इसे अमानवीय लापरवाही के अलावा क्या कहेंगे कि कोयला खदानों के अंदर लगी भूमिगत आग रेलवे लाइन तक पहुँच चुकी है लेकिन प्रबंधन को इससे कोई खतरा नहीं महसूस हो रहा है. किसी भी दिन यहाँ कोई बड़ा हादसा हो जाये तो इसकी जिम्म्मेवारी आखिर कौन लेगा. पढ़िए पूरी रिपोर्ट.
मगर ये कुफ़्फ़ार (ख़्वाहमख़्वाह) तकब्बुर और अदावत में (पड़े अंधे हो रहें
हैं)
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38 सूरए (साद)
सूरए (साद)
सूरए साद मक्का में नाजि़ल हुआ और इसकी अठ्ठासी (88) आयते हैं
खु़दा के नाम से शुरू करता हूँ जो बड़ा मेहरबान निहायत रहमवाला है
सआ...

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