Wednesday, August 8, 2012

'विवाह पूर्व यौन सम्बंध की त्रासदी' पर रविकर Best Hindi Comments

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विवाह पूर्व यौन सम्बंध की त्रासदी

रचना ईश्वर ने रची, तन मन मति अति-भिन्न |
प्राकृत के विपरीत गर, करे खिन्न खुद खिन्न |
करे खिन्न खुद खिन्न, व्यवस्था खुद से करता |
करे भरे वह स्वयं, बुढापा बड़ा अखरता  |
नाड़ी में है ताब, आबरू की क्या चिंता |
अंत घड़ी जब पास, शुरू की गलती गिनता ||

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खुदा की इबादत क्यों करना ?

कुछ जुगाड़ कर दो प्रभू, होवे बेडा पार |
नेता से मंत्री बनू, पैदल को दे कार |
पैदल को दे कार, खजाना सदा बढ़ाना |
कर दे मेरा काम, चढ़ावा पूरा माना |
ढकोसले ये छोड़, नित्य आभार प्रगट कर |
पाया प्रभू अपार, स्वार्थ अब छोडो रविकर ||

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भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से

ram ram bhai

ईमानदारी का एफ़ी-डेविट:अन्नापार्टी -रविकर : चर्चा मंच 965


Tuesday, August 7, 2012

Khawaja Qutbuddin Bakhtiar Kaki


ख़्वाजा बख़्तियार काकी र.अ. का जन्म ऊश (अफ़ग़ानिस्तान) में 1173 ई. में हुआ था।...हज़रत ख़्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी र.अ. ने सूफ़ीमत का कोई औपचारिक सिद्धांत तैयार नहीं किया था, फिर भी भारत में सूफीमत पर उनका प्रभाव बहुत है। चिश्ती सिलसिले में उन्होंने विश्व-बंधुत्व और परोपकार के पारंपरिक विचारों का विकास जारी रखा। इसके फलस्वरूप भारत में इस्लाम का एक नया आयाम विकसित होने लगा जो अब तक मौजूद नहीं था। उन्होंने तत्कालीन सरकार के साथ गैर-भागीदारी की नीति अपनाया। उनका मानना था कि शासकों और सरकार के साथ संबंध रखना उनके मन में सांसारिकता के प्रति इच्छाओं को जागृत कर देगा। हालांकि उन्होंने किसी भी राजनीतिक पद धारण करने से मना कर दिया था, फिर भी उनकी ख़ानक़ाह सभी क्षेत्र के लोगों के लिए संगम स्थल बन गई और वहां भारी संख्या में लोग आते रहते थे। वह मजलिस, सभा, का आयोजन करते थे, जहां अपने प्रवचन से लोगों को आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करते थे। आम जनता को निर्देशित उनके उपदेशों में,  त्यागपूर्ण जीवन जीने की सलाह होती थी साथ ही ईश्वर पर पूरा भरोसा रखने के लिए कहा जाता था। वे लोगों को सभी मनुष्यों के साथ समान व्यवहार रखने की सीख देते थे। परिणामकी चिंता किए बिना जरूरतमंद की मदद करने में उनका दृढ़ विश्वास था। जो कुछ उन्हें दान आदि में मिलता, आमतौर पर उसे वे उसी दिन लोगों की भलाई के लिए ख़र्च कर दिया करते थे। वे इस्लामी पैग़म्बर के “अल-फ़क्रो फ़ख़्री” (निर्धनता पर गर्व) के सिद्धांत पर अमल करने वालों में से थे। हज़रत ख्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी र.अ. ने हमेशा यही उपदेश दिया कि ईश्वर प्राप्ति के लिए संयम की बहुत आवश्यकता है। मनुष्य को थोड़ा खाना, थोड़ा सोना, थोड़ा बोलना और सांसारिक धन्धों में थोड़ा ही फंसना चाहिए। जो व्यक्ति इन चार सिद्धांतों को अपना सकेगा वह ईश्वर प्राप्ति के मार्ग पर चलने के योग्य बन सकेगा।
mazaar-of-hazrat-bakhtiyar-homeउनका समाअ के प्रति विशेष झुकाव था। समाअ स्थानीय लोगों के साथ संपर्क का एक उत्तम आधार था और यह दो ​​समुदायों के बीच आपसी संबंधों को मधुर बनाने का उपाय भी बना। उन्होंने ही बाबा फ़रीद, को चिश्तिया-परंपरा में दीक्षित किया था। उन्हें क़ुतुब-उल आफ़ताब, यानी संतों का संत माना जाता है। 15 नवम्बर 1235 ई. को उनकी मृत्यु हो गई। उनकी दरग़ाह दिल्ली के महरौली में स्थित क़ुतुब मीनार के पास है। यह दिल्ली की सबसे पुरानी दरग़ाह है।

क्या होता है बादल फटना ?

