थाईलैंडवासी डा. दिव्या ने अपनी पसंद की पार्टी के हक़ में वोटर्स के ध्रुवीकरण के लिए आग उगली। नतीजा यह हुआ कि उनके ब्लॉग पर आग देखकर टिप्पणीकार भाग खड़े हुए।
उनकी ताज़ा पोस्ट पर एक और महिला ब्लॉगर ने उन्हें आड़े हाथों ले लिया और ब्लॉग जगत ने भी उनका समर्थन कर दिया। डा. दिव्या को दिन में तारे और रात में सूरज दोनों दिखाई देने लगे तो उन्होंने तुरंत अपनी नीति बदली।
ताज़ा नीति के अनुसार उन्होंने सामाजिक लेख लिखने शुरू कर दिए हैं। इससे टिप्प्पणीकार वापस जुटने में आसानी होगी और जब वे जुट जाएंगे तो मुसलमानों के त्यौहार और चुनाव के समय पर वह फिर से आग उगलने लगेंगी। टिप्पणीकार भाग जाएंगे तो उन्हें सामाजिक लेख लिखकर या कविता आदि समर्पित करके फिर से मना लिया जाएगा।
ब्लॉगर्स भी बदलते रंग और मिज़ाज से उनके मन में चल रही उथल पुथल को ताड़ रहे हैं।
3 टिप्पणीकार वापस आ भी चुके हैं।
देखते हैं फिर से 50 का आंकड़ा कितने दिन में वापस आता है ?
एक सस्पेंस , एक पहेली !
ताज़ा नीति के अनुसार उन्होंने सामाजिक लेख लिखने शुरू कर दिए हैं। इससे टिप्प्पणीकार वापस जुटने में आसानी होगी और जब वे जुट जाएंगे तो मुसलमानों के त्यौहार और चुनाव के समय पर वह फिर से आग उगलने लगेंगी। टिप्पणीकार भाग जाएंगे तो उन्हें सामाजिक लेख लिखकर या कविता आदि समर्पित करके फिर से मना लिया जाएगा।
ब्लॉगर्स भी बदलते रंग और मिज़ाज से उनके मन में चल रही उथल पुथल को ताड़ रहे हैं।
3 टिप्पणीकार वापस आ भी चुके हैं।
देखते हैं फिर से 50 का आंकड़ा कितने दिन में वापस आता है ?
एक सस्पेंस , एक पहेली !
