Tuesday, July 31, 2012

भ्रष्टाचार का कारण है जायज़ और नाजायज़ का फ़र्क़ भुला देना

डा. अयाज़ अहमद साहब अपने ब्लॉग ‘सोने पे सुहागा‘ पर बता रहे हैं

(1) अपनी हैसियत बढ़ाने की ख्वाहिश में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की आदत

भारत भ्रष्टाचार में जकड़ा हुआ है और भ्रष्टाचार से लड़ने वाली टीम अन्ना को देश की जनता तन्हा छोड़ चुकी है। लोकपाल तो जैसे तैसे अब बन कर ही रहेगा मगर क्या मुल्क की अवाम को अपने आप को बदलने का अहसास हो पाएगा ?
अहम मुददे भी यहां अपने अहं की भेंट चढ़ा दिए जाते हैं।
ब्लॉग जगत में भी मुददे को नहीं नाम और हैसियत को समर्थन दिया जाता है।


जनाब मासूम साहब अपने ब्लॉग ‘अमन का पैग़ाम‘ पर लिखते हैं-

नाजाएज़ और जायज़ का फर्क महसूस करें 

नारायणदत्त तिवारी उज्ज्वला और रोहित के रिश्ते पे इस ब्लॉगजगत में भी एक बहस सी छिड़ी हुई है | कोई किसी का साथ दे रहा है कोई किसी का | सबके अपने अपने विचार हैं | लेकिन सच यही है कि गलत रास्ते से पाई गयी कोई भी नेमत इंसान को आज तक रास नहीं आयी ,फिर चाहे वो ओलाद हो या पैसा |

इसका हल यही है सभी लोग जायज़ और नाजायज़ का फर्क समझें | और ऐसा कोई काम न करें जिसे समाज के सामने सर उठा के बता न सकें |  

Sunday, July 29, 2012

N. D. Tiwari, Rohit और उज्जवला की बातें करें

मा. पं. नारायणदत्त तिवारी जी को मैं अपना राजनीतिक गुरू मानता हूँ। सभी लोग जानते हैं कि उन्होने देश की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान किया। 
...मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि पं. नारायणदत्त तिवारी जैसा विनम्र राजनीतिज्ञ लाखों में एक होता है।
    जो घटनाक्रम तिवारी जी के साथ हुआ वह वाकई में दुर्भाग्यपूर्ण है।
...अब स्व.शेरसिंह की पुत्री उज्जवला की बात करें तो सरासर गलती उज्जवला की ही है। एक शादीशुदा महिला ने उस समय के जाने-माने राजनीतिज्ञ को अपने जाल में फँसाया और उसके साथ हमबिस्तर हुई। 
क्या यह सच नहीं है ?
क्या तिवारी उसके घर बलात्कार करने गया था ?
इस सेक्स के खेल में यदि सन्तान हो गई तो गलती किसकी है ?

Saturday, July 28, 2012

बच्चों की मैगज़ीन की Top 5 Websites

बच्चों को इंटरनेट पर हल्के-फुल्के मनोरंजन की तलाश रहती है लेकिन कई बार वे भटककर गलत जगह पहुंच जाते हैं। जो माता-पिता बच्चों को मनोरंजक और शिक्षाप्रद साहित्य पढ़ते देखना चाहते हैं, वे अक्सर निराश होते हैं क्योंकि बच्चों के मतलब की अच्छी भारतीय वेबसाइटों की संख्या कम है। आप अपने बच्चों को इन वेबसाइटों के बारे में बताएं, जो साफ-सुथरी और अच्छी कहानियां, कविताएं, गेम और ऐक्टिविटीज़ को प्रमोट करती हैं।
बहरहाल, लैंग्वेज बुक सेक्शन लाजवाब है जहां बच्चे हिंदी, मराठी, तेलुगू, मलयालम, तमिल और अंग्रेजी जैसी भाषाएं भी सीख सकते हैं।
देखिये :

बच्चों की मैगज़ीन की Top 5 Websites

 

खबरगंगा: 'डायन' : औरतों को प्रताड़ित किये जाने का एक और तरीका

वे बचपन के दिन थे ....मोहल्ले में दो बच्चों की मौत होने के बाद  काना-फूसी शुरू हो गयी और एक बूढी विधवा को 'डायन' करार दिया गया...हम उन्हें प्यार से 'दादी' कहा करते थे...लोगो की ये बाते हम बच्चों तक भी पहुची और हमारी प्यारी- दुलारी दादी एक  'भयानक डर' में तब्दील हो गयी... उनके घर के पास से हम दौड़ते हुए निकलते कि वो पकड़ न ले...उनके बुलाने पर भी पास नहीं जाते ...उनके परिवार को अप्रत्यक्ष तौर पर बहिष्कृत कर दिया गया ....आज सोचती हूँ तो लगता है कि हमारे बदले व्यवहार ने उन्हें कितनी 'चोटे' दी होंगी ...और ये सब इसलिए कि हमारी मानसिकता सड़ी हुई थी....जबकि हमारा मोहल्ला बौद्धिक (?) तौर पर परिष्कृत (?) लोगो का था ..!............

खबरगंगा: 'डायन' : औरतों को प्रताड़ित किये जाने का एक और तरीका:

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ग़रीबों की मदद करने वाला ग़रीब BAI FANG LI चला गया


ग़रीबों की मदद करने वाला ग़रीब चला गया.
वह हम सबके लिए एक मिसाल छोड़कर गया है.
BAI FANG LI was a Tricycle Driver for 20 years and has Donated 350,000 Renminbi to support the EDUCATION OF 300 STUDENTS WHO LIVE IN POVERTY.
One winter, he gave his last 500 Renminbi to their Teacher, “THIS IS WILL BE MY LAST DONATION AS I AM NO LONGER FIT TO WORK”. He Passed Away at the Age of 93. His name is BAI FANG LI
His body is small, even too small compared to other rickshaw operators. However, he is very energetic and enthusiast. He starts his routine at 6am to converse God in prayers. He then cruises the streets of the city on his rickshaw either to get a customer or to bring the customers to their destination. He ends his days after the hard work not sooner than 8pm.
Secret to success
This friendly and an ever smiling guy is loved by all his customers. He never cares how much a customer pays him. Because of his kindness, more people prefer to hire him than others. Perhaps out of compassion, many customers pay him more than the usual rates. Considering his small body, the concern customers, must have noticed how hard it must have been for him to push the rickshaw.