बादलों की आकृति, ऊंचाई के आधार पर इन्हें तीन मुख्य वर्गों में बांटा गया है। और इन वर्गो में कुल दस तरह के बादल होते हैं। पहले वर्ग में आते है निम्न मेघ या लो क्लाउड्स।इनकी ऊंचाई ढाई किलोमीटर तक होती है। इनमें एक जैसे दिखने वाले भूरे रंग के स्तरी या स्ट्रेटस बादल, कपास के ढेर जैसे कपासी या क्यूमलस, गरजने वाले काले रंग के कपासी-- वर्षी,(क्यूमलोनिंबस) भूरे काले वर्षा स्तरी  (निम्बोस्ट्रेटस) और भूरे सफेद रंग के स्तरी-कपासी (स्ट्रेटोक्यूमलस) बादल आते हैं। बादलों का दूसरा वर्ग है मध्य मेघ का। इनकी ऊंचाई ढ़ाई से साढे़ चार किलोमीटर तक होती है। इस वर्ग में दो तरह के बादल हैं अल्टोस्ट्रेटस और अल्टोक्यूमलस। तीसरा वर्ग है उच्च मेघों का। इनकी ऊंचाई साढ़े चार किलोमीटर से ज्यादा रहती है। इस वर्ग में सफेद रंग के छोटे-छोटे साइरस बादल, लहरदार साइरोक्यूमलस और पारदर्शक रेशेयुक्त साइरोस्ट्रेटस बादल आते हैं।
बादलों के प्रकार
क्यूमोलोनिंबस बादल 
                            इन बादलों में से कुछ हमारे लिए फायदेमंद बारिश लाते हैं तो कुछ प्राकृतिक विनाश। बादल फटने की घटना के लिए क्यूमोलोनिंबस बादल जिम्मेदार हैं।ये बादल देखने में गोभी की शक्ल  के लगते हैं। ऐसा लगाता है आकाश में कोई बहुत बड़ा गोभी का फूल तैर रहा हो। इनकी लंम्बाई 14 किलोमीटर तक होती है।
            अब आप सोचेंगे कि देखने में इतने सुन्दर बादल कैसे इतनी बारिश एक साथ कर देते हैं। दरअसल जब क्यूमोलोनिंबस बादलों में एकाएक नमी पहुंचनी बन्द हो जाती है या कोई बहुत ठंडी  हवा का झोंका उनमें प्रवेश कर जाता है, तो ये सफेद बादल गहरे काले रंग में बदल जाते हैं। और तेज गरज के साथ उसी जगह के ऊपर अचानक बरस पड़ते हैं। ऐसी बारिश ज्यादातर पहाड़ी इलाकों में ही होती है।क्यूमोलोनिंबस बादलों के बरसने की रफ्तार इतनी तेज होती है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। यूं समझ लें कि कुछ ही देर में आसमान से एक पूरी की पूरी नदी जमीन पर  उतर आती है। जरा सोचिये कितनी खतरनाक होती है ये बारिश। हमारे पड़ोसी राज्य उत्तराखण्ड के नैनीताल शहर में बादल फटने से अभी तक की आधिकतम बारिश होने का रिकार्ड  24 घण्टों में 509.3 मिलीमीटर का दर्ज है।
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डा0हेमन्त कुमार
http://fulbagiya.blogspot.in/2012/08/blog-post.html

Monday, August 6, 2012

टीम अन्ना का कार्य समाप्त हो गया है -Anna Hazare

टीम अन्ना का कार्य समाप्त हो गया है -Anna Hazare

  • DR. ANWER JAMAL "HBFI" पर 
  •   जनलोकपाल कानून सरकार बनाने के लिए राजी नहीं है। कहां तक बार-बार अनशन करते रहोगे। अब अनशन छोड़ो और देश की जनता को विकल्प दे दो। यह मांग जनता से बढ़ती गई। मैंने भी सोचा आज की सरकार से देश का भ्रष्टाचार कम नहीं हो सकता। कारण, सरकार की मंशा ही नहीं है। जनलोकपाल कानून से भ्रष्टाचार दूर होगा। यह देशवासियों की आशा थी। लेकिन डेढ साल...
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    संजय गाँधी की रहस्यमय दुर्घटना Accident

    "खट्ठा-मीठा" ब्लॉग पर विजय कुमार सिंघल 'अंजान' बता रहे हैं -

    संजय गाँधी की रहस्यमय दुर्घटना

    इन्दिरा गाँधी संजय को अपने उत्तराधिकारी के रूप में तैयार कर रही थीं। इसलिए इस बार उन्हें पार्टी के महामंत्री पद पर रख दिया गया। इन्दिरा गाँधी स्वयं कांग्रेस की अध्यक्ष भी थीं, परन्तु सारे अधिकार वास्तव में संजय गाँधी के हाथ में थे। इतना ही नहीं पार्टी के अलावा सरकार के तमाम अधिकार भी अघोषित रूप में संजय गाँधी के हाथों में थे और वे मनचाहे तरीके से कार्यपालिका को चला रहे थे। विपक्ष बुरी तरह हताश था, जनता पार्टी टुकड़ों में टूट चुकी थी, इसलिए संजय गाँधी के अधिकारों को कोई प्रभावी चुनौती नहीं थी। वैसे भी वे पर्दे के पीछे रहकर सारी गतिविधियां चलाते थे, इसलिए किसी को सीधे उंगली उठाने का मौका नहीं मिलता था।

