Wednesday, November 30, 2011

मद का प्याला-अहंकार


दि नरक को पास से देखना हो तो अहंकार के विचार अपना लीजिये, आपको पूरी दुनिया स्वार्थी नजर आने लगेगी. मद का दुसरा नाम शराब भी है जिसके पान के बाद बुद्धि सुप्त हो जाती है.अहंकार से सभी लौकिक और परलौकिक कर्म हमें अन्धकार के गर्त में ले जाते हैं.
अहंकार क्या है ?
-जब हम में "मैं" पन जाग जाता है. मैं और मेरे विचार, मेरी सोच ही हर जगह सही है, बाकी सब गौण या मूल्यहीन.
अहंकार होने के कारण-
धन-धनवान होने की भावना हमारे पर शासन करने लग जाये. हमारी सोच हमारे धन तक आकर ठहर जाये. हमारी द्रष्टि अन्य सद्गुणों की जगह सिर्फ धन को देखने लग जाये.
विद्या-वैसे तो विद्या हमें विनय तक ले जाने वाली होती है मगर हम खुद को विद्धवान समझने की भूल कर देते हैं तब हमें हमारे ज्ञान के अलावा सब फीका लगने लग जाता है.

श्री रामचंद्र जी और उनके भाईयों की शादी की सालगिरह है माह मार्गशीर्ष के शुक्ल पक्ष के पांचवे दिन यानि कि आज। सभी रामप्रेमियों को बहुत बहुत बधाई।

श्री रामचंद्र जी और उनके भाईयों की शादी की सालगिरह है माह मार्गशीर्ष के शुक्ल पक्ष के पांचवे दिन यानि कि आज।
सभी रामप्रेमियों को बहुत बहुत बधाई।

Tuesday, November 29, 2011

अरे भई साधो......: अरबों की दौलत मगर किस काम की

हाल में मेरे चचेरे भाई नगेन्द्र प्रसाद रांची आये. उन्होंने एक मसला रखा जिसने कई सवाल खड़े कर दिए.. वे घाटशिला में रहते हैं. घाटशिला झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले का का एक पिछड़ा हुआ अनुमंडल है. यहां कुल आबादी में 51 % आदिवासी हैं. सिंचित ज़मीन 20 % भी नहीं. कुछ वर्षा आधारित खेती होती है लेकिन बंज़र ज़मीन काफी ज्यादा है. नगेन्द्र जी ने एक आदिवासी परिवार के बारे में बताया जिसके पास 250 बीघा ज़मीन है लेकिन आर्थिक स्थिति साधारण है. उस परिवार के युवक अपनी ज़मीन मोर्गेज रखकर यात्री बस निकालना चाहते हैं. इसमें वे मदद चाहते थे. जानकारी मिली कि आदिवासी ज़मीन मॉर्गेज नहीं होती. राष्ट्रीयकृत बैंक, प्राइवेट बैंक या प्राइवेट फाइनांसर भी इसके लिए तैयार नहीं होते. कारण है टेनेंसी एक्ट.

अरे भई साधो......: अरबों की दौलत मगर किस काम की:

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इस्लामी नया साल मुबारक .

इस्लामी नए साल को मनाने का तरीका बेवाओं (विधवाओं), बेसहारा लोगों की मदद करना है .

इस्लामी नया साल मुबारक . 
दुनिया के हर मजहब या कौम का अपना-अपना नया साल होता है। नए साल से मुराद (आशय) है पुराने साल का खात्मा (समापन) और नए दिन की नई सुबह के साथ नए वक्त की शुरुआत। नए वक्त की शुरुआत ही दरअसल नए साल का आगाज (आरंभ) है। 
इस्लामी कैलेंडर में जिलहिज के महीने की आखिरी तारीख को चाँद दिखते ही पुराना साल विदाई के पायदान पर आकर रुखसत हो जाता है और अगले दिन यानी मोहर्रम की पहली तारीख से इस्लामी नया साल शुरू हो जाता है।

Saturday, November 26, 2011

अरे भई साधो......: जनजीवन को जटिल बनाते अपराधी

मुट्ठी भर अपराधी और कमजोर सरकारी तंत्र आम आदमी के जीवन को जटिल बनाते जा रहे हैं. किसी ज़माने में एक खाताधारी की पहचान पर बैंक बैंक अकाउंट खुल जाता था अब इसके लिए कई तरह के दस्तावेज़ प्रस्तुत करने पड़ते हैं. ट्रेन में सफ़र करना हो किसी दूसरे शहर में होटल में ठहरना हो तो पहचान पत्र की ज़रुरत पड़ती है.

ब्राह्मणों ने गोमांस खाना कब और क्यों छोड़ा ? Beaf

यह पोस्ट बताती है -

हिंदू गोमांस खाते थे??????????

