Monday, December 31, 2012

हिंदी ब्लॉगिंग के सामने संकट का एक सच्चा विश्लेषण Blogger's Analysis

हिंदी ब्लॉगिंग का एक साल और गुज़र गया लेकिन  फिर भी 10 साल पूरे नहीं हुए। इसके बावजूद हिंदी ब्लॉगिंग के 10 वर्षीय उत्सव मना डाले गए। हिंदी ब्लॉगिंग की इस प्री-मेच्योर डिलीवरी या भ्रूण हत्या को पूरे ब्लॉग जगत ने देखा और सराहा। संवेदनशील काव्यकारों और बुद्धिकारों ने इसमें सक्रिय सहयोग दिया और बदले में सम्मान आदि पाया। इसमें जो ख़र्च आया, उसे भी सहर्ष स्वीकार किया गया और यह परंपरा आगे भी जारी रहे, इसके लिए वे प्रयासरत हैं। इस तरह नाम और शोहरत के ग्राहकों और सप्लायरों ने हिंदी ब्लॉगिंग का व्यापारीकरण कर दिया। यह एक दुखद घटना है और इससे भी ज़्यादा दुखद यह है कि सब कुछ जानते हुए भी लोग बाग डरे हुए हैं और टुकुर टुकुर चुपचाप देख रहे हैं। किसी को आगे सम्मान की इच्छा है और किसी को यह इच्छा है कि उसकी पोस्ट पर टिप्पणियां देने वाले बने रहें। इन्हीं में वे लोग हैं जो सम्मान की ख़रीद फ़रोख्त करते हैं।
हिंदी ब्लॉगिंग को नुक्सान पहुंचाने वाली दूसरी वजह गुटबाज़ी और सांप्रदायिक मानसिकता है। किसी विशेष विचारधारा वाले ब्लॉगर का हौसला पस्त करने के लिए हरसंभव तरीक़े इस्तेमाल किए गए और नतीजा कई प्रतिभाशाली ब्लॉगर के पलायन के रूप में सामने आया।
इन दो मूल कारणों से कई विकार सामने आए। मस्लन मठाधीश बनने की कोशिश की गई और इस चक्कर में मठाधीश ही आपस में टकरा कर अपना सिर फोड़ते रहे। डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और कवि आदि सभी ने इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।
इस चक्कर में वे ब्लॉगर पिस कर रह गए जो कि अच्छा लिखने आए थे और उन्होंने लिखा भी, लेकिन न तो वे किसी को गॉड फ़ादर बना पाए और न ही कमेंट बटोरने की कला में माहिर हो सके। इनसे बेनियाज़ (निरपेक्ष) भी वह न हो पाए क्योंकि अपनी कला का प्रदर्शन और सराहना एक साहित्यकार का पहला मक़सद होता है।
इसीलिए बहुत से हिंदी ब्लॉगर मैदान छोड़कर भाग गए। कोई चुपचाप निकल गया और ऐलान करके बता कर गया। जो भाग नहीं सकते या भाग नहीं पाए, वे अब भी जमे हुए हैं लेकिन लिखना उन्होंने भी पहले से कम कर दिया है।
कुछ नए ब्लॉगर भी मैदान में आए हैं, आते रहेंगे और जाते भी रहेंगे क्योंकि हिंदी ब्लॉगिंग से मोह भंग करने के कारण बदस्तूर मौजूद हैं और दूसरों के साथ हम इन घटनाओं के साक्षी हैं। फ़र्क़ सिर्फ़ यह है कि वे डरे हुए हैं और चुप हैं जबकि हम बेख़ौफ़ और बेबाक़ हैं।
हम बचाते ही रहे दीमक से अपना घर
चंद कीड़े कुर्सियों के मुल्क सारा खा गए

अल्लाह हमारा हामी व नासिर हो,
आमीन !!!


नया साल 2013 ब्लॉगर्स और ग़ैर-ब्लॉगर्स सबको मुबारक हो !

Saturday, December 29, 2012

‘मुझको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन'- ग़ालिब को खिराजे अक़ीदत

'बुनियाद' ब्लॉग पर

ग़ालिब को खिराजे अक़ीदत पेश करते हुए -
‘मुझको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन 
दिल के ख़ुश रखने को ग़ालिब यह ख़याल अच्छा है‘
नास्तिक लोग इस शेर को आख़िरत (परलोक) और जन्नत (स्वर्ग) के इनकार के लिए पेश करते हैं लेकिन जानना चाहिए कि इस शेर से मिर्ज़ा ग़ालिब कि मंशा जन्नत का इंकार करना नहीं था बल्कि बिना नेक अमल किये जन्नत पाने के ख़याल को गलत ठहराना था . इसीलिए मिर्ज़ा ग़ालिब ने कहा है कि
कोई उम्मीद बर नहीं आती/कोई सूरत नज़र नहीं आती
मौत का एक दिन मु'अय्यन है/नींद क्यों रात भर नहीं आती
आगे आती थी हाल-ए-दिल पे हँसी/अब किसी बात पर नहीं आती
जानता हूँ सवाब-ए-ता'अत-ओ-ज़ुहुद/पर तबीयत इधर नहीं आती 

27 दिसम्बर को मिर्ज़ा ग़ालिब की जयंती थी. मिर्ज़ा असद-उल्लाह बेग उर्फ “ग़ालिब” का जन्म 27 दिसम्बर 1776 को आगरा के एक परिवार में हुआ था। जिसकी पृष्ठभूमि सैनिक और राजनीतिक थी. वे उर्दू और फ़ारसी के महान शायर थे। आगरा, दिल्ली और कलकत्ता में अपनी ज़िन्दगी गुजारने वाले ग़ालिब को मुख्यतः उनकी ग़ज़लों को लिए याद किया जाता है। उन्हें उर्दू के ऐसे महान शायरों में गिना जाता है। जिनकी शोहरत समय के साथ बढती गयी. ग़ालिब (और असद) नाम से लिखने वाले मिर्ज़ा मुग़ल काल के आख़िरी शासक बहादुर शाह ज़फ़र के दरबारी कवि भी रहे थे। 1850 मे शहंशाह बहादुर शाह ज़फर द्वितीय ने मिर्ज़ा गालिब को "दबीर-उल-मुल्क" और "नज़्म-उद-दौला" के खिताब से नवाज़ा। बाद मे उन्हे "मिर्ज़ा नोशा" का खिताब भी मिला।
उन्होने अपने बारे में स्वयं लिखा था, 
हैं और भी दुनिया में सुखन्वर बहुत अच्छे
कहते हैं कि ग़ालिब का है अन्दाज़-ए बयां और

Friday, December 28, 2012

ब्लॉगिंग से मोह भंग की मूल वजह बताने में हिचकिचाहट कैसी ?