    इसी समय संजय को हेलीकॉप्टर उड़ाने का शौक चर्राया। सफदरजंग हवाई अड्डे पर एक उड़ान क्लब है, उसकी सदस्यता लेने और हवाई जहाज उड़ाना सीखने में संजय गाँधी को कोई दिक्कत नहीं हुई, हालांकि वे हाईस्कूल की परीक्षा भी पास नहीं कर सके थे। इस क्लब के तमाम नियमों को धता बताते हुए वे अपनी मनमर्जी के कभी भी हेलीकॉप्टर उड़ाया करते थे और उसके साथ खेल किया करते थे। इनमें एक खेल यह होता था कि दूर से हेलीकॉप्टर उड़ाकर लाते हुए गोता लगाकर किसी ऊँचे पेड़ की सबसे ऊँची डाल के पत्तों को छूने की कोशिश करते थे। यह बहुत खतरनाक खेल था, पर संजय गाँधी को रोकने-समझाने वाला कोई नहीं था।

    ऐसे ही एक दिन यह खेल करते हुए संजय गाँधी का हेलीकॉप्टर अनियंत्रित हो गया और वह पेड़ की डाल को छूने के बजाय जमीन से टकराया। कहने की आवश्यकता नहीं कि जमीन से टकराकर वह हेलीकॉप्टर चूर-चूर हो गया और उसको चला रहे संजय गाँधी तथा एक अन्य व्यक्ति बुरी तरह क्षत-विक्षत होकर मौत के मुँह में चले गये। वह दिन था 23 जून 1980 का।
    Source :  http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/Khattha-Meetha/entry/%E0%A4%B8-%E0%A4%9C%E0%A4%AF-%E0%A4%97-%E0%A4%A7-%E0%A4%95-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%AF-%E0%A4%A6-%E0%A4%B0-%E0%A4%98%E0%A4%9F%E0%A4%A8

    Sunday, August 5, 2012

    ग़ज़लगंगा.dg: लोकतंत्र का मर्सिया

    तुमने कहा-
    अब एक घाट पर पानी पीयेंगे
    बकरी और बघेरे

    इसी भ्रम में हलाल होती रहीं बकरियां
    तृप्त होते रहे बघेरे.

    हमारे हिस्से में आया
    काली दुनिया के सफेदपोशों की तर्जनी पर
    कठपुतली की तरह नाचता तंत्र
    कालिया नाग के फुफकार का मंत्र
    और.....
    पर्दानशीं तानाशाहों का रिमोट संचालित यंत्र
    कार्पोरेट घरानों के कंप्यूटरों का डाटा
    अंकेक्षकों की वार्षिक रिपोर्ट की प्रतिच्छाया
    धन्ना सेठों का बही-खाता
    जिसमें मात्र
    आय-व्यय
    लाभ-हानि के फर्जी आंकड़े
    जिसमें हमारी रत्ती भर भागीदारी नहीं
    हमारे लिये तो....
    हाशिये में भी जगह खाली नहीं

    और तुम्हारे हिस्से में.....?
    मनचाही रोटियां सेंकने की
    अंगीठी
    शाही खजाने की चाबी
    कई श्रेणियों का सुरक्षा घेरा
    और ...
    एक जादुई मुखौटा
    जिसे जब चाहो लगा लो
    जब चाहे हटा लो

    पता नहीं यह
    बाजार की आवारा पूंजी है
    या आवारा पूंजी का बाजार
    जो...हमारी श्वास नली में
    घुयें के छल्ले की तरह रक्स करता
    फेफड़ों में
    बलगम की तरह जमता
    हमारी जरूरियात के रास्ते में
    रोडे की तरह बिछता जा रहा है

    झूठ और पाखंड की यह
    पैंसठ साला इमारत
    दीमक का ग्रास बन चुकी है
    इसके तमाम पाए खोखले हो चुके हैं
    कभी भी धराशायी हो सकती है
    ताश के पत्तों की तरह

    अपने सर पर हाथ रखकर बोलो
    क्या यह वही तंत्र है
    जिसकी बुनियाद
    वैशाली,मगध,तक्षशिला और पाटलीपुत्र में पड़ी थी
    जिसकी कामना
    रूसो, दिदरो और मांटेस्न्यू ने की थी
    जिसका सपना
    आजादी के दीवानों ने देखा था.

    यह तंत्र तो
    कबूतर की उड़ानों पर बंदिशें लगाता
    और बाज के पंजे थपथपाता है
    गौरैया का निवाला छीन
    चील-कौओं की चोंच सहलाता है
    कोयल की कूक पर झुंझलाता
     और शेर की दहाड़ पर थिरकता है

    यह हमारे हिस्से का नहीं
    तुम्हारे हिस्से का जनतंत्र है

    हमें अपने हिस्से का जनतंत्र चाहिए
    और हम इसके लिये कोई अर्जी
    कोई मांगपत्र नहीं सौंपेंगे
    अपने दम पर हासिल करेंगे
    चाहे इसके लिये
    जो भी कीमत अदा करनी पड़े.

