अंदाज ए मेरा: स्कूल के माथे कलंक का टीका.....!!!!!!: फोटो साभार: हरिभूमि अमानवीय....... ! शर्मनाक..... ! दुर्भाग्यजनक......... ! मानवता को कलंकित करने का काम किया है एक स्कूल ने।...
"दृष्टिकोण वह कला है जिससे हम वह देख पाते हैं जो दूसरों के लिए अदृश्य है।
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"दृष्टिकोण वह कला है जिससे हम वह देख पाते हैं जो दूसरों के लिए अदृश्य है।"
— जोनाथन स्विफ्ट जयपुर में आयोजित 84वें AIOS सम्मेलन (12-15 मार्च 2026) में
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