बता रहे हैं जनाब सैयद मुहम्मद मासूम साहब , अपनी ताज़ा पोस्ट में-
(ये) वह किताब है। जिस (के किताबे खु़दा होने) में कुछ भी शक नहीं (ये)
परहेज़गारों की रहनुमा है
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सूरए बक़रा (गाय) मदीना में नाजि़ल हुआ और इसमें दो सौ छियासी आयतें और चालीस
रूकू हैं।
ख़ु़दा के नाम से शुरू करता हूँ जो बड़ा मेहरबान और रहम वाला है
अलीफ़...
1 comments:
बहुत सुन्दर...
पधारें "आँसुओं के मोती"
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