    ----देवेंद्र गौतम
    ग़ज़लगंगा.dg: लोकतंत्र का मर्सिया:

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    Saturday, August 4, 2012

    fact n figure: एक संपत्ति जो न चल है न अचल

    बचपन से मैंने यही पढ़ा, सुना और जाना था कि संपत्ति के दो रूप होते हैं-चल और अचल. लेकिन पिछले मंगलवार को मुझे इसके तीसरे रूप कि जानकारी मिली जिसके नामकरण और परिभाषा पर मैं विचार कर रहा हूं. हुआ यूं कि मैं धनबाद से बोकारो होते हुए रांची लौट रहा था कि चन्द्रपुरा के एक पत्रकार मित्र आरएस शर्मा से मिलने कि इच्छा हो गई जिनके दोनों गुर्दे ख़राब हो चुके हैं और फिलहाल डायलिसिस पर चल रहे हैं. इसी बहाने बेरमो कोयलांचल के मित्रों से भी मुलाकात कर लेनी थी सो फुसरो की बस में स्वर हो गया. डेढ़ घंटे की यात्रा के बाद फुसरो पहुंचा. प्रभात खबर के ब्यूरो चीफ राकेश वर्मा से मिला तो उन्होंने मनोज कुमार सिंह नामक अपने एक सहयोगी को बाइक पर मुझे चन्द्रपुरा पहुंचाने का निर्देश दिया और अगले दिन वापस लौटने के बाद बेरमो के मित्रों के साथ मिलना तय हुआ.  
    कोयलांचल की सड़कों पर बाइक पर चलने का रोमांच कुछ अलग ही होता है. पतली सड़क पर जगह-जगह कंक्रीट उखड जाने से गड्ढे और गड्ढों में बरसात का पानी. उसपर कोयला लदे ट्रकों की तेज़ी से आवाजाही. 
    चन्द्रपुरा का चेहरा कुछ बदला हुआ लगा. यहां थर्मल प्लांट की नई यूनिट लगने के बाद पहली बार आया था. इसकी चिमनी सड़क से बिलकुल सटी हुई बनी है. 
    शाम के करीब पांच बजे शर्मा जी के घर पर पहुंचा. शर्मा जी अचानक मुझे देखकर आनंदित हुए. उन्होंने नया घर बनवा लिया था. अच्छा लगा. पहले से काफी दुबले हो गए थे लेकिन हाव-भाव और गर्मजोशी पहले जैसी ही थी. मनोज शर्मा जी से मिलकर वापस लौट गया. उनकी सेहत और इलाज के संबंध में बातें होने लगीं. भाभी जी भी पास ही बैठी हमारी बातें सुन रही थीं.
    थोड़ी देर बाद बातचीत के क्रम में मैंने उनके छोटे भाई अरविंद के बारे में पूछा तो शर्मा जी थोडा गंभीर हो गए. अरविन्द बगल में  ही घर बनाकर रहते हैं. शर्मा जी ने इतना ही कहा कि आप चाहें तो उससे मिल लें लेकिन वो यहां नहीं आएगा.
    इसी बीच हिंदुस्तान के रिपोर्टर प्रमोद सिन्हा स्कूटर पर पहुंचे. मैंने उनसे कहा कि नीमिया मोड़ तरफ चलें शायद कुछ पुराने मित्रों से मुलाकात हो जाये. चाय नाश्ते के बाद हम स्कूटर से चले रस्ते में मैंने प्रमोद से पूछा कि शर्मा जी और अरविंद के बीच कुछ खटपट चल रही है क्या. प्रमोद ने जवाब दिया-खटपट..! उनके बीच केस-मुकदमा चल रहा है. उसने शर्मा जी के पीएफ और ग्रेच्युटी में अपनी हिस्सेदारी का दावा ठोककर उसपर रोक लगाने और उनकी जगह उनके बेटे कि नौकरी में भी अड़चन दाल दी है.  
    दरअसल शर्मा जी बोकारो इस्पात संयंत्र में कार्यरत थे. उनके परिवार की ज़मीन संयंत्र के लिए अधिगृहित की गयी थी जिसके एवज में मुआवजे के अलावा दो नौकरियां मिली थीं. शर्मा जी के बड़े भाई व्यवसायी थे इसलिए उन्होंने नौकरी नहीं ली. उनके चार भाइयों  में दुसरे नंबर वाले ने एक नौकरी ली और तीसरे नंबर पर शुमार शर्मा जी ने ली. अरविंद उम्र में काफी छोटा था. 
    अब जब कि शर्मा जी अस्वस्थता के आधार पर सेवानिवृति ले चुके हैं. नियमानुसार उनकी जगह उनके एक बेटे की नौकरी हो सकती है. प्रबंधन इसके लिए राजी भी है. अरविंद का तर्क यह है कि चूकि यह नौकरी पुश्तैनी ज़मीन के एवज़ में मिली थी इसलिए इसपर और सेवा निवृति के लाभों पर उनका हक बनता है. इसी आधार पर उन्होंने अपना दावा ठोका है और फिलहाल मौत के मुहाने पर खड़े अपने बड़े भाई को कटघरे में खड़ा कर दिया है. उनके दावे पर कोर्ट का या बीएसएल प्रबंधन का क्या रुख होगा यह मेरी सोच का विषय नहीं है मेरी सोच का विषय यह है कि क्या ऐसे संस्थानों में जहां अनुकम्पा के आधार पर आश्रित को नौकरी देने का प्रावधान है वहां नौकरी भी पैतृक संपत्ति का एक रूप बन गयी है और उसके लाभ के विभाजन की मांग हो सकती है. यदि हां तो इसे चल संपत्ति मानेंगे या अचल? 


