बता रहे हैं जनाब सैयद मुहम्मद मासूम साहब , अपनी ताज़ा पोस्ट में-
समय, स्मृति और मनुष्य की तलाश : ‘अक्टूबर उस साल’ का आलोचनात्मक पुनर्पाठ
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*समय, स्मृति और मनुष्य की तलाश : ‘अक्टूबर उस साल’ का आलोचनात्मक पुनर्पाठ*
समकालीन हिंदी कविता का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष यह है कि उसने जीवन के तथाक...
1 comments:
बहुत सुन्दर...
पधारें "आँसुओं के मोती"
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