Friday, July 27, 2012

टीम अन्ना के अनशन के साइड इफ़ेक्ट Anna Hajare

'चर्चाशाली मंच' हिंदी ब्लॉग जगत में गंभीर मुद्दों पर चर्चा के जाना जाता है . देखिये एक ऐसी ही सामयिक चर्चा-

टीम अन्ना का भव्य अनशन और उसके साइड इफ़ेक्ट Anna Hajare

सवाल यह है कि क्या अन्ना भ्रष्टाचार के मुद्दे की जड़ को काट पायेंगे ?


भ्रष्टाचार सदाचार का विपरीत है. 
जब तक लोगों में सदाचार की तमन्ना नहीं जागेगी तब तक अनशन करने से सरकार को तो परेशान किया जा सकता है लेकिन भ्रष्टाचार को नहीं मिटाया जा सकता है.
अनशन का रास्ता आत्महत्या और अराजकता का रास्ता है. इस तरह अगर सरकार अन्ना के क़ानून को बिना किसी विश्लेषण और सुधार के मान लेती है तो यह भी ग़लत है और अगर अन्ना अपना अनशन तोड़ते हैं, जैसा कि अनशन करने की घोषणा वह कर चुके हैं, तो उस से जनता में मायूसी फैलेगी और अगर वह अनशन नहीं तोड़ते और वह चल बसे तो देश में भारी अराजकता फैल जायेगी.
तीनों मार्ग देश को ग़लत अंजाम की तरफ़ ले जा रहे हैं. 
अनशन और आत्महत्या बहरहाल ग़लत है.

कारगिल विजय दिवस

Thursday, July 26, 2012

ग़ज़लगंगा.dg: हमसफ़र कोई न था फिर भी सफ़र करता रहा

अपनी सारी ख्वाहिशों को दर-ब-दर करता रहा.
हमसफ़र कोई न था फिर भी सफ़र करता रहा.

एक तुम जिसको किसी पर भी नहीं आया यकीं
एक मैं जो हर किसी को मोतबर करता रहा.

बेघरी ने तोड़ डाला था उसे अंदर  तलक
इसलिए वो हर किसी के दिल में घर करता रहा .

काश! वो आकर मेरी तहरीर पढ़ लेता कभी
हर वरक जिसके लिए अश्कों से तर करता रहा.

धीरे-धीरे सांस भी उल्टी तरफ चलने लगी
धीरे-धीरे जह्र भी अपना असर करता रहा.

शह्र की सड़कों पे मेरे पांव ठहरे ही नहीं
गांव की पगडंडियों पे मैं गुजर करता रहा.

----देवेंद्र गौतम

ग़ज़लगंगा.dg: हमसफ़र कोई न था फिर भी सफ़र करता रहा:

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Wednesday, July 25, 2012

ख़्वाजा मोइनउद्दीन चिश्ती


चिश्ती संप्रदाय के माध्यम से सूफ़ीमत का प्रचार भारत में करने तथा चिश्तिया परंपराकी नींव भारत में रखने का श्रेय मध्य एशिया के सजिस्तान (सीसतान) में जन्मे हज़रत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती सिज्ज़ी (बाद में अजमेरी) (1142-1236 ई.) को जाता है।

एक बार एक दरवेश उनकी सेवा में हाजिर हुआ। उसने प्रश्न किया, “शुद्ध और पुण्य जीवन की पहचान क्या है?”

ख़्वाजा ने जवाब दिया, “इस्लामी शरीअत के आधार पर अम्र” (वांछित) तथा नहि” (निषेध) का पालन करना।अम्र या जिन बातों का ईश्वर ने आदेश दिया है, उनका पालन करें और नहि अर्थात जिन बातों को ईश्वर ने मना किया हैउनका निषेध करें।

उन्होंने ईश्वर की आराधना और लोगों की सेवा के बीच कोई भेद नहीं किया। उनका मानना था कि इंसान के दो फ़र्ज़ हैं। एक, इबादत (आराधना) और दूसरा इताअत (आज्ञापालन)। इबादत से तात्पर्य है कि पूरे आदर और सम्मान के साथ ईश्वर के सम्मुख स्वयं को समर्पित कर दिया जाए। इताअत से तात्पर्य यह है कि ईश्वर ने प्राणी मात्र के प्रति जो कर्तव्य निर्धारित किए हैं, उन्हें निष्ठा से पूरा करे। उसका समय ईश्वर के बंदों की भलाई के लिए समर्पित रहे। ख़्वाजा मुईनउद्दीन चिश्ती ने सूफ़ीमत के नौ सिद्धांत प्रतिपादित किए थे। एक सूफ़ी के लिए ये सिद्धांत है

1.        
धन नहीं अर्जित करना चाहिए।

2.        
ऋण नहीं लेना चाहिए।

3.        
किसी व्यक्ति के सामने हाथ नहीं फैलाना चाहिए।

4.        
भविष्य के लिए कोई भी चीज़ बचा कर नहीं रखना चाहिए। आवश्यकता से अधिक हो तो उसे निर्धनों में बांट दिया जाना चाहिए।

5.        
किसी व्यक्ति का अहित नहीं सोचना चाहिए। शत्रुओं के लिए भी प्रभु से उसकी सद्बुद्धि की कामना करनी चाहिए।