    ----देवेंद्र गौतम
     fact n figure: एक संपत्ति जो न चल है न अचल:

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    जब प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज न हो


    आज हाई प्रोफाइल मामलों को छोड़ दें तो किसी अपराध की प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करा लेना ही एक "जंग" जीत लेने के बराबर है. आज के सम.......पूरा लेख यहाँ रमेश कुमार सिरफिरा: जब प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज न हो पर क्लिक करके पढ़ें.

    टीम अन्ना अब राजनीति करेगी ?

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' लिखते हैं -

    अन्ना के समर्थकों के समक्ष निराशा का आसन्न संकट?

    मेरा राजनैतिक अनुमान है, कि धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के मुद्दों को अपनाये बिना, इस देश में कोई राजनैतिक पार्टी स्थापित होकर राष्ट्रीय स्तर पर सफल हो ही नहीं सकती और इसे "अन्ना का दुर्भाग्य कहें या इस देश का"-कि अन्ना की सभाओं में या रैलियों में अभी तक जुटती रही भीड़ को ये दोनों ही संवैधानिक अवधारणाएँ कतई भी मंजूर नहीं हैं! बल्कि कड़वा सच तो यही है कि अन्ना अन्दोलन में अधिकतर वही लोग बढचढकर भाग लेते रहे हैं, जिन्हें देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप में कतई भी आस्था नहीं है। जिन्हें इस देश में अल्पसंख्यक, विशेषकर मुसलमान फूटी आँख नहीं सुहाते हैं और जो हजारों वर्षों से गुलामी का दंश झेलते रहे दमित वर्गों को समानता का संवैधानिक हक प्रदान किये जाने के सख्त विरोध में हैं। जो स्त्री को घर की चार दीवारी से बाहर शक्तिसम्पन्न तथा देश के नीति-नियन्ता पदों पर देखना पसन्द नहीं करते हैं।
     
    यह भी सच है कि इस प्रकार के लोग इस देश में पॉंच प्रतिशत से अधिक नहीं हैं, लेकिन इन लोगों के कब्जे में वैब मीडिया है। जिस पर केवल इन्हीं की आवाज सुनाई देती है। जिससे कुछ मतिमन्दों को लगने लगता है कि सारा देश अन्ना के साथ या आरक्षण या धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ चिल्ला रहा है। जबकि सम्भवत: ये लोग ही इस देश की आधुनिक छूत की राजनैतिक तथा सामाजिक बीमारियों के वाहक और देश की भ्रष्ट तथा शोषक व्यवस्था के असली पोषक एवं समर्थक हैं।
     
    इस कड़वी सच्चाई का ज्ञान और विश्‍वास कमोबेश अन्ना तथा बाबा दोनों को हो चुका है। इसलिये दोनों ने ही संकेत दे दिये हैं कि अब देश के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना होगा। 
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      Cartoon by Kirtish Bhatt

     

    Friday, August 3, 2012

    ग़ज़लगंगा.dg: हमने दुनिया देखी है

    भूल-भुलैया देखी है.
    हमने दुनिया देखी है.

    उतने की ही बात करो
    जितनी दुनिया देखी है.

    हमने झिलमिल पानी में
    अपनी काया देखी है.

    तुमने मन के उपवन में
    सोनचिरईया देखी है?

    उसको देख नहीं पाया
    उसकी माया देखी है.

    इक मुद्दत के बाद यहां
    इक गोरैया देखी है.

    लहरों में हिचकोलें खाती
    डगमग नैया देखी है.

    --देवेंद्र गौतम  
    ग़ज़लगंगा.dg: हमने दुनिया देखी है:

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    क्या काजल की कोठरी में बेदाग़ रह पाएगी अन्ना टीम ? Teem Anna

    जो लोग भ्रष्टाचार को शासन का मसला समझ कर इसे राजनीतिक स्तर पर हल करना चाहते हैं, वे सरासर ग़लतहैं. भ्रष्टाचार समाज में हरेक स्तर पर मौजूद है. समाज को नैतिक रूप से मज़बूत किये बिना भ्रष्टाचार को समाप्त नहीं किया जा सकता, राजनीतिक भ्रष्टाचार को भी नहीं क्योंकि राजनेता समाज से ही आते हैं.
    यह सच्चाई वे लोग भुला देते हैं जो भ्रष्टाचार को मिटाना नहीं चाहते बल्कि अपनी महत्वाकांक्षा पूरी करना चाहते हैं.
    अरविन्द केजरीवाल ऐसे ही एक महत्वाकांक्षी आदमी मालूम होते हैं. अन्ना और जो भी उनके साथ है, वह या तो उनके जैसा है या फिर इस्तेमाल हो रहा है. अब ये लोग राजनीति में आने वाले हैं तो ये भी उन लोगों जैसे ही हो जायेंगे जो लोग इनसे पहले राजनीति में मौजूद हैं.

