Sunday, April 8, 2012

अश्लील टीका टिप्पणी क्यों ?

एक नारी ने नर-नारी के जटिल संबंधों को देखा और उनमें मौजूद मुख्य समस्या नारी की संतुष्टि के विषय पर उस नारी ने ही समाधान भी दिया। जिसका स्वागत किया गया लेकिन कुछ लोगों ने उस महिला ब्लॉगर को अपमानित करने का मानो बीड़ा ही उठा लिया। इससे दुखी होकर उसने अपनी पोस्ट पर आई टिप्पणियों को छिपा दिया और अपनी मनोव्यथा बताने के लिए कह दिया कि
‘बस..., अब और विवाद नहीं‘

हमने उनकी पोस्ट पढ़कर यही कहा है कि
आपकी पोस्ट से आपकी पीड़ा झलक रही है। सबके हित के विषय पर आपने एक अच्छा समाधान दिया था। विषय व्यस्क था तो कुछ शब्द इस तरह के आ गए थे। जिन्हें उन शब्दों पर या आपकी शैली पर आपत्ति थी तो वे अपनी आपत्ति दर्ज करा देते। आपकी कविता के विरोध में जो कुछ किया गया, वह जायज़ नहीं है।
नारी को अपनी जागीर मान कर मर्द उसका रख रखाव कर सकता है लेकिन उसके मन को समझना उसके लिए आज भी मुश्किल है। इसीलिए आपको मुखर होकर स्पष्ट शब्द इस्तेमाल करने पड़े।
हमने ब्लॉग की ख़बरें व अन्य मंचों पर आपकी पोस्ट की मंशा की तारीफ़ की है।
अपने समर्थन में जो लिंक आपने दिए, उनमें वह सबसे ऊपर होना चाहिए लेकिन वह आपकी लिस्ट में ही नहीं है।
हमारी पोस्ट का लिंक किस कारण से छोड़ दिया गया ?

संभोग रहस्य - Vandana Gupta

धन्यवाद !

आपको भी अपनी राय ज़रूर देनी चाहिए।

13 comments:

शिखा कौशिक said...

nice post ....no comment ...

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सुज्ञ said...

इस लिए छोड़ दिया जमाल साहब कि वंदना जी की उस पोस्ट को आपकी इसी टिप्पणी ने अश्लीलता में खपाने/दर्शाने का कुत्सित कार्य किया गया था।

रविकर फैजाबादी said...

गारी-गुप्ता हो रहा, जाल जगत पर आज ।
मूल विषय खोता रहा, गिरी गजल पर गाज ।

गिरी गजल पर गाज, वंदना के स्वर रूठे ।
कौन यहाँ महफूज, मिटे सब दुष्ट अनूठे ।

भौतिकता धन धान्य, जला सकती चिंगारी ।
मन जीवन सम्मान, जलाती कटुता गारी ।।

DR. ANWER JAMAL said...

वंदना जी की पोस्ट पर अभद्र टिप्पणिया करने वालों से सहमति जताकर आपने उनका उत्साह वर्धन किया है, कुत्सित कृत्य इसे कहा जाता है।
वंदना जी की पोस्ट के विरोध में अश्लीलता की हद तक चले जाने वालों के खि़लाफ़ एक शब्द न कहकर भी आप उनका मनोबल बढ़ाते हुए ही नज़र आ रहे हैं, इसे भी कुत्सित ही कहा जाएगा।
इस पोस्ट की मंशा यही है कि आप जैसे कुत्सित ब्लॉगर्स से विनती की जाए कि कृप्या इस तरह के काम न करें।
See
‘संभलकर, विषय बोल्ड है‘ पर टिप्पणी
http://allindiabloggersassociation.blogspot.in/2012/04/blog-post_9049.html

DR. ANWER JAMAL said...

@ सुज्ञ जी ! पोस्ट में दी गई हमारी टिप्पणी वंदना जी की ताज़ा पोस्ट पर है जो अभी थोड़ी देर पहले दी है और मॉडरेशन का इंतेज़ार कर रही है। जिस टिप्पणी को उनके ब्लॉग पर अभी तक किसी पाठक ने पढ़ा ही नहीं है, वह टिप्पणी उनकी पोस्ट को किसी भी चीज़ में कैसे खपा सकती है ?
इससे पता चलता है कि आप हमारी नफ़रत में इतने अंधे हो चुके हैं कि आप यह भी ध्यान नहीं देते कि पोस्ट में दी गई टिप्पणी उनकी ताज़ा पोस्ट पर है न कि उनकी पुरानी चर्चित पोस्ट पर।
http://bhartiynari.blogspot.in/2012/04/blog-post_08.html

सुज्ञ said...

