एक लम्हा जिंदगी का आते-आते टल गया.
चांद निकला भी नहीं था और सूरज ढल गया.
अब हवा चंदन की खुश्बू की तलब करती रहे
जिसको जलना था यहां पर सादगी से जल गया.
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ग़ज़लगंगा.dg: चांद निकला भी नहीं था और सूरज ढल गया.:
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बुढापे में दो बूंद पोलियों की गुटकी
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बुढापे में दो बूंद पोलियों की गुटकी, बाज़ू पर अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के तहत
इंजेक्शन की सुई से दवा लगवाई, यह सब हज के मुक़द्दस सफर के लिये जरूरी भी है,
अल्ला...
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