Tuesday, June 10, 2014

अपने जीवन को बदलिए, सिर्फ़ एक दिन में

देखिये दो पोस्ट्स -
अपने जीवन को बदलिए, सिर्फ़ एक दिन मेंडा. अनवर जमाल   Monday June 09, 2014
( पहले देखिए  1- शाँति, सबके लिए     और 2-  सेहत, सबके लिए   और 3-  अमीरी सबके लिए ) ------------------ इन्सान खु़शी, कामयाबी और सेहत चाहता है। वह अपने सम्बंधों में प्रेम और अपने जीवन में विकास चाहता है...
 
अमीरी सबके लिएडा. अनवर जमाल   Saturday June 07, 2014
( पहले देखिए  1- शाँति, सबके लिए    और 2-  सेहत, सबके लिए ) शान्ति का समृद्धि से, अमीरी से सीधा सम्बंध है। आपने देखा होगा कि जिस परिवार में लड़ाई-झगड़े रहते हैं। वे नौकरी, बिज़नेस या खेती, कुछ भी ठीक ढंग से नहीं कर पाते। पति...
 

Wednesday, June 4, 2014

सेहत और शाँति सबके लिए Health & Peace

सेहत, सबके लिएडा. अनवर जमाल   Tuesday June 03, 2014
( पहले देखिए   शाँति, सबके लिए  ) मज़दूरी, खेती, व्यापार और फ़ैक्ट्रियों में प्रोडक्शन, हम इनमें से कुछ भी नहीं कर सकते, अगर समाज में शाँति नहीं है। अगर लोग शाँति के साथ सड़कों पर आ-जा नहीं सकते, तो वे कोई रचनात्मक काम भी नहीं कर सकते। ऐसे में...
 
शाँति, सबके लिएडा. अनवर जमाल   Friday May 30, 2014
आज इन्सान अपने सबसे कठिन दौर से गुज़र रहा है। विज्ञान की उन्नति ने जहां उसके पास सुविधा के साधनों का ढेर लगा दिया है वहीं उसके सामने एक मुश्किल भूल भुलैया भी बना दी है। आज इन्सान के सामने उसकी मंज़िल की साफ़ तस्वीर नहीं है। जिसके सहारे वह आगे बढ़ सके। ऐसे में...
 

Tuesday, May 27, 2014

नरेन्द्र भाई मोदी का प्रधानमंत्री बनना भारत में आए बड़े बदलाव का प्रमाण

नरेन्द्र भाई मोदी का व्यक्तित्व और उनकी विचारधारा जो भी हो लेकिन पिछड़ी जाति के व्यक्ति का प्रधानमंत्री बनना और हज़ारों साल से अपना वर्चस्व बनाए रखने वाली जातियों के सदस्यों का उनके अधीन काम करना एक बड़ा बदलाव है। यह बदलाव एक दिन में और किसी एक व्यक्ति के प्रयास से नहीं आया। 
आदरणीय गौतम बुद्ध ने, महावीर जैन ने, चार्वाक ने और बहुत से दूसरे सुधारकों ने सामाजिक न्याय के लिए वर्ण व्यवस्था को उखाड़ने का काम किया। वर्ण व्यवस्था के रक्षकों के उत्तराधिकारी अब समता और समरसता के लिए ख़ुशी ख़ुशी काम करते देखे जा सकते हैं। उन्हीं के एकजुट समन्वित प्रयासों के नतीजे में कल पिछड़ी जाति के एक व्यक्ति को सत्ता मिली और वे उसे ख़ुशी ख़ुशाी देखते रहने के लिए मजबूर थे.



Tuesday, April 29, 2014

वालिद साहब की मौत पर सभी भाई बहनों से दुआ की दरख्वास्त है

कुल्लु नफ्सिन ज़ायक़तुल मौत -अल-क़ुर्'आन 
हर जान को मौत का ज़ायक़ा चखना है. 
हमारे वालिद जनाब मसूद अनवर ख़ान यूसुफ़ ज़ई साहब का इंतेक़ाल (देहावसान) हो गया है जुमा (26 अप्रैल 2014) और शनिवार (27 अप्रैल 2014)की दरमियानी रात मे 7:25 PM पर. उनकी उम्र तक़रीबन 69 साल थी. सब लोगों से दुआ और इसाले सवाब की दरख्वास्त है. 
उन्होंने एक अच्छे बाप की सारी ज़िम्मेदारियाँ निभाई हैं. हम अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं कि उसने हमें इतना अच्छा बाप दिया जिसने हमें शहज़ादों की तरह पाला और अपनी ताक़त की हद तक कभी किसी चीज़ की कमी महसूस न होने दी. इसी के साथ उन्होंने हमें हक़ीक़ी दुनिया में जिद्दोजहद करना भी सिखाया जो कि बेहतर मुस्तक़बिल के लिये एक लाज़िमी चीज़ है.
अल्लाह हमारे वालिद साहब की मगफ़िरत फ़रमाये और उन्हें अपने दीदार से नवाज़े और हमारे नेक आमाल को उनकी राहत का सामान बनाये.
हम अल्लाह से अल्लाह की रिज़ा चाहते है. हमारे वालिद साहब की तालीमो तरबियत जो उन्होंने अपने बेटे बेटियों को दी है, उसका नफ़ा सारी इंसानियत को पहुंचे. सबको मुहब्बत और अम्नो अमान नसीब हो, जिसके लिये हमारे वालिद साहब ज़िंदगी भर मेहनत करते रहे.

आमीन.

वालिद साहब की मौत पर सभी भाई बहनों से दुआ की दरख्वास्त है

  • Tuesday, April 29, 2014
  •  by 
  • DR. ANWER JAMAL
  • Saturday, April 19, 2014

    भारत की ‘लिव-इन-रिलेशनशिप’ परंपरा-हरि मोहन

    लेख का एक अंश साभार पेश है. 

