Wednesday, July 6, 2011

सेक्स की बातें या काम की बातें ?

कौन सी बातों पर लोग ज़्यादा ध्यान देते हैं ?
इस नज़र से जब देखा गया तो प्रिय प्रवीण जी की पोस्ट पर 16 हाइली क्वालीफ़ाईड इंटेलेक्चुअल्स के कमेंट मौजूद थे।

माननीय मंत्री जी ने तो विकसित विश्व से आयातित बीमारी कह दिया, पर क्या यह मुद्दा इतना आसान है ?

महेश बारमाटे ‘माही‘
दूसरी तरफ़ प्रिय महेश बारमाटे ‘माही‘ जी की पोस्ट थी। जो आजकल हिंदी ब्लॉगिंग गाइड लिखने में एक ऐतिहासिक रोल निभा रहे हैं। हिंदी ब्लॉगिंग कैसे सामान्य जनता के लिए सुलभ हो सके ?
वे इस चिंता में घुले जा रहे हैं लेकिन उनकी पोस्ट पर शून्य कमेंट हैं।

हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड : एक नया अध्याय - भाग २

हम जब किशोर थे तो सेक्स की बातें करना बुरा माना जाता था। हमारे आस-पास भी इस पर बातचीत की कुछ मर्यादाएं हैं। औरत और मर्दों को मिक्स होकर तो हमने सेक्स पर बात करते शायद ही कभी सुना हो और समलैंगिकता पर तो आज तक नहीं सुना।
ब्लॉग जगत का हाल उल्टा है।
यहां वर्जनाएं तोड़ना बुद्धिजीवी कहलाने के लिए परमावश्यक है।
यहां आपको समलैंगिकता पर बात करते हुए औरत-मर्द इकठ्ठे मिल जाएंगे और माही जी की पोस्ट पर कोई अकेले भी न मिलेगा। हालांकि ‘हमारीवाणी‘ पर अब तक 17 लोग उसे पढ़ चुके हैं और टॉप 5 में वह नज़र आ रही है। उनका काम भी सकारात्मक है और वह किसी ऐसे वर्ग से भी नहीं हैं, जिन्हें अलग थलग डालने की क़वायद अक्सर ही की जाती है।
तब क्या वजह है कि लोग काम की बात छोड़कर सेक्स की बातें कर रहे हैं ?
क्या इनके अंदर काम के प्रति किसी तरह की कोई कुंठा दबी हुई है ?
यह सवाल परेशान सा कर सकता है।
कई बार मनोरोग बड़े जटिल हो जाते हैं।
समलैंगिकों की चिंता के साथ साथ उनके हिमायतियों को अपनी चिंता भी समय रहते कर लेनी चाहिए।
बहरहाल हिंदी ब्लॉग जगत में अपेक्षाकृत कम लाभदायक या रददी लेख ज़्यादा प्रशंसा और ध्यान पा रहे हैं, यह एक हक़ीक़त है।
यह बात हमने आज इसलिए कह दी क्योंकि आज ही हमसे फैज़ साहब ने कहा था की 'सच बोल दो'
सो हमने बोल दिया है. 
किसी को कोई शिकायत हो तो ज़िम्मेदारी फैज़ साहब पर पड़नी चाहिए.
लिहाज़ा शिकायत भी वहीं करना मुनासिब है.
लिंक यह थामिए, 
शब  बखैर, रात आधी हो चली है अब कुछ हमें भी कर लेने दिया जाए.

7 comments:

प्रवीण शाह said...
This comment has been removed by the author.
चंदन कुमार मिश्र said...

प्रवीण जी ने अन्तिम वाक्य कहकर शायद किसी का दिल दुखाया है। उनसे मेरी विनती है कि किसी काम के बारे में इस तरह न कहें जबकि इसका लेखक अपना समय और मेहनत दोनों लिखने में खर्च कर रहा है। बुरा न मानिएगा प्रवीण शाह साहब।

प्रवीण शाह said...

