Wednesday, April 17, 2013

उपेक्षित होने का दर्द कहलवा रहा है दूसरे ब्लॉगों को Bakwas

‘बॉब्स अतंर्राष्ट्रीय पुरस्कार 2013‘ में नामित ब्लॉगर्स के खि़लाफ़ आक्रमण की एक पोस्ट से हुई जो कि नारी के खि़लाफ़ लिखी गई थी।
इस पोस्ट लेखक के सहयोगी ब्लॉगर्स ने इस आग को हवा दी और नफरत की यह आग पूरे हिंदी ब्लॉग जगत में फैलाकर रख दी। यह दो चार ब्लॉगर्स का एक संगठित गुट है। इस गुट में बड़े तो दो ही हैं या हद से हद तीन होंगे बाक़ी एक उनके साथ है।  
बात दरअसल यह है कि ‘बॉब्स अतंर्राष्ट्रीय पुरस्कार 2013‘ का प्लेटफ़ार्म सामने आने के बाद उन लोगों की रोज़ी रोटी पर संकट आ खड़ा हुआ है जो हिन्दी ब्लॉगिंग पर किताबें लिखकर नोट छाप रहे थे। ये लोग ‘बिना पैसे लिए ही‘ पुरस्कार भी दिया करते थे। ये लोग हिन्दी ब्लॉगिंग के स्वयंभू ठेकेदार बनने के लिए भी बरसों से हाथ पैर मार रहे हैं।  
‘बॉब्स अतंर्राष्ट्रीय पुरस्कार 2013‘ के सामने इनके पुरस्कार की हैसियत ऐसी हो गई है जैसे कि पहाड़ के सामने ऊंट जाकर खड़ा हो जाए। इस पर हुआ यह कि इन्हें रविश कुमार जी ने पूछा तक नहीं, इनमें से किसी के ब्लॉग को भी उन्होंने नहीं चुना। अब ये एक साधारण ब्लॉगर की तरह अपने ऑफ़िस में बैठकर दूसरों को वोट देते रहते हैं। 
हर क्लिक पर उन्हें उपेक्षित होने का यही दर्द बेचैन कर रहा है कि हाय ! किताबें हमने लिखीं और चुने वे गए जिन्होंने कोई किताब न लिखी। इसीलिए वे हिन्दी ब्लॉगिंग पर अंग्रेज़ी में इंटरव्यू दे रहे हैं।
...कि शायद ऐसा करके ही मैं रविश जी की नज़र में आ जाऊं कि मैं भी कुछ हूं और शायद अगली बार वह मुझे या मेरे ब्लॉग को किसी लायक़ समझ लें। इसीलिए दूसरे ब्लॉगर्स के बारे में अनाप शनाप बकवास की जा रही है।
रविश कुमार जी भी इस मानसिकता से बख़ूबी वाक़िफ़ हैं। अपनी एक पोस्ट में वह अपना अनुभव इन अल्फ़ाज़ में लिखते हैं-
"मैंने देखा है कि चार आने के एंकरों को टेढ़ा होकर चलते हुए और सामने आते हुए लोगों को गेस करते हुए कि ये वाला पहचानेगा कि नहीं। पहचान लिया तो बस हां हां। ये सब बीमारी है।"
ये ब्लॉगर्स एक भयानक मानसिक कष्ट से गुज़र रहे हैं। हम सबको उनसे हमदर्दी रखनी चाहिए।
हिंदी ब्लॉग जगत के ताज़ा हालात पर डा. अयाज़ अहमद साहब व दूसरे ब्लॉगर्स की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। देखिए-