6.        
कोई पुण्य कार्य सम्पन्न हो, तो उसे अपने पीर की दुआ समझें या रब की कृपा।

7.        
कोई पाप घटित हो जाए, तो उसके लिए ख़ुद को जवाबदेह समझना चाहिए। उससे बचना चाहिए। ईश्वर से भय करना चाहिए।

8.        
नियमित रूप से दिन में उपवास रखें तथा रात में इबादत करें।

9.        
मौन रहना चाहिए। जब बोलना अनिवार्य हो तभी बोलें। इस्लामी शरीअत में अधिक बोलना निषेध है। उन्हीं शब्दों का प्रयोग करें जिनसे ईश्वर प्रसन्न हों।

उनकी विचारधारा, सादा जीवन और साधु-प्रवृत्ति ने लोगों का दिल जीत लिया और उन्हें काफ़ी ख्याति मिली।

Tuesday, July 24, 2012

रमज़ान के रोज़ों की बरकतें Ramazan

नवभारत टाइम्स के 'बुनियाद' ब्लॉग पर 

रोज़ा के लाभ

विज्ञान के इस आधुनिक युग में इस्लामी उपवास के विभिन्न आध्यात्मिक, सामाजिक, शारीरिक, मानसिक तथा नैतिक लाभ सिद्ध किए गए हैं। जिन्हें संक्षिप्त में बयान किया जा रहा है।
आध्यात्मिक लाभः (1) इस्लाम में रोजा का मूल उद्देश्य ईश्वरीय आज्ञापालन और ईश-भय है, इसके द्वारा एक व्यक्ति को इस योग्य बनाया जाता है कि उसका समस्त जीवन अल्लाह की इच्छानुसार व्यतीत हो। एक व्यक्ति सख्त भूक और प्यास की स्थिति में होता है, खाने पीने की प्रत्येक वस्तुयें उसके समक्ष होती हैं, एकांत में कुछ खा पी लेना अत्यंत सम्भव होता है, पर वह नहीं खाता पीता। क्यों ? इस लिए कि उसे अल्लाह की निगरानी पर दृढ़ विश्वास है। वह जानता है कि लोग तो नहीं देख रहे हैं पर अल्लाह तो देख रहा है। इस प्रकार एक महीने में वह यह शिक्षा ग्रहण करता है कि सदैव ईश्वरीय आदेश का पालन करेगा और कदापि उसकी अवज्ञा न करेगा।
 

मौत की याद इंसान को बदल कर रख देती है

आज एक पुरानी पोस्ट शेयर की जाती है-
गर तू है लक्खी बंजारा और खेप भी तेरी भारी है

ऐ ग़ाफ़िल तुझसे भी चढ़ता इक और बड़ा ब्यौपारी है

क्या शक्कर मिसरी क़ंद गरी, क्या सांभर मीठा-खारी है

क्या दाख मुनक़्क़ा सोंठ मिरच, क्या केसर लौंग सुपारी है

सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा।
                                               देखिये मूल पोस्ट -  ऐसे काम कीजिए, जिससे आपको दुआ मिले

Monday, July 23, 2012

मासूम बीमार भ्रूणों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाईये

अनम हिंदी ब्लॉग जगत के लिए जाना पहचाना नाम है। महज़ 28 दिन की अनम को हिंदी ब्लॉग जगत ने जो प्यार दिया है, वह बेमिसाल है। अनम एक ऐसी पहली कन्या भ्रूण है, जिसकी त्रासदी से हिंदी ब्लॉग जगत उसकी पैदाइश से पहले ही वाक़िफ़ हो चुका था। अनम उन मासूम भ्रूणों के दर्द को ज़ुबां दे गई, जिन्हें किसी बीमारी के कारण पैदा होने से पहले ही क़त्ल कर दिया जाता है। उनके क़त्ल को मेडिकल साइंस जायज़ मानती है और ज़माना उनके अमल पर ख़ामोश रहता है। यह ख़ामोशी एक जुर्म है। आप बोलेंगे तो करोड़ों मासूम भ्रूण बचेंगे। 
8

एक आवाज़ बीमार भ्रूण हत्या के खि़लाफ़

DR. ANWER JAMAL
प्यारी माँ  


रविकर फ़ैज़ाबादी जी का आभार, कि उन्होंने इस मुद्दे को अपनी चर्चा 949 में जगह दी।

Saturday, July 21, 2012

रमज़ान का इस्तक़बाल हिंदी ब्लॉग जगत में

हिंदी ब्लॉग जगत ने रमज़ान का इस्तक़बाल अपने ख़ास अंदाज़ में किया है। इस मौक़े पर बहुत से लेख लिखे गए और बहुत सी कविताएं लिखी गईं और इसके अलावा दूसरी गतिविधियां भी जारी रहीं। इन सबको एक साथ यशोदा अग्रवाल जी ने अपनी चर्चा में समेटने की ख़ूबसूरत कोशिश की है। देखिए उनकी यादगार चर्चा-

शनिवारीय हलचल.. में कुछ खास


ग़ज़लगंगा.dg: रखते हैं लोग जिल्द में दिल की किताब को

कांटों से भरी शाख पर खिलते गुलाब को.
हमने क़ुबूल कर लिया कैसे अज़ाब को.

दिल की नदी में टूटते बनते हुबाब को.
देखा नहीं किसी ने मेरे इज़्तराब को.

चेहरों से झांकते नहीं जज़्बात आजकल
रखते हैं लोग जिल्द में दिल की किताब को.

लम्हों की मौज ले गयी माजी के सब वरक़
अब तुम  कहां से लाओगे यादों के बाब को.

बेचेहरगी ने थाम लिया होगा उनका हाथ
चेहरे से फिर हटा लिया होगा नकाब को.

ऐसे भी कुछ सवाल थे जो हल न हो सके
ताउम्र ढूढ़ते रहे जिनके जवाब को.

