एक लम्हा जिंदगी का आते-आते टल गया.
चांद निकला भी नहीं था और सूरज ढल गया.
अब हवा चंदन की खुश्बू की तलब करती रहे
जिसको जलना था यहां पर सादगी से जल गया.
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ग़ज़लगंगा.dg: चांद निकला भी नहीं था और सूरज ढल गया.:
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मरहूम हाफिज पारू, जो कोटा के मशहूर पहलवान, ओर हर कुश्ती की शान हुआ करते थे,
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मरहूम हाफिज पारू, जो कोटा के मशहूर पहलवान, ओर हर कुश्ती की शान हुआ करते थे,
कोटा की हर कुश्ती में इनके दांव पेंच , इन्हें कुश्ती केसरी, कुश्ती के हीरो
कहा ...






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