आदरणीय डा. अरविन्द मिश्रा जी का यह कथन हिंदी ब्लॉगर्स के दरम्यान चल रही एक लंबी और आलिमाना बहस का हिस्सा है, जिसे देखा जा सकता है निम्न पोस्ट पर
वो हाज़िर हो
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वो जो हर दीन में आँख मिचौली खेलता है,
उस से कहो के नाज़िल हो,
जिसके नाम से हर गुनाह छुप जाए,
उस से कहो के ज़ाहिर हो।
जब उसका ही नाम उनके लबों पे है,
तो उस...

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