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आदरणीय व प्रिय डॉ० अनवर जमाल साहब,

आपकी इस आपत्ति व आहत होने को समझ सकता हूँ...जानता हूँ कि आप एक धार्मिक शख्स हैं और आपका धर्म इस तरह की बातों की चर्चा तक की भी इजाजत नहीं देता...

पर इस नयी दुनिया में मुद्दे कालीन के नीचे दबा देने मात्र से खत्म नहीं हो जाते... इस बात पर जरूर गौर कीजिये...


...

(प्रिय चंदन कुमार मिश्र जी के कहे को ध्यान में रख मैंने अपनी पहले की टीप के अंतिम वाक्य को हटा यह टिप्पणी फिर से दी है... यदि किसी का भी दिल दुखा है तो क्षमाप्रार्थी भी हूँ...)


...

महेश बारमाटे "माही" said...

अब मैं क्या कहूँ यहाँ ?

जानता हूँ की मेरे लेख जिनपर कभी १० से ज्यादा कमेंट्स भी आये हैं, आज एक भी कमेन्ट मुझे नसीब नहीं हो रहा है...

लगता है कि ये मेरे ब्लॉग्गिंग कैरियर की नयी शुरुआत है...

शायद भगवान् को यही मंजूर हो..

इसी आस में मैं लिख रहा हूँ कि
मेरा भी वक्त आएगा...
जब लोग मुझे गुपचुप ही सही पढेंगे जरूर...
और मेरे काम को सारे जग में सराहा जायेगा...

DR. ANWER JAMAL said...

@ Mahesh ji ! मैंने ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ पर पोस्ट इसीलिए बनाई है कि हरेक अपना चेहरा देख ले और जान ले कि सकारात्मक काम करने वालों का हौसला जाने अनजाने कैसे तोड़ रहे हैं वे ?
अब किसी के पास कोई जवाब ही नहीं है तो वह देगा क्या !
हौसलाभंजक तत्वों की परवाह मैंने कभी नहीं की, आप भी मत करना। ये सब आपका हौसला तोड़ने के हथकंडे हैं।
इनसे घबराना नहीं चाहिए।
आदमी को बस अपने काम पर ध्यान देना चाहिए।
अब आपके पास गूगल और फ़ेसबुक पर कई ग्रुप हैं और सभी अच्छे जा रहे हैं। आपकी पोज़ीशन पहले के मुक़ाबले आज मज़बूत है और आने वाले समय में आप और भी ज़्यादा मज़बूत होकर उभरेंगे।
शुभकामनाएं,
धन्यवाद !

महेश बारमाटे "माही" said...

धन्यवाद अनवर जी...
आप न होते तो शायद मैं इतनी आगे तक न पहुँच सका होता...
मुझे लोगों के कमेन्ट की नहीं बल्कि खुद के आत्म विश्वास की जरूरत है जिसे आप हमेशा बढ़ाते रहते हैं...

मैंने कहीं सुना था कि
अगर कोई आपके कार्य से जलने लगा हो, आपकी बुराई करने लगा हो और आपका मनोबल गिराने का प्रयास करने लगे
तो यह समझना कि आप तरक्की कर रहे हैं और सफलता बहुत जल्द आपके कदमो में होगी, बस अपना आत्मविश्वास न खोना...

DR. ANWER JAMAL said...

