Saturday, December 31, 2011

"गुर्जरों का सम्पूर्ण इतिहास" - चौ. खुर्शीद भाटी जी

Sheel Gurjar

"गुर्जरों का सम्पूर्ण इतिहास" लेखक चौ. खुर्शीद भाटी जी

by Sheel Gurjar on Saturday, December 31, 2011 at 5:43pm on Facebook
मित्रों, मै स्वयं को अनुग्रहित, धन्य और खुशकिस्मत महसूस कर रहा हूँ क्योंकि कल मुझे चौ. खुर्शीद भाटी जी द्वारा गुर्जर इतिहास एवं संस्कृती पर लिखी गयी एक सम्पूर्ण पुस्तक "गुर्जरों का सम्पूर्ण इतिहास" की एक complimentary कॉपी मिली. 
मै इस स्नेहिल अनुकम्पा के लिए भाई राजबीर सिंह जी (एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट), भाई मनोज चंदीला जी और चौ. खुर्शीद भाटी जी का अपने हृदय की गहराइयों से धन्यवाद करना चाहता हूँ क्योंकि आपने कष्ट किया, व्यक्तिगत रूप से आप मेरे ऑफिस आये और इस बेशकीमती पुस्तक की प्रति मुझे भेंट की. 
यह पुस्तक गुर्जरों पर लिखी किसी अन्य पुस्तक की तरह नहीं है बल्कि अपने आप में एक सम्पूर्ण ग्रन्थ है...एक encyclopedia है. इसमें 874 प्रष्ठ हैं और निम्नलिखित विषयों पर बहुत ही विस्तार में लिखा गया है:
  1. गुर्जरों की उत्पत्ति एवं विस्तार 
  2. गुर्जरों का प्राचीन एवं मध्यकालीन इतिहास
  3. गुर्जरों का आधुनिक इतिहास
  4. गुर्जर महिलाओं का धर्म और समाज में योगदान
  5. गुर्जरों के आराध्य अवतार भगवान् श्री देवनारायण जी महाराज
  6. भगवान् कारस देव जी
  7. हिन्दू धर्म में गुर्जर अवतार एवं संत
  8. मुस्लिम धर्म में गुर्जर औलिया एवं सूफी 
  9. सिख व जैन धर्म में गुर्जर गुरु, संत एवं मुनि
  10. गुर्जर संस्कृती
  11. गुर्जरों की वर्तमान दशा एवं भावी दिशा
इसके अलावा गुर्जरी भाषा, गुर्जर चित्रकला, गुर्जर वास्तुकला, गुर्जरी राग, गुर्जरी गहना, गुर्जरी पहनावा, गुर्जरों के त्यौहार, गुर्जरों के गोत्र, गुर्जर रियासतें, पुरुस्कारों से विभूषित होने वाले गुर्जर, गुर्जर संस्कृती के प्रतीक मंदिर, गुर्जर समाज की पत्र-पत्रिकाएं, गुर्जर रेजिमेंट की घोषणा जैसे अन्य कई विषयों पर भी गहन विवेचना की गयी है. 
इस पुस्तक पर पहली नज़र डालते ही आप को यह स्पष्ट आभास हो जायेगा कि इसके लेखन में चौ. खुर्शीद भाटी जी ने कितनी मेहनत की है. उनकी इस मेहनत और लगन का ही नतीजा है जो हमारे समाज को अपने आप को पूरी तरह से जानने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है.
मै आप सभी से विनम्र निवेदन करूँगा कि आप इस महा पुस्तक की कम से कम एक प्रति अवश्य मंगवाएं. आप चौ. खुर्शीद भाटी जी से उनके निवास/कार्यालय - गुर्जर भवन, कोटला, पटपडगंज, दिल्ली 110091 पर संपर्क कर सकते हैं या उनके मोबाइल न. 9990865810 पर भी संपर्क कर सकते हैं.
धन्यवाद .
पुस्तक के प्रचार हेतु शील कुमार जी से साभार

मालिक आप सबको शांति के ख़ज़ाने से भर दे Happy 2012

वर्ष 2011 बस अब जा ही चुका है और वर्ष 2012 आपके सामने है।
हम आपके लिए शांति की कामना करते हैं।
मालिक आप सबको शांति के ख़ज़ाने से भर दे।
मालिक आपको ऐसी शांति दे,
जो सदा आपके साथ बनी रहे।
वर्ष 2012 आपके लिए एक अवसर है, शांति पाने का।

नए साल के मुबारक मौक़े पर हमारी तरफ़ आपके लिए एक अमूल्य भेंट है,
जो शांति को तुरंत उपलब्ध कराती है।

विभिन्‍न प्रकार की नमाज और उन्हें पढने का तरीका namaz ka tariqa


लाखों हिन्‍दी जानने वाले हमारे भाईयों-बहनों को अरबी न समझने के कारण नमाज़
पढने में दिक्‍कत होती है, उनकी परेशानी को देखते हुये, पेश है ऐसी किताब जो नमाज विषय पर हिन्‍दी में सभी जानकारी देती है .