आपके उस टीप्पणी दुष्प्रचार से अधिक कोई अभद्र टिप्पणी वहाँ नहीं थी। आपकी मंशा तो इस पोस्ट में भी स्पष्ट है धन्यवाद के उपर बोल्ड में कुछ शब्दों को लिखकर आपने जता ही दिया है।

डॉ श्याम गुप्त जी का वहां अवतरण भी आपके दुष्प्रचार के बाद उसके प्रभाव को रोकने के लिए ही हुआ था। जिसका जिक्र उन्होनें वहां शालीनता से किया ही था। उनकी वहाँ पोस्ट से असहमति मात्र थी, कोई अभद्रता नहीं, उन्होंने निवेदन भी किया था कि इस तरह की पोस्टों से अनवर जमाल जैसे लोगों को अपने मांस-मछली आदि के प्रचार का मौका मिलता है।

इसलिए प्रकरण स्पष्ट है। यह पोस्ट भी जब वंदना जी से प्रशंसा नहीं मिली तो खुन्दक का परिणाम है। इसलिए कुत्सित कृत्य है।

सुज्ञ said...

@ जमाल साहब, मै भी उनकी पुरानी चर्चित पोस्ट पर की गई आपकी उस टिप्पणी की बात कर रहा हूं जिसका आपने दुष्प्रचार किया था, लगभग अपने कमेंट गार्डन समेत दूसरे ब्लॉगस पर्।
http://allindiabloggersassociation.blogspot.in/2012/04/blog-post_9049.html
इसी ने अश्लीलता का वातावरण फैलाया। जबकि वंदना जी का मक़सद अन्ततः आत्मीय प्रेम को महत्व देना था।

हमें आपसे कोई नफरत नहीं, द्वेष करना हमारा चरित्र भी नहीं, पर जो सच्चाई है सो है। हम क्यों नफरत कर जी जलाएँ, गलत विचारों से प्रेम न करें उसका अर्थ यह नहीं होता कि हम किसी मनुष्य से घृणा करते है।

DR. ANWER JAMAL said...

भाई सुज्ञ जी ! वंदना जी के दिल को डा. श्याम गुप्ता की दर्जन भर से ज़्यादा टिप्पणियों की भाषा से बहुत ठेस लगी है और जिन तीन ब्लॉगर्स के कृत्य से वह आहत हुई हैं, उनमें डा. श्याम गुप्ता जी का नाम भी शामिल है जिनके कमेंट्स को आप शालीन बता रहे हैं।
डा. गुप्ता जी का कमेंट मेरे कमेंट करने से पूर्व ही हो चुका था।
आपका अवतरण ज़रूर डा. श्याम गुप्ता जी को बल देने के लिए वहां हुआ था, इसलिए उनके कुत्सित कर्म में आप भी साझीदार हैं।
जो मांस नहीं खाते उन्हें हमने उस पोस्ट पर शाकाहार को अपनाने के लिए ही कहा है।
बात को उसकी मंशा के खि़लाफ़ बयान करना भी कुत्सित होता है।
अब भी आप वंदना जी का उत्पीड़न करने वाले डा. श्याम गुप्ता जी के पक्ष का ही समर्थन कर रहे हैं जो नितांत कुत्सित एवं निंदनीय है।

सुज्ञ said...

डा. श्याम गुप्ता जी के सारे कमेंट मय समय के वंदना जी के पास संरक्षित है, वास्तविकता का फैसला वे ही कर लेगी। यह सच है कि गुप्त जी नें दर्जनों कमेंट असहमति के दिए। इसी कारण से वंदना जी को विरोध नजर आया। वंदना जी नें भी स्पष्ट किया ही है कि मेरा श्याम जी से कोई विवाद नहीं हुआ और उन्हें ठीक से पहचानती भी नहीं। किसी भी असहमति को विरोध समझ लिया जाना स्वभाविक है। यह उनसे भी हुआ कोई विशेष बात नहीं, मुख्य प्रश्न मंशा और भावनाओं का है। यह समझना जरूरी है कि अगले की मंशा क्या है?

सुज्ञ said...

मेरा यहां ध्येय न तो श्याम गुप्त का समर्थन करना है उनका वे खुद देखें। न इस पूरे प्रकरण में इसके या उसके पक्ष विपक्ष में खेमेबाजी करना। मुझे इससे भी फर्क नहीं पड़ता कि कोई मुझे अपने पक्ष में या विरोध में माने।
यहाँ आपकी पोस्ट देखी कि टिप्पणी दुष्प्रचार के उपरांत भी आप प्रशंसको में सामिल न करने का उल्हाना भेज रहे हैं तो बोलना पड़ा।

डा. श्याम गुप्त said...

