लेखकOct 28, 2013 09:28 AMसभी पोस्ट देखें
ज्ञानतंत्र की रहस्य-बोध कथाएं यह एक फ़र्ज़ी क़िस्सा है यानि एक ऐसा क़िस्सा, जिसकी हक़ीक़त समझना हर उस आदमी का फ़र्ज़ है जिसका कोई भाई-बंधु किसी दंगे में मारा जा चुका है या अभी तक मारा नहीं गया है। क़िस्से की तरह इसके पात्र और देशकाल भी पूरी तरह फ़र्ज़ी हैं। किसी भीआगे पढ़ें...16 कॉमेंट
मगर ये कुफ़्फ़ार (ख़्वाहमख़्वाह) तकब्बुर और अदावत में (पड़े अंधे हो रहें
हैं)
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38 सूरए (साद)
सूरए (साद)
सूरए साद मक्का में नाजि़ल हुआ और इसकी अठ्ठासी (88) आयते हैं
खु़दा के नाम से शुरू करता हूँ जो बड़ा मेहरबान निहायत रहमवाला है
सआ...







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जय हो
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