    राजनीति और युवाओं का योगदान

    हरि मोहन

    ताज़ा पोस्ट


    भारत की ‘लिव-इन-रिलेशनशिप’ परंपराहरि मोहन  Saturday April 19, 2014
    लिव इन रिलेशनशिप भारतीय समाज में हमेशा चर्चा का विषय रहा है। सामाजिक रूप से इसे आज भी स्वीकार नहीं किया जाता है। स्त्री का शादी के बगैर पुरुष के साथ रहना सामाजिक दृष्टि से पाप समझा जाता है। घर-परिवार और समाज में लिव इन रिलेशनशिप की बात उठाते ही इसे पश्चिमी...

    Friday, April 4, 2014

    वैवाहिक बलात्कार’ का कानून कितना प्रासंगिक?-Nirankush

    घरेलु हिंसा प्रकरणों को पुलिस और कोर्ट में ले जाना कानून कितना प्रासंगिक?

    एक हिंदी ब्लॉगर ने चिंता जताई है कि

    बहुत सारी ऐसी बातें हैं, जिन पर वैवाहिक बलात्कार का कानून बनवाने की मांग पर विचार करने से पहले जानने और समझने की जरूरत है। इस आलेख को विराम देने से पूर्व निम्न कुछ प्रसिद्ध उक्तिओं को पाठकों के समक्ष अवश्य प्रस्तुत करना चाहूंगा :-
    1. प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक वाटसन का कहना था कि पश्‍चिम में दस में नौ तलाक मैथुन सम्बन्धी गड़बड़ी के कारण होते हैं, जिसमें स्त्रियों का सेक्स में रुचि नहीं लेना भी बड़ा कारण होता है।
    2. एक अन्य स्थान पर वाटसन कहते हैं कि स्त्रियॉं विवाह के कुछ समय बाद सेक्स में रुचि लेना बन्द कर देती हैं और अपने पति के आग्रह पर सेक्स को घरेलु कार्यों की भांति फटाफट निपटाने को उतावली रहती हैं।
    3. सेक्स मामलों की विशेषज्ञ लेखिका डॉ. मेरी स्टोप्स लिखती हैं कि स्त्री और पुरुष की काम वासना का वेग एक समान हो ही नहीं सकता। पुरुष कितना ही प्रयास क्यों न कर ले, अपनी पत्नी या प्रेमिका के समीप होने पर वह अपनी वासना पर नियन्त्रण नहीं कर सकता। वह क्षण मात्र में सेक्स करने को आतुर होकर रतिक्रिया करने लगता है, जबकि स्त्रियों को समय लगता है, लेकिन स्त्रियों को इसे पुरुषों की, स्त्रियों के प्रति अनदेखी नहीं समझकर, इसे पुरुष का प्रद्भतिदत्त स्वभाव मानकर सामंजस्य बिठाना सीखना होगा, तब ही दाम्पत्य जीवन सफलता पूर्वक चल सकता है।
    4. डॉ. मेरी स्टोप्स आगे लिखती हैं आमतौर पर स्त्रियॉं सेक्स में अतृप्त रह जाती हैं, सदा से रहती रही हैं। जिसके लिये वे पुरुषों को जिम्मेदार मानती हैं और कुछेक तो अगली बार पुरुष को सेक्स नहीं करने देने की धमकी भी देती हैं। जबकि स्त्रियों को ऐसा करने से पूर्व स्त्री एवं पुरुष की कामवासना के आवेग के ज्वार-भाटे को समझना चाहिये।
    5. महादेवी वर्मा का कथन है कि काव्य और प्रेमी दोनों नारी हृदय की सम्पत्ति हैं। पुरुष नारी पर विजय का भूखा होता है, जबकि नारी पुरुष के समक्ष समर्पण की। पुरुष लूटना चाहता है, जबकि नारी लुट जाना चाहती है।
    6. द मैस्तेरी का कहना है कि नारी की सबसे बड़ी त्रुटी है, पुरुष के अनुरूप बनने की लालसा।
    7. शेक्सपियर-कुमारियां पति के अतिरिक्त कुछ नहीं चाहती और जब उन्हें पति मिल जाता है तो सब कुछ चाहने लगती हैं। यही प्रवृत्ति उनके जीवन की सबसे भयंकर त्रासदी सिद्ध होती है।
    8. बुलबर-विवाह एक ऐसी प्रणय कथा है, जिसमें नायक प्रथम अंक में ही मर जाता है। लेकिन उसे अपनी पत्नी के लिये जिन्दा रहने का नाटक करते रहना पड़ता है। 
    9. अरबी लोकोक्ति-सफल विवाह के लिये एक स्त्री के लिये यह श्रेयस्कर है कि वह उस पुरुष से विवाह करे, जो उसे प्रेम करता हो, बजाय इसके कि वह उस पुरुष से विवाह करे, जिसे वह खुद प्रेम करती हो।
    उपरोक्त पंक्तियों पर तो पाठक अपने-अपने विचारानुसार चिन्तन करेंगे ही, लेकिन अन्त में, मैं अपने अनुभव के आधार पर लिखना चाहता हूँ कि-
    यदि स्त्रियॉं विवाह के बाद अपने पतियों के प्रति भी वैसा ही शालीन व्यवहार करें, जैसा कि वे अपरचित पुरुषों से करती हैं तो सौ में से निन्यानवें युगलों का दाम्पत्य जीवन सुगन्धित फूलों की बगिया की तरह महकने लगेगा। साथ ही स्त्रियों को हमेशा याद रखना चाहिये कि पुरुष प्रधान सामाजिक ढांचे में कोई भी पुरुष चिड़चिड़ी तथा कर्कशा पत्नी के समीप आने के बजाय उससे दूर भागने में ही भलाई समझता है। जिसके परिणाम कभी भी सुखद नहीं हो सकते।

    Monday, March 31, 2014

    चाय के ठेले पर विकास पुरूष

    देखें पूरी कहानी इस लिंक पर :