तहजीब के फलक पे सितारों के दर्मियां
आंखें तलाशती रहीं आवारा ख्वाब को.

सबकी नज़र में खार सा चुभने लगा था वो
देखा था जिस किसी ने मेरे इन्तखाब को.

वो जिनकी दस्तरस में है सिमटा हुआ निजाम
दावत भी वही दे रहे हैं इन्कलाब को.

हम यूं नवाजते हैं उन्हें अपने मुल्क में
 जैसे कोई शिकार नवाज़े उकाब को.

गौतम हमारे बीच में दीवार क्यों रहे
अबके तुम अपने साथ न लाना हिजाब को.

----देवेंद्र गौतम


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Friday, July 20, 2012

हमें अपने चरित्र का निर्माण करना चाहिए

दोस्तों, काफी समय पहले मेरा लिखा एक लेख " हमें अपने चरित्र का निर्माण करना चाहिए" जो कई पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ था. यह लेख ही नहीं मेरे .......पूरा लेख यहाँ सच्चा दोस्त: हमें अपने चरित्र का निर्माण करना चाहिए: पर क्लिक करके पढ़ें.

Thursday, July 19, 2012

खुश रहना हो,तो तुलना से बचें

कुमार राधारमण जी बता रहे हैं -
लो-एस्टीम है वजह 
जब भी हम किसी से अपनी तुलना करके निराश होते हैं, तो इसका मतलब यही है कि हम अपने आप से और अपने आस-पास की चीजों से खुश नहीं हैं। साइकॉलजिस्ट डॉ. अमित चुग कहते हैं, 'दूसरों से कंपैरिजन पर कॉम्प्लेक्स फील होता है, तो मान लें कि आपको खुद को एक्सेप्ट करने में परेशानी हो रही है। अगर आप हमेशा यही सोचते रहेंगे कि वह बेहतर है या मैं बेहतर हूं, तो कभी भी आपको दिमागी शांति नहीं मिल पाएगी।'  

यही नहीं, ऐसी तुलना से आप अपनी स्पिरिट भी खोने लगेंगे। हालांकि देखने में आया है कि ऐसे लोग रियल लाइफ में भी दूसरों से कंपैरिजन कर ऐसे ही दुखी रहते हैं। 

कैसे बचें 
किसी भी तरह के कॉम्प्लेक्स से बचने का बेस्ट तरीका है कि आप जैसे हैं, वैसे ही खुद को एक्सेप्ट कर लें। जितना आप अपने साथ सहज होंगे, दूसरों की चीजें आपको उतना ही कम परेशान करेंगी। जब आप खुद को पसंद करने लगेंगे, तो आपको क्या फर्क पड़ेगा कि कौन क्या कर रहा है और कहां जा रहा है। 

आकृति कहती हैं कि अगर आप अपने बारे में अच्छा नहीं सोच सकते, तो कोई आपको अच्छा महसूस करवा भी नहीं सकता है। 

...तो मिलेगी खुशी 
- सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर लिमिटेड टाइम गुजारें। 

- याद रखें कि आप और बाकी सभी लोग अपने-आप में यूनीक हैं और सभी के पास अपना टैलंट है। 

- अपनी तुलना बस खुद से ही करें और अपनी इंप्रूवमेंट के लिए कुछ गोल्स तय कर लें। 

- अपने इंटरेस्ट की ऐक्टिविटीज में इंवॉल्व होकर नेगेटिव थॉट्स को दूर रखें। 

- अगर कभी फ्रस्ट्रेशन हो, तो अपने विचारों को लिखें या फिर किसी फ्रेंड से शेयर करें। 

- खुद से सवाल करें कि दूसरों की बड़ी समस्याओं के आगे आपकी यह लो-फीलिंग कितना मायने रखती है। 

- और अगर यह सब आपके लिए काम नहीं करता है, तो बेहतर होगा कि आप अपना अकाउंट ही डिलीट कर दें
Source : http://upchar.blogspot.in/2012/07/blog-post_17.html

Monday, July 16, 2012

ग़ालिब और आम -Manawwar Rana

'मुशायरा' ब्लॉग  पर

ग़ालिब और आम -मनव्वर राना

 
अनुवाद: डा. अनवर जमाल

अल्लाह जानता है मुहब्बत हमीं ने की
ग़ालिब के बाद आमों की इज़्ज़त हमीं ने की

जैसे भी आम हम को मिले हम ने खा लिए
आमों का मान रखा मुरव्वत हमीं ने की

खट्टे भी खाए शौक़ से मीठे भी खाए हैं
क़िस्मत के फ़ैसले पे क़नाअत हमीं ने की

क्या आज महिलाएं खुद मार खाना चाहती हैं ?

सच का सामना: क्या आज महिलाएं खुद मार खाना चाहती हैं ?:  भारत देश में ऐसा राष्टपति होना चाहिए जो देश के आम आदमी की बात सुने और भोग-विलास की वस्तुओं का त्याग करने की क्षमता रखता हो. ऐसा ना हो ...

क्या महिलाओं को पीटना मर्दानगी की निशानी है ?

सच का सामना: क्या महिलाओं को पीटना मर्दानगी की निशानी है ?: आज वैसे तो 99.98% लोगों का मीडिया और ऑफ कैमरा के सामने कहना है कि अपनी पत्नी को पीटते रहना चाहिए नहीं तो सिर पर सवार हो जाती है. उन्हें...

