छोटी या कितनी बड़ी है ?
बल्कि बात यह है कि लड़की को एक विशेष सम्मान उसके लड़की होने के कारण दिया जा रहा है।
यह सम्मान लड़की को घर में भी और बाहर भी हर जगह मिलना चाहिए और रही बात शिक्षा की तो वह तो शासन की ओर से लड़के और लड़की को प्रत्येक स्तर पर बिल्कुल मुफ़्त मिलनी चाहिए।
वर्ना जो मोटा माल शिक्षा पाने में लगाएगा तो फिर वह उसे कई गुना करके वसूलेगा भी, तब कोई यह शोर न मचाए कि ये लोग भ्रष्टाचार कर रहे हैं।
मोटा माल ख़र्च करके शिक्षा पाई है तो सदाचार के रास्ते पर चलने के लिए तो नहीं ही पाई है।
माल लगाया है तो माल कमाएगा भी।
जो इतनी मोटी फ़ीस नहीं दे पाएगा और उसके बच्चे पीछे रह जाएंगे क्योंकि वह सदाचार पर चलता है। यह देखकर वह भी सदाचार छोड़कर भ्रष्टाचार करेगा और किया जा रहा है ताकि उनके बच्चे आगे बढ़ें।
बच्चे आगे बढ़ रहे हैं और देश पीछे जा रहा है।
लड़कियों की तादाद में कमी का कारण भी यही है कि आदमी बेटी पर ख़र्च करके या उसका दहेज देने के बजाय अपना जीवन स्तर ऊंचा उठाना चाहता है।
सूदख़ोर सेठों का जीवन स्तर ऊंचा हो रहा है और ख़ुद वे नीचे गिरे हुए हैं।
अजीब हाल है कि व्यक्ति माल और रूतबे में ऊंचा उठ रहा है और आगे बढ़ रहा है और इंसानियत में समाज नीचे और पीछे जा रहा है और जो इन्हें समझाता है, उस पर ये बुद्धिजीवी (?) ऐतराज़ करते हैं। 

याद रखिए कि आप ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ के मंच पर मौजूद हैं जो कि आपको ब्लॉग जगत की ताज़ा हलचल के बारे में जानकारी देने के लिए कटिबद्ध है और वक्षबद्ध भी।
यह वक्षबद्ध होना क्या होता है ?
क्या आप नहीं जानते ?
क्या आपने वह गाना सुना है ?
‘...चौड़ी छाती वीरों की‘

जो दूसरों के फटे में टांग अड़ाए, वह कटिबद्ध कहलाता है
और जो उसके बाद उठने वाले बवंडर को फ़ेस करे चौड़ी छाती के बल पर, वह वक्षबद्ध कहलाता है।
कटिबद्ध की गारंटी नहीं है कि वह मैदान छोड़कर नहीं भागेगा लेकिन वक्षबद्ध की गारंटी होती है।
है न मज़ेदार लफ़्ज़
‘वक्षबद्ध होना‘

यहां आपको ऐसी ही नई नई बातें मिलेंगी।
आपका यहां सदा स्वागत है लेकिन इस पोस्ट पर हमारी राय पर ज़रूर अपनी राय दें।
बिना धन्यवाद के और बिना आभार के यह पोस्ट आपको समर्पित है क्योंकि धन्यवाद और आभार जैसा काम आपने अभी तक इस पोस्ट के साथ किया ही नहीं है।
कमेंट दें और आभार आदि लें,

अतः कहा जा सकता है कि
‘तुम मुझे कमेंट दो मैं तुम्हें धन्यवाद दूंगा‘- अनवर जमाल

‘ब्लॉग की ख़बरें‘

1- क्या है ब्लॉगर्स मीट वीकली ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_3391.html

2- किसने की हैं कौन करेगा उनसे मोहब्बत हम से ज़्यादा ?
http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

3- क्या है प्यार का आवश्यक उपकरण ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

4- एक दूसरे के अपराध क्षमा करो
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

5- इंसान का परिचय Introduction
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/introduction.html

6- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

8- बेवफा छोड़ के जाता है चला जा
http://kunwarkusumesh.blogspot.com/2011/07/blog-post_11.html#comments

9- इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक
http://www.hamarianjuman.com/2011/07/blog-post.html

10- दुआ की ताक़त The spiritual power
http://ruhani-amaliyat.blogspot.com/2011/01/spiritual-power.html

11- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

12- शकुन्तला प्रेस कार्यालय के बाहर लगा एक फ्लेक्स बोर्ड-4
http://shakuntalapress.blogspot.com/

13- वाह री, भारत सरकार, क्या खूब कहा
http://bhadas.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

14- वैश्विक हुआ फिरंगी संस्कृति का रोग ! (HIV Test ...)
http://sb.samwaad.com/2011/07/blog-post_16.html