    चाय के ठेले पर विकास पुरूष

    जिन किसानों की ज़मीनें विकास पुरूष ने बहकाकर पूंजीपतियों को लगभग मुफ़त ही नाम करवा दी थीं। ज़मीन खोकर खाने के लिए किसानों को पैसे की ज़रूरत पड़ी तो उन्हें  पूंजीपतियों से भारी ब्याज पर क़र्ज़ लेना पड़ा। क़र्ज़ में दबकर किसी की पत्नी और किसी की बेटी को ब्याजख़ोर से दबना पड़ा और किसी को अपने गले में फंदा डालकर दुनिया से उठ जाना पड़ा। 
    विकास पुरूष ने गांव के लिए जो कुछ किया है, उसे याद करके गांव के लोगों की आंखे भर आती हैं, आदर से नहीं बल्कि दर्द के मारे। लालवाणी जी भी कोठी में पड़े रोते रहते हैं। सोचते हैं कि जो सत्ता उनके हाथ ही नहीं आई, उसके लिए उन्होंने बेशुमार लोगों को मरवा दिया। अब अंत समय है। मरने के बाद पुण्य ही काम आना है और वह पाप के मुक़ाबले बहुत कम है। इसी वजह से अड्डू दादा आजकल आहत हैं।
    विकास पुरूष आहत है या नहीं, हमें पता नहीं। किसी भाई बहन को उसका हाल चाल पता चले तो हमें भी बताना।

    Tuesday, March 18, 2014

    होली का भाव और प्रभाव holi

    होली का भाव और प्रभाव

    होली के अवसर पर सभी पाठकों को शुभकामनायें. होली आती है और भक्त प्रह्लाद की याद दिलाती है. हालात कितने ही विपरीत हों और शत्रु कितना ही बलशाली क्यों न हो लेकिन अगर आपका विश्वास है कि आपका पालनहार आपका रक्षक और सहायक है तो फिर उसकी मदद आयेगी और हर जगह आयेगी. हज़रत इब्राहीम अलैहिस-सलाम को भी अल्लाह के नाशुक्रे और मुनकिर बादशाह ने बहुत तेज़ आग जलवा कर उसमें फिकवा दिया था लेकिन अल्लाह ने उन्हें बचा लिया. होली महज़ रंगों का त्यौहार ही नहीं है बल्कि यह इस बात को जानने और जांचने का भी अवसर है कि हम ईश्वर-अल्लाह पर कितना भरोसा रखते हैं?
    इस बात का पता इससे चलेगा कि जब हमारे सामने कठिनाईयाँ आती है तब हम उस दयालु डाटा से शिकवा तो नहीं करने लगते या फिर मायूसी का शिकार तो नहीं हो जाते ?
    होली की यह मूल भावना मन में न रहे तो हुडदंगी लोग होली को अनुशासन और संयम के बन्धन तोड डालने का दिन बनकर रख देते हैं जोकि धर्म और अध्यात्म दोनों के खिलाफ है. धर्म और नैतिकता जिन लोगों का स्वभाव है, उनके लिये होली पुरानी स्मृति को ताज़ा करती है और उनका नैतिक उत्थान करती है.

    Friday, February 28, 2014

    आपकी मनोकामना पूरी होगी, ऐसा हमारा वरदान है

    आपकी मनोकामना पूरी होगी, ऐसा हमारा वरदान है


    शुभ-कामनायें सद-विचार से उत्पन्न होती हैं और सद-भावना से पूरी होती हैं.
    आप माल पाना चाहते हैं तो आप अपना माल ज़रूरतमंदों को देना शुरु कर दें. आपके पास गैबी तरीक़ों से बहुत सा माल आना शुरु हो जायेगा. यह हमारी आज़माई हुई बात है. अगर आप लोगों को ज़्यादा माल न दे सकें तो उस रब से दुआ करें कि वह उन ज़रूरतमंदों को अपने पास से बहुत सा माल दे.इस तरह भी आपकी सद्भावना प्रकट हो जागी और आपकी शुभ कामना पूरी हो जायेगी.
    रात को सोते समय और सुबह को उठते ही आप सबके भले के लिये दुआ करें और साथ ही अपने लिये भी करें. आपको हम याद आ जाएं तो हमारे लिये भी भलाई की दुआ ज़रूर करें. 40 दिन तक ऐसा ज़रूर करें. इसके बाद आपके दिल से महंगाई और अभाव का डर निकल जायेगा.

    Saturday, February 1, 2014

    खबरगंगा: आदिवासी पंचायतों की वैधानिकता का सवाल

    आदिवासी पंचायतों की वैधानिकता का सवाल

    वीरभूम जिले में पंचायत के  आदेश पर घटित सामुहिक बलात्कार कांड पर पश्चिम बंगाल के  राज्यपाल एमके० नारायणन ने देश भर में इस तरह के गैर कानूनी अदालत को  बंद करने की अपील की है 

