आदरणीय डा. अरविन्द मिश्रा जी का यह कथन हिंदी ब्लॉगर्स के दरम्यान चल रही एक लंबी और आलिमाना बहस का हिस्सा है, जिसे देखा जा सकता है निम्न पोस्ट पर
हिन्दी साहित्य में मिथकों की उपस्थिति का समाजशास्त्रीय और वैज्ञानिक अध्ययन
-
हिन्दी साहित्य में मिथकों की उपस्थिति का समाजशास्त्रीय और वैज्ञानिक अध्ययन
शोध-आलेख
डॉ. मनीष कुमार सी. मिश्रा
एसोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग
के. एम. अग...

0 comments:
Post a Comment