Saturday, July 14, 2012

ग़ज़लगंगा.dg: बाधा दौड़

बंद आंखों के सामने है 
अतृप्त इच्छाओं का एक कब्रिस्तान......
हर कब्र से उभरती हैं
तरह-तरह की आकृतियां
कुछ डराने वाली
स्याह...खौफनाक
कुछ गुदगुदानेवाली
रंग विरंगी
कुछ सीधी-सादी 
कुछ जानी-पहचानी
कुछ अनदेखी...अनजानी
किसी डब्बाबंद फिल्म के
अप्रदर्शित दृश्यों की तरह
घूमने लगती हैं
अवचेतन पटल पर.....
नींद के महासागर की अनंत गहराइयों में 
उतरने को बेचैन चेतना के 
पांव में लिपट जाती हैं जंजीर की तरह 
अपनी यात्रा स्थगित कर 
बार-बार लौट आती है चेतना 
वापस सतह पर 
किसी बेबस गोताखोर की तरह
हर वक़्त जारी रहती है
साकार से निराकार तक की 
यह बाधा दौड़.


---देवेंद्र गौतम 

ग़ज़लगंगा.dg: बाधा दौड़:

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Friday, July 13, 2012

fact n figure: कंद मूल खाकर दूंढा था गौड़ पार्टिकल

10 हज़ार वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत और खरबों डॉलर के खर्च के बाद जिस हिग्स बोसोंस नामक सूक्ष्मतम कणों को ढूंढ निकाला. प्राचीन भारत के ऋषि-मुनि उसे वीरान जंगलों में फलफूल खाकर बिना किसी खर्च के तलाश लेते थे. सृष्टि की उत्पत्ति और विकास में इन कणों की भूमिका के रहस्यों को भी उन्होंने अपनी साधना के बदौलत सुलझा लिया था. वैदिक ऋचाओं में उनकी खोज के निष्कर्ष मौजूद हैं. उन्होंने अध्यात्म के रास्ते अपनी खोज यात्रा संपन्न की थी. आज भौतिक विज्ञानं के रास्ते उन हजारों वर्षों पूर्व खोजे गए रहस्यों को दुबारा खोजा जा रहा है या फिर दूसरे शब्दों में कहें तो उनकी सत्यता की पड़ताल की जा रही है.सवाल उठता है  यह रास्ता अत्यधिक खर्चीला है. वैज्ञानिक खोज होने चाहिए. इसपर किसी को कोई आपत्ति नहीं हो सकती. लेकिन आज जब पूंजीवादी अर्थ व्यवस्था अपने संकट के चरम पर पहुंच रही है तब खोजे हुए सत्य को दुबारा खोजने में इतने भारी भरकम खर्च का क्या औचित्य है. क्यों न पहले वेदों में मौजूद कणाद ऋषि की ऋचाओ का गंभीरता से अध्ययन कर लिया जाये. उसके निष्कर्षों के आधार पर आगे की खोज यात्रा की जाये. भारत की प्राच्य विद्याओं में इतना ज्ञान विज्ञानं भरा पड़ा है की उनका अध्ययन करने में कई पीढियां कम पड़ें.
यह सच है कि हिग्स बोसोंस के जरिये वैज्ञानिक किसी वस्तु को भारहीन कर देने की क्षमता प्राप्त करने की उम्मीद कर रहे हैं. इसमें सफलता मिली तो आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई काफी सहज हो जाएगी. ऊर्जा की बचत होगी. लेकिन भारहीन करने के यंत्र पर क्या खर्च होगा अभी इसका आकलन नहीं किया जा सकता. पौराणिक काल में हनुमान के पास उड़ने की शक्ति थी. नारद जी नारायण-नारायण करते हुए पूरे ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाया करते थे. यह हिग्स बोसोंस या गौड पार्टिकल का ही तो कमाल नहीं था. इसका अध्ययन भी किया जाना चाहिए. इसपर भी विचार किया जाना चाहिए कि अन्वेषण का भौतिकवादी रास्ता सुगम है या अध्यात्मिक.

----देवेंद्र गौतम
fact n figure: कंद मूल खाकर दूंढा था गौड़ पार्टिकल:

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Thursday, July 12, 2012

ग़ज़लगंगा.dg: देवता जितने भी थे पत्थर के थे

कुछ ज़मीं के और कुछ अंबर के थे.
अक्स  सारे  डूबते  मंज़र  के  थे.

कुछ इबादत का सिला मिलता न था
देवता जितने भी थे पत्थर के थे.

दिल में कुछ, होठों पे कुछ, चेहरे पे कुछ
किस कदर मक्कार हम अंदर के थे.

खुल के कुछ कहने की गुंजाइश न थी
हम निशाने पर किसी खंज़र के थे.

मेरी बातें गौर से सुनते थे सब
हम उड़ाते जब तलक बेपर के थे.

आस्मां को नापना मुश्किल न था
फ़िक्र में हमलोग बालो-पर के थे.

उलझनों में इस कदर जकड़े थे हम
हम न दफ्तर के न अपने घर के थे.

तोड़ डाली वक़्त ने सारी अकड़
तेज़ वर्ना हम भी कुछ तेवर के थे.

-----देवेंद्र गौतम



ग़ज़लगंगा.dg: देवता जितने भी थे पत्थर के थे:

