Tuesday, April 30, 2013

अनवर जमाल साहब सच में एक संवेदनशील इंसान हैं-Digambar Naswa


मशहूर हिंदी ब्लॉगर दिगम्बर नासवा जी के इस बयान पर अचानक ही नज़र पड़ गई। 
हुआ यों कि एक नारी की आलोचना का बाज़ार गर्म हुआ तो एक पुरानी पोस्ट पर फिर से जाना हुआ। जिसमें हिंदी ब्लॉगर सर्वत जमाल साहब की गुमशुदगी को लेकर यह अपील की गई थी कि 

ब्लागर साथियों से हर संभव मदद चाहिए


उसी पोस्ट पर दिगम्बर नासवा साहब ने यह टिप्पणी की है-

  1. अनवर जमाल साहब सच में संवेदनशील इंसान हैं ... उनकी सलामती की दुआ करता हूँ ... आशा है जल्दी ही उनका पता मिलेगा ...

वह सर्वत जमाल के बजाय अनवर जमाल को घर से ग़ायब समझे। ख़ैर इस बहाने हमें उनकी दुआएं मिल गईं और उनके नेक जज़्बात का इल्म भी हो गया।
हम दिगम्बर नासवा जी के शुक्रगुज़ार हैं।
इस बहाने हमें सर्वत जमाल साहब की ख़ैरियत भी मिल गई है। अल्पना वर्मा जी के एक कमेंट ने हमें इस ख़बर तक पहुंचा दिया-

इस पोस्ट में हमें अलका सर्वत के जज़्बात को जानने का सौभाग्य भी मिला। 
‘औरत के जज़्बात‘ सचमुच पेचीदा होते हैं। उन्हें दो और दो चार की तरह नहीं समझा जा सकता।
‘औरत की हक़ीक़त‘ ब्लॉग में हम ऐसे ही जज़्बात को जानने समझने का काम करते हैं।
सर्वत जमाल साहब की इज़्ज़त हमारी नज़रों में और ज़्यादा बढ़ गई है। हम आज तक दूसरी शादी की सोचते ही रह गए और उन्हें किए हुए 16 साल भी बीत गए। इसी के साथ अलका सर्वत जी के लिए भी हमारे दिल में बहुत ज़्यादा क़द्र पैदा हो गई है कि वे रिश्तों में यक़ीन रखती हैं।
मर्द के हौसले और औरत की वफ़ा को एक साथ सलाम !
कोई अच्छी सी वफ़ादार लड़की मिले तो हम भी अपना हौसला बुलंद किए बैठे हैं, भले हमारे पहले से ही बच्चे हों। 

सम्भोग से समाधि तक Sanbhog se samadhi tak


जागरूक नारियों में से एक हिन्दी ब्लॉगर ने ताज़ा ताज़ा कहा है कि-
"गहन अर्थों को समझने के लिए जीवन की पाठशाला में अध्यात्मिक प्रवेश जरूरी होता है."
किस चीज़ के गहन अर्थ ?
यह उनकी कविता के शीर्षक से ही ज़ाहिर है-

सम्भोग से समाधि तक

Photo: सम्भोग से समाधि तक
***************
संभोग 
एक शब्द 
या एक स्थिति 
या कोई मंतव्य 
विचारणीय  है .........

सम + भोग 
समान भोग हो जहाँ 
अर्थात 
बराबरी के स्तर पर उपयोग करना 
अर्थात दो का होना 
और फिर 
समान स्तर पर समाहित होना 
समान रूप से मिलन होना 
भाव की समानीकृत अवस्था का होना
वो ही तो सम्भोग का सही अर्थ हुआ 
फिर चाहे सृष्टि हो 
वस्तु हो , मानव हो या दृष्टि हो 
जहाँ भी दो का मिलन 
वो ही सम्भोग की अवस्था हुयी 

समाधि 
सम + धी (बुद्धि )
समान हो जाये जहाँ बुद्धि 
बुद्धि में कोई भेद न रहे 
कोई दोष दृष्टि न हो 
निर्विकारता का भाव जहाँ स्थित हो 
बुद्धि शून्य में स्थित हो जाये
आस पास की घटित घटनाओं से उन्मुख हो जाये
अपना- पराया
मेरा -तेरा ,राग- द्वेष 
अहंता ,ममता का 
जहाँ निर्लेप हो 
एक चित्त 
एक मन 
एक बुद्धि का जहाँ 
स्तर समान हो 
वो ही तो है समाधि की अवस्था 

सम्भोग से समाधि कहना 
कितना आसान है 
जिसे सबने जाना सिर्फ 
स्त्री पुरुष 
या प्रकृति और पुरुष के सन्दर्भ  में ही 
उससे इतर 
न देखना चाहा न जानना 
गहन अर्थों की दीवारों को 
भेदने के लिए जरूरी नहीं 
शस्त्रों का ही प्रयोग किया जाए 
कभी कभी कुछ शास्त्राध्ययन 
भी जरूरी हो जाता है 
कभी कभी कुछ अपने अन्दर 
झांकना भी जरूरी हो जाता है 
क्योंकि किवाड़ हमेशा अन्दर की ओर  ही खुलते हैं 
बशर्ते खोलने का प्रयास किया जाए 