ब्लॉगिंग से मोह भंग की मूल वजह जो है उसे कहना समझदारी के खिलाफ़ समझ लेने से भी हिन्दी ब्लॉगिंग पर बुरा असर पड़ा है.
See:
डा. टी. एस. दराल साहब अपनी लम्बी पोस्ट में यह मूल वजह कितनी स्पष्ट कर पाए हैं ?
यह देखना आपका काम है .
अंतर्मंथन: 2012 -- ब्लॉगिंग की राह में मज़बूर हो गए --- हिंदी ब्लॉगिंग का कच्चा (चर्चा) चिट्ठा !

अब आप एक छोटी सी पोस्ट भी देखिये,  ब्लॉगिंग छोड़ने से पहले उन्होंने क्या कहा है ?


कमेन्ट माफिया 


आज कल हमारे ब्लॉग जगत पर एक अलग सा माफिया ग्रुप का कब्ज़ा हो गया। इस माफिया ग्रुप का नाम मैंने रखा हैं कमेन्ट माफिया या सी कंपनी भी कह सकते हैं।

कुछ लोगो का आपसी ग्रुप इतना मजबूत हो चूका हैं कि अगर किसी ब्लोगेर ने दादी कि सुनी हुई कहानी भी लिख दी तो ७०- ८० कमेन्ट तो मिल ही जाता हैं। और कुछ ब्लोगेर बंधू तो ऐसे हैं कि सिर्फ महिलावो के ब्लॉग पर ही टिप्पड़ी करेंगे। और कुछ कि तो बात ही अलग हैं।

कुछ बंधू तो nice लिख कर के चलते बनते हैं।

भाई लोग ऐसा क्यों करते हैं। मैंने बहुत से ऐसे ब्लॉग देखे हैं जिनमे बहुत सी अच्छी -अच्छी जानकारी दी गई, होती हैं, धर्म के उपर बहुत से ब्लॉग अच्छी जानकारी देते हैं। समाज के उपर हो या विज्ञानं के उपर लेकिन ऐसे लेख बिना पढ़े ही रह जाते हैं। आज कि राजनितिक हलचल हो या महंगाई , कोई नहीं जाता , बेचारा लिखने वाला भी सोचता हैं कि में क्या लिखू।

में अपनी बात ही कह दू, कि अगर मैं किसी कि बुराई करता नज़र आ जाऊ तो लोग दबा के टिप्पड़ी करेंगे लेकिन अगर कोई अच्छी बात लिखने लगु तो ऐसे लगता हैं कि साली टिप्पड़ी भी नासिक के प्याज के खेते से आ रही हैं।

खैर अब देखता हूँ।

Wednesday, December 26, 2012

‘आओ क़ुरआन और नमाज़ समझें‘ शिविर का आयोजन सकुषल संपन्न


‘अल्लाह ने क़ुरआन उतारे जाने का मक़सद उसमें ग़ौर व फ़िक्र करना और उससे नसीहत हासिल करना बताया है ताकि इंसान अपने दुष्मन षैतान के बहकावे में आकर बुरे काम करने से बच सके। इसीलिए क़ुरआन में कहा गया है कि हमने क़ुरआन को नसीहत हासिल करने के लिए और याद करने के लिए आसान कर दिया है, क़ुरआन की अरबी बहुत आसान है। इसे बहुत कम मेहनत से सीखा जा सकता है। जिससे नमाज़ में रोज़ाना बार बार पढ़ा जाने वाला क़ुरआन समझ में आने लगता है और इससे फ़ायदा यह होता है कि समझ में आने के बाद नमाज़ और क़ुरआन में भी दिल लगता है और एक नमाज़ी एक बेहतरीन इंसान बन जाता है। बार बार अल्लाह के हुक्म को सुनने के बाद उसके लिए ज़ुल्म ज़्यादती करना, किसी का हक़ मारना और गुनाह करना मुमकिन नहीं रहता।‘उक्त विचार जनाब अब्दुर्रहीम नईमुददीन साहब ने व्यक्त किए। वह ‘अंडरस्टैंड क़ुरआन एकेडमी, हैदराबाद‘ की ओर से मुस्लिम डिग्री कॉलिज मुरादाबाद में ‘आओ क़ुरआन और नमाज़ समझें‘ षीर्शक के अंतर्गत एक 4 दिवसीय प्रषिक्षण शिविर में 190 लोगों के सामने बोल रहे थे। दिनांक 23 दिसंबर 2012 से दि. 26 दिसंबर तक चलने वाले इस षिविर का आयोजन डा. नदीम हाषमी की ओर से किया गया। इस शिविर में ख़ालिद एडवोकेट, गुफ़रान अहमद सिददीक़ी, ज़ाहिद साहब, जव्वाद अहमद, साजिद अहमद, इक़बाल ज़फ़र, ख़ालिद भाई, बरकतुल्लाह, डा. एम रहमान, मुमताज़ आदि ने अपना सक्रिय सहयोग दिया। कॉलिज के प्रिंसिपल जमील अहमद ख़ां व सीनियर असिस्टेंट मैनेजर अनवर आलम लतीफ़ी के उत्तम प्रबंध को सराहते हुए षिविर में भाग लेने वालों ने जल्दी ही इस प्रोग्राम को फिर से करवाने की तमन्ना ज़ाहिर की। इस अवसर पर तुलनात्मक धार्मिक अध्ययन के लिए विष्व विख्यात विद्वान सैयद अब्दुल्लाह तारिक़ व रूहानी षैख़ सैयद हफ़ीज़ अहमद नक्षबंदी भी मौजूद थे। जनाब अब्दुर्रहीम नईमुददीन साहब ने नगर के बुद्धिजीवियों व विभिन्न स्कूलों के प्रधानाचार्यों  के सामने एक अलग सत्र में अपने इस कोर्स की विषेशताओं पर एक विस्तृत लेक्चर देकर स्कूल पाठयक्रम में इसे पढ़ाए जाने की आवष्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि 3 खंडों में सिखाया जाने वाला यह कोर्स मदरसों के परंपरागत पाठ्यक्रम से अलग है और आधुनिक वैज्ञानिक षोध पर आधारित है। यह कोर्स विष्व की 18 भाशाओं में  उपलब्ध है और दुनिया के बहुत से देशों  में इसे स्कूलों में पढ़ाया जा रहा है। 


http://www.facebook.com/notes/anwer-jamal-khan/%E0%A4%86%E0%A4%93-%E0%A4%95%E0%A4%BC%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%86%E0%A4%A8-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BC-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%9D%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A4%B2-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8/235720926561560?comment_id=991766&notif_t=note_comment

Tuesday, December 25, 2012

दिल्ली गैंगरेप- आंदोलन नहीं पागलपन, समाज की ज़िम्मेदारी क्या और कितनी ?

