एक लम्हा जिंदगी का आते-आते टल गया.
चांद निकला भी नहीं था और सूरज ढल गया.
अब हवा चंदन की खुश्बू की तलब करती रहे
जिसको जलना था यहां पर सादगी से जल गया.
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ग़ज़लगंगा.dg: चांद निकला भी नहीं था और सूरज ढल गया.:
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वो हाज़िर हो
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वो जो हर दीन में आँख मिचौली खेलता है,
उस से कहो के नाज़िल हो,
जिसके नाम से हर गुनाह छुप जाए,
उस से कहो के ज़ाहिर हो।
जब उसका ही नाम उनके लबों पे है,
तो उस...






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