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| यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे... |
वो हाज़िर हो
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वो जो हर दीन में आँख मिचौली खेलता है,
उस से कहो के नाज़िल हो,
जिसके नाम से हर गुनाह छुप जाए,
उस से कहो के ज़ाहिर हो।
जब उसका ही नाम उनके लबों पे है,
तो उस...







2 comments:
पढ़ा है.
@भूषण जी, आपका धन्यवाद!
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