ये टीम अन्ना तो हाथ धोकर भ्रष्टाचार के पीछे पड़ गयी है. लगता है कि इसका नामो-निशान ही मिटाकर दम लेगी. कोई उन्हें समझाए कि भ्रष्टाचार हर किसी के वश की बात नहीं है. यह भी एक कला है जिसे लंबी साधना के बाद हासिल किया जाता है. कुछ लोगों ने तो अपना पूरा जीवन ही इसकी साधना में होम कर दिया है. अब जीवन के इस मुकाम पर आकर वे इसे छोड़ दें...यह उचित है..?
हाड़ोती रचनाकार परिचय कोश 87. डॉ.अपर्णा पांडेय, कोटा
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हाड़ोती रचनाकार परिचय कोश
87. डॉ.अपर्णा पांडेय, कोटा
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रचनाकार 30 मार्च तक व्हाट्सअप न. 9413350242 पर अपना परिचय भेजे..
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