अरुणेश दवे लिखते हैं -
"हमारे नेता नपुंसक है", "हमारी पुलिस नपुंसक है" "बलात्कारी को फ़ांसी दो" का नारा लगाने वालो से मै पूछना चाहता हूं कि कहा से आये है ये लोग? इन बलात्कारियों को इसी समाज ने पैदा किया है और नेताओ को भी। और मनोविकार पैदा कौन कर रहा है? जापानी तेल और लिंग वर्धक यंत्र का विज्ञापन कौन छापता है नेता या मीडिया? पुरूष जीन्स के विज्ञापन में अर्धनग्न महिला का फ़ोटो कौन दिखाता है नेता या मीडिया ? महिलाओ के जिस्म की नुमाइश कर अपना माल बेचने वाले बाजार को माध्यम कौन दे रहा है नेता कि मीडिया ??? अपने उकसाये आंदोलन के इस हिंसा के दौर में पहुंचने पर लोगो से शांती और अहिंसा की अपील कर रहे मीडिया ने पत्रकारिता नैतिकता और ढोंग की सारी हदें पार कर दी हैं। खाप पंचायत वाले अपनी बेटियों को जब इस बाजारवाद के दुष्परिणामो से बचाने की कोशिश करते तो यही मीडिया उनको तालीबान करार देता है। फ़ांसी की सजा ही एक समाधान हो सकता है पर इस देश में कानून का कितना दुरूपयोग होता है यह भी किसी से छुपा नही है।

दिल्ली गैंगरेप- आंदोलन नहीं पागलपन

लिंक - http://aruneshdave.blogspot.in/2012/12/blog-post_23.html?showComment=1356444405301#c2566775432981347120

Wednesday, December 19, 2012

दीन के नाम पर दुकानदारी The Great Sin


दीन के नाम पर दुकानदारी करने वाले मुल्लाओं की एक कारस्तानी The Sin

इसलाम एक चेतना है, क़ुरआन व सीरत पढ़कर इसे अपने अंदर ख़ुद जगाना पड़ता है। यह चेतना न जागे तो इसलाम महज़ कुछ निर्जीव परम्पराओं का समूह बन कर रह जाता है और जाहिल लोग इसलाम का नाम लेकर अपनी चौधराहट क़ायम कर लेते हैं। लोग इन्हें अपना नेता, पीर और क़ाज़ी समझते हैं। ये लोग उन ग़रीबों से भी धन ऐंठ लेते हैं, जिन्हें कि ज़कात व सदक़ा दिया जाना चाहिए। आम मुसलमान को क़ुरआन, मदरसे और मस्जिद से अक़ीदत (श्रद्धा) होती है। ये मुफ़्तख़ोर चौधरी मुसलमानों की अक़ीदत का फ़ायदा उठाते हैं। इसलाम और मुसलमानों को दुनिया में बदनाम करने वाले यही हैं। 
सोहराब अली द्वारा लिखित मुईनुददीन और मरियम का वाक़या ऐसे ही ज़रपरस्तों को बेनक़ाब करता है.

इस्लाम को कलंकित करने वाला फरमान

ऐसा लगता है कि आजकल इस्लाम को बदनाम करने का ठेका स़िर्फ मुसलमानों ने ले रखा है. न स़िर्फ दुनिया के तमाम देशोंबल्कि भारत से भी अक्सर ऐसे समाचार मिलते रहते हैंजिनसे इस्लाम बदनाम होता है और मुसलमानों का सिर नीचा होता है.

Tuesday, December 18, 2012

उर्दू जानने वालों के लिए एक भेंट Book Set Christianity & Tauheed

उर्दू जानने वालों के लिए एक भेंट

Iqbal Seth added a photo from December 18, 2012 to his timeline.
christmas पर जिधर यह शांता कलाज देखें पूछें where are you in the Bible? और फिर हमें बताएं

مطالعہ مسیحیت ہے اس موضوع سے متعلقہ تمام اسلامی مکاتب فکر کی تحریرات آپ کو یہاں مل سکیں گی ۔
http://only1or3.com/books.html
christmas पर जिधर यह शांता कलाज देखें पूछें where are you in the Bible? और फिर हमें बताएं

مطالعہ مسیحیت ہے اس موضوع سے متعلقہ تمام اسلامی مکاتب فکر کی تحریرات آپ کو یہاں مل سکیں گی ۔
http://only1or3.com/books.html

Merry christmas you are agreeing that jesus christ was born on the 25th of December and your are agreeint htat he is the begotten sonof God....
 shirk (Picture)
http://www.facebook.com/photo.php?fbid=243285085745074&set=a.243284192411830.57419.176316369108613&type=1&relevant_count=1

can God ever take Birth? Picture
http://www.facebook.com/photo.php?fbid=243284195745163&set=a.243284192411830.57419.176316369108613&type=1&relevant_count=1

where are you in the bible?  Picture 
www.facebook.com/photo.php?fbid=243284589078457&set=a.243284192411830.57419.176316369108613&type=1&relevant_count=1

Monday, December 10, 2012

किसी मुसलमान द्वारा फतवा हासिल किया जाता है और उसका समाचार पत्रों और टीवी पर जिस तरह से शोर शराबा किया जाता है उसका कोई मतलब नहीं होता है-आशुतोष शुक्ल Fatwa in Islam

पूरा लेख यहाँ पढ़ें -

फतवा ज़रूरी या स्वैच्छिक ?