Friday, December 30, 2011

पुनर्जन्म और आवागमन में अंतर

मोक्ष के लिए आपको पुनर्जन्म और आवागमन में अंतर जानना होगा Salvation

साधना वैद जी की रचना 'मोक्ष' देखिये 'वेद कुर'आन' ब्लॉग पर 
और हमारा विश्लेषण भी जो देता है मुक्ति बोध , तुरंत. 
वह ईश्वर हमसे प्रेम करता है। इसीलिए उसने हमें निष्पाप पैदा किया है। बच्चा हरेक मासूम है ,  पिछले पापों का कोई इतिहास किसी का भी नहीं है .
उसने हमें किन्हीं पिछले जन्मों का दंड भुगतने के लिए पैदा नहीं किया है .
पुनर्जन्म और आवागमन में अंतर यह है कि
पुनर्जन्म परलोक में प्रलय के बाद होता है, इसी दुनिया में नहीं।
पुनर्जन्म दो शब्दों का योग है
पुनः और जन्म
जिसका अर्थ है दोबारा जन्म
दोबारा जन्म की बात हरेक धर्म-मत में मौजूद है।
स्वर्ग-नरक की बात भी हरेक धर्म-मत में मौजूद है।
इसी संसार में बार बार जन्म लेना आवागमन कहलाता है.
पुनर्जन्म एक हक़ीक़त है जिसकी पुष्टि सारी दुनिया करती है और आवागमन एक कल्पना है जिसके बारे में उसे मानने वाले तक एकमत नहीं हैं। कोई कहता है कि मनुष्य की आत्मा पशु और वनस्पति दोनों में जाती है और कोई कहता है कि नहीं केवल मुनष्य योनि में ही जाती है औ कोई कहता है कि मनुष्य की आत्मा मानव योनिऔर पशु योनि दोनों में जाती है . आवागमन में विश्वास रखने वाले कुछ ऐसे भी हैं जो कहते हैं कि आत्मा का वुजूद ही नहीं होता . गर्ज़ यह कि हरेक अपनी अटकल से बोल रहा है .
84 लाख योनियों में जन्म-मरण के चक्र से छुटकारे को मोक्ष कहा जाता है।
ईश्वर ने यह चक्र बनाया ही नहीं है, सो मोक्ष तो वह दे चुका है,
बस आपको इसका बोध हो जाए।

खूब रहा मुआ स्वांग

अन्ना-आंदोलन क्या सत्ता की राजनीति में किसी ताकत के साथ बँधा है? 
कांग्रेस के कुछ नेताओं का आरोप है कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ अन्ना-मंडली का गठजोड़ है। यह है या नहीं इसे साबित करना खासा मुश्किल काम है, खासतौर से तब जब अन्ना-मंडली खुद इससे इनकार करती है। तथ्यों के सहारे अनुमान लगाया जा सकता है। पर सवाल यह है ही नहीं। सवाल यह है कि क्या अन्ना-आंदोलन या अन्ना टाइप आंदोलन का वक्त गया? क्या मुम्बई को ‘फ्लॉप शो’ के बाद कहानी खत्म? ऐसा सम्भव नहीं। अन्ना हों या न हों, आने वाले वक्त में जनता का दबाव और बढ़ेगा। हमारी राजनीति अभी तक खामोश प्रजा की आदी रही है। प्रजा जो फॉलोवर होती है। जातीय और धार्मिक आधार पर राजनीति करने वाली ताकतें अपने सॉलिड बेस के सहारे खड़ी रहना चाहती हैं। पर यह लम्बा चलने वाला नहीं है। नए समय के फॉलोवर सवाल भी करेंगे।

सन 2011 के साल की उपलब्धि है ‘राष्ट्रीय मंतव्य’(सेंस ऑफ नेशन) का प्रकटन। देश लोकतांत्रिक संस्थाओं का विकास और विस्तार चाहता है। लम्बे समय से वह अपने नेताओं के भाषण सुनता रहा है। अब वह खुद भी कुछ कहना चाहता है। ज़रूरत है उन संस्थाओं की जिनके मार्फत देश कुछ कहे। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने एक नया शब्द दिया है ‘ब्रेक’। इंतजार करें ब्रेक के बाद होता क्या है। जनवाणी में प्रकाशित
                                                            हिन्दू में केशव का कार्टून
पूरा लेख इस लिंक पर देखें 

Wednesday, December 28, 2011

आप मुझे "बकवास" शब्द की परिभाषा बताएं ?

