यूं तेरी यादों की कश्ती है रवां शाम के बाद.
जैसे वीरान जज़ीरे में धुआं शाम के बाद.
चंद लम्हे जो गुजारे थे तेरे साथ कभी
ढूंढ़ता हूं उन्हीं लम्हों के निशां शाम के बाद.
एक-एक करके हरेक जख्म उभर आता है
दिल के जज़्बात भी होते हैं जवां शाम के बाद.
Read more: http://www.gazalganga.in/2012/11/blog-post_9373.html#ixzz2Db9P0l4m
ग़ज़लगंगा.dg: काटने लगता है अपना ही मकां शाम के बाद:
'via Blog this'
हाड़ोती रचनाकार परिचय कोश 4. महेश पंचोली कवि, कोटा
-
हाड़ोती रचनाकार परिचय कोश
4. महेश पंचोली कवि, कोटा
**********************
महेश पंचोली का जन्म पिता स्व.श्री हरिदत्त पंचोली व्याख्याता एवं माता
माता:स्व....
2 comments:
बहुत बढ़िया ।
भाई देवेन्द्र जी-
त्योहारों के बाद सुन्दर गजल पढने को मिली -
शुभकामनायें-
behatarin.....nwinta liye hue prastuti
Post a Comment