 
 बौद्ध भिक्षुओ पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए ब्राह्मणों के लिए यह अनिवार्य हो गया था कि वे वैदिक धर्म के एक अंश से अपना पीछा छुड़ा लें। यह एक साधन था जिसे ब्राह्मणों ने अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को पाने के लिए उपयोग किया।

Monday, November 21, 2011

यह है गीता का ज्ञान ......

(संजय द्वारा धृतराष्ट्र के प्रति विश्वरूप का वर्णन )
संजय उवाच
एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरिः ।
दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम्‌ ॥
भावार्थ : संजय बोले- हे राजन्‌! महायोगेश्वर और सब पापों के नाश करने वाले भगवान ने इस प्रकार कहकर उसके पश्चात अर्जुन को परम ऐश्वर्ययुक्त दिव्यस्वरूप दिखलाया॥9॥
अनेकवक्त्रनयनमनेकाद्भुतदर्शनम्‌ ।
अनेकदिव्याभरणं दिव्यानेकोद्यतायुधम्‌ ॥
दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम्‌ ।
सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम्‌ ॥
भावार्थ : अनेक मुख और नेत्रों से युक्त, अनेक अद्भुत दर्शनों वाले, बहुत से दिव्य भूषणों से युक्त और बहुत से दिव्य शस्त्रों को धारण किए हुए और दिव्य गंध का सारे शरीर में लेप किए हुए, सब प्रकार के आश्चर्यों से युक्त, सीमारहित और सब ओर मुख किए हुए विराट्स्वरूप परमदेव परमेश्वर को अर्जुन ने देखा॥10-11॥
दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता ।
यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः ॥
भावार्थ : आकाश में हजार सूर्यों के एक साथ उदय होने से उत्पन्न जो प्रकाश हो, वह भी उस विश्व रूप परमात्मा के प्रकाश के सदृश कदाचित्‌ ही हो॥12॥
तत्रैकस्थं जगत्कृत्स्नं प्रविभक्तमनेकधा ।
अपश्यद्देवदेवस्य शरीरे पाण्डवस्तदा ॥
भावार्थ : पाण्डुपुत्र अर्जुन ने उस समय अनेक प्रकार से विभक्त अर्थात पृथक-पृथक सम्पूर्ण जगत को देवों के देव श्रीकृष्ण भगवान के उस शरीर में एक जगह स्थित देखा॥13॥
ततः स विस्मयाविष्टो हृष्टरोमा धनञ्जयः ।
प्रणम्य शिरसा देवं कृताञ्जलिरभाषत ॥
भावार्थ : उसके अनंतर आश्चर्य से चकित और पुलकित शरीर अर्जुन प्रकाशमय विश्वरूप परमात्मा को श्रद्धा-भक्ति सहित सिर से प्रणाम करके हाथ जोड़कर बोले॥14॥
(अर्जुन द्वारा भगवान के विश्वरूप का देखा जाना और उनकी स्तुति करना )
अर्जुन उवाच
पश्यामि देवांस्तव देव देहे सर्वांस्तथा भूतविशेषसङ्‍घान्‌ ।
ब्रह्माणमीशं कमलासनस्थमृषींश्च सर्वानुरगांश्च दिव्यान्‌ ॥
भावार्थ : अर्जुन बोले- हे देव! मैं आपके शरीर में सम्पूर्ण देवों को तथा अनेक भूतों के समुदायों को, कमल के आसन पर विराजित ब्रह्मा को, महादेव को और सम्पूर्ण ऋषियों को तथा दिव्य सर्पों को देखता हूँ॥15॥
अनेकबाहूदरवक्त्रनेत्रंपश्यामि त्वां सर्वतोऽनन्तरूपम्‌ ।
नान्तं न मध्यं न पुनस्तवादिंपश्यामि विश्वेश्वर विश्वरूप ॥
भावार्थ : हे सम्पूर्ण विश्व के स्वामिन्! आपको अनेक भुजा, पेट, मुख और नेत्रों से युक्त तथा सब ओर से अनन्त रूपों वाला देखता हूँ। हे विश्वरूप! मैं आपके न अन्त को देखता हूँ, न मध्य को और न आदि को ही॥16॥