दूसरे ब्लोगों को बकवास कहना हिन्दी ब्लोगिंग को नुकसान पहुँचाना है

Dr. Ayaz Ahmad 
सब मिल-जुल कर किसी ढंग के ब्लोगर को जर्मनी भेजने पर इत्तेफ़ाक़ कर ले। अच्छा तो यही है.
ब्लोगिंग का माज़ी (इतिहास) लिखने वाले उसका वर्तमान ख़राब कर रहे हैं. यह देखना अच्छा नहीं लगता. 
शोहरत के लिए या किसी और मकसद के लिए आदमी वह सब कर गुज़रता है जो कि नहीं करना चाहिए.
रविन्द्र परभात जी किसी ब्लॉग को अच्छा कहें तो सही है लेकिन वे या उनके हमनवा दूसरे ब्लोगों को बकवास कहने का हक नहीं रखते. उन्हें भी बहुत लोग पसंद करते हैं। दूसरे ब्लोगों को बकवास कहना हिन्दी ब्लोगिंग को नुकसान पहुँचाना है .
ईनाम के लिए  नामित एक महिला ब्लोगर कि ईमेल ने तो उनके बारे में बहुत कुछ बिना कहे कह दिया है.
यह चर्चा हो रही है इस पोस्ट की-

Ravindra Prabhat के प्रचार के पीछे ख़ुद रवीन्द्र प्रभात ही निकले ?

Ratan singh shekhawat said...
किसी भी ब्लॉग को बकवास कहना दुखद है इसी से कहने वाले की मानसिकता का पता चल जाता है कि वह सिर्फ कुँए का मेंडक है !!
Gyan Darpan

Shah Nawaz said...
हालाँकि मैं रविन्द्र प्रभात जी के द्वारा 'नारी' ब्लॉग पर उठाएं सवाल से सहमत नहीं हूँ, मगर मानता हूँ कि उन्हें वह सवाल उठाने का हक है...

और अगर उनकी बात गलत है तो रचना जी को उचित जवाब देना चाहिए। मगर इस बात से तल्खी का कोई भी ताल्लुक नहीं होना चाहिए। ब्लॉग जगत में वैचारिक मतभेदों से मनभेद की नौबत आना ठीक बात नहीं है।

5 comments:

रविकर said...

बच्ची बच्चा बस बचा, चचा चची का जोर ।

धमाचौकड़ी ले मचा, नचा रहा मन-मोर ।

नचा रहा मन-मोर, मुबारक क्लिक किलकारी ।

लिखते ब्लॉग करोर, किन्तु कुछ ही नर नारी ।

डालें व्यापक छाप, छाप कर झूठी सच्ची ।

कर रविकर तू वोट, जियें कुल बच्चा बच्ची ॥

रचना said...

shah nawaj ji

maenae kisi kae adihkaar par koi prashn kab lagayaa

unhonae new paper mae interview diya
maenae new paper editor koi mail bhej kar aaptti darj karvaa di
[ ab mujhae aaptti kaese darj karwaani haen , kin shabdo me karvaani haen KYAA YAE MUJHAE KISI SAE SIKHNA HAEN ,aaptti darj karwana mera bhi adhikaar aur apnae tarikae sae karwaana bhi mera adhikaar haen }

news paper nae aaptti ravindra prabhat tak pahuchaa di

unhonae us patr kae content ko tod madod kar kae paesh kar diyaa

santosh trivedi ne naari ki asliyat par post likh dii

aur mare upar maan haani kaa davaa karnae ki baat shuru ho gayii

iskae baad new paper editor ne mujhae patr likha ki mujae ravindra prabhat sae maafi maang laeni chahiyae

maenae unko likh diya PLEASE DONT THREATN ME

newpaper kaa domain trace karkae jo jaankari maenae uplabhd karaa dii us par FARZI KAMNET AYAA HAEN

ravindra prabhat ki pehli parikalpna post jo shyaad blogspot par thee aur wahaan 25 blogs selected they mera kament thaa

INKO HINDI KAE BEST BLOG NAA KAHEY APNII PASAND KAHEY

aur mae aaj bhi apne byaan par kayam hun

Mukesh Kumar Sinha said...

ek award ne fir duriyan bana di....

Mukesh Kumar Sinha said...

ek award ne fir duriyan bana di....

तुषार राज रस्तोगी said...

सबकी अपनी अपनी सोच है हुज़ूर | कम से कम ब्लॉग जगत को तो बक्श दीजिये इस गन्दी राजनीति से | आभार

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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