    DEVENDRAउन्होंने यह अपील राज्यपाल की हैसियत से की है अथवा एक संवेदनशील भारतीय नागरिक की हैसियत से अपने अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार का प्रयोग करते हुए यह तो  पता नहीं लेकिन इसके  अंदर प्रशासनिक नज़रिये की जगह इस घटना से उपजा हुआ क्षोभ और आक्रोश ही दिखाई  पड़ रहा है। यदि उनकी अपील पर देश के  तमाम राज्यों  की सरकारें  अमल करती हैं तों ¨ यह सत्ता के विकेन्द्रीकरण की अवधारणा और पंचायती राज व्यवस्था की परिकल्पना के  विपरीत होगा ।
    निश्चित रूप से यह घटना अ्त्यंत निंदनीय, अमानवीय और  शर्मनाक है। इसकी जितनी भी भर्त्सना  की जाये कम है। लेकिन इस एक फैसले से किसी एक पूरी संस्था के  वजूद के   नकारा जाना उचित नहीं है। बल्कि इस संस्था की गड़बडियों के  दुरुस्त करने पर विचार किया जाना चाहिए। भुक्तभोगी आदिवासी युवती का दोष सिर्फ इतना था कि वह समुदाय के  बाहर के  युवक से प्रेम करती थी। प्रेम करना किसी मायने में अपराध की श्रेणी में नहीं आता। इक्कीसवीं सदी में भी इतनी दकियानुसी सोच  का विद्यमान होना  इस बात की अलामत है कि पिछड़े समाजों के  ऊपर उठाने की अबतक की तमाम सरकारी गैर सरकारी को¨शिशें व्यर्थ गई हैं।
    युवती का मां-बाप का दोष यह था कि वे गरीब थे और पंचायत के  25 हजार रुपये का दंड भरने की उनकी हैसियत नहीं थी। जाहिर तौर  पर पंच स्थानीय थे और उन्हें भुक्तभोगी परिवार की माली हालत की जानकारी रही होगी। फिर इतनी बड़ी रकम का दंड  लगाना उनकी कुत्सित मानसिकता का ही परिचायक था। माता पिता के  दंड भरने में असमर्थता जताने पर पंचायत ने आदिवासी युवती के  साथ सामुहिक बलात्कार का फरमान जारी कर दिया गया और  उसके आस पडोस के  ग्रामीण इसे अंजाम देने लगे। यह फरमान गैर कानूनी ही नहीं क्रूर और  पूरी तरह आपराधिक माना जाना चाहिए। इसे सामंती दबंगई का एक नमूना ही कहा जा सकता है। घटना के  कई दिन¨ बाद इस अपराध के लिए बलात्कार के 13 आरोपियों  के¨ न्यायिक हिरासत में लिया गया।
    गिरफ्तारी में विलंब होने पर जिले के पुलिस कप्तान का तबादला कर दिया गया। लेकिन उन पंचों के कटघरे में खड़ा नहीं किया गया जिन्होंने यह शर्मनाक फैसला सुनाया था। उनकी भी गिरफ्तारी हो¨नी चाहिए। उनपर भी मुकदमा चलाया जाना चाहिए। इस घटना के लिए वे भी उतना ही दोषी हैं जितना उनके फैसले के अमली जामा पहनाने वाले युवती के आस-पडोस  के ग्राणीण। यदि राज्यपाल महोदय ने फरमान जारी करने वाले पंचों  की भी गिरफ्तारी का आदेश दिया होता तो  इसका स्वागत किया जाता। इसका संदेश दूर-दूर तक जाता। पंचायती राज के लिए यह एक नज़ीर बनता। तमा्म जातीय पंचायतों  के गैर कानूनी करार दिया जाना कहीं से भी उचित नहीं है।
    आदिवासियों  की पड़हा पंचायत और  मानकी मुंडा प्रशासन के  ब्रिटिश सरकार के  जमाने में ही कानूनी मान्यता मिल गई थी। इसके लिए आदिवासी इलाके में कितने ही आंदोलन हुए। कुर्बानियां दी गईं। उन्हें एक सिरे से गैरकानूनी कहकर प्रतिबंधित कर देना न उचित है न संभव। जिस पंचायत ने यह क्रूर फैसला दिया उसकी कुछ न कुछ वैधानिक हैसियत तो अवश्य रही होगी। वे आदिवासियों  की पारंपरिक व्यवस्था के  तहत मान्यता प्राप्त पंच रहे हैं अथवा पंचायती राज व्यवस्था के  तहत चुने हुए मुखिया सरपंच। गांव समाज के खुद मुख्तार नेता रहे है अथवा ज¨ भी रहे है। उनका जो  भी स्वरूप रहा हो  लेकिन उन्हें पूरी तरह गैरकानूनी तो  नहीं करार दिया जा सकता।
    आदिवासी पंचायतें कठोर  दंड देने के  लिए जरूर चर्चे में रही हैं। उनके  यहां डायन-विसाही के आरोप  में महिलाओं  को  मैला पिलाने, नंगा घुमाने का चलन रहा है लेकिन स्त्रियों की आबरू से खेलना उनकी संस्कृति या पारंपरिक दंड संहिता में शामिल नहीं रहा है। संभवतः यह पहला मौका है जब पूर्वांचल के किसी आदिवासी पंचायत ने हरियाणा की खाफ पंचायतो  की तर्ज पर फैसला किया है। इसके  पीछे कौन सी मानसिकता काम कर रही थी। आदिवासी समाज के  अंदर यह विकृति किधर से आयातित है रही है, इस पर गंभीरतापूर्वक विचार किये जाने की जरूरत है।
    एक कड़वा सच यह भी है कि हमारे देश की न्याय व्यवस्था इतनी पेंचीदी है कि छोटे –छोटे  मामलें  का फैसला आने में भी कई-कई साल लग जाते हैं। न्याय मिलता भी है त¨ इतने विलंब से कि उससे संतुष्टि या असंतुष्टि के  भाव ही तिर¨हित ह¨ जाते हैं। फरियादी अदालते  के चक्कर लगाता-लगाता पूरी जवानी काटकर बूढ़ा है जाता है।
    कभी-कभी तो  फैसला आने तक उसकी आयु ही समाप्त है  जाती है। आरो¨पी भी जमानत पर घूमते-घूमते दंड पाने से पहले ही स्वर्ग सिधार जाते हैं। न मुद्दई बचता है न मुदालय। बच जाते हैं सिर्फ मुकदमें ज¨ तारीख दर तारीख खिंचते चले जाते हैं। क¨यलांचल क¢ बहुर्चिर्चत दास हत्याकांड का फैसला आने आने में कई दशक निकल गए थे। तब तक सारे मुख्य आरोपियों का देहांत हो  चुका था। उनकी जगह परिवादियों  की सूची में शामिल किये उनके  भाई बंधु आजीवन कारावास के  भागी बने। ऐसे सैकडों उदाहरण हैं।
    हमारी विलंबित न्याय प्रणाली के कारण ही नक्सल प्रभावित इलाका  में त्वरित फैसला करने वाली नक्सलियों  की जन अदालतें लगाकर  मान्य होती रही हैं। लोग अपनी फरियाद लेकर थाना और कोर्ट -कचहरी का चक्कर लगाने की जगह नक्सलियों  की कमेटियों  में अर्जी देने लगे हैं। उनका कई  वैधानिक अस्तित्व भले नहीं है  लेकिन उनके  इलाके में उनके प्रति एक किस्म की आस्था दिखाई देती है तो  यह हमारी न्याय प्रणाली की कमियों के  कारण ही। नक्सली न भारतीय संविधान के  मानते हैं न दंड संहिता के । उनका अपना अलग जंगल का कानून चलता है।
    ग्राम स्तर पर मिल बैठकर मामलों  के  निपटाने की यह क¨ई नई व्यवस्था नहीं है। यह परंपरा प्राचीन काल से ही भारत में प्रचलित रही है। यहां पंच के  परमेश्वर का दर्जा दिया जाता रहा है। महात्मा गांधी भी पंचायती राज व्यवस्था क¨ ग्राम स्वराज का आधार मानते थे। वे सत्ता के  विकेद्रीकरण के हिमायती थे। तमाम राजनैतिक पार्टियां ग्राम पंचायतों को शक्ति संपन्न बनाने की वकालत करती हैं।
    राज्यपाल महोदय ने जिस तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त की है वह सत्ता के केंद्रीकरण की दिशा में संकेत देता है। यह राजतंत्र अथवा तानाशाही की व्यवस्था में ही संभव है। ल¨कतांत्रिक व्यवस्था में विकेद्रीकरण का महत्व है। तब यह जरूरी है कि सत्ता की छो¨टी से छोटी इकाइयां भी एक नियम के तहत चलें। एक दंड विधान है  जिसका हर स्तर पर पालन है। अपराध और  सज़ा के बीच एक तारतम्य है । तमाम फैसले समाज के मान्य है ।
    गलत, पक्षपातपूर्ण, मनमाने और  विधान के विरुद्ध फैसले सुनाने वालों  पर कार्रवाई का प्रावधान भी होना चाहिए। मेहनत मजदूरी करके  गुजारा करने वालों  पर छोटी-छोटी गल्ती के लिए बड़ी-बड़ी राशियों  का आर्थिक दंड लादा जाना अराजकता और मनमानी का प्रतीक है।
    निश्चित रूप से विकेद्रीकरण अच्छी चीज है लेकिन इसके  नाम पर अराजकता और  वर्वरता के ¨ प्रश्रय नहीं दिया जा सकता। किसी युवती के  साथ सामुहिक बलात्कार करने का आदेश मध्ययुगीन बर्बर समाज¨ में भी नहीं दिया जाता था। यह पूरी तरह आपराधिक कृत्य है। ऐसा फरमान जारी करने करने वाले के  खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो  भविष्य में भी इस तरह के  फरमान जारी किये जा सकते हैं।
    लेकिन यदि किसी एक पंचायत ने अपने ही पंचायत की बेटी के साथ इस तरह का अमानुषिक फैसला दिया तो इसके  कारण आदिवासियों  की पूरी परंपरागत स्वशासन की व्यवस्था का  गैरकानूनी करार देकर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। उस पंचायती इकाई क¨ भले भंग कर दिया जाए लेकिन पूरी व्यवस्था के  ध्वस्त नहीं किया जा सकता।
    देवेंद्र गौतम 