    Thursday, August 2, 2012

    रक्षाबँधन की हार्दिक शुभकामनाएं Rakhi

    आज रक्षा बंधन के पर्व की सभी को मंगल कामनाएं ।
    इस मौक़े  पर जनाब शाहिद मिर्ज़ा साहब ने यह प्यारा सा कलाम कहा है-

    Source : http://shahidmirza.blogspot.in/2012/08/blog-post.html

    Tuesday, July 31, 2012

    भ्रष्टाचार का कारण है जायज़ और नाजायज़ का फ़र्क़ भुला देना

    डा. अयाज़ अहमद साहब अपने ब्लॉग ‘सोने पे सुहागा‘ पर बता रहे हैं

    (1) अपनी हैसियत बढ़ाने की ख्वाहिश में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की आदत

    भारत भ्रष्टाचार में जकड़ा हुआ है और भ्रष्टाचार से लड़ने वाली टीम अन्ना को देश की जनता तन्हा छोड़ चुकी है। लोकपाल तो जैसे तैसे अब बन कर ही रहेगा मगर क्या मुल्क की अवाम को अपने आप को बदलने का अहसास हो पाएगा ?
    अहम मुददे भी यहां अपने अहं की भेंट चढ़ा दिए जाते हैं।
    ब्लॉग जगत में भी मुददे को नहीं नाम और हैसियत को समर्थन दिया जाता है।


    जनाब मासूम साहब अपने ब्लॉग ‘अमन का पैग़ाम‘ पर लिखते हैं-

    नाजाएज़ और जायज़ का फर्क महसूस करें 

    नारायणदत्त तिवारी उज्ज्वला और रोहित के रिश्ते पे इस ब्लॉगजगत में भी एक बहस सी छिड़ी हुई है | कोई किसी का साथ दे रहा है कोई किसी का | सबके अपने अपने विचार हैं | लेकिन सच यही है कि गलत रास्ते से पाई गयी कोई भी नेमत इंसान को आज तक रास नहीं आयी ,फिर चाहे वो ओलाद हो या पैसा |

    इसका हल यही है सभी लोग जायज़ और नाजायज़ का फर्क समझें | और ऐसा कोई काम न करें जिसे समाज के सामने सर उठा के बता न सकें |  

    Sunday, July 29, 2012

    N. D. Tiwari, Rohit और उज्जवला की बातें करें

    मा. पं. नारायणदत्त तिवारी जी को मैं अपना राजनीतिक गुरू मानता हूँ। सभी लोग जानते हैं कि उन्होने देश की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान किया। 
    ...मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि पं. नारायणदत्त तिवारी जैसा विनम्र राजनीतिज्ञ लाखों में एक होता है।
        जो घटनाक्रम तिवारी जी के साथ हुआ वह वाकई में दुर्भाग्यपूर्ण है।
    ...अब स्व.शेरसिंह की पुत्री उज्जवला की बात करें तो सरासर गलती उज्जवला की ही है। एक शादीशुदा महिला ने उस समय के जाने-माने राजनीतिज्ञ को अपने जाल में फँसाया और उसके साथ हमबिस्तर हुई। 
    क्या यह सच नहीं है ?
    क्या तिवारी उसके घर बलात्कार करने गया था ?
    इस सेक्स के खेल में यदि सन्तान हो गई तो गलती किसकी है ?

    Saturday, July 28, 2012

    बच्चों की मैगज़ीन की Top 5 Websites

    बच्चों को इंटरनेट पर हल्के-फुल्के मनोरंजन की तलाश रहती है लेकिन कई बार वे भटककर गलत जगह पहुंच जाते हैं। जो माता-पिता बच्चों को मनोरंजक और शिक्षाप्रद साहित्य पढ़ते देखना चाहते हैं, वे अक्सर निराश होते हैं क्योंकि बच्चों के मतलब की अच्छी भारतीय वेबसाइटों की संख्या कम है। आप अपने बच्चों को इन वेबसाइटों के बारे में बताएं, जो साफ-सुथरी और अच्छी कहानियां, कविताएं, गेम और ऐक्टिविटीज़ को प्रमोट करती हैं।
    बहरहाल, लैंग्वेज बुक सेक्शन लाजवाब है जहां बच्चे हिंदी, मराठी, तेलुगू, मलयालम, तमिल और अंग्रेजी जैसी भाषाएं भी सीख सकते हैं।
    देखिये :

    बच्चों की मैगज़ीन की Top 5 Websites

     

    खबरगंगा: 'डायन' : औरतों को प्रताड़ित किये जाने का एक और तरीका

    वे बचपन के दिन थे ....मोहल्ले में दो बच्चों की मौत होने के बाद  काना-फूसी शुरू हो गयी और एक बूढी विधवा को 'डायन' करार दिया गया...हम उन्हें प्यार से 'दादी' कहा करते थे...लोगो की ये बाते हम बच्चों तक भी पहुची और हमारी प्यारी- दुलारी दादी एक  'भयानक डर' में तब्दील हो गयी... उनके घर के पास से हम दौड़ते हुए निकलते कि वो पकड़ न ले...उनके बुलाने पर भी पास नहीं जाते ...उनके परिवार को अप्रत्यक्ष तौर पर बहिष्कृत कर दिया गया ....आज सोचती हूँ तो लगता है कि हमारे बदले व्यवहार ने उन्हें कितनी 'चोटे' दी होंगी ...और ये सब इसलिए कि हमारी मानसिकता सड़ी हुई थी....जबकि हमारा मोहल्ला बौद्धिक (?) तौर पर परिष्कृत (?) लोगो का था ..!............

