ग़ज़लगंगा.dg: ग़म की धूप न खाओगे तो खुशियों की बरसात न होगी: ग़म की धूप न खाओगे तो खुशियों की बरसात न होगी . दिन की कीमत क्या समझोगे जबतक काली रात न होगी . जीवन के इक मोड़ पे आकर हम फिर से मिल...
और फिरऔन के आदमियों को तुम्हारे देखते-देखते डुबो दिया और (वह वक़्त भी याद
करो) जब हमने मूसा से चालीस रातों का वायदा किया था और तुम लोगों ने उनके जाने
के बाद एक बछड़े को (परसतिश के लिए खु़दा) बना लिया
-
और फिरऔन के आदमियों को तुम्हारे देखते-देखते डुबो दिया और (वह वक़्त भी याद
करो) जब हमने मूसा से चालीस रातों का वायदा किया था और तुम लोगों ने उनके जाने
के...