    खबरगंगा: आदिवासी पंचायतों की वैधानिकता का सवाल

    Saturday, January 25, 2014

    Happiness cultivation कैसे करें ?


    डा. अनवर जमाल लेखकडा. अनवर जमालJan 25, 2014 11:56 AMसभी पोस्ट देखें

    ख़ुशी की खेती कैसे करें ?

    हम जब चाहे तब ख़ुश हो सकते हैं, जितना चाहे उतना ख़ुश हो सकते हैं और जब तक चाहे तब तक ख़ुश रह सकते हैं।  हमें ख़ुश करने वाला अगर कोई है तो वह हम ख़ुद हैं। हमें कोई हादसा दुख नहीं दे सकता। हमें कोई आदमी दुखी नहीं कर सकता। अगर हमें कोई दुखी कर सकता है तो...आगे पढ़ें...कोई कॉमेंट नहीं

    Thursday, January 23, 2014

    दौलत का ढेर लगा देने वाली दुआ, जो आसान भी है

    Dua for Prosperity

    ya Wah'habu
    It is one of most effective and powerful Wazifa for gaining rise in wealth. And the Barakah of this wazifa will continue to your generation even after your death. This is forever wazifa.
    Source: http://ruhani-amaliyat.blogspot.in/2014/01/very-very-effective-powerful-wazifa-for.html

    Monday, January 20, 2014

    महात्मा गांधी से भी ऊंचा एक व्यक्तित्व sarhadi gandhi

    महात्मा गांधी से भी ऊंचा एक व्यक्तित्व khan abdul gaffar khan

    DR. ANWER JAMAL at Hindi Bloggers Forum International (HBFI) - 46 seconds ago
    जब भी संघर्ष और वह भी जेल में रहकर संघर्ष करने की बात आती है, तो हम या तो महात्मा गांधी को याद करते हैं या नेल्सन मंडेला को या फिर आंग सान सू की को। गांधी को छह-सात वर्ष तक जेल में रहना पड़ा, सू की को 15 वर्ष तक और नेल्सन मंडेला को 27 वर्ष तक। लेकिन यह सब खान अब्दुल गफ्फार खान के संघर्ष के सामने कुछ नहीं, जिन्होंने अपने जीवन के पूरे 42 साल ब्रिटिश राज और फिर पाकिस्तान की जेलों में गुजार दिए। जेल में उनके समान कष्ट और यातनाएं भी किसी ने नहीं झेलीं। सरहदी सूबे की जेलों में तो अक्सर पैरों में लोहे की बेड़ी बंधी रहती थी। बादशाह खां और सीमांत गांधी जैसी उपाधियों से नवाजे गए खान अब्दुल गफ्...more »

    Wednesday, January 15, 2014

    मनुष्य की प्रजनन क्षमता बढ़ाने में रेड मीट मददगार garbhdharan

    लंदन। मांसाहार पसंद करने वालों के लिए यह एक अच्छी ख़बर हो सकती है। आहार विशेषज्ञों का कहना है कि रेड मीट में मिलने वाला पोषक तत्व प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है। उनके मुताबिक़ संतान की चाह रखने वाले दंपतियों के स्वास्थ्य के लिए रेड मीट लाभदायक साबित हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ...