किसी मसले पर जहाँ पर किसी मुसलमान की समझ में कुछ नहीं आता है कि कहीं उसके द्वारा किया जाने वाला कोई काम इस्लामिक मूल्यों पर ग़लत न हो तो वह मुफ्ती और उलेमा की राय मांगने के लिए स्वतंत्र है पर साथ ही यह भी देखना चाहिए कि उस व्यक्ति की परिस्थितियां क्या थीं और किस तरह से उसने काम किया है ? हर स्थान पर परिस्थितयां भिन्न हो सकती है और किसी एक फतवे को सभी पर बाध्यकारी नहीं बनाया जा सकता है तभी इस्लाम में फतवे को बाध्यकारी बनाने की जगह स्वैच्छिक बनाया गया है. यह इस्लाम की राह पर चलने का सही रास्ता तो बताता ही है साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि इस्लाम के अनुयायी किस तरह से अपने जीवन को सही ढंग से जी पाएं. आज जिस तरह से पत्रकारिता की जाती है उसमें भी किसी भी फतवे को लेकर बहुत कुछ कहा जाता है जबकि उसके पूरे सन्दर्भ का ज़िक्र भी नहीं किया जाता है. किसी भी फतवे को लेकर जब भी कुछ छपता है तो लोग उसके असली पहलू को समझने के स्थान पर अपने ढंग से उसकी भी व्याख्या करना शुरू कर देते हैं. अब सही समय है कि इस्लामिक शिक्षा केन्द्रों को केवल मुसलमानों के लिए ही नहीं बल्कि इस्लाम के मूल्यों की सही जानकारी सभी तक पहुँचाने के लिए सही दिशा में प्रयास करने चाहिए जिससे इस तरह के किसी फतवे को लेकर अनावश्यक रूप से सनसनी फ़ैलाने का काम न किया जा सके.  

Friday, December 7, 2012

हिन्दुत्व के 20 हजार करोड़ रुपये


हिन्दुत्व के 20 हजार करोड़ रुपये



रणधीर सिंह सुमन
हिन्दुत्ववादी संगठन व उसकी सोच वाले लोग हर समय कांग्रेसी भ्रष्टाचार को कोसते रहते हैं लेकिन उनकी निगाहें अपनी तरफ कभी नहीं होती हैं। 

Thursday, December 6, 2012

अवाम को लूटने वाले उलमा और पीरों की हक़ीक़त

दीन को मज़हब और मज़हब को पेशा बनाकर अवाम को गुमराह करने वाले, उसे लूटने वाले उलमा और पीरों की हक़ीक़त-एक रिपोर्ट
DR. ANWER JAMAL at इसलाम धर्म - 19 hours ago
Allama S. Abdullah tariq sahab Masjid me Namaze Juma ada karane ke baadअल्लामा सैयद अब्दुल्लाह तारिक़ साहब रियासत रामपुर में रहते हैं और दीन का काम करते हैं। इसलाम को उन्होंने ‘डिस्कवर‘ किया है। इसलाम को डिस्कवर करने का मतलब यह है कि उन्होंने बरसों बरस इसलाम को समझने में लगाए हैं और जब वह समझ गए तो फिर उन्होंने अपनी ज़िंदगी दीन को समझाने के लिए ही वक्फ़... More »
और इसी पोस्ट को 'बुनियाद' पर भी देखें-
अवाम को लूटने वाले उलमा और पीरों की हक़ीक़त
दीन को मज़हब और मज़हब को पेशा बनाकर अवाम को गुमराह करने वाले, उसे लूटने वाले उलमा और पीरों की हक़ीक़त-एक रिपोर्ट  Allama S. Abdullah tariq sahab Masjid me Namaze Juma ada karane ke baad, 
आगे पढ़ें...

Monday, December 3, 2012

भारतीय गाय के प्रति 'उसके अपनों' का व्यवहार 'Goraksha & Gohatya'

गाय के प्रति अपनी चिंता जताते हुए

मुझे याद है कि जब मैं छोटा था और कुछ वर्ष गाँव में ही रहते हुए यह देखता था कि गाय जब बूढ़ी हो जाती थी और दूध देना बंद कर देती थी तो हिन्दू,जो गाय को माता की संज्ञा देते हैं, ही उसे कसाई को बेच अपना पिंड छुड़ा कर आ जाते थे और ऐसा गाँवों में आजकल भी निरंतर हो रहा है...
आपने एक सार्थक पोस्ट लिखी इसके लिए शुभकामनाएं...

देखें पूरी पोस्ट निम्न लिंक पर -


गायें खा रही हैं "गौमांस" और इंसान.....