@ प्रिय महेश जी ! आपने बिल्कुल सही सुना है। यह दुनिया है और यहां हर अकसर आदमी अपने आप को बहुत बड़ा समझते हैं और दूसरों से उम्मीद करते हैं कि वे उनके विचार सुनें और सराहें जबकि वे ख़ुद दूसरों के लिए यह सब करने के लिए तैयार ही नहीं हैं।
हिंदी ब्लॉगर्स को नई ताक़त नए लोगों के आने से ही मिलेगी। पुराने लोगों में से बहुत से निकल लिए हैं पतली गली से और जो जमे बैठे हैं इनमें से भी बहुत से ऐसे हैं जिनके पास अब नया देने के लिए कुछ नहीं है। बस अपने पैसे के बल पर अपनी चैपाल जमाए बैठे हैं।
इनकी परवाह करना बेकार है। अपनी मंज़िल तय करके आप अपने रास्ते पर आगे बढ़ते रहिए। लोगों को कुछ ऐसा देते रहिए जिससे उन्हें कुछ नया ज्ञान मिले, उनकी कोई समस्या आप दूर करते रहिए। नए लोग आपसे जुड़ते चले जाएंगे और वे लोग देखते रह जाएंगे जो सोचते हैं कि लोगों को ब्लॉगर होने सर्टिफ़िकेट हमसे लेना चाहिए।
वहम है उनका, धूल की तरह उड़ा दीजिए, उनका सारा वहम और बस अपने लेखन पर ध्यान दीजिए।
अपने ब्लॉग पर ट्रैफ़िक बढ़ाने पर ध्यान दीजिए और यह बिल्कुल भी न देखिए कि आपके लेख पर टिप्पणी एक आई है या दस !!!

‘ब्लॉग की ख़बरें‘

1- क्या है ब्लॉगर्स मीट वीकली ?
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2- किसने की हैं कौन करेगा उनसे मोहब्बत हम से ज़्यादा ?
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3- क्या है प्यार का आवश्यक उपकरण ?
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4- एक दूसरे के अपराध क्षमा करो
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

5- इंसान का परिचय Introduction
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6- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
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8- बेवफा छोड़ के जाता है चला जा
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9- इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक
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10- दुआ की ताक़त The spiritual power
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11- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
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12- शकुन्तला प्रेस कार्यालय के बाहर लगा एक फ्लेक्स बोर्ड-4
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13- वाह री, भारत सरकार, क्या खूब कहा
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14- वैश्विक हुआ फिरंगी संस्कृति का रोग ! (HIV Test ...)
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15- अमीर मंदिर गरीब देश
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16- मोबाइल : प्यार का आवश्यक उपकरण Mobile
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/mobile.html

17- आपकी तस्वीर कहीं पॉर्न वेबसाइट पे तो नहीं है?
http://bezaban.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

18- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम अब तक लागू नहीं
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19- दुनिया में सबसे ज्यादा शादियाँ करने वाला कौन है?
इसका श्रेय भारत के ज़ियोना चाना को जाता है। मिजोरम के निवासी 64 वर्षीय जियोना चाना का परिवार 180 सदस्यों का है। उन्होंने 39 शादियाँ की हैं। इनके 94 बच्चे हैं, 14 पुत्रवधुएं और 33 नाती हैं। जियोना के पिता ने 50 शादियाँ की थीं। उसके घर में 100 से ज्यादा कमरे है और हर रोज भोजन में 30 मुर्गियाँ खर्च होती हैं।
http://gyaankosh.blogspot.com/2011/07/blog-post_14.html

20 - ब्लॉगर्स मीट अब ब्लॉग पर आयोजित हुआ करेगी और वह भी वीकली Bloggers' Meet Weekly
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/bloggers-meet-weekly.html

21- इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
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16- लघु नज्में ... ड़ा श्याम गुप्त...
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20- मौत कहते हैं जिसे वो ज़िन्दगी का होश है Death is life

21- कल रात उसने सारे ख़तों को जला दिया -ग़ज़ल Gazal

22- मोम का सा मिज़ाज है मेरा / मुझ पे इल्ज़ाम है कि पत्थर हूँ -'Anwer'

23- दिल तो है लँगूर का

24- लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी - Allama Iqbal

25- विवाद -एक लघुकथा डा. अनवर जमाल की क़लम से Dispute (Short story)

26- शीशा हमें तो आपको पत्थर कहा गया (ग़ज़ल)