    खबरगंगा: 'डायन' : औरतों को प्रताड़ित किये जाने का एक और तरीका:

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    ग़रीबों की मदद करने वाला ग़रीब BAI FANG LI चला गया


    ग़रीबों की मदद करने वाला ग़रीब चला गया.
    वह हम सबके लिए एक मिसाल छोड़कर गया है.
    BAI FANG LI was a Tricycle Driver for 20 years and has Donated 350,000 Renminbi to support the EDUCATION OF 300 STUDENTS WHO LIVE IN POVERTY.
    One winter, he gave his last 500 Renminbi to their Teacher, “THIS IS WILL BE MY LAST DONATION AS I AM NO LONGER FIT TO WORK”. He Passed Away at the Age of 93. His name is BAI FANG LI
    His body is small, even too small compared to other rickshaw operators. However, he is very energetic and enthusiast. He starts his routine at 6am to converse God in prayers. He then cruises the streets of the city on his rickshaw either to get a customer or to bring the customers to their destination. He ends his days after the hard work not sooner than 8pm.
    Secret to success
    This friendly and an ever smiling guy is loved by all his customers. He never cares how much a customer pays him. Because of his kindness, more people prefer to hire him than others. Perhaps out of compassion, many customers pay him more than the usual rates. Considering his small body, the concern customers, must have noticed how hard it must have been for him to push the rickshaw.

    Friday, July 27, 2012

    टीम अन्ना के अनशन के साइड इफ़ेक्ट Anna Hajare

    'चर्चाशाली मंच' हिंदी ब्लॉग जगत में गंभीर मुद्दों पर चर्चा के जाना जाता है . देखिये एक ऐसी ही सामयिक चर्चा-

    टीम अन्ना का भव्य अनशन और उसके साइड इफ़ेक्ट Anna Hajare

    सवाल यह है कि क्या अन्ना भ्रष्टाचार के मुद्दे की जड़ को काट पायेंगे ?


    भ्रष्टाचार सदाचार का विपरीत है. 
    जब तक लोगों में सदाचार की तमन्ना नहीं जागेगी तब तक अनशन करने से सरकार को तो परेशान किया जा सकता है लेकिन भ्रष्टाचार को नहीं मिटाया जा सकता है.
    अनशन का रास्ता आत्महत्या और अराजकता का रास्ता है. इस तरह अगर सरकार अन्ना के क़ानून को बिना किसी विश्लेषण और सुधार के मान लेती है तो यह भी ग़लत है और अगर अन्ना अपना अनशन तोड़ते हैं, जैसा कि अनशन करने की घोषणा वह कर चुके हैं, तो उस से जनता में मायूसी फैलेगी और अगर वह अनशन नहीं तोड़ते और वह चल बसे तो देश में भारी अराजकता फैल जायेगी.
    तीनों मार्ग देश को ग़लत अंजाम की तरफ़ ले जा रहे हैं. 
    अनशन और आत्महत्या बहरहाल ग़लत है.

    कारगिल विजय दिवस

    Thursday, July 26, 2012

    ग़ज़लगंगा.dg: हमसफ़र कोई न था फिर भी सफ़र करता रहा

    अपनी सारी ख्वाहिशों को दर-ब-दर करता रहा.
    हमसफ़र कोई न था फिर भी सफ़र करता रहा.

    एक तुम जिसको किसी पर भी नहीं आया यकीं
    एक मैं जो हर किसी को मोतबर करता रहा.

    बेघरी ने तोड़ डाला था उसे अंदर  तलक
    इसलिए वो हर किसी के दिल में घर करता रहा .

    काश! वो आकर मेरी तहरीर पढ़ लेता कभी
    हर वरक जिसके लिए अश्कों से तर करता रहा.

    धीरे-धीरे सांस भी उल्टी तरफ चलने लगी
    धीरे-धीरे जह्र भी अपना असर करता रहा.

    शह्र की सड़कों पे मेरे पांव ठहरे ही नहीं
    गांव की पगडंडियों पे मैं गुजर करता रहा.

    ----देवेंद्र गौतम

    ग़ज़लगंगा.dg: हमसफ़र कोई न था फिर भी सफ़र करता रहा:

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    ‘ब्लॉग की ख़बरें‘

    1- क्या है ब्लॉगर्स मीट वीकली ?
    http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_3391.html

    2- किसने की हैं कौन करेगा उनसे मोहब्बत हम से ज़्यादा ?
    http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

    3- क्या है प्यार का आवश्यक उपकरण ?
    http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

    4- एक दूसरे के अपराध क्षमा करो
    http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    5- इंसान का परिचय Introduction
    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/introduction.html

    6- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
    http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
    http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    8- बेवफा छोड़ के जाता है चला जा
    http://kunwarkusumesh.blogspot.com/2011/07/blog-post_11.html#comments

    9- इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक
    http://www.hamarianjuman.com/2011/07/blog-post.html

    10- दुआ की ताक़त The spiritual power
    http://ruhani-amaliyat.blogspot.com/2011/01/spiritual-power.html

    11- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
    http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    12- शकुन्तला प्रेस कार्यालय के बाहर लगा एक फ्लेक्स बोर्ड-4
    http://shakuntalapress.blogspot.com/