Saturday, December 1, 2012

इस्लाम की नज़र में ग़ैर मुस्लिमों के अधिकार Jaziya


लेखक: नकीबुल हक

हिन्दू भाई, इस्लाम की नज़र में


टर्निंग पॉइंट 
मुआहिदा हलफ़ अलफ़ज़ोल में बनू हाशिम, बनू मुत्तलिब, बनू ज़ोहरा और बनू तमीम शामिल थे,  इसके मेम्बरान ने भी इस बात का इक़रार किया कि हम मुल्क से बदअमनी दूर करेंगे। मुसाफ़िरों की हिफ़ाज़त करेंगे, ग़रीबों की इमदाद करते रहेंगे, ज़बरदस्त को ज़ेर दस्त पर ज़ुल्म करने से रोका करेंगे। रियासत मदीना में जो दफ़आत मुरत्तिब हुईं उनका ख़ुलासा ये है:
(1)          तमाम मुसलमान एक दूसरे को रज़ाकार समझेंगे।
(2)          मदीना में रहते हुए ग़ैर मुस्लिमीन को मज़हबी आज़ादी हासिल होगी ।
(3)          मदीना का दिफ़ा जिस तरह मुसलमान अपना हक़ समझते हैं इसी तरह ग़ैर मुस्लिमीन पर भी ये ज़िम्मेदारी आइद हुई है ।
(4)          ख़ारिजी हमले के वक़्त तमाम अफ़राद मदीना का दिफ़ा करेंगे।
(5)          हर क़ातिल मुस्तहिक़े सज़ा होगा।
(6)          तमद्दुन और सक़ाफ़ती मुआमलात में ग़ैर मुस्लिमीन को मसावी हुक़ूक़ दिए जाऐंगे।
(7)          ग़ैर मुस्लिमीन और मुसलमान एक दूसरे एक के हलीफ़ हैं, वक़्त ज़रूरत एक दूसरे की मदद करेंगे।
(8)          अगर दोनों क़ौमों पर कोई हमला करता है तो एक दूसरे का साथ देंगे।
(9)          ग़ैर मुस्लिमीन और मुसलमानों में इख़्तेलाफ़ की नौबत आ जाती है तो मुआमला दरबारे रिसालत सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम में पेश किया जाएगा और मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम का आख़िरी और क़तई फ़ैसला मंज़ूर होगा।
(10)        ग़ैर मुस्लिमीन के ज़ाती मुआमलात में दख़ल अंदाज़ी नहीं की जाएगी।
(11)        तमाम तब्क़ात को मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की सियादत व क़यादत तस्लीम नहीं की जाएगी। इन हुक़ूक़ से अंदाज़ा होता है कि यक़ीनन रियासत मदीना मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की सियासी बसीरत की आला तरीन मिसाल है, क्योंकि सहराए अरब के उम्मी नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने उस वक़्त दुनिया को सबसे पहले जामे तहरीरी दस्तूर से मुतआर्रिफ़ कराया जब अभी दुनिया की सियासत आईन या दस्तूर से नाआशना थी। मग़रिबी दुनिया का आईन दस्तूरी सफ़र 1212 ईस्वी में शुरू हुआ जब शाह इंग्लिस्तान (King Jahn) ने मह्ज़र कबीर (Magnacarta) पर दस्तख़त किए जबकि इससे 593 साल क़ब्ल जामे तरीन तहरीरी दस्तूर दुनिया को दिया जा चुका है। इसके बाद 16 दिसंबर 1686 में Bill of Right 1700-1 में the act of settlement और 1911 में The Parliament Act  को इख़्तियार किया गया और अमेरिका का Convention Constitution 1787 में और फ़्रांस में क़ौमी असेम्बली ने आईन को मंज़ूरी 1791 में दी। मग़रिब का ये दस्तूर  सफ़र 1215 में शुरू हो चुका था, मगर आम आदमी तक इसके असरात पहुंचने में सदियां गुज़र गईं जबकि एक 1 हिजरी रियासत मदीना से शुरू होने वाला इस्लाम का सियासी व आईनी सफ़र 10 साल के कम अर्से में अपने मुंतहाए कमाल को पहुंच गया।
आज हम देखते हैं कि तरक़्क़ी याफ़्ता ममालिक के दसातीर में अमेरीका के दस्तूर को 7000 अल्फ़ाज़ का मुख़्तसर तरीन मिसाली दस्तूर क़रार दिया जाता है, मगर सवा चौदह सौ साल क़ब्ल मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम का दिया हुआ 730 अल्फ़ाज़ पर मुश्तमिल मीसाक़े मदीना इससे कहीं ज़्यादा जामे, मोअस्सर और मोकम्मल दस्तूर है जिसमें तमाम तब्क़ात के हुक़ूक़ का तहफ़्फ़ुज़ किया गया है मुख़्तलिफ़ रियासती वज़ाइफ़ की अदायगी का तरीकएकार तय कर दिया गया है।
रियासत मदीना के ज़िम्न में ये बात अर्ज़ की जा सकती है कि इन ममालिक में जहां मुसलमानों के अलावा दूसरी कौमें रहती और बसती हैं और एक मज़हब के बजाय कई मज़ाहिब और एक क़ौमियत के बजाय कई क़ौमों के लोग एक साथ रहते हैं तो ऐसे ममालिक में अक़ल्लियतों ख़ुसूसन मुस्लिम अक़ल्लियत अपने हुक़ूक़ की बाज़याबी के लिए रियासत मदीना को उस्वए कामला समझे, क्योंकि अग़यार व एदा के दरमियान में रह कर जिन मुश्किलात व मसाइब का आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने मुक़ाबला किया और जिस तरह सब्र व इस्तेक़ामत और हिक्मत व मस्लेहत के साथ इस्लाम का पैग़ाम पहुंचाया इससे बढ़ कर और कोई क़ाबिले तक़्लीद अमल नहीं हो सकता। रसूले करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की दावती ज़िंदगी में एक मर्हला जो तक़रीबन नज़रअंदाज किया जाता है, वो रियासत मदीना का जो आलमे इंसानियत की अज़मत रफ़्ता की बाज़याबी का अहम सबब है।
नबी करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने अपनी मसाईए जमीला, हिक्मत व मस्लेहत के ज़रिए किस तरह एदाए इस्लाम को सुरंगों कर लिया और फ़ुतूहात का दरवाज़ा वसी से वसीतर होता चला गया। बड़े दर्द और कर्ब के साथ ये कहना पड़ रहा है कि आज हिंदुस्तान में अक़ल्लियतों बिलख़सूस मुस्लिम अक़ल्लियत के अंदर मुआमलाफह्मी,  दूर अंदेशी,  दानिश व बीनिश, हिक्मत व मस्लेहत और सियासी बसीरत का फ़ुक़दान है जिसकी बिना पर मुस्लिम अक़ल्लियत का अभी तक कोई मुतालिबा पूरा नहीं किया गया। हुकूमतें आती जाती रहीं मगर आज तक उनकी बुनियादी मसाइल पर अमल दर आमद किसी ने नहीं किया। हाँ अक़ल्लियतों के हुक़ूक़ की बाज़याबी के लिए एसोसिएशन, कमीशन, कमेटियां तश्कील तो की गईं मगर उनको अमलीजामा नहीं पहनाया गया।
हसरत होती है अर्बाबे इक़्तेदार की दग़ाबाज़ियों, चालबाज़ियों, मक्कारियों, अय्यारियों और मक्र व फरेब पर कि वो हमें सब्ज़बाग़ दिखा कर आज तक हमारे हुक़ूक़ का इस्तेहसाल करते रहे। इसलिए मर्कज़ी और रियास्ती हुकूमतों के लिए रियासत मदीना ताज़ियानए इबरत है कि सेकूलर मुल्क में किस तरह अक़ल्लियत और अक्सरीयत के हुक़ूक़ व फ़राइज़ का एहतेमाम किया जाता है। साथ साथ ये भी अर्ज़ कर दूँ कि आज हमारे इदारों, मदारिस,  ख़ानक़ाहों और जामिआत में अफ़राद साज़ी, किरदार साज़ी और तर्बियत पर कम तवज्जो दी जा रही है जबकि आज आलमे इंसानियत को मुहज़्ज़ब, शाइस्ता, संजीदा, लायक़, दूरबीं, दूर रस और तर्बियत याफ़्ता अफ़राद की ज़रूरत है कि जो उम्मत के मर्ज़ की सही तशख़ीस कर सकें। रियासत मदीना से हमें ये सबक़ मिलता है कि हम जज़्बात से कम हिक्मत व मसलहेत से ज़्यादा काम लें। ये आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की आला तरीन सियासी बसीरत का शाहकार है कि चंद बरसों में एदाए इस्लाम की साज़िशें, मंसूबे, कोशिशें और औहाम व ख़्यालात ख़ाकसतर हो गए और उन्हें ख़ुद मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की क़यादत और मुसलमानों का एक वजूद तस्लीम करना पड़ा। अगर हम मौजूदा दौर में इन दरख़शां आईन व क़वानीन को नजरअंदाज़ करके अपने हुक़ूक़ की बक़ा व तहफ़्फ़ुज़ की जंग लड़ते रहे तो हमारी पसपाई, नामुरादी मायूसी यक़ीनी है, क्योंकि इस्लाम ने इबादत से ज़्यादा ज़ोर सियासत, मुआमलात, अख़लाक़ियात, संजीदगी, फ़हम व शाऊर और सियासी सूझ बूझ पर दिया है और बातिल परस्तों को महवे हैरत और शुशदर बना दिया और ये साबित कर दिया कि तंग व तारीक दौर में बक़ा सिर्फ़ मिल्लते इस्लामिया की हो सकती है। अगर नबी करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ये मुनज़्ज़म लाइहे अमल तैय्यार ना करते तो जज़ीरतुल अरब तक ही ये उसूल व ज़वाबित महदूद रहते लेकिन नबी करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के सारे उसूल पूरे आलम के लिए लाइहे अमल और मशअले राह हैं। आज के वो मुमालिक जहां हुकूमतें अक्सरीयत दूसरे मज़ाहिब के हामिलीन की है और मुसलमान वहां अक़ल्लियत की हैसियत से जी रहे हैं तो वो रियासत मदीना और सीरत तैय्यबा के तनाज़ुर में रहनुमाई हासिल करें और पुर अमन ज़िंदगी गुज़ारने का मक़सद तैय्यार करके, मुल्क के आईन और अदालत से हक़ हासिल कर सकते हैं और अपने हुक़ूक़ व फ़राइज़ को यक़ीनी बना सकते हैं ।