किरीटिनं गदिनं चक्रिणं च तेजोराशिं सर्वतो दीप्तिमन्तम्‌ ।
पश्यामि त्वां दुर्निरीक्ष्यं समन्ताद्दीप्तानलार्कद्युतिमप्रमेयम्‌ ॥
भावार्थ : आपको मैं मुकुटयुक्त, गदायुक्त और चक्रयुक्त तथा सब ओर से प्रकाशमान तेज के पुंज, प्रज्वलित अग्नि और सूर्य के सदृश ज्योतियुक्त, कठिनता से देखे जाने योग्य और सब ओर से अप्रमेयस्वरूप देखता हूँ॥17॥
त्वमक्षरं परमं वेदितव्यंत्वमस्य विश्वस्य परं निधानम्‌ ।
त्वमव्ययः शाश्वतधर्मगोप्ता सनातनस्त्वं पुरुषो मतो मे ॥
भावार्थ : आप ही जानने योग्य परम अक्षर अर्थात परब्रह्म परमात्मा हैं। आप ही इस जगत के परम आश्रय हैं, आप ही अनादि धर्म के रक्षक हैं और आप ही अविनाशी सनातन पुरुष हैं। ऐसा मेरा मत है॥18॥
अनादिमध्यान्तमनन्तवीर्यमनन्तबाहुं शशिसूर्यनेत्रम्‌ ।
पश्यामि त्वां दीप्तहुताशवक्त्रंस्वतेजसा विश्वमिदं तपन्तम्‌ ॥
भावार्थ : आपको आदि, अंत और मध्य से रहित, अनन्त सामर्थ्य से युक्त, अनन्त भुजावाले, चन्द्र-सूर्य रूप नेत्रों वाले, प्रज्वलित अग्निरूप मुखवाले और अपने तेज से इस जगत को संतृप्त करते हुए देखता हूँ॥19॥
द्यावापृथिव्योरिदमन्तरं हि व्याप्तं त्वयैकेन दिशश्च सर्वाः ।
दृष्ट्वाद्भुतं रूपमुग्रं तवेदंलोकत्रयं प्रव्यथितं महात्मन्‌ ॥
भावार्थ : हे महात्मन्‌! यह स्वर्ग और पृथ्वी के बीच का सम्पूर्ण आकाश तथा सब दिशाएँ एक आपसे ही परिपूर्ण हैं तथा आपके इस अलौकिक और भयंकर रूप को देखकर तीनों लोक अतिव्यथा को प्राप्त हो रहे हैं॥20॥
अमी हि त्वां सुरसङ्‍घा विशन्ति केचिद्भीताः प्राञ्जलयो गृणन्ति।
स्वस्तीत्युक्त्वा महर्षिसिद्धसङ्‍घा: स्तुवन्ति त्वां स्तुतिभिः पुष्कलाभिः ॥
भावार्थ : वे ही देवताओं के समूह आप में प्रवेश करते हैं और कुछ भयभीत होकर हाथ जोड़े आपके नाम और गुणों का उच्चारण करते हैं तथा महर्षि और सिद्धों के समुदाय 'कल्याण हो' ऐसा कहकर उत्तम-उत्तम स्तोत्रों द्वारा आपकी स्तुति करते हैं॥21॥
रुद्रादित्या वसवो ये च साध्याविश्वेऽश्विनौ मरुतश्चोष्मपाश्च ।
गंधर्वयक्षासुरसिद्धसङ्‍घावीक्षन्ते त्वां विस्मिताश्चैव सर्वे ॥
भावार्थ : जो ग्यारह रुद्र और बारह आदित्य तथा आठ वसु, साध्यगण, विश्वेदेव, अश्विनीकुमार तथा मरुद्गण और पितरों का समुदाय तथा गंधर्व, यक्ष, राक्षस और सिद्धों के समुदाय हैं- वे सब ही विस्मित होकर आपको देखते हैं॥22॥
रूपं महत्ते बहुवक्त्रनेत्रंमहाबाहो बहुबाहूरूपादम्‌ ।
बहूदरं बहुदंष्ट्राकरालंदृष्टवा लोकाः प्रव्यथितास्तथाहम्‌ ॥
भावार्थ : हे महाबाहो! आपके बहुत मुख और नेत्रों वाले, बहुत हाथ, जंघा और पैरों वाले, बहुत उदरों वाले और बहुत-सी दाढ़ों के कारण अत्यन्त विकराल महान रूप को देखकर सब लोग व्याकुल हो रहे हैं तथा मैं भी व्याकुल हो रहा हूँ॥23॥
नभःस्पृशं दीप्तमनेकवर्णंव्यात्ताननं दीप्तविशालनेत्रम्‌ ।
दृष्टवा हि त्वां प्रव्यथितान्तरात्मा धृतिं न विन्दामि शमं च विष्णो ॥