जब जीव का परमात्मा से मिलन हो जाये 
या जब अपनी खोज संपूर्ण हो जाए 
जहाँ मैं का लोप हो जाए 
जब आत्मरति से परमात्म रति की और मुड जाए 
या कहिये 
जीव रुपी बीज को 
उचित खाद पानी रुपी 
परमात्म तत्व मिल जाए 
और दोनों का मिलन हो जाए 
वो ही तो सम्भोग है 
वो ही तो मिलन है 
और फिर उस मिलन से 
जो सुगन्धित पुष्प खिले 
और अपनी महक से 
वातावरण को सुवासित कर जाए 
या कहिये 
जब सम्भोग अर्थात 
मिलन हो जाये 
तब मैं और तू का ना भान रहे 
एक अनिर्वचनीय सुख में तल्लीन हो जाए 
आत्म तत्व को भी भूल जाए 
बस आनंद के सागर में सराबोर हो जाए 
वो ही तो समाधि की स्थिति है 
जीव और ब्रह्म का सम्भोग से समाधि तक का 
तात्विक अर्थ तो 
यही है 
यही है 
यही है 

काया के माया रुपी वस्त्र को हटाना 
आत्मा का आत्मा से मिलन 
एकीकृत होकर 
काया को विस्मृत करने की प्रक्रिया 
और अपनी दृष्टि का विलास ,विस्तार ही तो 
वास्तविक सम्भोग से समाधि तक की अवस्था है 
मगर आम जन तो 
अर्थ का अनर्थ करता है 
बस स्त्री और पुरुष 
या प्रकृति  और पुरुष की दृष्टि से ही 
सम्भोग और समाधि को देखता है 
जबकि दृष्टि के बदलते 
बदलती सृष्टि ही 
सम्भोग से समाधि  की अवस्था है 

ब्रह्म और जीव का परस्पर मिलन 
और आनंद के महासागर में 
स्वयं का लोप कर देना ही 
सम्भोग से समाधि  की अवस्था है 
गर देह के गणित से ऊपर उठ सको 
तो करना प्रयास 
सम्भोग से समाधि की अवस्था तक पहुंचने का 
तन के साथ मन का मोक्ष 
यही है 
यही है 
यही है 

जब धर्म जाति  , मैं , स्त्री पुरुष 
या आत्म तत्व का भान  मिट जाएगा 
सिर्फ आनंद ही आनंद रह जायेगा 
वो ही सम्भोग से समाधि की अवस्था हुयी 

जीव रुपी यमुना का 
ब्रह्म रुपी गंगा के साथ 
सम्भोग उर्फ़ संगम होने पर 
सरस्वती में लय  हो जाना ही 
आनंद या समाधि  है 
और यही 
जीव , ब्रह्म और आनंद की 
त्रिवेणी का संगम ही तो 
शीतलता है 
मुक्ति है 
मोक्ष है 


सम्भोग से समाधि तक के 
अर्थ बहुत गहन हैं 
सूक्ष्म हैं 
मगर हम मानव 
न उन अर्थों को समझ पाते हैं 
और सम्भोग को सिर्फ 
वासनात्मक दृष्टि से ही देखते हैं 
जबकि सम्भोग तो 
वो उच्च स्तरीय अवस्था है 
जहाँ न वासना का प्रवेश हो सकता है 
गर कभी खंगालोगे ग्रंथों को 
सुनोगे ऋषियों मुनियों की वाणी को 
करोगे तर्क वितर्क 
तभी तो जानोगे इन लफ़्ज़ों के वास्तविक अर्थ 
यूं ही गुरुकुल या पाठशालाएं नहीं हुआ करतीं 
गहन प्रश्नो को बूझने  के लिए 
सूत्र लगाये जाते हैं जैसे 
वैसे ही गहन अर्थों को समझने के लिए 
जीवन की पाठशाला में अध्यात्मिक प्रवेश जरूरी होता है 
तभी तो सूत्र का सही प्रतिपादन होता है 
और मुक्ति का द्वार खुलता है 
यूँ ही नहीं सम्भोग से समाधि तक कहना आसान होता है

इस लिंक को गूगल की मदद से तलाश करें और बताएं कि यह रचना किस महिला की है ?
है न अच्छी पहेली !!!

Saturday, April 27, 2013

सौतेली माँ भी ले सकती है बच्चों से भरण पोषण का ख़र्च Indian Law

Friday, April 26, 2013

जानिए अल्लाह, रसूल और इबादत के बारे में-Dr. Anwer Jamal


हमारे एक भाई ने इसलाम के विषय में 5 सवाल किए हैं। उनका जवाब इस प्रकार है।
प्रश्न 1- अल्लाह कौन है? उसके क्या गुण है और उस अल्लाह की क्या पहचान है? वह साकार है या निराकार?
उत्तर 1- अल्लाह रब्बुल-आलमीन है यानि वह सब लोकों का पैदा करने वाला और पालनहार है। वह इंसानों का ‘इलाह‘ है क्योंकि उसी ने इंसान को पैदा किया है। वही जानता है कि इंसान के लिए क्या करना फ़ायदेमंद है और क्या करना नुक्सानदेह है।
अल्लाह अजन्मा है। न उसने किसी से जन्म लिया है और न ही उससे किसी ने ऐसे जन्म लिया है जैसे कि मनुष्य अपने माता पिता से जन्म लेता है। कोई उसके बराबर नहीं है और न ही कोई चीज़ उसके जैसी है। वह अतुलनीय और अप्रतिम है। उसके रूप और आकार का निर्धारण करने में मनुष्य की बुद्धि अक्षम है। इसीलिए उसे अचिंत्य और अकल्पनीय कहा गया है।
क़ुरआन व हदीस में अल्लाह के चेहरा या हाथ आदि का अलंकारिक तात्पर्य होता है। जिसे उसी संदर्भ में समझा जाना चाहिए।
देखिये-