    देखें-

    दैनिक हिन्दुस्तान दिनांक 13 जनवरी 2014 अंतिम पृष्ठ
    आयुर्वेद में रेड मीट के उपयोग का वर्णन देखकर प्राचीन काल के बड़े आर्य परिवारों का रहस्य आसानी से जाना जा सकता है। आर्य परिवार ही क्या ग़ैर आर्य परिवार भी रेड मीट का उपयोग करते थे और बड़ी उम्र तक संतान उत्पन्न करने में सक्षम रहते थे।
    उन सभी आर्य और ग़ैर आर्य पूर्वजों का धन्यवाद कि हम उन्हीं के पौरूष के कारण आज इस धरती पर मौजूद हैं।

    Friday, December 20, 2013

    Vitamin B 12 की कमी से होने वाली बीमारियों पर एक नई रिसर्च

    Vitamin B 12 की कमी से होने वाली बीमारियों पर एक रिपोर्ट
    डा. अनवर जमाल लेखकडा. अनवर जमालDec 20, 2013 11:42 AMसभी पोस्ट देखें

    शाकाहार सेहत की गारंटी नहीं है

    भारत में ज्यादातर लोग मांसाहारी हैं यानि कि ऐसे लोग हैं जो कि अनाज और सब्ज़ी के साथ अंडा, मुर्ग़ा, मछली और बकरा वग़ैरह का मांस खाते हैं। इनके दरम्यान एक छोटी सी तादाद ऐसे लोगों की भी है जो कि मुर्ग़ा-मछली वग़ैरह का मांस नहीं खाते लेकिन अंडा खा लेते हैं और कुछ इस...आगे पढ़ें... 

    Tuesday, December 17, 2013

    Gay Relationship पर ग़लत है Politics

    होमोसेक्सुअलिटी, एक मनोवैज्ञानिक विकृति Homosexuality and Indian Culture

    क्रिएटर के स्वाभाविक अधिकार को न मानकर आधुनिक पश्चिमी सभ्यता ने लोगों को आत्म-विस्मृति का शाप भोगने पर मजबूर कर दिया है। हमें उन्हें शाप से मुक्ति का उपाय बताना है न कि उनकी ही तरह शापित हो जाना है।
    उठो, जागो और वरदान के पात्र बनो!

    Read entire story and give your opinion on both of these blogs
    होमोसेक्सुअलिटी, एक मनोवैज्ञानिक विकृतिडा. अनवर जमाल   Tuesday December 17, 2013
    एक लेख के अनुसार भारत में लगभग 1 करोड़ समलैंगिक हैं। इनमें से कुछ लोग अपने अधिकार के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। ऊँची तालीम पाए हुए कुछ लोग इनकी वकालत कर रहे हैं। इनमें स्वामी अग्निवेश से लेकर आमिर ख़ान जैसी हस्तियों के नाम हैं। जबकि समलैंगिक संबंध आर्य समाज की नज़र...

    Friday, December 13, 2013

    Dutch Politician Accepts Islam अपने इस्लाम विरोधी अतीत पर मुझे अफसोस है: अनार्ड वॉन डूर्न

    बुनियाद

    ताज़ा पोस्ट

    अपने इस्लाम विरोधी अतीत पर मुझे अफसोस है: अनार्ड वॉन डूर्न
    डा. अनवर जमाल   Thursday December 12, 2013
    अपने इस्लाम विरोधी अतीत पर मुझे अफसोस है: अनार्ड वॉन डूर्न Dutch Politician Accepts Islam क्या ये संभव है कि जीवन भर आप जिस विचारधारा का विरोध करते आए हों एक मोड़ पर आकर आप उसके अनुनायी बन जाएं. कुछ ऐसा ही हुआ है  नीदरलैंड  में.   ...

    Tuesday, December 3, 2013

    जंकफूड की लत से बर्बाद हो रही है नई नस्ल

    हम यह देख-सुन रहे हैं कि औसत आयु बढ़ रही है, स्वास्थ्य और पोषण के बारे में जानकारी भी बढ़ रही है, पर यह भी सच है कि आजकल के बच्चे अपने माता-पिता की तुलना में कम फिट हैं। दुनिया के 28 देशों के आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद विशेषज्ञ इस नतीजे पर पहुंचे हैं। पिछले 50 वर्षों में ढाई करोड़ लोगों के फिटनेस-आंकड़ों की तुलना करने के बाद विशेषज्ञों का कहना है कि हर साल बच्चों में फिटनेस का स्तर पांच प्रतिशत गिर रहा है। एक मोटे अनुमान से आजकल के बच्चे एक मील दौड़ने में जितना वक्त लगाते हैं, उनके माता-पिता अपने बचपन में उससे औसतन 90 सेकंड कम वक्त में एक मील दौड़ लेते थे, यानी अंदाजन  बच्चों की रफ्तार में प्रति किलोमीटर एक मिनट बढ़ गया है। अध्ययन करने वाले लोगों का कहना है कि इसकी मुख्य वजह बच्चों में बढ़ता मोटापा है। ज्यादा खाना, फास्ट फूड का चलन और व्यायाम की कमी इस बात के लिए जिम्मेदार हैं। बचपन में फिटनेस की कमी वयस्क होने पर जीवनशैली की बीमारियां पैदा होने का खतरा बढ़ा देती है।

    दुनिया भर में फास्ट फूड के खिलाफ काफी जोरदार अभियान छिड़ा है, लेकिन उसका आकर्षण कम नहीं हो रहा। फास्ट फूड जितना चटपटा और स्वादिष्ट होता है, वह उतना पौष्टिक आहार नहीं हो सकता। उसका स्वादिष्ट होना ही सेहत के लिए उसके ठीक न होने का कारण है, क्योंकि उसे चटपटा बनाने के लिए उसमें नमक, चीनी और फैट जरूरत से ज्यादा मात्र में इस्तेमाल किए जाते हैं। इससे भी बड़ी समस्या व्यायाम की कमी है। जानकार बताते हैं कि व्यायाम का अर्थ जिम जाना या स्कूल की किसी खेल टीम का हिस्सा होना नहीं है। उनका कहना है कि इस तरह के व्यायाम के मुकाबले बच्चे दौड़-भाग करें, खुले में खेलें और ज्यादा देर बैठे न रहें, तो बचपन के मोटापे से और फिटनेस की कमी से मुकाबला किया जा सकता है। एक तथ्य यह है कि इंसान की औसत लंबाई बढ़ रही है। उन्नीसवीं शताब्दी के मुकाबले इंसान की औसत लंबाई अब लगभग छह इंच ज्यादा है।