भावार्थ : क्योंकि हे विष्णो! आकाश को स्पर्श करने वाले, दैदीप्यमान, अनेक वर्णों से युक्त तथा फैलाए हुए मुख और प्रकाशमान विशाल नेत्रों से युक्त आपको देखकर भयभीत अन्तःकरण वाला मैं धीरज और शान्ति नहीं पाता हूँ॥24॥
दंष्ट्राकरालानि च ते मुखानिदृष्टैव कालानलसन्निभानि ।
दिशो न जाने न लभे च शर्म प्रसीद देवेश जगन्निवास ॥
भावार्थ : दाढ़ों के कारण विकराल और प्रलयकाल की अग्नि के समान प्रज्वलित आपके मुखों को देखकर मैं दिशाओं को नहीं जानता हूँ और सुख भी नहीं पाता हूँ। इसलिए हे देवेश! हे जगन्निवास! आप प्रसन्न हों॥25॥
अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्राः सर्वे सहैवावनिपालसंघैः ।
भीष्मो द्रोणः सूतपुत्रस्तथासौ सहास्मदीयैरपि योधमुख्यैः ॥
वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति दंष्ट्राकरालानि भयानकानि ।
केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु सन्दृश्यन्ते चूर्णितैरुत्तमाङ्‍गै ॥
भावार्थ : वे सभी धृतराष्ट्र के पुत्र राजाओं के समुदाय सहित आप में प्रवेश कर रहे हैं और भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य तथा वह कर्ण और हमारे पक्ष के भी प्रधान योद्धाओं के सहित सबके सब आपके दाढ़ों के कारण विकराल भयानक मुखों में बड़े वेग से दौड़ते हुए प्रवेश कर रहे हैं और कई एक चूर्ण हुए सिरों सहित आपके दाँतों के बीच में लगे हुए दिख रहे हैं॥26-27॥
यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगाः समुद्रमेवाभिमुखा द्रवन्ति ।
तथा तवामी नरलोकवीराविशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति ॥
भावार्थ : जैसे नदियों के बहुत-से जल के प्रवाह स्वाभाविक ही समुद्र के ही सम्मुख दौड़ते हैं अर्थात समुद्र में प्रवेश करते हैं, वैसे ही वे नरलोक के वीर भी आपके प्रज्वलित मुखों में प्रवेश कर रहे हैं॥28॥
यथा प्रदीप्तं ज्वलनं पतंगाविशन्ति नाशाय समृद्धवेगाः ।
तथैव नाशाय विशन्ति लोकास्तवापि वक्त्राणि समृद्धवेगाः ॥
भावार्थ : जैसे पतंग मोहवश नष्ट होने के लिए प्रज्वलित अग्नि में अतिवेग से दौड़ते हुए प्रवेश करते हैं, वैसे ही ये सब लोग भी अपने नाश के लिए आपके मुखों में अतिवेग से दौड़ते हुए प्रवेश कर रहे हैं॥29॥
लेलिह्यसे ग्रसमानः समन्ताल्लोकान्समग्रान्वदनैर्ज्वलद्भिः ।
तेजोभिरापूर्य जगत्समग्रंभासस्तवोग्राः प्रतपन्ति विष्णो ॥
भावार्थ : आप उन सम्पूर्ण लोकों को प्रज्वलित मुखों द्वारा ग्रास करते हुए सब ओर से बार-बार चाट रहे हैं। हे विष्णो! आपका उग्र प्रकाश सम्पूर्ण जगत को तेज द्वारा परिपूर्ण करके तपा रहा है॥30॥
आख्याहि मे को भवानुग्ररूपोनमोऽस्तु ते देववर प्रसीद ।
विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यंन हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम्‌ ॥
भावार्थ : मुझे बतलाइए कि आप उग्ररूप वाले कौन हैं? हे देवों में श्रेष्ठ! आपको नमस्कार हो। आप प्रसन्न होइए। आदि पुरुष आपको मैं विशेष रूप से जानना चाहता हूँ क्योंकि मैं आपकी प्रवृत्ति को नहीं जानता॥31॥