एग्रीगेटर, Hamarivani.com के माध्यम से:

  • 6 व्यक्तियों को यह पसंद है.
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    • रमेश कुमार सिरफिरा ‎@दिव्या श्रीवास्तव जी, आप खुद इसका कितना पालन करती है ? आप एक बुध्दिजीवी वर्ग से आती है यानि आप एक डाक्टर है. अपनी असभ्य भाषा खुद देखें. दिव्या श्रीवास्तव जी, लगता है आप हमसे नाराज है. जो देशहित और समाज हित के हमारे लिंकों बार-बार हटा देती हैं. क्या आप स्वयं भारत देश के प्रति ईमानदार है ? क्या आप स्वयं लोगों के विचारों की अभिव्यक्ति का गला नहीं घोट रही है ? हमारे लिंकों में ऐसा क्या था, जो आपको आपत्तिजनक लगा ? मुझे आपका जवाब जरुर चाहिए. पहले खुद सुधारों, फिर दूसरों को सुधारने का प्रयास करो. यह मेरा प्रयास रहता है. आपने पहले भी जवाब देने की नैतिकता का पालन नहीं किया था. मेरे पास पुख्ता सबूत है या जो आपकी तारीफ करें या चापलूसी करें. उसको ही जवाब देती हैं. नैतिकता में गिरावट अच्छी नहीं होती हैं. अपना ध्यान रखें. आप कर सकें तो हमारी खूब अपनी पोस्ट में और फेसबुक पर आलोचना करना. मगर उचित तर्क-वितर्क होने चाहिए और क्रोध में आकर दोस्ती भी आप खत्म करना चाहें तो कर सकती हैं. हम कभी किसी से मनभेद नहीं रखते लेकिन अनेकों से मतभेद है.
      Divya Srivastava 7 घंटे पहले Divya Srivastava- tumhari bakwaas jhel li....unfriend bhi kar diya....Good Bye !

      लगभग एक घंटा पहले · · 1

    • रमेश कुमार सिरफिरा आपके कुछ ही महीनों में हमारे प्रति कैसे विचार बदल गए सनद है आपको देखें-रमेश जी , अत्यंत शोधपरक आलेख है। गहन विवेचना की है आपने कानून की , उसमें त्रुटियों की एवं सुधार की।आपके विचारों से सहमत हूँ । सदियों पूर्व के नियम जो चले आ रहे हैं वे तेज़ी से बदलती परिस्थियों और समय के अनुकूल नहीं हैं। इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार की ज़रुरत है और सरकार के द्वारा सार्थक बदलावों की । . पति द्वारा क्रूरता की धारा 498A में संशोधन हेतु सुझाव पर
      ZEAL 5/16/11 को

      लगभग एक घंटा पहले ·

    • रमेश कुमार सिरफिरा आज हमारी बातें बकवास हो गयी कल तक अच्छी थी देखें-आपने अपने नाम के आगे 'सिरफिरा' क्यूँ लिखा है ? आपका लेखन तो अत्यंत गहन विश्लेषणात्मक है। आपकी ऊर्जा एवं चिंतन से प्रभावित हूँ। . पति द्वारा क्रूरता की धारा 498A में संशोधन हेतु सुझाव पर, ZEAL -5/16/11 को
      लगभग एक घंटा पहले ·

    • रमेश कुमार सिरफिरा डॉ.दिव्या श्रीवास्तव जी, मुझे नहीं मालूम आपकी लेखनी के किस प्रशंसक ने आपकी उपरोक्त पोस्ट को इस लिंक http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_20.html पर चार चाँद लगाकर बहुत खूबसूरत बना दिया है. आप एक बार वहाँ जरुर जाकर आये. यहाँ आपको सिर्फ सूचित कर रहा हूँ. आपसे अपने हर ब्लॉग की हर पोस्ट पर टिप्पणी नहीं मांग रहा हूँ. मुझे तो अब कोई भीख भी नहीं देता है. फिर टिप्पणी(विचारधारा) क्यों दें या देंगा. पढ़े-लिखों की दुनियाँ में इस अनपढ़ व गंवार सिरफिरे की विसात कहाँ? इस पागल का कोई दिन-मान नहीं है.क्या पता किसको काटने दौड़ पड़ें?
      जरुर देखे."प्रिंट व इलेक्ट्रोनिक्स मीडिया को आईना दिखाती एक पोस्ट"