    उन्नीसवीं शताब्दी में साढ़े पांच फीट की लंबाई अच्छी-खासी मानी जाती थी। लंबाई के साथ औसत वजन भी बढ़ा है और खासकर बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध के बाद दुनिया के कई हिस्सों में समृद्धि के बढ़ने व फास्ट फूड उद्योग के पनपने की वजह से मोटापा बढ़ा है। इन सब वजहों से भी फिटनेस पर असर हुआ है। परिवहन के साधनों की वजह से चलना और दौड़ना कम हो गया है। टेक्नोलॉजी ने वजन उठाने की जरूरत कम कर दी है। इसीलिए मध्ययुग के साढ़े पांच फीट के लोग जिन हथियारों से लड़ सकते थे, उनमें से कई आज के साढ़े छह फीट के हट्टे-कट्टे लोग उठा नहीं पाते। इनमें से कुछ बातों का तो कोई उपाय नहीं है, पर बच्चों को घर में टीवी व वीडियो गेम से हटाकर खुले में खेलने भेजना तो मुमकिन है।

    पुराने जमाने के लोगों में फिटनेस का स्तर बेहतर था, लेकिन चिकित्सा सुविधाएं न होने से औसत उम्र कम थी। अब अगर कोई व्यक्ति अपनी दो-तिहाई उम्र किसी लंबी बीमारी के साये में परहेज करते हुए और दवाएं खाते गुजारे, तो यह कितना कष्टप्रद होगा। आधुनिक विज्ञान ने बीमारियों के इलाज तो ढूंढ़े हैं, किंतु फिटनेस के तरीके वही पुराने हैं। अब खुली जगह भी कम है, सड़कें भी सुरक्षित नहीं, इसलिए बच्चों के खेलने और दौड़ने के लिए खुली जगहें छोड़ना शहरी नियोजन में अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही स्कूलों के लिए बच्चों की फिटनेस पर ध्यान देना जरूरी किया जाना चाहिए। बच्चा जिंदगी की राह पर तंदुरुस्ती के साथ चल सके, इसलिए बचपन में उसे दौड़ने-कूदने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है।
    Source:
    हिंदुस्तान २५ नवंबर २०१३ , संपादकीय पेज से साभार
    इस खबर की अहमियत को देखते हुए पूरा लेख पब्लिश किया जा रहा है बजाय सिर्फ़  के। अपने बच्चों को  लीजिये। 

    Monday, November 25, 2013

    जमाली चाय दे स्वर्गिक आनंद का अहसास Best Herbal Tea

    HBF International परजमाली चाय दे स्वर्गिक आनंद का अहसास Best Herbal Tea

  • Monday, November 25, 2013
  •  by 
  • DR. ANWER JAMAL

  • हम एक निराली चाय का सेवन करते हैं। एक बड़े कप के बराबर पानी में 10 दाने सौंफ़, 10 अजवायन, 1 ग्राम अदरक, 1 लौंग, 2 काली मिर्च फोड़कर, एक छोटी इलायची, 5-7 तुलसी के पत्ते, 1 छुहारा व 1 बादाम मोटा कतरकर हल्की आंच पर चन्द मिनट पका लेते हैं। इसे छानकर कप में निकाल लेते हैं। छलनी में से बादाम और छुहारे के पीस चम्मच से चुन चुन कर उठाकर कप में डाल लेते हैं। मिठास के लिए एक-दो चम्मच शहद मिलाते हैं। इस चाय को पीने के साथ हम बीच बीच में छुहारे और बादाम के पीस भी चम्मच से निकाल कर खाते रहते हैं। यह निराली चाय हमारे द्वारा विकसित किये जाने के कारण जमाली चाय के नाम से याद की जा सकती है।
    इसी लेख पर पाठकों के मज़ेदार कमेंट्स यहाँ देखिये Buniyad पर -
    http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/BUNIYAD/entry/ayurvedic-tea
    Ramesh only said
    आदाब अर्ज , आखिर जमाल साहब के स्टाइल को लम्बी छलांग दिला ही डाली...... अच्छा सटाइर और कुछ ज्ञान की बाते भी जैसे " इसके लिए बार बार अपने माईन्ड को डी-कन्डीशंड करते रहने की ज़रूरत है। " और इस बात ने " जो नियमित रूप से इसे पीता है। वह घरवाली को छोड़कर नहीं भाग सकता और घरवाली उसे छोड़कर नहीं भाग सकती।" वास्तव मे हंसा दिया | बधाई

    Thursday, November 21, 2013

    धर्म को विदा करो, विवेक को अपनाओ Hindi Story

    धर्म को विदा करो, विवेक को अपनाओ (कहानी)

  • Thursday, November 21, 2013
  •  by 
  • DR. ANWER JAMAL
  • ज्ञानतंत्र की रहस्यबोध कथाएं वैसे तो उनका नाम तुषार था लेकिन श्री श्री गजदन्त प्रवेश पीड़क देव जी महाराज ने उसका अनुवाद करके उसे सरल कर दिया था। वह उन्हें ओला कहकर बुलाते थे। ओला बाबू ग़ज़ब के पियक्कड़थे। जब वे पी लेते थे तो बाज़ारे हुस्न की तरफ़ उनके क़दम ख़ुद ब ख़ुद उठ जाते थे। घर पर भी उनकी गर्लफ़्रेंड सेलेकर ब्वायफ़्रेन्ड तक सभी...
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    ‘ब्लॉग की ख़बरें‘

    1- क्या है ब्लॉगर्स मीट वीकली ?
    http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_3391.html

    2- किसने की हैं कौन करेगा उनसे मोहब्बत हम से ज़्यादा ?
    http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