मुझे सोच कर भी शर्म आती है के कितना निकम्मा है राष्ट्रपति भवन का शिकायत निवारण विभाग


जी हाँ दोस्तों देश में आग लग रही हो उसकी सुचना महामहिम राष्ट्रपतिभवन के शिकायत निवारण प्रकोष्ट के पास हो वहां शिकायत दर्ज भी हो जाए और फिर शिकायत निवारण के लियें अधिकारी की नियुक्ति भी कर दी जाए और यह खतरनाक जहर फेला कर देश की सुक्ख शान्ति खत्म करने वाला अपराध जारी रहे तो फिर तो देश के इस सर्वोच्च ज़िम्मेदार पद वाले अधिकरियों पर शर्म आने के अलावा और क्या करा जा सकता है ........दोस्तों में बात कर रहा हूँ इंटरनेट के नाम पर फेसबुक और दुसरे तरीकों से देश में अराजकता फेलाने वालों की जिनके माँ बाप इन्सान नहीं जानवर होते है कहते हैं के कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनका जन्म और पिता का नाम संदिग्ध होने के कारण वोह अपनी हरकतों से समाज के लियें सर दर्द बन जाते है में ऐसे ही मानसिक रोगियों की बात कर रहा हूँ जो ब्लोगिंग ..फेसबुक और दुसरे माध्यमों से देश के कानून नियंत्रकों की कमजोरियों का फायदा उठा कर देश में अराजकता फेलाने के लियें साम्प्रदायिक द्वेष फेलाने के लियें एक दुसरे के धर्म को अपमानित करते है या एक दुसरे के आस्थाओं और नेताओं को चोट पहुंचा कर देश और समाज में गृह युद्ध के हालत पैदा करना चाहते है यह लोग वेसे तो विदेशों के एजेंट होते हैं लेकिन इनके खिलाफ अगर पुलिस और साइबर थाने कार्यवाही नहीं करते है तो यह मान लेना चाहिए के साइबर थाने भी इनसे मिले हुए है । खेर कोई बात नहीं देश भ्रष्ट तन्त्र के दोर से गुजर रहा है संतरी से मंत्री तक चोर बेईमान और निकम्मे भ्रष्ट है लेकिन इन सभी को कंट्रोल करने के लियें देश में एक संस्था राष्ट्रपति भवन है जो इन सभी की खबर लेने और देश को सुरक्षित करने के लियें बनाया गया है अरबों खरबों रूपये हमारे देश की गरीब जनता के इस विभाग पर प्रतिमाह खर्च होते हैं । तो दोस्तों दो हफ्ते पहले इंटरनेट की गंदगी दूर करने और साइबर अपराधियों को सजा दिलवाने के लियें मेने एक शिकायत आदरणीय महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील महोदया को की थी इस मामले में मेरी शिकायत rpsec/e/2011/17238 पर दर्ज की गयी और इस शिकायत को दर्ज कर एक वरिष्ठ अधिकारी को इसके निराकरण के लियें नियुक्त किया गया लेकिन सभी प्रयासों के बाद भी देश की इस महत्वपूर्ण शिकायत पर राष्ट्रपति भवन के नियुक्त अधिकारी सुस्त रहे और नतीजन कल जब लोगों ने अपनी फेसबुक खोली तो कुछ अराजकता फेलाने वाले लोगों ने मुस्लिम धार्मिक भावनाए भडकाने के लियें खुद के माता पिता जो गंदे जानवर मने जाते हैं उनके फोटू कूट रचित कर धार्मिक तस्वीरें बना डालीं फिर राष्ट्रपति भवन को सुचना दी गयी लेकिन बेकार रहा... उदयपुर राजस्थान सहित कई स्थानों और इस अपराध को लेकर तनाव पैदा हुआ तो दोस्तों यह हिंदुस्तान यह देश हमारा अपना है यहाँ जब सिस्टम फेल हो जाए तब हमें ही इस अपराध को नियंत्रित करने के लियें आगे आना होगा और ऐसे अपराधी जहाँ कहीं भी पकड़ में आयें उन्हें ढूंढे उनके खिलाफ साक्ष्य एकत्रित करें और उन्हें पुलिस के हवाले कर दे चाहे वोह अपने मित्र भाई रिश्तेदार ही क्यूँ ना हों क्योंकि यह कुत्ते की टेडी दुम की तरह से साबित हो रहे है जो समझायश से मानने वाले नहीं है ....अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

Sunday, November 20, 2011

स्कैन कर हिंदी को बदलिए टेक्स्ट फाइल में

देखिये :-

अब हिंदी डॉक्युमेंट को भी स्कैन कर बदलिए टेक्स्ट फाइल में

अब आप किसी हिंदी में लिखे या छापे पृष्ठ को बिना टाइप किये इस सॉफ्टवेयर की मदद से टेक्स्ट के रूप में प्राप्त कर सकते हैं ।

इस टूल के विषय में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें 

ग़ज़लगंगा.dg: अपनी-अपनी जिद पे अड़े थे

अपनी-अपनी जिद पे अड़े थे.

इसीलिए हम-मिल न सके थे.


एक अजायब घर था, जिसमें

कुछ अंधे थे, कुछ बहरे थे.


फिसलन कितनी थी मत पूछो

हम गिर-गिरकर संभल रहे थे.



Friday, November 18, 2011

सिरफिरा पर विश्वास रखें

फ़ेसबुक के कई हजार अकाउंट्स हैक हुए हैं (अधिकांश ID बंगलोर के हैं), जिनसे अश्लील और अभद्र वीडियो और फोटो भेजे जा रहे हैं…। किसी मित्र को यदि मेरे नाम या आई डी (ID) से ऐसा कोई अश्लील क्लिप अथवा फ़ोटो मिलता है तब उसे तुरन्त डिलीट करें और मुझ पर विश्वास रखें कि ऐसी "घटिया हरकत" मैंने नहीं की; न कभी भविष्य में कर सकता हूँ.
जैसा आप सबको सनद होगा ही कि मैं पेशे से एक पत्रकार भी हूँ और मुझे तकनीकी ज्ञान भी ज्यादा नहीं है. पुलिस, सीबीआई एवं साइबर क्राइम विशेषज्ञ इस मामले की जाँच कर रहे हैं… अगर भविष्य में कभी ऐसा हो भी धैर्य रखें और मुझ पर विश्वास भी रखें और संभव हो तो मुझे फोन करके सूचित भी करें. कभी मेरे विरोधी साजिश करके मुझे आपकी नजरों में गिराने के लिए ऐसी ओछी हरकत कर सकते हैं.…। 
(हस्ताक्षर) आपका अपना दोस्त-रमेश कुमार जैन उर्फ सिरफिरा
नोट:- इस संदेश में अपनी आवश्यकता अनुसार बदलाव करके अपने स्टेटस में भी डाले|