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Monday, July 9, 2012

लड़ो और आखिरी दम तक लड़ों



 दोस्तों ! आखिरकार टीम अन्ना को जंतर-मंतर पर अनशन करने की अनुमति मिल गई है। मिली जानकारी के मुताबिक, शनिवार को टीम अन्ना को 25 जुलाई से 8 अगस्त तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन करने के लिए दिल्ली पुलिस की इजाजत मिल गई है । गौरतलब है कि दो दिन पहले दिल्ली पुलिस ने मानसून सेशन के हवाला देते हुए टीम अन्ना को अनुमति देने से मना कर दिया था। टीम अन्ना के अहम अरविंद केजरीवाल के अनुसार दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से शनिवार को मुलाकात के बाद यह परमिशन दी गई है। वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि कुछ शर्तों के साथ टीम अन्ना को यह अनुमति दी गई है । 
दोस्तों ! आप यह मत सोचो कि- देश ने हमारे लिए क्या किया है, बल्कि यह सोचो हमने देश के लिए क्या किया है ? इस बार आप यह सोचकर "आर-पार" की लड़ाई के लिए श्री अन्ना हजारे जी के अनशन में शामिल (अपनी-अपनी योग्यता और सुविधानुसार) हो. वरना वो दिन दूर नहीं. जब हम और हमारी पीढियां कीड़े-मकोड़ों की तरह से रेंग-रेंगकर मरेगी. आज हमारे देश को भ्रष्टाचार ने खोखला कर दिया है. माना आज हम बहुत कमजोर है, लेकिन "एकजुट" होकर लड़ो तब कोई हम सबसे ज्यादा ताकतवर नहीं है. 
 इतिहास गवाह रहा कि जब जब जनता ने एकजुट होकर अपने अधिकारों को लेने के लिए लड़ाई (मांग) की है, तब तब उसको सफलता मिली है. लड़ो और आखिरी दम तक लड़ों. यह मेरी-तुम्हारी लड़ाई नहीं है. हम सब की लड़ाई है. मौत आज भी आनी है और मौत कल भी आनी है. मौत से मत डरो. मौत एक सच्चाई है. इसको दिल से स्वीकार करो.  
 पूरा आलेख यहाँ सिरफिरा-आजाद पंछी: लड़ो और आखिरी दम तक लड़ों क्लिक करके पढ़ें.
अगर हम अपना-अपना राग और अपनी अपनी डपली बजाते रहे तो हमें कभी कोई भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून नहीं मिलेगा. अब यह तुम्हारे ऊपर है कि गीदड़ की मौत मरना चाहते हो या शेर की मौत मरना चाहते हो. सब जोर से कहो कि- खुद मिटा देंगे लेकिन "जन लोकपाल बिल" लेकर रहेंगे. जो हमें जन लोकपाल बिल नहीं देगा तब हम यहाँ(ससंद) रहने नहीं देंगे. 
निम्नलिखित समाचार भी पढ़ेंभ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे की लड़ाई

Sunday, July 8, 2012

‘ब्लॉग की ख़बरें‘ को ज़्यादा पुरअसर बनाने के लिए आपकी राय दरकार है




‘ब्लॉग की ख़बरें‘ हिंदी ब्लॉग जगत का पहला समाचार पत्र है। आप इसमें अपनी पोस्ट का या अपने ब्लॉग का विज्ञापन दे सकते हैं। यह समाचार पत्र इस सेवा के बदले कोई फ़ीस नहीं लेता है। समाचार पत्र से जुड़े विद्वान ब्लॉग पत्रकार ब्लॉग जगत में प्रकाशित होने वाले लेख का लिंक व अन्य जानकारी भी नियमित रूप से देते रहते हैं। गुटबाज़ी और सांप्रदायिकता के बीच में किसी के दबाव में आए बिना यह काम लगातार करते रहना सचमुच बहुत हिम्मत की बात है। मुख़ालिफ़त और झूठे प्रचार की परवाह न करके भी जो इस मंच के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका प्रयास सराहनीय है। ‘ब्लॉग पत्रकारिता‘ का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, उनके फ़ौलादी हौसले को सलाम ज़रूर किया जाएगा। ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ एक वैचारिक आंदोलन है। इससे जुड़ना अपने आप में ही एक गौरव की बात है।
‘ब्लॉग की ख़बरें‘ हरेक धर्म-मत और हरेक राजनैतिक विचारधारा के ब्लॉगर का और उसकी रचनाओं का सम्मान करता है। किसी का मत और विचार कुछ भी हो, उसे यहां पेश किया जा सकता है। बात तर्क और प्रमाण से पुष्ट हो और उसका उददेश्य समाज में हो रहे अन्याय को दूर करके लोगों में जागरूकता लाना होना चाहिए।
‘ब्लॉग की ख़बरें‘ अब तक लगभग 800 पोस्ट्स का प्रकाशन कर चुका है। ‘लाइक‘ कॉलम के अन्तर्गत नज़र आने पोस्ट्स को देखकर पता चलता है कि हिंदी ब्लॉगर्स ‘महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों‘ को लेकर ज़्यादा चिंतित हैं। इसके बाद उनकी दिलचस्पी सामाजिक अन्याय, आतंकवाद और अध्यात्म के विषय में भी देखी जा सकती है। उपमा के माध्यम से अपनी बात कहने वालों से लेकर ‘बोल्ड‘ होकर सब कुछ सामने रख देने वालों तक, सभी की रचनाओं को हमारे पाठक समय देते हैं, इससे उनकी बौद्धिक परिपक्वता और उनकी समझ के विस्तृत दायरे का परिचय मिलता है। 
हमें ख़ुशी है कि सुलझी हुई सोच के अच्छे हिंदी पाठक हमसे जुड़े हुए हैं। इस ब्लॉग के सभी फ़ालोअर्स प्रतिष्ठित हिंदी ब्लॉगर्स हैं। थोड़ी सी अवधि में ही इसे 37 हज़ार से ज़्यादा पाठक पढ़ चुके हैं जो कि इसकी लोकप्रियता को दर्शाता है।
‘ब्लॉग की ख़बरें‘ आप सभी का अपना समाचार पत्र है। यह निष्पक्ष है और सच को सामने लाना इसका उददेश्य है। अपने कर्तव्य का पालन करते हुए किसी के हित पर चोट पर लगना स्वाभाविक है और उसका झल्लाना भी स्वाभाविक है। घर की सफ़ाई की जाए तो धूल ज़रूर उड़ती है।
अपने पाठकों और अपने फ़ालोअर्स का हार्दिक धन्यवाद अदा करते हुए आप सभी के विचार आमंत्रित हैं कि कैसे ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ को और ज़्यादा प्रभावी बनाया जाए ?
सच को सामने लाने के प्रयास में जो लोग ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ से किसी भी प्रकार से आहत हुए हों, वे भी अपने विचार यहां टिप्पणी के रूप में या निजी ईमेल के माध्यम से दे सकते हैं।
प्रत्येक अच्छा विचार एक अनमोल मोती है बल्कि मोती से ज़्यादा है। अच्छा विचार आभूषण भी है और आलोक भी। सद्-विचार हमें सन्मार्ग दिखाते हैं और यही हमारा अभीष्ट है।
जय हिन्द !