      लगभग एक घंटा पहले · ·

    • रमेश कुमार सिरफिरा डॉ.दिव्या श्रीवास्तव जी,क्या यह शब्द आपके नहीं थें हमारे बारें में-ZEAL said....Ramesh ji , Reached here by the link you have provided on my post . Thanks. You are indeed a fearless writer and brutally honest as well. Best wishes ! रमेश जी, लिंक तुम मेरी पोस्ट पर उपलब्ध कराई है द्वारा यहाँ पहुँच गया है. धन्यवाद. आप वास्तव में एक निडर लेखक और क्रूरता के रूप में अच्छी तरह से ईमानदार हैं. शुभकामनाएं.
      लगभग एक घंटा पहले ·

    • रमेश कुमार सिरफिरा डॉ.दिव्या श्रीवास्तव जी, आज क्या मैं ईमानदार नहीं रहा ? आप अपने ब्लॉग पर तो मेरी टिप्पणी और प्रश्न हटा चुकी है यहाँ से हटाए. आपको कारण बताना चाहिए था कि मेरे लिंक में क्या कमी थी.
      लगभग एक घंटा पहले ·

    • रमेश कुमार सिरफिरा डॉ.दिव्या श्रीवास्तव जी, अगर आपने यह लिखा था कि "फेसबुकिया नागरिक चोरी भी करते हैं ? मेरी पिछली पोस्टों को "सुमित फंडे " तथा कुछ अन्यों ने चोरी से कट-पेस्ट कर अपनी वाल पर लगा ली! भ्रष्टाचार फेसबुक पर भी ? यदि पोस्ट पसंद आये तो शेयर करनी चाहिए, चोरी नहीं!--जनलोकपाल लाओ--भ्रष्ट चोर हटाओ--देश बचाओ !" और "आजाद भारत में हर व्यक्ति स्वतंत्र है अपनी बात कहने के लिए ! यदि पसंद ना आये तो व्यक्तिगत आक्षेप नहीं करना चाहिए" लिख रही है. तब हमारे इस लिंक में क्या कमी थी देखें:-http://sirfiraa.blogspot.com/2011/12/blog-post_11.html

      55 मिनट पहले · ·

    • रमेश कुमार सिरफिरा डॉ.दिव्या श्रीवास्तव जी, अगर आपने यह लिखा था कि-बुद्धिजीवियों को आलस्य त्याग देना चाहिए! यदि सारे बुद्धिजीवी अपने मतदान का प्रयोग करें तो इस "चौपट राजा" को गिराया जा सकता है और अपने देश को "अंधेर नगरी" से बनने से बचाया जा सकता है! नादान और मासूम जनता को छोटे-छोटे प्रलोभनों द्वारा आसानी से खरीदा जा सकता है, लेकिन बुद्धिजीवियों को फुसलाना आसान नहीं है ! तख्ता पलटो ! देश बचाओ ! --- वन्देमातरम ! और "माटी का कर्ज उतार दो , अपने देश के साथ प्रेम करके !" तब हमारे इस लिंक में क्या कमी थीं देखें:-http://rksirfiraa.blogspot.com/2011/12/blog-post_24.html

      50 मिनट पहले · ·

    • रमेश कुमार सिरफिरा डॉ.दिव्या श्रीवास्तव जी, क्या यह आपकी कथनी और करनी हैं ? आप इससे ज्यादा कुछ कर भी नहीं सकती थीं. आप किसी की आलोचना कर सकती हैं, मगर सहन नहीं कर सकती. आप कहना ही जानती है कि "माटी का कर्ज उतार दो , अपने देश के साथ प्रेम करके !" आपकी उचित टिप्पणी पर उचित लिंक दिए थें. आज इतना पता चल गया कि आप चापलूस लोगों को ही पसंद करती हैं.
      48 मिनट पहले ·