जानिए अल्लाह, रसूल और इबादत के बारे में




Tuesday, April 23, 2013

अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉग सम्मेलन Nepal में क्यों ?

पढ़िए यह पोस्ट-

विदेश में ईनाम क्यों बांटता है बड़ा ब्लॉगर ?Nepal


‘सरदार, आपके नॉर्थ एशिया में छपे इंटरव्यू पर ब्लॉगर्स बड़ा ताव खा रहे  हैं‘-जंगलायतन वाले ने आकर सांभा स्टाइल में अपने बॉस को ख़बर दी। 
‘सरदार तो तू ऐसे कह रहा है जैसे कि मैं गब्बर सिंह होऊँ।‘-उसके बॉस ने ‘भोजपुरी ब्लॉगिंग के इतिहास‘ के पन्ने पलटते हुए कहा।
‘ हें हें हें, आप उनसे कम भी तो नहीं हैं।‘-जंगलायतन के उजड्ड ने अपनी बात ऊपर रखते हुए कहा।
‘कैसे ?‘
‘वह भी लूटता था और आप भी लूट लेते हैं।‘-यह कहकर उसने अपने हाथ जोड़ दिए और हस्बे आदत ‘हें हें हें‘ करने लगा।

Monday, April 22, 2013

घायल करता मर्म को, प्रतिदिन का दुष्कर्म -Ravikar


घायल करता मर्म को, प्रतिदिन का दुष्कर्म -Posted by 


 और ...

रेप और गैंगरेप के सिलसिले को कैसे रोकें ?

Saturday, April 20, 2013

Rape & Ganrape के सिलसिले को कैसे रोकें ?


दिल्ली में एक 5 वर्षीय बच्ची के साथ रेप हुआ। उसे 4 दिनों से बंधक बनाकर रखा गया। उसके साथ रेप किया गया। उसके पेट से तेल की शीशी और मोमबत्ती निकली है। उसकी हालत गंभीर है। दिल्ली के बाहर के लोग दुखी हैं और दिल्ली के रहने वाले पुलिस से भिड़ रहे हैं। 3 अधिकारी निलंबित कर दिए गए हैं।
क्या इस बार लोग फिर सख्त क़ानून बनाने की मांग करेंगे ?
...लेकिन क़ानून तो पहले ही सख्त बनाया जा चुका है !
...तो फिर लोग अब क्या करेंगे ?

देखिये समाधान क्या है ?

Friday, April 19, 2013

नेपाली युवती के साथ Gangrape in Delhi

महज़ सख्त क़ानून औरत को सुरक्षा नहीं दे सकते। इस विषय को रेखांकित करती डा. अयाज़ अहमद की एक पोस्ट:

नेपाली युवती के साथ गैंगरेप किया गया

क़ानून सख्त बन गया मगर औरत है आज भी नर्म निवाला :


नई दिल्ली।। आज सुबह साउथ दिल्ली के नानकपुरा गुरुद्वारे के पास फुटओवर ब्रिज के नीचे एक नेपाली युवती बदहवास हालत में पड़ी मिली। जिस्म पर अस्त-व्यस्त और थोड़े कपड़े। कई जगह चोट के निशान। करीब 20 साल की इस युवती को यूं पड़ा देख वहां राहगीरों का मजमा इकठ्ठा हो गया। लोगों ने पूछा तो युवती ने एक ईंट का टुकड़ा उठा कर सड़क पर लिखकर बताया कि उसके साथ 3 लोगों ने रेप किया है।
किसी ने पुलिस को कॉल करके इस सनसनीखेज मामले की सूचना दी। फौरन साउथ दिल्ली के कई सीनियर अफसर समेत लोकल पुलिस पहुंची। युवती ने बताया कि किडनैप करके उसके साथ गैंगरेप किया गया है। तुरंत युवती को अस्पताल ले जाया गया।

Thursday, April 18, 2013

Hawan करते हुए 6 लोग झुलसे

'बुनियाद' ब्लॉग पर

हवन करते हुए 6 लोग झुलसे, ज़ेरे ईलाज

हवन करते हुए एक ही परिवार के 6 लोग आग में झुलस गये हैं. यह घटना उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर ज़िले के शिकारपुर इलाक़े की है. एक की हालत गंभीर है. सब लोग दुआ करें. यह खबर 'श्री' चैनल दिखा रहा है.