Thursday, November 29, 2012

ग़ज़लगंगा.dg: काटने लगता है अपना ही मकां शाम के बाद

यूं  तेरी यादों की कश्ती है रवां शाम के बाद.
जैसे वीरान जज़ीरे में धुआं शाम के बाद.

चंद लम्हे जो  गुजारे थे तेरे साथ कभी
ढूंढ़ता हूं उन्हीं लम्हों के निशां शाम के बाद.

एक-एक करके हरेक जख्म उभर आता है
दिल के जज़्बात भी होते हैं जवां शाम के बाद.

Read more: http://www.gazalganga.in/2012/11/blog-post_9373.html#ixzz2Db9P0l4m
ग़ज़लगंगा.dg: काटने लगता है अपना ही मकां शाम के बाद:

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Monday, November 26, 2012

इमाम हुसैन: सच्चाई जिनके दम से आज तक क़ायम है Imam husain, Shah e Karbala





(इमाम हुसैन र. को खि़राजे अक़ीदत का नज़राना सभी लोग पेश करते हैं। इस ब्लॉग के सभी  सदस्यों की तरफ़ से यह कलाम 10 मुहर्रम की निस्बत से ‘मुशायरा‘ ब्लॉग पर पेश किया जा रहा है।)

दोनों जहां मे ख़ास है अज़्मत हुसैन की

ज़हरा के घर में चांद जो चमका हुसैन का
वो परतौ ए रसूल था चेहरा हुसैन का
लेने लगे बलाएं फिर अर्ज़ो-समा सभी
दोनों जहां के लब पे था चर्चा हुसैन का

ज़हरा के लाडले हैं इब्ने अली हुसैन
2 days ago


Saturday, November 24, 2012

कर्बला : इमाम हुसैन की शहादत को श्रद्धांजलि Imam Hasain & Moharram


इंदौर की अर्चना जी का शुक्रिया जिन्होंने इस पोस्ट को बेहतरीन अंदाज़ मैं पढ़ा.. आप सब भी सुने.
Moharram 2010 Layout (1)
इमाम हुसैन की शहादत को नमन करते हुए हमारी ओर से श्रद्धांजलि…इस लेख़ के ज़रिये मैंने एक कोशिश की है  यह बताने की के धर्म कोई भी हो जब यह राजशाही , बादशाहों, नेताओं का ग़ुलाम बन जाता है तोज़ुल्म और नफरत फैलाता    है और जब यह अपनी असल शक्ल मैं रहता है तो, पैग़ाम ए मुहब्बत "अमन का पैग़ाम " बन जाता है.  …..एस0 एम0 मासूम 
'हिन्दी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेश्नल' पर 

Friday, November 23, 2012

सज़ा ए मौत Kasab ko phansi


हिन्दुस्तान में सज़ा ए मौत बाक़ी रहे या इसे ख़त्म कर दिया जाए ? Kasab:Hang Till Death

  • Thursday, November 22, 2012
  •  by 
  • DR. ANWER JAMAL
  • इस पर एक लंबे अर्से से विचार चल रहा है। 21 नवंबर 2012 को कसाब को फांसी दिए जाने के बाद एक बार फिर यह मुददा उठाया जा सकता है। उसे फांसी दिए जाने से 2 दिन पहले ही संयुक्त महासभा कि मानवाधिकार समिति दुनिया भर में सज़ा ए मौत को ख़त्म करने का प्रस्ताव पास किया था। दुनिया के 140 देश सज़ा ए मौत ख़त्म कर चुके हैं और अब सिर्फ़ 58 देश ही यह सज़ा...
    हरेक समस्या का हल मौजूद है लेकिन हमें समस्या के मूल तक पहुंचना होगा। शरीफ़ लोग जी सकें इसलिए ख़ून के प्यासे इंसाननुमा दरिंदों को मरना ही चाहिए।

    Tuesday, November 20, 2012

    ग़ज़लगंगा.dg: उठते-उठते उठता है तूफ़ान कोई

    ग़ज़लगंगा.dg: हैवानों की बस्ती में इंसान कोई.
    भूले भटके आ पहुंचा नादान कोई.

    कहां गए वो कव्वे जो बतलाते थे
    घर में आनेवाला है मेहमान कोई.

    जाने क्यों जाना-पहचाना लगता है
    जब भी मिलता है मुझको अनजान कोई.

    इस तर्ह बेचैन है अपना मन जैसे
    दरिया की तह में उठता तूफ़ान कोई.

    अपनी जेब टटोल के देखो क्या कुछ है
    घटा हुआ है फिर घर में सामान कोई.

    धीरे-धीरे गर्मी सर पे चढ़ती है
    उठते-उठते उठता है तूफ़ान कोई.

    कितना मुश्किल होता है पूरा करना
    काम अगर मिल जाता है आसान कोई.

    सबसे कटकर जीना कोई जीना है
    मिल-जुल कर रहने में है अपमान कोई?