    3- क्या है प्यार का आवश्यक उपकरण ?
    http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

    4- एक दूसरे के अपराध क्षमा करो
    http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    5- इंसान का परिचय Introduction
    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/introduction.html

    6- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
    http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
    http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    8- बेवफा छोड़ के जाता है चला जा
    http://kunwarkusumesh.blogspot.com/2011/07/blog-post_11.html#comments

    9- इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक
    http://www.hamarianjuman.com/2011/07/blog-post.html

    10- दुआ की ताक़त The spiritual power
    http://ruhani-amaliyat.blogspot.com/2011/01/spiritual-power.html

    11- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
    http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    12- शकुन्तला प्रेस कार्यालय के बाहर लगा एक फ्लेक्स बोर्ड-4
    http://shakuntalapress.blogspot.com/

    13- वाह री, भारत सरकार, क्या खूब कहा
    http://bhadas.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

    14- वैश्विक हुआ फिरंगी संस्कृति का रोग ! (HIV Test ...)
    http://sb.samwaad.com/2011/07/blog-post_16.html

    15- अमीर मंदिर गरीब देश
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

    16- मोबाइल : प्यार का आवश्यक उपकरण Mobile
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/mobile.html

    17- आपकी तस्वीर कहीं पॉर्न वेबसाइट पे तो नहीं है?
    http://bezaban.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

    18- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम अब तक लागू नहीं
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

    19- दुनिया में सबसे ज्यादा शादियाँ करने वाला कौन है?
    इसका श्रेय भारत के ज़ियोना चाना को जाता है। मिजोरम के निवासी 64 वर्षीय जियोना चाना का परिवार 180 सदस्यों का है। उन्होंने 39 शादियाँ की हैं। इनके 94 बच्चे हैं, 14 पुत्रवधुएं और 33 नाती हैं। जियोना के पिता ने 50 शादियाँ की थीं। उसके घर में 100 से ज्यादा कमरे है और हर रोज भोजन में 30 मुर्गियाँ खर्च होती हैं।
    http://gyaankosh.blogspot.com/2011/07/blog-post_14.html

    20 - ब्लॉगर्स मीट अब ब्लॉग पर आयोजित हुआ करेगी और वह भी वीकली Bloggers' Meet Weekly
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/bloggers-meet-weekly.html

    21- इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
    http://www.sahityapremisangh.com/2011/07/blog-post_3678.html

    22- इसलाम में आर्थिक व्यवस्था के मार्गदर्शक सिद्धांत
    http://islamdharma.blogspot.com/2012/07/islamic-economics.html

    23- मेरी बिटिया सदफ स्कूल क्लास प्रतिनिधि का चुनाव जीती
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_2208.html

    24- कुरआन का चमत्कार

    25- ब्रह्मा अब्राहम इब्राहीम एक हैं?

    26- कमबख़्तो ! सीता माता को इल्ज़ाम न दो Greatness of Sita Mata

    27- राम को इल्ज़ाम न दो Part 1

    28- लक्ष्मण को इल्ज़ाम न दो

    29- हरेक समस्या का अंत, तुरंत

    30-
    अपने पड़ोसी को तकलीफ़ न दो
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    साहित्य की ताज़ा जानकारी

    1- युद्ध -लुईगी पिरांदेलो (मां-बेटे और बाप के ज़बर्दस्त तूफ़ानी जज़्बात का अनोखा बयान)
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    2- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
    http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    3- आतंकवादी कौन और इल्ज़ाम किस पर ? Taliban
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/taliban.html

    4- तनाव दूर करने की बजाय बढ़ाती है शराब
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    5- जानिए श्री कृष्ण जी के धर्म को अपने बुद्धि-विवेक से Krishna consciousness
    http://vedquran.blogspot.com/2011/07/krishna-consciousness.html

    6- समलैंगिकता और बलात्कार की घटनाएं क्यों अंजाम देते हैं जवान ? Rape
    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/rape.html

    7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
    http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    8- ख़ून बहाना जायज़ ही नहीं है किसी मुसलमान के लिए No Voilence
    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/no-voilence.html

    9- धर्म को उसके लक्षणों से पहचान कर अपनाइये कल्याण के लिए
    http://charchashalimanch.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    10- बाइबिल के रहस्य- क्षमा कीजिए शांति पाइए
    http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

    11- विश्व शांति और मानव एकता के लिए हज़रत अली की ज़िंदगी सचमुच एक आदर्श है
    http://dharmiksahity.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    12- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
    http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    13- ‘इस्लामी आतंकवाद‘ एक ग़लत शब्द है Terrorism or Peace, What is Islam
    http://commentsgarden.blogspot.com/2011/07/terrorism-or-peace-what-is-islam.html

    14- The real mission of Christ ईसा मसीह का मिशन क्या था ? और उसे किसने आकर पूरा किया ? - Anwer Jamal
    http://kuranved.blogspot.com/2010/10/real-mission-of-christ-anwer-jamal.html

    15- अल्लाह के विशेष गुण जो किसी सृष्टि में नहीं है.
    http://quranse.blogspot.com/2011/06/blog-post_12.html

    16- लघु नज्में ... ड़ा श्याम गुप्त...
    http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    17- आपको कौन लिंक कर रहा है ?, जानने के तरीके यह हैं
    http://techaggregator.blogspot.com/

    18- आदम-मनु हैं एक, बाप अपना भी कह ले -रविकर फैजाबादी

    19-मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत

    20- मौत कहते हैं जिसे वो ज़िन्दगी का होश है Death is life

    21- कल रात उसने सारे ख़तों को जला दिया -ग़ज़ल Gazal

    22- मोम का सा मिज़ाज है मेरा / मुझ पे इल्ज़ाम है कि पत्थर हूँ -'Anwer'

    23- दिल तो है लँगूर का

    24- लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी - Allama Iqbal

    25- विवाद -एक लघुकथा डा. अनवर जमाल की क़लम से Dispute (Short story)

    26- शीशा हमें तो आपको पत्थर कहा गया (ग़ज़ल)

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