ये टीम अन्ना तो हाथ धोकर भ्रष्टाचार के पीछे पड़ गयी है. लगता है कि इसका नामो-निशान ही मिटाकर दम लेगी. कोई उन्हें समझाए कि भ्रष्टाचार हर किसी के वश की बात नहीं है. यह भी एक कला है जिसे लंबी साधना के बाद हासिल किया जाता है. कुछ लोगों ने तो अपना पूरा जीवन ही इसकी साधना में होम कर दिया है. अब जीवन के इस मुकाम पर आकर वे इसे छोड़ दें...यह उचित है..?
हिन्दी महोत्सव व्याख्यान : डॉ कमोला
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हिन्दी महोत्सव 2026 अंतरराष्ट्रीय विशेष व्याख्यान रिपोर्ट
Hindi Mahotsav 2026 International Special Lecture Report
उज़्बेकिस्तान में हिन्...

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