    • रमेश कुमार सिरफिरा हम अपने दोस्तों को यह कहते हैं कि "दोस्तों, एक बात कहे. जब कभी आपको समय मिले तो हमारी पूरी "वाल" और ब्लॉग भी पढ़ें. आप हमारी प्रशंसा न करें मगर पढ़कर कुछ भी बुरा लगे तब आप स्वस्थ मानसिकता से हमारी निष्पक्ष होकर उचित तर्क-वितर्क करते हुए सभ्य भाषा में "आलोचना" जरुर करें. जिससे हमें लगे कि आप हमारे असली शुभचिंतक है. क्या आप बनना चाहोंगे मेरे शुभचिंतक ? यदि हाँ, तब अपनी यहाँ हाजिरी जरुर लगाओ.
      47 मिनट पहले ·

    • रमेश कुमार सिरफिरा डॉ.दिव्या श्रीवास्तव जी, क्या आप मुझे "बकवास" शब्द की परिभाषा बताएंगी, क्योंकि आप स्वयं एक बुध्दिजीवी वर्ग से है ?
      45 मिनट पहले ·

    • रमेश कुमार सिरफिरा मैं आदरणीय हमारी वाणी के संचालक से यह जानना चाहता हूँ कि आप भी हमारी उचित तर्कों के साथ की टिप्पणी को हटाएंगे. जैसा- काफी समय पहले भाई अनवर जमाल खान की टिप्पणियाँ और पोस्टों को हटा दिया गया था यानि विचारों की अभिव्यक्ति का गला घोटा जायेगा.
      40 मिनट पहले ·

Tuesday, December 27, 2011

ब्लॉग पहेली -७

क्या उसूलों पर चलने वालों का कोई घर नहीं होता है ?...


दोस्तों, क्या आप इस विचार से सहमत है कि-अपने उसूलों(सिद्धांतों) पर चलने वालों का कोई घर* नहीं होता है, उनके तो मंदिर बनाये जाते हैं. क्या देश व समाज और परिवार के प्रति ईमानदारी का उसूल एक बेमानी-सी एक वस्तु है ?
*आवश्कता से अधिक धन-दौलत का अपार, भोगविलास की वस्तुओं का जमावड़ा, वैसे आवश्कता हमारे खुद द्वारा बड़ी बनाई जाती हैं. जिसके कारण धोखा, लालच और मोह जैसी प्रवृतियाँ जन्म लेती हैं. इस कारण से हम अनैतिक कार्यों में लीन रहते हैं. मेरे विचार में अगर जिसके पास "संतोष' धन है, उसके लिए आवश्कता से अधिक भोग-विलास की यह भौतिकी वस्तुएं बेमानी है. उसके लिए सारा देश ही उसका अपना घर है.
दोस्तों, अपनी पत्रकारिता और लेखन के प्रति कुछ शब्दों में अपनी बात कहकर रोकता हूँ. मैं पहले प्रिंट मीडिया में भी कहता आया हूँ और इन्टरनेट जगत पर कह रहा हूँ कि-मुझे मरना मंजूर है,बिकना मंजूर नहीं.जो मुझे खरीद सकें, वो चांदी के कागज अब तक बनें नहीं.
दोस्तों-गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे. 
पूरा लेख यहाँ पर क्लिक करके पढ़ें:क्या उसूलों पर चलने वालों का कोई घर नहीं होता है ?

Saturday, December 24, 2011

एक पुकार हिंदी ब्लॉगर्स के लिए Unity





एक पुकार हिंदी ब्लॉगर्स के लिए
ब्लॉगिंग के मक़सद, उसकी दशा और दिशा को लेकर चिंतन करने वाले लेखों में नवीनतम लेख है आदरणीय महेंद्र श्रीवास्तव जी का, जो कि दिल्ली में एक वरिष्ठ ब्लॉगर हैं लेकिन सामाजिक सरोकारों को लेकर उनके अंदर एक छटपटाहट भी है। जिसका ज़मीर ज़िंदा है, जिसकी चेतना जागृत है और जो एक सोचने वाला दिमाग़ रखता है। उसके अंदर यह छटपटाहट होती ही है।
उनकी पोस्ट पढ़कर अहसास होता है कि शर्म-ग़ैरत और इंसानियत अभी ज़िंदा है। उनकी पोस्ट यह है- 

 हां ब्लागर होने पर मैं हूं शर्मिंदा ...


