ग़ज़लगंगा.dg: ग़म की धूप न खाओगे तो खुशियों की बरसात न होगी: ग़म की धूप न खाओगे तो खुशियों की बरसात न होगी . दिन की कीमत क्या समझोगे जबतक काली रात न होगी . जीवन के इक मोड़ पे आकर हम फिर से मिल...
राही मासूम रज़ा (1927–1992)
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राही मासूम रज़ा राही मासूम रज़ा (1927–1992) आधुनिक हिंदी-उर्दू साहित्य के
महत्वपूर्ण लेखक थे। उनका लेखन गंगा-जमुनी संस्कृति, साम्प्रदायिकता, गाँव,
विभा...








