ग़ज़लगंगा.dg: ग़म की धूप न खाओगे तो खुशियों की बरसात न होगी: ग़म की धूप न खाओगे तो खुशियों की बरसात न होगी . दिन की कीमत क्या समझोगे जबतक काली रात न होगी . जीवन के इक मोड़ पे आकर हम फिर से मिल...
केंद्रीय हिंदी निदेशालय की ‘भाषा’ पत्रिका के विशेषांक हेतु आलेख आमंत्रित
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