Wednesday, November 16, 2011

क़ुरआन यूनिवर्सिटी ऑनलाइन

ईमेल से प्राप्त सूचना के आधार पर
Hazrat Muhammad (PBUH) said: "The best of you is the one who learns the Qur'an and teaches it."
To fullfill the above duty of this mortal life, Online Quran University is an aspiration for Muslims living in Western countries recognizing their difficulties to approach/search an Islamic Center or a qualified teacher (the Qari). Even if one has access to such centers, he/she is engaged in packed commitments ranging from full time work, studies, family and unable to spare time to provide pick & drop to their children for learning the holy Quran from such centers. Especially for children and sisters facing difficulties to go into Islamic centers and in mosques to learn Quran as environment in society is not ideal for going on the path of knowledge whilst trying to retain their modesty. It is therefore with the consideration of all environmental factors.
Further, the online Quran classes of the Quran University has been planned in such a unique way that you can have an eye on your children (how he is learning Quran) as well as on Scholar/Qari (how he is teaching your kid). This online/live monitoring of Quran learning / classes not only confers you mental satisfaction about progress of your children but also give an insight of high quality teaching standards offered by the Online Quran University.

Online Quran University bestows the convenience of:-
  • Easy Quran learning while staying at your home
  • Free three days trial before you start regular classes
  • Student-centered teaching
  • One to one live Quran classes
  • Availability of timing at your own choice
  • Affordable and convenient
  • Anytime from anywhere
  • Increases student interaction
  • Time saving Opportunity
  • No Age Limit
  • You can have an eye on your kid while he is learning Quran
 In light of above, we hope that Quran University can be a very good source for you/your children to learn Holy Quran (from Alphabets learning to Tajweed and from Translation to Tafseer). To start learning the Holy Quran, send you query to info@onlinequranuniversity.com along with your contact number at which our inquiry officers will furnish you all requisite information.

Best regards,
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Muhammad Asim
Online Quran University

Tuesday, November 15, 2011

अरे भई साधो......: आणविक सृष्टि बनाम रासायनिक सृष्टि

अध्यात्म की दुनिया में नज़र दौडाएं तो विभिन्न धर्मों में जीवन की उत्पत्ति की अवधारणाएं प्रस्तुत की गयी हैं लेकिन सबका सार यह है कि इस सृष्टि और उसमें जीवन की उत्पत्ति एक महाशून्य से हुई है.

Monday, November 14, 2011

आलू टमाटर मांसाहारी पौधे हैं

आपको पता नहीं है कि ये दोनों मांसाहारी पौधे हैं। आपको ही नहीं बल्कि ज़्यादातर शाकाहारी यह बात नहीं जानते।
यह बात अजीब सी लगती है कि मांसाहारी व्यक्ति तो शाकाहारी जीव खाए और शाकाहारी भाई बहन मसाले लगाकर मांसाहारी पौधों के अंग खाएं।
हज़ारों साल से खाते आ रहे हैं अज्ञानवश।
चलिए पहले तो पता नहीं था लेकिन क्या अब शाकाहारी लोग इन दोनों मांसाहारी पौधों के अंग खाना बंद करेंगे या बदस्तूर पहले की तरह ही खाते रहेंगे ?
देखिए -

आलू-टमाटर मांसाहारी, खान-पान पर संकट भारी

निकट भविष्‍य में आचार-विचार के पुराने मानदंडों से काम नहीं चलनेवाला। 
आनेवाले वर्षों में शाकाहार-मांसाहार के बीच की रेखा भी उतनी स्‍पष्‍ट नहीं रहेगी, जितनी अब तक रहते आयी है। यह बात प्रयोगशाला में कृत्रिम मांस से संबंधित पिछले आलेख में कही गयी थी। उन शब्‍दों के लिखे जाने के एक सप्‍ताह के अंदर ही यह खबर दुनिया भर में सुर्खियों में रही है कि ब्रिटिश वनस्‍पति विज्ञानियों ने नए शोध में यह निष्कर्ष निकाला है कि आलू व टमाटर मांसाहारी हैं, क्‍योंकि ये पौधे कीड़ों को मारकर अपने लिए खाद बनाते हैं।