भाई महेंद्र श्रीवास्तव जी ! आपने इस अगुवाई के लायक़ ब्लॉगर्स की सूची में हमारा नाम शामिल किया, इसके लिए हम आपके शुक्रगुज़ार हैं।
हम अपने दिल पर हाथ रखकर कह सकते हैं कि जो काम हम यहां करने आए थे वही कर रहे हैं।
पत्रकारिता की शुरूआत एक मिशन के तौर पर हुई थी लेकिन बाद में यह मिशन के बजाय प्रोफ़ेशन बन गया। आप इस प्रोफ़ेशन में हैं और इसकी हक़ीक़त को रोज़ देखते ही हैं। इसके बावजूद कुछ साप्ताहिक-मासिक पत्र पत्रिकाएं आज भी मिशन की भावना के साथ मौजूद हैं, चाहे उनकी रीडरशिप कम और आर्थिक स्थिति कमज़ोर ही क्यों न हो ।
हिंदी ब्लॉगिंग में भी ऐसे ब्लॉग मौजूद हैं जो मिशन की भावना से काम कर रहे हैं।

लोगों के बिखराव का एक लाभ यह होता है कि सच को सामने आने से रोकना असंभव हो जाता है।
यही बिखराव ब्लॉगिंग की ताक़त है।
जब भी ब्लॉगर्स एक होंगे तो उनकी नकेल किसी एक के हाथ में या एक ग्रुप के हाथ में आ जाएगी और सत्ता द्वारा उसे ख़रीद लेना ठीक वैसे ही आसान हो जाएगा जैसे कि अख़बार और टी. वी. चैनलों के संपादकों को ख़रीद लेना। एकता में जितनी ताक़त है, यह उतनी ही बड़ी कमज़ोरी भी बन जाती है।
इस समय यह संभव नहीं है कि किसी एक ब्लॉगर या किसी एक ग्रुप से बात करके कोई ‘डील‘ की जा सके।
आस्तिक-नास्तिक, वामपंथी-दक्षिणपंथी, हिंदू-मुस्लिम, सवर्ण-दलित, दिल्ली-बिहारी, अमीर-ग़रीब, औरत-मर्द और इसी तरह की बहुत सी बुनियादों पर लोग बंटे-छंटे और जमे हुए हैं।
इस बंटवारे के बावजूद सामाजिक सुरक्षा, रोज़गार, शिक्षा, चिकित्सा, भ्रूण रक्षा, वृद्ध सेवा, भ्रष्टाचार उन्मूलन और महंगाई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर सभी लोग अपना रचनात्मक सहयोग देने के लिए एकमत हो सकते हैं।
‘हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल‘ की ब्लॉगर्स मीट वीकली की शुरूआत इसी मक़सद को लेकर की गई थी जिसे गुटबंदी के कारण अपेक्षित सहयोग नहीं मिला और वह इस लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाई।
हम यहां उन भ्रष्टाचारी राजनीतिक दलों से एक सीख ले सकते हैं जो कि अपनी विचारधारा में आकाश-पाताल का अंतर होने के बावजूद सत्ता का सुख लेने के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम बना लेते हैं और कामयाबी के साथ जनता पर राज करते हैं पूरे 5 वर्ष।
जब बेईमान लोग सत्ता के लिए एक हो सकते हैं तो क्या ईमानदार ब्लॉगर सत्य के लिए एक नहीं हो सकते ?

आपने अच्छा मुद्दा उठाया है।
जितने भी मुद्दों पर एकता क़ायम हो सके, अच्छा है वर्ना तो सारी ऊर्जा आपस के टकराव में ही निकल जाएगी और जीनियस लोगों का यह मंच जनसामान्य को उल्लेखनीय कुछ भी न दे पाएगा।

धन्यवाद !

सबसे भारी व्यक्ति , पहली कार और इंदिरा की शादी का फ़ोटो

दुनिया का सबसे भारी व्यक्ति कौन है? उसका वजन कितना है? 


मैक्सिको के मैनुअल उरीबे को दुनिया का सबसे वजनदार व्यक्ति माना जा सकता है। इनका वजन गिनीज बुक के अनुसार 597 किलोग्राम तक हो गया था। 1965 में जन्मे उरीबे ने बाद में अपना वजन कम कर लिया, पर वे आज भी दुनिया के सबसे वजनी व्यक्ति हैं। यों रिकॉर्ड बुक में जॉन ब्राउनर मिनक का नाम दुनिया के सबसे वजनी व्यक्ति के रूप में दर्ज है, जिनका अधिकतम वजन 635 किलो था। 1941 में जन्मे जॉन का निधन 1983 में हो गया था।

चरित्र अभिनेता एके हंगल का जन्म कब और कहाँ हुआ था?-राजीव ग्रोवर और कुक्की राजा, मोतीनगर दिल्ली