देखिये हमारा नया ब्लॉग 'डरावना'

देखिये हमारे नए ब्लॉग 'डरावना' की सबसे पहली पोस्ट-

हेतम खां का किलाःजमींदोज होता गौरवशाली

 भाई HBFI के सदस्य हैं . उनका एक ईमेल मिला . जिसमें उनके लेख के लिंक्स  थे. हमने उन्हें देखा तो दिल खुश हो गया . आप भी देखें .

Afsar Khan
11:11 PM (9 hours ago)
to Amalendume1SushmaAA&Maalokanshaamadmi1aamiraamir1981AanchalAarsiaayushabAbadAbdulAbdullahabdusabhadarshanabhadarshanabhaysingh_008abhiAbhijeetABHISHEKAbhishek

1- हेतम खां का किलाःजमींदोज होता गौरवशाली

main gate

खण्डहर सिर्फ खण्डहर नहीं होते
बेशकीमती खजाना छुपाये रहते हैं अपने दिलों में
चुप रहते हैं तो सदियों तक चुप रहते हैं
पर जब चुप्पी टूटती है तो
कई नालन्दा, कई तक्षशिला जीवित हो उठते हैं।
इतिहास और कुछ नहीं, समाजों व सभ्यताओं की स्मृति है। हम सभ्यताओं के बीते हुए समय को साक्षात देख सकते हैं, छू सकते हैं, उसमें सशरीर प्रवेश कर सकते हैं। सभ्यताओं की ये स्मृतियां सुरक्षित और प्रत्यक्ष रूप में उसके भग्नावशेषों में रहती हैं। खण्डहर, किले, पुराने नगर, और बर्तन, आभूषण, कलाकृतियां सब एक बीत चुके समय में होते हैं। इतिहास को जानने व समझने के लिए इनको सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी से 55 किमी0 पूरब की तरफ महाईच परगना के धानापुर ब्लाक में स्थित हेतमपुर चन्दौली जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी0 दूरी पर है। चन्दौली जनपद में अनेक प्रकार के ऐतिहासिक व प्राकृतिक सम्पदायें मौजूद हैं। इसी में एक है हेतम खां का किला।
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2- कहां गुम हो गईं बैलगाडियां

By  on April 5, 2013

Bail
होर्रे…. होर, आवा राजा बायें दबा के। ना होर ना। शाबाश… चला झार के। बाह रे बायां… बंगड़ई नाही रे। अरे… अरे देही घुमा के सोटा। जीआ हमार लाल, खट ला; खट ला आज से खोराक बढ़ी। आज जो पचास से उपर हैं वो जानते हैं कि बैलगाड़ी हांकना और घोड़े की लगाम थामने में वही अन्तर था जो आज कार व बस को चलाने में है। यही नहीं चूंकि उनके अन्दर भी आत्मा थी, अतः इस दौरान उनसे उपरोक्त संवाद भी करने में कामयाब थे। चढ़ाई, ढ़लान व मोड पर महज बागडोर से नहीं बल्कि संवाद से भी गाइड किये जाते थे बैल। इन पर साहित्यकारों व कवियों ने भी खूब कलम चलाया है
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3- गुलाबों का शहर गाजीपुर


एम. अफसर खां सागर
पावन व पवित्र गंगा नदी के तट पर बसा गाजीपुर गंगा-जमुनी तहजीब को समेटे उत्तर प्रदेश में अपना अलग पहचान रखता है। ऐतिहासिक, सामाजिक, राजनैतिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व व्यावसायिक नजरिये से यह शहर किसी पहचान का मोहताज नहीं। इस शहर का गुलाब, नील व अफीम विश्व प्रसिद्ध है। तारीख गवाह है कि धर्म के नाम पर यहां कभी दंगा-फसाद नहीं हुआ। ग़ाजियों कर शहर गाजीपुर पूरे भारत में अपनी बहादुरी के लिए प्राचीन काल से ही जाना जाता है। चीनी यात्री हवेनसांग ने अपने ‘यात्रा-वृतान्त’ में गाजीपुर को चिन-चू यानि बहादुरों का देश बताया है। वीरता का सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र भी गाजीपुर के चैड़े सीने पर टंका चम-चमा रहा है।
गाजीपुर की धरती की टोकरी इतिहास के विभिन्न रंग के फूलों से भरा पड़ा है। वैदिक युग से आधुनिक युग के अनेकों ऐतिहासिक साक्ष्य गाजीपुर में बिखरे पड़े हैं। ऐसा माना जाता है कि महान संत महर्षि गाधि के नाम पर इस शहर का नाम पड़ा। जबकि दूसरा तथ्य है कि अमीर सैयद मसउद बिन जलालुददीन के मुल्कुस्सादात ग़ाजी उपाधि धारण करने के बाद गाजीपुर नाम पड़ा। इस बात का जिक्र अंग्रेज इतिहासकार विल्टन ओल्ढ़म ने अपनी पुस्तक ‘मेमायर्ज आफ गाजीपुर’ में लिखा है कि ‘‘गाजीपुर का नाम अमीर सैयद मसउद बिन जलालुद्दीन के ‘मुल्कुस्सादात गाजी’ उपाधि को चिरस्मरणीय रखने के लिए सन् 1330 ई0 में गाजीपुर नगर की बुनियाद रखी।’ इतिहासकार डा0 अवध नारायण सिंह ने अपनी पुस्तक ‘गाजीपुर जनपद का इतिहास की दृष्टि में’ लिखा है  कि ‘‘सन् 1330 ई0 में सैयद मसउद ने राजा मानधता अैर उसके भतीजे को युद्ध में पराजित किया और उस वर्ष वर्तमान शहर की स्थापना की। प्रसन्न होकर बादशाह फिरोज शाह ने उसे ‘मुल्कुस्सादात गाजी’ की उपाधि प्रदान किया और जिसके नाम पर शहर का नाम पड़ा। गाजी के माने बहादुर होता है। 

Wednesday, April 17, 2013

क्या पूंजीपति आपकी सेहत का जनाज़ा निकाल सकते हैं ?