सुग्य जी सही बात तो यही है कि वन्दना जी की कविता के लिये ..अनवर जमाल के मूर्खतापूर्ण शीर्षक ’ सम्भोग रहस्य’ ही सबसे अधिक अभद्र टिप्पणी है... अनजान व अस्पष्ट सोच ग्रसित वन्दना जी ने यह समझा ही नहीं.... और धडल्ले से यही शीर्षक अब भी ब्लोग पर दिखाया जारहा है.....यही सब्से अधिक उत्प्रीणन की बात है...

डा. श्याम गुप्त said...

nice post ....no comment ... ये क्या होता है?

डा. श्याम गुप्त said...

एसे अश्लील शीर्षक वाली पोस्ट पर टिप्पणी वैसी ही तो आयेंगी...

‘ब्लॉग की ख़बरें‘

1- क्या है ब्लॉगर्स मीट वीकली ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_3391.html

2- किसने की हैं कौन करेगा उनसे मोहब्बत हम से ज़्यादा ?
http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

3- क्या है प्यार का आवश्यक उपकरण ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

4- एक दूसरे के अपराध क्षमा करो
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

5- इंसान का परिचय Introduction
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/introduction.html

6- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

8- बेवफा छोड़ के जाता है चला जा
http://kunwarkusumesh.blogspot.com/2011/07/blog-post_11.html#comments

9- इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक
http://www.hamarianjuman.com/2011/07/blog-post.html

10- दुआ की ताक़त The spiritual power
http://ruhani-amaliyat.blogspot.com/2011/01/spiritual-power.html

11- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

12- शकुन्तला प्रेस कार्यालय के बाहर लगा एक फ्लेक्स बोर्ड-4
http://shakuntalapress.blogspot.com/

13- वाह री, भारत सरकार, क्या खूब कहा
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14- वैश्विक हुआ फिरंगी संस्कृति का रोग ! (HIV Test ...)
http://sb.samwaad.com/2011/07/blog-post_16.html

15- अमीर मंदिर गरीब देश
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

16- मोबाइल : प्यार का आवश्यक उपकरण Mobile
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/mobile.html

17- आपकी तस्वीर कहीं पॉर्न वेबसाइट पे तो नहीं है?
http://bezaban.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

18- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम अब तक लागू नहीं
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

19- दुनिया में सबसे ज्यादा शादियाँ करने वाला कौन है?
इसका श्रेय भारत के ज़ियोना चाना को जाता है। मिजोरम के निवासी 64 वर्षीय जियोना चाना का परिवार 180 सदस्यों का है। उन्होंने 39 शादियाँ की हैं। इनके 94 बच्चे हैं, 14 पुत्रवधुएं और 33 नाती हैं। जियोना के पिता ने 50 शादियाँ की थीं। उसके घर में 100 से ज्यादा कमरे है और हर रोज भोजन में 30 मुर्गियाँ खर्च होती हैं।
http://gyaankosh.blogspot.com/2011/07/blog-post_14.html

20 - ब्लॉगर्स मीट अब ब्लॉग पर आयोजित हुआ करेगी और वह भी वीकली Bloggers' Meet Weekly
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/bloggers-meet-weekly.html

21- इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
http://www.sahityapremisangh.com/2011/07/blog-post_3678.html

22- इसलाम में आर्थिक व्यवस्था के मार्गदर्शक सिद्धांत
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23- मेरी बिटिया सदफ स्कूल क्लास प्रतिनिधि का चुनाव जीती
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24- कुरआन का चमत्कार

25- ब्रह्मा अब्राहम इब्राहीम एक हैं?

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28- लक्ष्मण को इल्ज़ाम न दो

29- हरेक समस्या का अंत, तुरंत

30-
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7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
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13- ‘इस्लामी आतंकवाद‘ एक ग़लत शब्द है Terrorism or Peace, What is Islam
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16- लघु नज्में ... ड़ा श्याम गुप्त...
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17- आपको कौन लिंक कर रहा है ?, जानने के तरीके यह हैं
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18- आदम-मनु हैं एक, बाप अपना भी कह ले -रविकर फैजाबादी

19-मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत

20- मौत कहते हैं जिसे वो ज़िन्दगी का होश है Death is life

21- कल रात उसने सारे ख़तों को जला दिया -ग़ज़ल Gazal

22- मोम का सा मिज़ाज है मेरा / मुझ पे इल्ज़ाम है कि पत्थर हूँ -'Anwer'

23- दिल तो है लँगूर का

24- लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी - Allama Iqbal

25- विवाद -एक लघुकथा डा. अनवर जमाल की क़लम से Dispute (Short story)

26- शीशा हमें तो आपको पत्थर कहा गया (ग़ज़ल)