अवतार कृष्ण हंगल का जन्म सन 1917 में सियालकोट में हुआ था।

कहाँ और कब पहली कार बनी?-रैना, गुड़गाँव 

                                                   
हालांकि शुरू में भाप से चलने वाली गाड़ियाँ बनी थीं, पर इंटरनल कॉम्बुशन इंजन से चलने वाली पहली कार सन 1870 में ऑस्ट्रिया के विएना शहर में सिग्फ्राइड मार्कस ने तैयार की। वह गैसोलीन से चलती थी। इसे फर्स्ट मार्कस कार कहते हैं। मार्कस ने ही 1888 में सेकंड मार्कस कार तैयार की जिसमें कई तरह के सुधार किए गए थे। इस बीच जर्मनी के मैनहाइम में कार्ल बेंज ने सन 1885 में तैयार की।

भारत में कुल कितने गाँव हैं?-कमल टेलर दिल्ली

सन 2011 की जनगणना के अनुसार हमारे देश में गाँवों की संख्या 6,38,000 है।

इंदिरा गांधी की शादी कब हुई थी? शानू वैलकम, सीलमपुर दिल्ली  

                               

श्रीमती इंदिरा गांधी और फिरोज़ गांधी का विवाह 26 मार्च 1942 को इलाहाबाद में हुआ था। 
Go to 
http://gyaankosh.blogspot.com/2011/12/597-1965-635-1941-1983-1917-1870-1888.html

Friday, December 23, 2011

Hindu muslim unity is our strenth .

Amazing .
We will fight with unity . Hindu muslim unity is our strenth . See this video against terrorism and corruptions of all types .
http://www.youtube.com/watch?feature=endscreen&NR=1&v=uBLctMHjhWo

मित्रों के नाम के एक संदेश


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और (जिनपर कार्य चल रहा है,अगले दो महीने में पूरा होने की संभवाना है>>>

शकुन्तला महिला कल्याण कोष http://shakuntala-mkk.blogspot.com 

मानव सेवा एकता मंच http://manawsewa.blogspot.com एवं चुनाव चिन्ह पर आधरित

कैमरा-तीसरी आँख http://kaimra.blogspot.com
कैमरा-तीसरी आँख वाला ब्लॉग एक-आध महीना लेट हो सकता लेकिन उस पर अपने लड़े दोनों चुनाव की प्रक्रिया और अनुभव डालने का प्रयास कर रहा हूँ.जिससे मार्च-अप्रैल  2012 में दिल्ली नगर निगम के चुनाव होने है और मेरी दिली इच्छा है कि इस बार पहले ज्यादा निर्दलीय लोगों को चुनाव में खड़ा करने के लिए प्रेरित कर सकूँ. पिछली बार 11 लोगों की मदद की थी. जब आम-आदमी और अच्छे लोग राजनीती में नहीं आयेंगे. तब तक देश के बारें में अच्छा सोचना बेकार है. मेरे ब्लॉग से अगर लोगों को जानकारी मिल गई. तब शायद कुछ अन्य भी हौंसला दिखा सकें. मेरे अनुभव और संपत्ति की जानकारी देने से लोगों में एक नया संदेश भी जाएगा
       

‘ब्लॉग की ख़बरें‘

1- क्या है ब्लॉगर्स मीट वीकली ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_3391.html

2- किसने की हैं कौन करेगा उनसे मोहब्बत हम से ज़्यादा ?
http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

3- क्या है प्यार का आवश्यक उपकरण ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

4- एक दूसरे के अपराध क्षमा करो
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

5- इंसान का परिचय Introduction
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/introduction.html

6- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

8- बेवफा छोड़ के जाता है चला जा
http://kunwarkusumesh.blogspot.com/2011/07/blog-post_11.html#comments

9- इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक
http://www.hamarianjuman.com/2011/07/blog-post.html

10- दुआ की ताक़त The spiritual power
http://ruhani-amaliyat.blogspot.com/2011/01/spiritual-power.html

11- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

12- शकुन्तला प्रेस कार्यालय के बाहर लगा एक फ्लेक्स बोर्ड-4
http://shakuntalapress.blogspot.com/

13- वाह री, भारत सरकार, क्या खूब कहा
http://bhadas.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

14- वैश्विक हुआ फिरंगी संस्कृति का रोग ! (HIV Test ...)
http://sb.samwaad.com/2011/07/blog-post_16.html

15- अमीर मंदिर गरीब देश
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

16- मोबाइल : प्यार का आवश्यक उपकरण Mobile
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/mobile.html

17- आपकी तस्वीर कहीं पॉर्न वेबसाइट पे तो नहीं है?
http://bezaban.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

18- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम अब तक लागू नहीं
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