पूंजीपति अपने नफ़े के लिए आपकी सेहत का जनाज़ा निकाल सकते हैं


जंक फ़ूड में कुछ ऐसे रसायन मिलाए जाते हैं जो कि ‘फ़ाल्स फ़ीलिंग ऑफ़ हंगर‘ पैदा करते हैं। एक बार उन रसायनों की गंध नाक के ज़रिये दिमाग़ तक पहुंची नहीं कि आदमी उसे खाने के लिए लपका नहीं और फिर वह उसका आदी हो जाता है किसी नशेड़ी की तरह। इन रसायनों की वजह से इंसान बिना भूख के खाता है और पेट भरने के बाद भी खाता रहता है। इसके नतीजे में मोटापा, डायबिटीज़ व हार्ट प्रॉब्लम्स पैदा हो जाती हैं।
इसी वजह से हम तो घर के बाहर की बनी चीज़ें नहीं खाते। इससे भी बड़ी वजह यह है कि हमें ऐतबार ही नहीं है कि बाज़ार में बनी इन चीज़ों के इन्ग्रेडिएन्ट्स क्या हैं और उनमें से कोई ऐसा भी हो सकता है जिसे खाना हमारे लिए हराम हो।
पूंजीपति अपने नफ़े के लिए आपकी सेहत का जनाज़ा निकाल सकते हैं।
इसलिए ख़ुद भी सावधान रहने की ज़रूरत है और बच्चे को भी बचाए रखने की ज़रूरत है।
देखिये निम्न पोस्ट-

उपेक्षित होने का दर्द कहलवा रहा है दूसरे ब्लॉगों को Bakwas

‘बॉब्स अतंर्राष्ट्रीय पुरस्कार 2013‘ में नामित ब्लॉगर्स के खि़लाफ़ आक्रमण की एक पोस्ट से हुई जो कि नारी के खि़लाफ़ लिखी गई थी।
इस पोस्ट लेखक के सहयोगी ब्लॉगर्स ने इस आग को हवा दी और नफरत की यह आग पूरे हिंदी ब्लॉग जगत में फैलाकर रख दी। यह दो चार ब्लॉगर्स का एक संगठित गुट है। इस गुट में बड़े तो दो ही हैं या हद से हद तीन होंगे बाक़ी एक उनके साथ है।  
बात दरअसल यह है कि ‘बॉब्स अतंर्राष्ट्रीय पुरस्कार 2013‘ का प्लेटफ़ार्म सामने आने के बाद उन लोगों की रोज़ी रोटी पर संकट आ खड़ा हुआ है जो हिन्दी ब्लॉगिंग पर किताबें लिखकर नोट छाप रहे थे। ये लोग ‘बिना पैसे लिए ही‘ पुरस्कार भी दिया करते थे। ये लोग हिन्दी ब्लॉगिंग के स्वयंभू ठेकेदार बनने के लिए भी बरसों से हाथ पैर मार रहे हैं।  
‘बॉब्स अतंर्राष्ट्रीय पुरस्कार 2013‘ के सामने इनके पुरस्कार की हैसियत ऐसी हो गई है जैसे कि पहाड़ के सामने ऊंट जाकर खड़ा हो जाए। इस पर हुआ यह कि इन्हें रविश कुमार जी ने पूछा तक नहीं, इनमें से किसी के ब्लॉग को भी उन्होंने नहीं चुना। अब ये एक साधारण ब्लॉगर की तरह अपने ऑफ़िस में बैठकर दूसरों को वोट देते रहते हैं। 
हर क्लिक पर उन्हें उपेक्षित होने का यही दर्द बेचैन कर रहा है कि हाय ! किताबें हमने लिखीं और चुने वे गए जिन्होंने कोई किताब न लिखी। इसीलिए वे हिन्दी ब्लॉगिंग पर अंग्रेज़ी में इंटरव्यू दे रहे हैं।
...कि शायद ऐसा करके ही मैं रविश जी की नज़र में आ जाऊं कि मैं भी कुछ हूं और शायद अगली बार वह मुझे या मेरे ब्लॉग को किसी लायक़ समझ लें। इसीलिए दूसरे ब्लॉगर्स के बारे में अनाप शनाप बकवास की जा रही है।
रविश कुमार जी भी इस मानसिकता से बख़ूबी वाक़िफ़ हैं। अपनी एक पोस्ट में वह अपना अनुभव इन अल्फ़ाज़ में लिखते हैं-
"मैंने देखा है कि चार आने के एंकरों को टेढ़ा होकर चलते हुए और सामने आते हुए लोगों को गेस करते हुए कि ये वाला पहचानेगा कि नहीं। पहचान लिया तो बस हां हां। ये सब बीमारी है।"
ये ब्लॉगर्स एक भयानक मानसिक कष्ट से गुज़र रहे हैं। हम सबको उनसे हमदर्दी रखनी चाहिए।
हिंदी ब्लॉग जगत के ताज़ा हालात पर डा. अयाज़ अहमद साहब व दूसरे ब्लॉगर्स की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। देखिए-