रॉयल बॉटेनिकल गार्डन, कियू और लंदन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बताया है कि दोनों सब्जियों के पौधों के तनों में मौजूद बालों में एक चिपचिपा पदार्थ बहता रहता है। यह पदार्थ आसपास उड़ने वाले कीट-पतंगों को तने से चिपका देता है। कुछ दिन बाद कीटों के बेजान शरीर सूखकर जमीन में गिर जाते हैं। तब पौधों की जड़ें कीटों के शरीर के पोषक तत्वों को सोख लेती हैं। शोधकर्ता मार्क चेज ने बताया, ‘टमाटर और आलू की फसल कटने के बाद भी पौधों में बाल साफ नजर आते हैं। ये नियमित तौर पर कीड़ों को पकड़कर मार देते हैं।’

जीव विज्ञान के पितामह चा‌र्ल्स डार्विन की दूसरी जन्म शताब्दी मना रहे वैज्ञानिक नए-नए शोध कर रहे हैं। इसी क्रम में ये नतीजे भी सामने आए हैं। इस शोध से जुड़े डा. माइक फे के अनुसार अब तक हम मानते थे कि पेड़-पौधों की करीब 650 प्रजातियां मांसाहारी हैं, जो कीट-पतंगों और जीवों का रक्त चूस कर पोषण पाती हैं लेकिन इस श्रेणी में 325 और पेड़-पौधे जुड़ गए हैं।

नए शोध में जिन पौधों को मांसाहारी बताया गया है, उनमें आलू और टमाटर के साथ तंबाकू भी शामिल है। हालांकि ये मुख्य रूप से कीट-पतंगों पर निर्भर नहीं होते, लेकिन पोषण पाने के लिए इनका शिकार करते हैं।

इससे पहले यह माना जाता था कि बंजर स्थानों व जंगलों में पाए जाने वाले पौधे ही पोषक तत्वों की प्रतिपूर्ति के लिए कीड़ों को मारते हैं। लेकिन नए शोध से ज्ञात हुआ है कि घरेलू किचन गार्डन में लगे पौधों में भी यह हिंसक आचरण मौजूद रहा है।
आलू-टमाटर मांसाहारी, खान-पान पर संकट भारी

अंदाज ए मेरा: माथे पर लिख दिया- दत्‍तक बालिका....!!!!!

अंदाज ए मेरा: माथे पर लिख दिया- दत्‍तक बालिका....!!!!!: सरकारी योजनाएं जनता के भले के लिए होती हैं लेकिन जब सरकारी योजनाओं के माध्‍यम से जनता का मजाक बनने लग जाए या फिर मासूम बचपन को सरकारी योजन...

Sunday, November 13, 2011

जवां दिलों की ख्वाहिश को पूरा करती हुई एक वेबसाइट

जितनी बंटनी थी बंट चुकी ये ज़मीं,
अब तो बस आसमान बाकी है |
सर क़लम होंगे कल यहाँ उनके,
जिनके मुंह में ज़बान बाक़ी है ||
 http://www.nulite.tk/

