बता रहे हैं जनाब सैयद मुहम्मद मासूम साहब , अपनी ताज़ा पोस्ट में-
मजदूर दिवस का तमाशा
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कविता:
*"मजदूर दिवस का तमाशा"*✍️ कृष्ण कायत, मंडी डबवाली।
पंडालों में शोर है, नारों का बाजार है,
आज फिर 'मजदूर' नेताओं का त्योहार है।
तय हुई है मजदूर...






1 comments:
बहुत सुन्दर...
पधारें "आँसुओं के मोती"
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