दूसरे ब्लोगों को बकवास कहना हिन्दी ब्लोगिंग को नुकसान पहुँचाना है

Dr. Ayaz Ahmad 
सब मिल-जुल कर किसी ढंग के ब्लोगर को जर्मनी भेजने पर इत्तेफ़ाक़ कर ले। अच्छा तो यही है.
ब्लोगिंग का माज़ी (इतिहास) लिखने वाले उसका वर्तमान ख़राब कर रहे हैं. यह देखना अच्छा नहीं लगता. 
शोहरत के लिए या किसी और मकसद के लिए आदमी वह सब कर गुज़रता है जो कि नहीं करना चाहिए.
रविन्द्र परभात जी किसी ब्लॉग को अच्छा कहें तो सही है लेकिन वे या उनके हमनवा दूसरे ब्लोगों को बकवास कहने का हक नहीं रखते. उन्हें भी बहुत लोग पसंद करते हैं। दूसरे ब्लोगों को बकवास कहना हिन्दी ब्लोगिंग को नुकसान पहुँचाना है .
ईनाम के लिए  नामित एक महिला ब्लोगर कि ईमेल ने तो उनके बारे में बहुत कुछ बिना कहे कह दिया है.
यह चर्चा हो रही है इस पोस्ट की-

Ravindra Prabhat के प्रचार के पीछे ख़ुद रवीन्द्र प्रभात ही निकले ?

Ratan singh shekhawat said...
किसी भी ब्लॉग को बकवास कहना दुखद है इसी से कहने वाले की मानसिकता का पता चल जाता है कि वह सिर्फ कुँए का मेंडक है !!
Gyan Darpan

Shah Nawaz said...
हालाँकि मैं रविन्द्र प्रभात जी के द्वारा 'नारी' ब्लॉग पर उठाएं सवाल से सहमत नहीं हूँ, मगर मानता हूँ कि उन्हें वह सवाल उठाने का हक है...

और अगर उनकी बात गलत है तो रचना जी को उचित जवाब देना चाहिए। मगर इस बात से तल्खी का कोई भी ताल्लुक नहीं होना चाहिए। ब्लॉग जगत में वैचारिक मतभेदों से मनभेद की नौबत आना ठीक बात नहीं है।

Tuesday, April 16, 2013

Hindi Bloggers को शर्मिन्दगी से बचाने के लिए कुछ टिप्स

बता रहे हैं जनाब सैयद मुहम्मद मासूम साहब , अपनी ताज़ा पोस्ट में-

ब्लॉगजगत में टोपी पहनाओ टीका लगवाओ प्रतियोगिता |

-by 

Ravindra Prabhat और उनके सहयोगियों द्वारा अन्य ब्लॉग्स को बकवास बताना मानवर्धन या मानहानि ?



'मंगलायतन' ब्लॉग पर आज हिन्दी ब्लॉगर्स यह पढ़ रहे हैं-

डचे वेले के बोब्स ब्लॉग पुरस्कार के टॉप टेन मे नामित हिन्दी ब्लॉग के चयन पर रबिश कुमार के सिविक सेंस पर उंगली उठाई है रवीन्द्र प्रभात ने और कहा है कि यह चयन स्तरीय नहीं है । उन्होने केवल चार ब्लॉग को ही बेहतर नामित ब्लॉग माना है, बाकी छ: ब्लॉग को बकबास ।


रविन्द्र प्रभात जी ने ‘तस्लीम‘ ब्लॉग को वोट देने की अपील की है और उसके बाद 3 अन्य ब्लॉग्स को भी अच्छा बताया है। इस तरह उनकी पसंद के 4 ब्लॉग्स के नाम सामने आ जाते हैं और कुल 10 ब्लॉग्स में इन ब्लॉग्स को निकालने के बाद ये छः ब्लॉग्स बचते हैं-


हिंदी का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग...
अन्ना हज़ारे
आधारभूत ब्रह्मांड
विज्ञान
इन 6 ब्लॉग्स को मंगलायतन पर रविन्द्र प्रभात जी के हवाले से बकबास बताया जा रहा है। उनके हवाले 6 ब्लॉग्स को बकबास कहने वाले को ‘बकवास‘ शब्द को सही लिखना तक नहीं आता और बकवास करने से बाज़ नहीं आया। इस तरह के ब्लॉगर्स रविन्द्र प्रभात जी की बात को बकवास नहीं मानते लेकिन दूसरे ब्लॉगर्स उनके नज़रिए से आहत हैं।
आजकल ‘मानहानि‘ का डर दिखाया जा रहा है लेकिन रविन्द्र मंडल के कार्यकर्ता हिन्दी की सेवा करने वाले ब्लॉग्स को ‘बकबास‘ बताकर उनकी मानहानि कर रहे हैं। इससे हिन्दी ब्लॉगर्स में रोष है। 2-3 ब्लॉगर्स की प्रतिक्रियाएं देखकर पता चलता है कि उन्हें यह ज़्यादा ही नागवार गुज़रा है।