    उसके आगे मर्ज़ी किसकी चलती है
    किस्मत से भी होता है बलवान कोई?

    --देवेंद्र गौतम

    उठते-उठते उठता है तूफ़ान कोई:

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    आखिर हमारी फ्रीडम आफ स्पीच आज कितनी सुरक्षित है ?

    'जिज्ञासा' ब्लॉग पर 
    जस्टिस मार्कंडेय काटजू के फेसबुक वॉल से
    Letter to Maharashtra CM on arrest of the young girl for her facebook status.
    To,
    The Chief Minister
    Maharashtra
    Dear Chief Minister,
    I am forwarding an email I have received stating that a woman in Maharashtra has been arrested for protesting on Facebook against the shut down in Mumbai on the occasion of the death of Mr. Bal Thackeray. It is alleged that she has been arrested for
    allegedly hurting religious sentiments.

    To my mind it is absurd to say that protesting against a bandh hurts religious sentiments. Under Article 19(1)(a) of our Constitution freedom of speech is a guaranteed fundamental right . We are living in a democracy, not a fascist dictatorship. In fact this arrest itself appears to be a criminal act since under sections 341 and 342 it is a crime to wrongfully arrest or wrongfully confine someone who has committed no crime.

    Hence if the facts reported are correct, I request you to immediately order the suspension, arrest, chargesheeting and criminal prosecution of the police personnel (however high they may be) who ordered as well as implemented the arrest of that woman, failing which I will deem it that you as Chief Minister are unable to run the state in a democratic manner as envisaged by the Constitution to which you have taken oath, and then the legal consequences will follow

    Regards
    Justice Katju
    (Chairman, Press Council of India, and former Judge, Supreme Court of India)
     
    भारत में अभिव्यक्ति की आजादी कितनी सुरक्षित है इसका एक नमूना देखिये. बाला साहब ठाकरे के निधन पर एक फेसबुक यूजर Shaheen Dhada ने फेसबुक स्टेटस लिखा और उसकी दोस्त Renu Srinivasan ने उसे शेयर कर दिया. शिवसैनिक भड़क उठे और लड़की को जबरन पुलिस स्टेशन ले आए. साथ ही शाहीन के चाचा के अस्पताल पर धावा बोल दिया और हास्पिटल को बुरी तरह से बर्बाद कर दिया. शाहीन और रेनू को सारी रात पुलिस स्टेशन में बैठना पड़ा. 
    सुबह कोर्ट में पेशी हुई और दोनो को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. बाद में दबाव पड़ने पर 15,000 रूपये की जमानत पर दोनों को छो़ड़ दिया गया.

    लड़की और उनके घर वाले बुरी तरह से घबराए हुए हैं. शाहीन तो इस कदर डरी हुई है कि उसने कभी किसी सोशल नेटवर्किग प्लेटफार्म पर नहीं जाने की कसम खा ली है. शाहीन के अंकल के हास्पिटल को 10 लाख से भी ज्यादा का नुकसान हुआ है.

    अब आप नीचे शाहीन के लिखे स्टेटस को पढ़िये और बताइये कि उसकी गलती क्या है. आखिर हमारी फ्रीडम आफ स्पीच आज कितनी सुरक्षित है?
    पूरा लेख यहाँ पढ़ें-


    Monday, November 19, 2012

    देखिये अल्लाह ने कद्दू में क्या तासीर रखी है ?


    और निस्संदेह यूनुस भी रसूलो में से था(139) याद करो, जब वह भरी नौका की ओर भाग निकला, (140)फिर पर्ची डालने में शामिल हुआ और उसमें मात खाई (141) फिर उसे मछली ने निगल लिया और वह निन्दनीय दशा में ग्रस्त हो गया था। (142) अब यदि वह तसबीह करनेवाला न होता (143) तो उसी के भीतर उस दिन तक पड़ा रह जाता, जबकि लोग उठाए जाएँगे। (144) अन्ततः हमने उसे इस दशा में कि वह निढ़ाल था, साफ़ मैदान में डाल दिया। (145) हमने उसपर बेलदार वृक्ष उगाया था (146)कुर'आन की तफसीर में बताया गया है कि हज़रत यूनुस अलैहिस-सलाम पर उगने वाला यह बेलदार पेड़ कद्दू का था। उस वक़्त हज़रत यूनुस अलैहिस-सलाम की जो शारीरिक और मानसिक दशा थी, उसके लिए कद्दू सबसे ज़्यादा  मुनासिब था। देखिये अल्लाह ने कद्दू में क्या तासीर रखी है ?

    Sunday, November 18, 2012

    आदरणीय चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ जी की पोस्ट पर हिंदूवादी भाइयों का ऐतराज़ कितना जायज़ है ?


    आदरणीय चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ जी की पोस्ट पर हिंदूवादी भाइयों का ऐतराज़ कितना जायज़ है  ?

    देखिये यह पोस्ट :

    चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ का ऐसे लोगों के लिए यह सन्देश है:
    आभार रविकर जी आपको इस प्रविष्टि के लिए! इन कट्टरपंथी रूढ़िवादी हिन्दुओं को इस पोस्ट 'गैर-मुसलमानों के साथ संबंधों के लिए इस्लाम के अनुसार दिशानिर्देश' में ऐसी कौन सी गाली दिख गयी जो कि भड़क उठे चर्चामंच पर लगाने से यह मेरी समझ में नहीं आ रहा और इनको क्या समझ आये कि हिन्दुस्तान में सारे पर्वों में चाहे वह हिन्दुओं के हों या अन्य धर्मावलम्बियों के कैसे हम समभाव से सहभागिता करते हैं! इन्हें भारत के गांवों में आकर देखना चाहिए कि हम किस तरह होली, दीवाली, और ईद एक साथ मनाते हैं! कितने आदर से हम अपने गांव के बुज़ुर्ग जुम्मन को जुम्मन चाचा कहते हैं ये कुटिलआलसी और छद्मरूपधारी छुद्रमना धर्मांधी क्या जाने?...रविकर भाई! हम चाहते हैं कि तथाकथित विवादित पोस्ट जो इन सभी को गाली लगी उसका लिंक आप अपनी चर्चामंच पर देकर लोगों की राय लें कि इसमें कौन सी गाली है जिसके नाते सभी चर्चाकारों पर मूढ़मति होने का आरोप ये विद्वान लोग लगा रहे हैं...ब्लॉग जगत में ऐसे भड़काऊ तथा कट्टरपंथियों की खुलकर भर्त्सना होनी ही चाहिए...उस पोस्ट का लिंक हमने अपनी टिप्पणी में ऊपर दे दिया है।
    लिंक:
    http://besurm.blogspot.in/2012/11/blog-post_17.html?showComment=1353234734212#c5629979070439672175