19- दुनिया में सबसे ज्यादा शादियाँ करने वाला कौन है?
इसका श्रेय भारत के ज़ियोना चाना को जाता है। मिजोरम के निवासी 64 वर्षीय जियोना चाना का परिवार 180 सदस्यों का है। उन्होंने 39 शादियाँ की हैं। इनके 94 बच्चे हैं, 14 पुत्रवधुएं और 33 नाती हैं। जियोना के पिता ने 50 शादियाँ की थीं। उसके घर में 100 से ज्यादा कमरे है और हर रोज भोजन में 30 मुर्गियाँ खर्च होती हैं।
http://gyaankosh.blogspot.com/2011/07/blog-post_14.html

20 - ब्लॉगर्स मीट अब ब्लॉग पर आयोजित हुआ करेगी और वह भी वीकली Bloggers' Meet Weekly
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/bloggers-meet-weekly.html

21- इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
http://www.sahityapremisangh.com/2011/07/blog-post_3678.html

22- इसलाम में आर्थिक व्यवस्था के मार्गदर्शक सिद्धांत
http://islamdharma.blogspot.com/2012/07/islamic-economics.html

23- मेरी बिटिया सदफ स्कूल क्लास प्रतिनिधि का चुनाव जीती
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_2208.html

24- कुरआन का चमत्कार

25- ब्रह्मा अब्राहम इब्राहीम एक हैं?

26- कमबख़्तो ! सीता माता को इल्ज़ाम न दो Greatness of Sita Mata

27- राम को इल्ज़ाम न दो Part 1

28- लक्ष्मण को इल्ज़ाम न दो

29- हरेक समस्या का अंत, तुरंत

30-
अपने पड़ोसी को तकलीफ़ न दो

साहित्य की ताज़ा जानकारी

1- युद्ध -लुईगी पिरांदेलो (मां-बेटे और बाप के ज़बर्दस्त तूफ़ानी जज़्बात का अनोखा बयान)
http://pyarimaan.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

2- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

3- आतंकवादी कौन और इल्ज़ाम किस पर ? Taliban
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/taliban.html

4- तनाव दूर करने की बजाय बढ़ाती है शराब
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

5- जानिए श्री कृष्ण जी के धर्म को अपने बुद्धि-विवेक से Krishna consciousness
http://vedquran.blogspot.com/2011/07/krishna-consciousness.html

6- समलैंगिकता और बलात्कार की घटनाएं क्यों अंजाम देते हैं जवान ? Rape
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/rape.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

8- ख़ून बहाना जायज़ ही नहीं है किसी मुसलमान के लिए No Voilence
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/no-voilence.html

9- धर्म को उसके लक्षणों से पहचान कर अपनाइये कल्याण के लिए
http://charchashalimanch.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

10- बाइबिल के रहस्य- क्षमा कीजिए शांति पाइए
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

11- विश्व शांति और मानव एकता के लिए हज़रत अली की ज़िंदगी सचमुच एक आदर्श है
http://dharmiksahity.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

12- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

13- ‘इस्लामी आतंकवाद‘ एक ग़लत शब्द है Terrorism or Peace, What is Islam
http://commentsgarden.blogspot.com/2011/07/terrorism-or-peace-what-is-islam.html

14- The real mission of Christ ईसा मसीह का मिशन क्या था ? और उसे किसने आकर पूरा किया ? - Anwer Jamal
http://kuranved.blogspot.com/2010/10/real-mission-of-christ-anwer-jamal.html

15- अल्लाह के विशेष गुण जो किसी सृष्टि में नहीं है.
http://quranse.blogspot.com/2011/06/blog-post_12.html

16- लघु नज्में ... ड़ा श्याम गुप्त...
http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

17- आपको कौन लिंक कर रहा है ?, जानने के तरीके यह हैं
http://techaggregator.blogspot.com/

18- आदम-मनु हैं एक, बाप अपना भी कह ले -रविकर फैजाबादी

19-मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत

20- मौत कहते हैं जिसे वो ज़िन्दगी का होश है Death is life

21- कल रात उसने सारे ख़तों को जला दिया -ग़ज़ल Gazal

22- मोम का सा मिज़ाज है मेरा / मुझ पे इल्ज़ाम है कि पत्थर हूँ -'Anwer'

23- दिल तो है लँगूर का

24- लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी - Allama Iqbal

25- विवाद -एक लघुकथा डा. अनवर जमाल की क़लम से Dispute (Short story)

26- शीशा हमें तो आपको पत्थर कहा गया (ग़ज़ल)