‘नारी‘ ब्लॉग की संस्थापिका से एक ईमेल मिली है जिसमें उन्होंने 3 लिंक भेजे हैं। ये तीनों लिंक भी आजकल हिन्दी ब्लॉगर्स के दरम्यान काफ़ी पढ़े जा रहे हैं। इन पोस्ट्स का केन्द्रीय विषय रविन्द्र प्रभात जी ही हैं। इन्हें देखकर पता चलता है कि रविन्द्र प्रभात जी छुपे रूस्तम हैं।  इन पोस्ट्स में कई सच्चाईयां उजागर की गई हैं। फिर भी पूरी बात सामने आना अभी बाक़ी है। देखिए-

रचना
11:30 PM (0 minutes ago)
to me

अंत में एक सवाल रविन्द्र प्रभात जी से यह कि
‘भाई साहब ! आपको किसने हक़ दिया है कि आप ‘बॉब्स पुरस्कार 2013‘ में नामित 6 ब्लॉग्स को बकबास बताएं और उनके चयन के कारण श्री रविश कुमार जी के सिविक सेंस पर सवालिया निशान लगाएं ?
आपको अपनी इस कथन के लिए हिन्दी ब्लॉग जगत से उमूमन और संबंधित 6 ब्लॉगर्स से ख़ुसूसन माफ़ी मांग लेनी चाहिए।
अपनी ग़लती पर अड़ने वाले कभी अच्छे लोग नहीं होते और ग़लती स्पष्ट है ही।
यह एक दुखद प्रकरण है। माफ़ी मांग कर इसे समाप्त करना ही बेहतर है। दूसरों पर कीचड़ उछालने से दूसरों पर वह गिरे या न गिरे लेकिन अपने हाथ ज़रूर गंदे हो जाते हैं।
इस पोस्ट का रवीन्द्र प्रभात जी से कोई संबंध नहीं है और न ही यह आजकल ज़्यादा पढ़ी जा रही है लेकिन इस पोस्ट पर रवीन्द्र प्रभात जी के हिमायतियों की कुछ टिप्पणियां हैं। जिनमें यह देखा जा सकता है कि वे दूसरों को क्या नसीहतें देते हैं और ख़ुद दूसरों के ब्लॉग को ‘बकबास‘ :( बताते समय उन्हें भूल जाते हैं।

बड़ा ब्लॉगर वह है जो कमाता है

इस तरह हिन्दी ब्लॉगर्स को अपनी आय का स्रोत बनाने की घटिया मानसिकता बेनक़ाब हो जाती है। इसी के साथ गुटबाज़ी और रंजिश की एक बड़ी वजह भी सामने आ जाती है।
नोटः मंगलायतन ब्लॉग की पोस्ट का स्क्रीन शॉट सुरक्षित है। उसमें किसी तरह के हेर-फेर की कोशिश कामयाब न होगी।

Friday, April 12, 2013

बेटी चाहिए तो शाकाहारी बनें ? girl child


लंदन। मां बनने की तैयारी कर रही महिलाएं ज़रा ग़ौर फ़रमाएं। अगर आप पहली संतान के रूप में एक ख़ूबसूरत बेटी चाहती हैं, मांस-मच्छी से तौबा कर शाकाहार अपनाएं। एक नए अध्ययन के मुताबिक़ गर्भधारण से कुछ माह पहले कैल्शियम और मैगनीशियम युक्त फल-सब्ज़ियों का सेवन करने वाली 80 फ़ीसदी महिलाएं लड़कियों को जन्म देती हैं।

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डा. अनवर जमाल लेखकडा. अनवर जमालApr 12, 2013 03:26 PMसभी पोस्ट देखें

बेटी चाहिए तो शाकाहारी बनें

आदरणीय महेन्द्र श्रीवास्तव जी की पोस्ट ( देवी भक्तों ने जमकर उड़ाया नानवेज ? )  पढ़कर पता चला कि नवरात्र के दौरान श्रृद्धालु  औरत-मर्द शाकाहा री बन जाते हैं। जो लोग आम दिनों में मांस खाते हैं। इन दिनों में वे भी मांस का सेवन...आगे पढ़ें...कोई कॉमेंट नहींपिछली पोस्ट:

‘ब्लॉग की ख़बरें‘

1- क्या है ब्लॉगर्स मीट वीकली ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_3391.html

2- किसने की हैं कौन करेगा उनसे मोहब्बत हम से ज़्यादा ?
http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

3- क्या है प्यार का आवश्यक उपकरण ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

4- एक दूसरे के अपराध क्षमा करो
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

5- इंसान का परिचय Introduction
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/introduction.html

6- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

8- बेवफा छोड़ के जाता है चला जा
http://kunwarkusumesh.blogspot.com/2011/07/blog-post_11.html#comments

9- इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक
http://www.hamarianjuman.com/2011/07/blog-post.html

10- दुआ की ताक़त The spiritual power
http://ruhani-amaliyat.blogspot.com/2011/01/spiritual-power.html

11- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

12- शकुन्तला प्रेस कार्यालय के बाहर लगा एक फ्लेक्स बोर्ड-4
http://shakuntalapress.blogspot.com/

13- वाह री, भारत सरकार, क्या खूब कहा
http://bhadas.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

14- वैश्विक हुआ फिरंगी संस्कृति का रोग ! (HIV Test ...)
http://sb.samwaad.com/2011/07/blog-post_16.html

15- अमीर मंदिर गरीब देश
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

16- मोबाइल : प्यार का आवश्यक उपकरण Mobile
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/mobile.html

17- आपकी तस्वीर कहीं पॉर्न वेबसाइट पे तो नहीं है?
http://bezaban.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

18- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम अब तक लागू नहीं
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

19- दुनिया में सबसे ज्यादा शादियाँ करने वाला कौन है?
इसका श्रेय भारत के ज़ियोना चाना को जाता है। मिजोरम के निवासी 64 वर्षीय जियोना चाना का परिवार 180 सदस्यों का है। उन्होंने 39 शादियाँ की हैं। इनके 94 बच्चे हैं, 14 पुत्रवधुएं और 33 नाती हैं। जियोना के पिता ने 50 शादियाँ की थीं। उसके घर में 100 से ज्यादा कमरे है और हर रोज भोजन में 30 मुर्गियाँ खर्च होती हैं।
http://gyaankosh.blogspot.com/2011/07/blog-post_14.html

20 - ब्लॉगर्स मीट अब ब्लॉग पर आयोजित हुआ करेगी और वह भी वीकली Bloggers' Meet Weekly
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/bloggers-meet-weekly.html

21- इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
http://www.sahityapremisangh.com/2011/07/blog-post_3678.html

22- इसलाम में आर्थिक व्यवस्था के मार्गदर्शक सिद्धांत
http://islamdharma.blogspot.com/2012/07/islamic-economics.html

23- मेरी बिटिया सदफ स्कूल क्लास प्रतिनिधि का चुनाव जीती
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_2208.html

24- कुरआन का चमत्कार

25- ब्रह्मा अब्राहम इब्राहीम एक हैं?

26- कमबख़्तो ! सीता माता को इल्ज़ाम न दो Greatness of Sita Mata

27- राम को इल्ज़ाम न दो Part 1

28- लक्ष्मण को इल्ज़ाम न दो

29- हरेक समस्या का अंत, तुरंत

30-
अपने पड़ोसी को तकलीफ़ न दो

साहित्य की ताज़ा जानकारी

1- युद्ध -लुईगी पिरांदेलो (मां-बेटे और बाप के ज़बर्दस्त तूफ़ानी जज़्बात का अनोखा बयान)
http://pyarimaan.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

2- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

3- आतंकवादी कौन और इल्ज़ाम किस पर ? Taliban
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/taliban.html

4- तनाव दूर करने की बजाय बढ़ाती है शराब
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

5- जानिए श्री कृष्ण जी के धर्म को अपने बुद्धि-विवेक से Krishna consciousness
http://vedquran.blogspot.com/2011/07/krishna-consciousness.html

6- समलैंगिकता और बलात्कार की घटनाएं क्यों अंजाम देते हैं जवान ? Rape
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/rape.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

8- ख़ून बहाना जायज़ ही नहीं है किसी मुसलमान के लिए No Voilence
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/no-voilence.html

9- धर्म को उसके लक्षणों से पहचान कर अपनाइये कल्याण के लिए
http://charchashalimanch.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

10- बाइबिल के रहस्य- क्षमा कीजिए शांति पाइए
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

11- विश्व शांति और मानव एकता के लिए हज़रत अली की ज़िंदगी सचमुच एक आदर्श है
http://dharmiksahity.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

12- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

13- ‘इस्लामी आतंकवाद‘ एक ग़लत शब्द है Terrorism or Peace, What is Islam
http://commentsgarden.blogspot.com/2011/07/terrorism-or-peace-what-is-islam.html

14- The real mission of Christ ईसा मसीह का मिशन क्या था ? और उसे किसने आकर पूरा किया ? - Anwer Jamal
http://kuranved.blogspot.com/2010/10/real-mission-of-christ-anwer-jamal.html

15- अल्लाह के विशेष गुण जो किसी सृष्टि में नहीं है.
http://quranse.blogspot.com/2011/06/blog-post_12.html

16- लघु नज्में ... ड़ा श्याम गुप्त...
http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

17- आपको कौन लिंक कर रहा है ?, जानने के तरीके यह हैं
http://techaggregator.blogspot.com/

18- आदम-मनु हैं एक, बाप अपना भी कह ले -रविकर फैजाबादी

19-मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत

20- मौत कहते हैं जिसे वो ज़िन्दगी का होश है Death is life

21- कल रात उसने सारे ख़तों को जला दिया -ग़ज़ल Gazal

22- मोम का सा मिज़ाज है मेरा / मुझ पे इल्ज़ाम है कि पत्थर हूँ -'Anwer'

23- दिल तो है लँगूर का

24- लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी - Allama Iqbal

25- विवाद -एक लघुकथा डा. अनवर जमाल की क़लम से Dispute (Short story)

26- शीशा हमें तो आपको पत्थर कहा गया (ग़ज़ल)