सोने पे सुहागा: हिंदी ब्लागर किस पोस्ट को ज़्यादा पढ़ते हैं ?-एक सर्वे जनहित में

अपने ब्लाग का स्टैट चेक करो तो पता चलता है कि हिंदी ब्लागर कैसे कैसे घिनौने अल्फ़ाज़ लिखकर पढ़ने का मसौदा तलाश करते हैं।
यह देखा तो कुछ औरतों ने तो औरतपने ही हदें पार करके ही लिखना शुरू कर दिया। बाद में ये ऐसे लजाती हैं जैसे कि , जैसे कि ...
शीर्षक में प्यार, बोल्ड और वासना अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल कीजिए और फिर देखिए कि आपके पाठक कितने ज़्यादा बढ़ जाते हैं। हिंदी ब्लागरों को यही सब पसंद है।
दीन धर्म की बात बताने वाले ब्लाग पर ब्लागर जाते ही कहां हैं ?
ब्लागर अच्छी चीज़ें पढ़ना शुरू करें तो हरेक ब्लाग का ‘लाइक‘ कालम अपने आप बदल जाएगा।
जो भी कविता करने वाली बोल्ड होकर लिखे, उसे पढ़ो ही मत और वह लिखे और ब्लागर पढ़ें तो फिर उछल कूद मत मचाओ कि हाय ! हमारा पढ़ा हुआ सबसे ज़्यादा पढ़ा हुआ क्यों बन गया ?
ज़्यादा उछल कूद मचाओगे तो पर्दा तुम्हारा ही खुलेगा कि तुम इंटरनेट पर बीवी बच्चों को छोड़कर दिन रात पढ़ते क्या हो ?

Saturday, July 7, 2012

पोस्ट कॉपी पेस्ट करने वालों से बचने का उपाय


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पोस्ट कॉपी पेस्ट करने वालों से बचने का उपाय, बिना किसी स्क्रिप्ट का प्रयोग किए!

यह कोड आपकी पोस्ट का टेक्स्ट सेलेक्श्न (Text selection) रोक देगा|

ऐसा करने के लिए क्या करें?

देखें -

पोस्ट कॉपी पेस्ट करने वालों से बचने का उपाय


Friday, July 6, 2012

करेक्ट करें कैटरैक्ट (मोतियाबिंद)

बुनियाद ब्लॉग पर 
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मोतियाबिंद अंधेपन की एक बड़ी वजह है, लेकिन समय रहते अगर इसका इलाज करा लिया जाए, तो मरीज पहले की तरह न सिर्फ देख सकता है, बल्कि कुछ खास स्थितियों में उसे चश्मे से भी निजात मिल सकती है। क्या है मोतियाबिंद? क्या इसे दवाओं से रोका जा सकता है? अगर नहीं, तो फिर इसका इलाज क्या है? एक्सपर्ट्स से बात करके मोतियाबिंद के बारे में ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब दे रहे हैं प्रभात गौड़ :

ब्लू फिल्म देखते हुए सारी रात करते रहे रेप

प्यारी माँ  ब्लॉग पर 
पहले लड़कियों को उनकी हिफाज़त की गर्ज़ से घर में रखा जाता था और जब वे घर से बाहर जाती थीं तो उनकी हिफाज़त के लिए घर का कोई न कोई सदस्य भी उनके साथ जाता था . आज लड़कियों और औरतों के लिए खतरे पहले से ज़्यादा बढ़ गए हैं और उनकी हिफ़ाज़त  का परम्परागत कवच भी आज उन्हें मयस्सर  नहीं है. अपनी लड़कियों को हमेशा हिफ़ाज़त मुहैय्या कराएं. दरिन्दे जान पहचान के दायरे में भी होते हैं।. देखिये एक ताज़ा घटना और सबक़  हासिल कीजिये-

ब्लू फिल्म देखते हुए दो नाबालिगों के साथ 5 लोग सारी रात करते रहे रेप


अपनी लड़कियों को हमेशा हिफ़ाज़त मुहैय्या कराएं -  

Thursday, July 5, 2012

खोजा गॉड पार्टिकल -डा. अयाज़ अहमद

ब्लॉग  जगत को डा. अयाज़ अहमद साहब ने बताया है कि 

विज्ञान ने खोजा गॉड पार्टिकल

बह्मांड की उत्पत्ति और जीवन के सृजन संबंधी कई प्रश्नों का जवाब देने में सक्षम गॉड पार्टिकल को बुधवार को खोज लिया गया। स्विटजरलैंड और फ्रांस की सीमा पर स्थित 27 किलोमीटर लंबी एक भूमिगत सुरंग में हिग्स बोसोन पर वर्ष 2009 से दिन-रात शोध कर रही यूरोपीय परमाणु शोध संगठन (सर्न) की दो टीमों (एटलस) और (सीएमएस) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में इससे मिलते-जुलते कण के अस्तित्व की बात स्वीकार की। सर्न की ओर से जारी बयान में कहा गया कि हमें अपने आंकड़ों...
Read More...
गॉड पार्टिकल खोज लिए जाने की सूचना देने वाले डा. अयाज़ अहमद साहब पहले व्यक्ति हैं.

