इसे अमानवीय लापरवाही के अलावा क्या कहेंगे कि कोयला खदानों के अंदर लगी भूमिगत आग रेलवे लाइन तक पहुँच चुकी है लेकिन प्रबंधन को इससे कोई खतरा नहीं महसूस हो रहा है. किसी भी दिन यहाँ कोई बड़ा हादसा हो जाये तो इसकी जिम्म्मेवारी आखिर कौन लेगा. पढ़िए पूरी रिपोर्ट.
कोटा शहर में जागरूकता से 12 घंटे में पांच नेत्रदान संपन्न
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कोटा शहर में जागरूकता से 12 घंटे में पांच नेत्रदान संपन्न
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मिलेगी नई रौशनी
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