    13- वाह री, भारत सरकार, क्या खूब कहा
    http://bhadas.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

    14- वैश्विक हुआ फिरंगी संस्कृति का रोग ! (HIV Test ...)
    http://sb.samwaad.com/2011/07/blog-post_16.html

    15- अमीर मंदिर गरीब देश
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

    16- मोबाइल : प्यार का आवश्यक उपकरण Mobile
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/mobile.html

    17- आपकी तस्वीर कहीं पॉर्न वेबसाइट पे तो नहीं है?
    http://bezaban.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

    18- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम अब तक लागू नहीं
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

    19- दुनिया में सबसे ज्यादा शादियाँ करने वाला कौन है?
    इसका श्रेय भारत के ज़ियोना चाना को जाता है। मिजोरम के निवासी 64 वर्षीय जियोना चाना का परिवार 180 सदस्यों का है। उन्होंने 39 शादियाँ की हैं। इनके 94 बच्चे हैं, 14 पुत्रवधुएं और 33 नाती हैं। जियोना के पिता ने 50 शादियाँ की थीं। उसके घर में 100 से ज्यादा कमरे है और हर रोज भोजन में 30 मुर्गियाँ खर्च होती हैं।
    http://gyaankosh.blogspot.com/2011/07/blog-post_14.html

    20 - ब्लॉगर्स मीट अब ब्लॉग पर आयोजित हुआ करेगी और वह भी वीकली Bloggers' Meet Weekly
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/bloggers-meet-weekly.html

    21- इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
    http://www.sahityapremisangh.com/2011/07/blog-post_3678.html

    22- इसलाम में आर्थिक व्यवस्था के मार्गदर्शक सिद्धांत
    http://islamdharma.blogspot.com/2012/07/islamic-economics.html

    23- मेरी बिटिया सदफ स्कूल क्लास प्रतिनिधि का चुनाव जीती
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_2208.html

    24- कुरआन का चमत्कार

    25- ब्रह्मा अब्राहम इब्राहीम एक हैं?

    26- कमबख़्तो ! सीता माता को इल्ज़ाम न दो Greatness of Sita Mata

    27- राम को इल्ज़ाम न दो Part 1

    28- लक्ष्मण को इल्ज़ाम न दो

    29- हरेक समस्या का अंत, तुरंत

    30-
    अपने पड़ोसी को तकलीफ़ न दो
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    साहित्य की ताज़ा जानकारी

    1- युद्ध -लुईगी पिरांदेलो (मां-बेटे और बाप के ज़बर्दस्त तूफ़ानी जज़्बात का अनोखा बयान)
    http://pyarimaan.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    2- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
    http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    3- आतंकवादी कौन और इल्ज़ाम किस पर ? Taliban
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/taliban.html

    4- तनाव दूर करने की बजाय बढ़ाती है शराब
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    5- जानिए श्री कृष्ण जी के धर्म को अपने बुद्धि-विवेक से Krishna consciousness
    http://vedquran.blogspot.com/2011/07/krishna-consciousness.html

    6- समलैंगिकता और बलात्कार की घटनाएं क्यों अंजाम देते हैं जवान ? Rape
    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/rape.html

    7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
    http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    8- ख़ून बहाना जायज़ ही नहीं है किसी मुसलमान के लिए No Voilence
    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/no-voilence.html

    9- धर्म को उसके लक्षणों से पहचान कर अपनाइये कल्याण के लिए
    http://charchashalimanch.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    10- बाइबिल के रहस्य- क्षमा कीजिए शांति पाइए
    http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

    11- विश्व शांति और मानव एकता के लिए हज़रत अली की ज़िंदगी सचमुच एक आदर्श है
    http://dharmiksahity.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    12- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
    http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    13- ‘इस्लामी आतंकवाद‘ एक ग़लत शब्द है Terrorism or Peace, What is Islam
    http://commentsgarden.blogspot.com/2011/07/terrorism-or-peace-what-is-islam.html

    14- The real mission of Christ ईसा मसीह का मिशन क्या था ? और उसे किसने आकर पूरा किया ? - Anwer Jamal
    http://kuranved.blogspot.com/2010/10/real-mission-of-christ-anwer-jamal.html

    15- अल्लाह के विशेष गुण जो किसी सृष्टि में नहीं है.
    http://quranse.blogspot.com/2011/06/blog-post_12.html

    16- लघु नज्में ... ड़ा श्याम गुप्त...
    http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    17- आपको कौन लिंक कर रहा है ?, जानने के तरीके यह हैं
    http://techaggregator.blogspot.com/

    18- आदम-मनु हैं एक, बाप अपना भी कह ले -रविकर फैजाबादी

    19-मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत

    20- मौत कहते हैं जिसे वो ज़िन्दगी का होश है Death is life

    21- कल रात उसने सारे ख़तों को जला दिया -ग़ज़ल Gazal

    22- मोम का सा मिज़ाज है मेरा / मुझ पे इल्ज़ाम है कि पत्थर हूँ -'Anwer'

    23- दिल तो है लँगूर का

    24- लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी - Allama Iqbal

    25- विवाद -एक लघुकथा डा. अनवर जमाल की क़लम से Dispute (Short story)

    26- शीशा हमें तो आपको पत्थर कहा गया (ग़ज़ल)

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