15- अमीर मंदिर गरीब देश
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

16- मोबाइल : प्यार का आवश्यक उपकरण Mobile
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/mobile.html

17- आपकी तस्वीर कहीं पॉर्न वेबसाइट पे तो नहीं है?
http://bezaban.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

18- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम अब तक लागू नहीं
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

19- दुनिया में सबसे ज्यादा शादियाँ करने वाला कौन है?
इसका श्रेय भारत के ज़ियोना चाना को जाता है। मिजोरम के निवासी 64 वर्षीय जियोना चाना का परिवार 180 सदस्यों का है। उन्होंने 39 शादियाँ की हैं। इनके 94 बच्चे हैं, 14 पुत्रवधुएं और 33 नाती हैं। जियोना के पिता ने 50 शादियाँ की थीं। उसके घर में 100 से ज्यादा कमरे है और हर रोज भोजन में 30 मुर्गियाँ खर्च होती हैं।
http://gyaankosh.blogspot.com/2011/07/blog-post_14.html

20 - ब्लॉगर्स मीट अब ब्लॉग पर आयोजित हुआ करेगी और वह भी वीकली Bloggers' Meet Weekly
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/bloggers-meet-weekly.html

21- इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
http://www.sahityapremisangh.com/2011/07/blog-post_3678.html

22- इसलाम में आर्थिक व्यवस्था के मार्गदर्शक सिद्धांत
http://islamdharma.blogspot.com/2012/07/islamic-economics.html

23- मेरी बिटिया सदफ स्कूल क्लास प्रतिनिधि का चुनाव जीती
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_2208.html

24- कुरआन का चमत्कार

25- ब्रह्मा अब्राहम इब्राहीम एक हैं?

26- कमबख़्तो ! सीता माता को इल्ज़ाम न दो Greatness of Sita Mata

27- राम को इल्ज़ाम न दो Part 1

28- लक्ष्मण को इल्ज़ाम न दो

29- हरेक समस्या का अंत, तुरंत

30-
अपने पड़ोसी को तकलीफ़ न दो

साहित्य की ताज़ा जानकारी

1- युद्ध -लुईगी पिरांदेलो (मां-बेटे और बाप के ज़बर्दस्त तूफ़ानी जज़्बात का अनोखा बयान)
http://pyarimaan.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

2- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

3- आतंकवादी कौन और इल्ज़ाम किस पर ? Taliban
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/taliban.html

4- तनाव दूर करने की बजाय बढ़ाती है शराब
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

5- जानिए श्री कृष्ण जी के धर्म को अपने बुद्धि-विवेक से Krishna consciousness
http://vedquran.blogspot.com/2011/07/krishna-consciousness.html

6- समलैंगिकता और बलात्कार की घटनाएं क्यों अंजाम देते हैं जवान ? Rape
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/rape.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

8- ख़ून बहाना जायज़ ही नहीं है किसी मुसलमान के लिए No Voilence
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/no-voilence.html

9- धर्म को उसके लक्षणों से पहचान कर अपनाइये कल्याण के लिए
http://charchashalimanch.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

10- बाइबिल के रहस्य- क्षमा कीजिए शांति पाइए
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

11- विश्व शांति और मानव एकता के लिए हज़रत अली की ज़िंदगी सचमुच एक आदर्श है
http://dharmiksahity.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

12- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

13- ‘इस्लामी आतंकवाद‘ एक ग़लत शब्द है Terrorism or Peace, What is Islam
http://commentsgarden.blogspot.com/2011/07/terrorism-or-peace-what-is-islam.html

14- The real mission of Christ ईसा मसीह का मिशन क्या था ? और उसे किसने आकर पूरा किया ? - Anwer Jamal
http://kuranved.blogspot.com/2010/10/real-mission-of-christ-anwer-jamal.html

15- अल्लाह के विशेष गुण जो किसी सृष्टि में नहीं है.
http://quranse.blogspot.com/2011/06/blog-post_12.html

16- लघु नज्में ... ड़ा श्याम गुप्त...
http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

17- आपको कौन लिंक कर रहा है ?, जानने के तरीके यह हैं
http://techaggregator.blogspot.com/

18- आदम-मनु हैं एक, बाप अपना भी कह ले -रविकर फैजाबादी

19-मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत

20- मौत कहते हैं जिसे वो ज़िन्दगी का होश है Death is life

21- कल रात उसने सारे ख़तों को जला दिया -ग़ज़ल Gazal

22- मोम का सा मिज़ाज है मेरा / मुझ पे इल्ज़ाम है कि पत्थर हूँ -'Anwer'

23- दिल तो है लँगूर का

24- लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी - Allama Iqbal

25- विवाद -एक लघुकथा डा. अनवर जमाल की क़लम से Dispute (Short story)

26- शीशा हमें तो आपको पत्थर कहा गया (ग़ज़ल)