    ‘ब्लॉग की ख़बरें‘

    1- क्या है ब्लॉगर्स मीट वीकली ?
    http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_3391.html

    2- किसने की हैं कौन करेगा उनसे मोहब्बत हम से ज़्यादा ?
    http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

    3- क्या है प्यार का आवश्यक उपकरण ?
    http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

    4- एक दूसरे के अपराध क्षमा करो
    http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    5- इंसान का परिचय Introduction
    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/introduction.html

    6- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
    http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
    http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    8- बेवफा छोड़ के जाता है चला जा
    http://kunwarkusumesh.blogspot.com/2011/07/blog-post_11.html#comments

    9- इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक
    http://www.hamarianjuman.com/2011/07/blog-post.html

    10- दुआ की ताक़त The spiritual power
    http://ruhani-amaliyat.blogspot.com/2011/01/spiritual-power.html

    11- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
    http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    12- शकुन्तला प्रेस कार्यालय के बाहर लगा एक फ्लेक्स बोर्ड-4
    http://shakuntalapress.blogspot.com/

    13- वाह री, भारत सरकार, क्या खूब कहा
    http://bhadas.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

    14- वैश्विक हुआ फिरंगी संस्कृति का रोग ! (HIV Test ...)
    http://sb.samwaad.com/2011/07/blog-post_16.html

    15- अमीर मंदिर गरीब देश
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

    16- मोबाइल : प्यार का आवश्यक उपकरण Mobile
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/mobile.html

    17- आपकी तस्वीर कहीं पॉर्न वेबसाइट पे तो नहीं है?
    http://bezaban.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

    18- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम अब तक लागू नहीं
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

    19- दुनिया में सबसे ज्यादा शादियाँ करने वाला कौन है?
    इसका श्रेय भारत के ज़ियोना चाना को जाता है। मिजोरम के निवासी 64 वर्षीय जियोना चाना का परिवार 180 सदस्यों का है। उन्होंने 39 शादियाँ की हैं। इनके 94 बच्चे हैं, 14 पुत्रवधुएं और 33 नाती हैं। जियोना के पिता ने 50 शादियाँ की थीं। उसके घर में 100 से ज्यादा कमरे है और हर रोज भोजन में 30 मुर्गियाँ खर्च होती हैं।
    http://gyaankosh.blogspot.com/2011/07/blog-post_14.html

    20 - ब्लॉगर्स मीट अब ब्लॉग पर आयोजित हुआ करेगी और वह भी वीकली Bloggers' Meet Weekly
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/bloggers-meet-weekly.html

    21- इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
    http://www.sahityapremisangh.com/2011/07/blog-post_3678.html

    22- इसलाम में आर्थिक व्यवस्था के मार्गदर्शक सिद्धांत
    http://islamdharma.blogspot.com/2012/07/islamic-economics.html

    23- मेरी बिटिया सदफ स्कूल क्लास प्रतिनिधि का चुनाव जीती
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_2208.html

    24- कुरआन का चमत्कार

    25- ब्रह्मा अब्राहम इब्राहीम एक हैं?

    26- कमबख़्तो ! सीता माता को इल्ज़ाम न दो Greatness of Sita Mata

    27- राम को इल्ज़ाम न दो Part 1

    28- लक्ष्मण को इल्ज़ाम न दो

    29- हरेक समस्या का अंत, तुरंत

    30-
    अपने पड़ोसी को तकलीफ़ न दो
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    साहित्य की ताज़ा जानकारी

    1- युद्ध -लुईगी पिरांदेलो (मां-बेटे और बाप के ज़बर्दस्त तूफ़ानी जज़्बात का अनोखा बयान)
    http://pyarimaan.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    2- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
    http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    3- आतंकवादी कौन और इल्ज़ाम किस पर ? Taliban
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/taliban.html

    4- तनाव दूर करने की बजाय बढ़ाती है शराब
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    5- जानिए श्री कृष्ण जी के धर्म को अपने बुद्धि-विवेक से Krishna consciousness
    http://vedquran.blogspot.com/2011/07/krishna-consciousness.html

    6- समलैंगिकता और बलात्कार की घटनाएं क्यों अंजाम देते हैं जवान ? Rape
    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/rape.html

    7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
    http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    8- ख़ून बहाना जायज़ ही नहीं है किसी मुसलमान के लिए No Voilence
    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/no-voilence.html

    9- धर्म को उसके लक्षणों से पहचान कर अपनाइये कल्याण के लिए
    http://charchashalimanch.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    10- बाइबिल के रहस्य- क्षमा कीजिए शांति पाइए
    http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

    11- विश्व शांति और मानव एकता के लिए हज़रत अली की ज़िंदगी सचमुच एक आदर्श है
    http://dharmiksahity.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    12- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
    http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    13- ‘इस्लामी आतंकवाद‘ एक ग़लत शब्द है Terrorism or Peace, What is Islam
    http://commentsgarden.blogspot.com/2011/07/terrorism-or-peace-what-is-islam.html

    14- The real mission of Christ ईसा मसीह का मिशन क्या था ? और उसे किसने आकर पूरा किया ? - Anwer Jamal
    http://kuranved.blogspot.com/2010/10/real-mission-of-christ-anwer-jamal.html

    15- अल्लाह के विशेष गुण जो किसी सृष्टि में नहीं है.
    http://quranse.blogspot.com/2011/06/blog-post_12.html

    16- लघु नज्में ... ड़ा श्याम गुप्त...
    http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

    17- आपको कौन लिंक कर रहा है ?, जानने के तरीके यह हैं
    http://techaggregator.blogspot.com/

    18- आदम-मनु हैं एक, बाप अपना भी कह ले -रविकर फैजाबादी

    19-मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत

    20- मौत कहते हैं जिसे वो ज़िन्दगी का होश है Death is life

    21- कल रात उसने सारे ख़तों को जला दिया -ग़ज़ल Gazal

    22- मोम का सा मिज़ाज है मेरा / मुझ पे इल्ज़ाम है कि पत्थर हूँ -'Anwer'

    23- दिल तो है लँगूर का

    24- लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी - Allama Iqbal

    25- विवाद -एक लघुकथा डा. अनवर जमाल की क़लम से Dispute (Short story)

    26- शीशा हमें तो आपको पत्थर कहा गया (ग़ज़ल)

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