12 hours ago

‘ब्लॉग की ख़बरें‘

1- क्या है ब्लॉगर्स मीट वीकली ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_3391.html

2- किसने की हैं कौन करेगा उनसे मोहब्बत हम से ज़्यादा ?
http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

3- क्या है प्यार का आवश्यक उपकरण ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

4- एक दूसरे के अपराध क्षमा करो
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

5- इंसान का परिचय Introduction
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/introduction.html

6- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

8- बेवफा छोड़ के जाता है चला जा
http://kunwarkusumesh.blogspot.com/2011/07/blog-post_11.html#comments

9- इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक
http://www.hamarianjuman.com/2011/07/blog-post.html

10- दुआ की ताक़त The spiritual power
http://ruhani-amaliyat.blogspot.com/2011/01/spiritual-power.html

11- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

12- शकुन्तला प्रेस कार्यालय के बाहर लगा एक फ्लेक्स बोर्ड-4
http://shakuntalapress.blogspot.com/

13- वाह री, भारत सरकार, क्या खूब कहा
http://bhadas.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

14- वैश्विक हुआ फिरंगी संस्कृति का रोग ! (HIV Test ...)
http://sb.samwaad.com/2011/07/blog-post_16.html

15- अमीर मंदिर गरीब देश
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

16- मोबाइल : प्यार का आवश्यक उपकरण Mobile
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/mobile.html

17- आपकी तस्वीर कहीं पॉर्न वेबसाइट पे तो नहीं है?
http://bezaban.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

18- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम अब तक लागू नहीं
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

19- दुनिया में सबसे ज्यादा शादियाँ करने वाला कौन है?
इसका श्रेय भारत के ज़ियोना चाना को जाता है। मिजोरम के निवासी 64 वर्षीय जियोना चाना का परिवार 180 सदस्यों का है। उन्होंने 39 शादियाँ की हैं। इनके 94 बच्चे हैं, 14 पुत्रवधुएं और 33 नाती हैं। जियोना के पिता ने 50 शादियाँ की थीं। उसके घर में 100 से ज्यादा कमरे है और हर रोज भोजन में 30 मुर्गियाँ खर्च होती हैं।
http://gyaankosh.blogspot.com/2011/07/blog-post_14.html

20 - ब्लॉगर्स मीट अब ब्लॉग पर आयोजित हुआ करेगी और वह भी वीकली Bloggers' Meet Weekly
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/bloggers-meet-weekly.html

21- इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
http://www.sahityapremisangh.com/2011/07/blog-post_3678.html

22- इसलाम में आर्थिक व्यवस्था के मार्गदर्शक सिद्धांत
http://islamdharma.blogspot.com/2012/07/islamic-economics.html

23- मेरी बिटिया सदफ स्कूल क्लास प्रतिनिधि का चुनाव जीती
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_2208.html

24- कुरआन का चमत्कार

25- ब्रह्मा अब्राहम इब्राहीम एक हैं?

26- कमबख़्तो ! सीता माता को इल्ज़ाम न दो Greatness of Sita Mata

27- राम को इल्ज़ाम न दो Part 1

28- लक्ष्मण को इल्ज़ाम न दो

29- हरेक समस्या का अंत, तुरंत

30-
अपने पड़ोसी को तकलीफ़ न दो

साहित्य की ताज़ा जानकारी

1- युद्ध -लुईगी पिरांदेलो (मां-बेटे और बाप के ज़बर्दस्त तूफ़ानी जज़्बात का अनोखा बयान)
http://pyarimaan.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

2- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

3- आतंकवादी कौन और इल्ज़ाम किस पर ? Taliban
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/taliban.html

4- तनाव दूर करने की बजाय बढ़ाती है शराब
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

5- जानिए श्री कृष्ण जी के धर्म को अपने बुद्धि-विवेक से Krishna consciousness
http://vedquran.blogspot.com/2011/07/krishna-consciousness.html

6- समलैंगिकता और बलात्कार की घटनाएं क्यों अंजाम देते हैं जवान ? Rape
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/rape.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

8- ख़ून बहाना जायज़ ही नहीं है किसी मुसलमान के लिए No Voilence
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/no-voilence.html

9- धर्म को उसके लक्षणों से पहचान कर अपनाइये कल्याण के लिए
http://charchashalimanch.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

10- बाइबिल के रहस्य- क्षमा कीजिए शांति पाइए
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

11- विश्व शांति और मानव एकता के लिए हज़रत अली की ज़िंदगी सचमुच एक आदर्श है
http://dharmiksahity.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

12- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

13- ‘इस्लामी आतंकवाद‘ एक ग़लत शब्द है Terrorism or Peace, What is Islam
http://commentsgarden.blogspot.com/2011/07/terrorism-or-peace-what-is-islam.html

14- The real mission of Christ ईसा मसीह का मिशन क्या था ? और उसे किसने आकर पूरा किया ? - Anwer Jamal
http://kuranved.blogspot.com/2010/10/real-mission-of-christ-anwer-jamal.html

15- अल्लाह के विशेष गुण जो किसी सृष्टि में नहीं है.
http://quranse.blogspot.com/2011/06/blog-post_12.html

16- लघु नज्में ... ड़ा श्याम गुप्त...
http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

17- आपको कौन लिंक कर रहा है ?, जानने के तरीके यह हैं
http://techaggregator.blogspot.com/

18- आदम-मनु हैं एक, बाप अपना भी कह ले -रविकर फैजाबादी

19-मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत

20- मौत कहते हैं जिसे वो ज़िन्दगी का होश है Death is life

21- कल रात उसने सारे ख़तों को जला दिया -ग़ज़ल Gazal

22- मोम का सा मिज़ाज है मेरा / मुझ पे इल्ज़ाम है कि पत्थर हूँ -'Anwer'

23- दिल तो है लँगूर का

24- लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी - Allama Iqbal

25- विवाद -एक लघुकथा डा. अनवर जमाल की क़लम से Dispute (Short story)

26- शीशा हमें तो आपको पत्थर कहा गया (ग़ज़ल)