साइबर क्राइम अक्षम्य अपराध ..नहीं समझेंगे तो सजा तो मिलना ही चाहिए {१}


जी हाँ दोस्तों में अपना वायदा निभाने आ गया हूँ कहते हैं के कोई भी काम करो तो चेतावनी देकर ही करो ..पहले अपने भाइयों और परिवारजनों को समझायश करो उन्हें नफे नुकसान के बारे में समझाओ और अगर वोह फिर भी नहीं माने तो इस मामले में फिर कार्यवाही करो ताकि अपनों को सजा की तकलीफ में देख कर फिर खुद को दुक्ख ना हो क्योंकि वोह एक इंसाफ होगा ........दोस्तों मेने राष्ट्रपति महोदय को एक पत्र लिखा था जिन्होंने आर पी एस ई /ई /२०११/१७२३८ नम्बर पर शिकायत दर्ज की और इसकी जाँच शुरू करवा दी है ..इस मामले में राष्ट्रपति भवन भी सतर्क हो गया है और वहां से सभी सम्बन्धित अधिअक्रियों को इस साबर क्राइम को रोकने के लियें सख्त हिदायत दी गयी है ............दोस्तों सामाजिक ढाँचे में प्रचलित नियमों ..प्रथाओं.रुदियों ..जन्रितियों .सामजिक मापदंडों के खिलाफ जो भी कार्य निर्धारित नियमों के तहत किया जाता है और इस कृत्य से किसी को नुकसान पहुंचे या न पहुंचे अपराध कहलाता है और समाज के दो ही हिस्से है एक अपराधी और एक निरपराधी जो लोग अपराधी हैं उन्हें चाहे कितनी ही कोशिश कर लें एक दिन दंड भुगतना ही पढ़ता है ..........आप सभी जानते है के समाज में परिवर्तन प्रक्रति का नियम है समाज जेसे विकसित होता है अपराध और अपराधियों के तोर तरीके भी बदलते रहते हैं .वर्तमान में इक्कीसवीं सदी सुचना क्रान्ति का युग है हर तरफ कम्प्यूटर इंटरनेट का जाल फेला है ..माउस दबाओं पलक झपको विश्व के हर कोने से आप और हम जुड़ जायेंगे इस तकनीक का देश और विश्व के अनेक लोग लाभ ले रहे है लेकिन हर सुविधा का उपयोग ..सदुपयोग और दुरूपयोग सभी होता है ..यहाँ कुछ लोग है जो इस तकनीक का दुरूपयोग कर समाज में हिंसा अफ़ला रहे है समाज को बाँट रहे है समाज को ठगने का प्रयास कर रहे हैं ......आज विश्व में साइबर स्पेस के माध्यम से विश्व जुडा हुआ है इसका उपयोग ई गवर्नेस ..ई कोमर्स ..ई बिजनेज के रूप में होने लगा है साहित्यकार रचनाकार और पत्रकार भी इसका खूब लाभ उठा रहे है लेकिन वर्तमान में साइबर क्राइम के कारण इंटरनेट उपयोगकर्ताओं का एक बहुत बढ़ा खेमा दुःख है ..निरंतर साइबर क्राइम में वृद्धि हो रही है खासकर भारत को इन अपराधियों ने चारा गाह समझ लिया है २६ नोव्म्ब्र २००८ की मुंबई आतंकवादी घटना इंटरनेट दुरूपयोग का ही नतीजा थी ..और अभी भी साइबर क्राइम आतंकवाद लगातार चल रहा है कई लोग हंसी खेल ठिठोली में दोस्तों और अज्ञात लोगों को परेशान करने में लगे हैं फर्जी आई ड़ी लगाते है फोटू छुपाते है ओरफिर सोचते हैं के जिस तरह से शतुरमुर्ग रेट में अपना सर छुपा कर यह सोचता है के उसे कोई नहीं देख रहा है इसी तरह से खुद को छुपा हुआ समझते है लेकिन दोस्तों आज तकनीक बहुत आगे निकल गयी है आप किस मोहल्ले किस गली में बेठ कर इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे है सब पता लगाया जा सकता है ऐसे में किसी का भी खुद को छुपाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है ...........गूगल ..फेसबुक..याहू सभी अपना साम्राज्य लेकर बेठे हैं उसके इंजीनियर सब जानते है लेकिन हम और हमारे इंटरनेट अपराधी हैं के नहीं मानते हैं ... कम्प्यूटर इंटरनेट और सहयोगी उपकरणों का प्रयोग कर अपराधिक कृत्य करना साइबर क्राइम की श्रेणी में आता है और इसमें अलग अलग दंड की व्यवस्था है वर्ष २००० से सुचना प्रोद्ध्योगिकी अधिनियम लागु है यद्धपि हमारे देश में इस कानून में आवश्यक संशोधनों की जरूरत है लेकिन हमारे देश की दंड संहिता और दुसरे कानून इस अपराध को रोकने के लियें पर्याप्त हैं ....साइबर अपराधों को सुनने के लियें विशेष कोर्टों की स्थापना की गयी है जेसे कंट्रोल ऑफ़ सर्तिफ़ाइन्ग ऑथोरिटी ..साइबर अपीलेट ट्रिब्यूनल ॥ ई कोर्ट ..साइबर थानों की स्थापना है .....लेकिन हमारे पास अभी इस साइबर क्राइम को कंट्रोल करने के मामले में इच्छा शक्ति की कमी है एक तो हमे देश के अपराधों से कोई लेना देना नहीं समाज को सूधारने में हमारी रूचि नहीं सबको अपनी पढ़ी है फिर कोई नंगा नाचे या अपराध करे किसी को कोई फर्क नहीं पढ़ता इसलियें इसकी सूचनाये नहीं पहुंच पाती है अभी वर्तमान में राहुल गाँधी के नाम से फर्जी आई ड़ी बनाकर दुष्प्रचार करने वाले को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है रोज़ देश में अश्लील प्र्कष्ण और धमकियां देने वाले गिरफ्तार होते है वर्तमान में इंटरनेट पर चुनाव क्रान्ति है चुनाव प्रचार के साथ साथ एक दुसरे के नेताओं का मान मर्दन भी मर्यादाओं को लाँघ कर किया जा रहा है सोनिया ..राहुल ..मनमोहन और नरेंद्र मोदी के अश्लील चित्र और आपत्तिजनक चित्र ट्रिक फोटोग्राफी से बनाये जा रहे है तो फिर इस अपराध को रोकने के लियें तो हमें और आपको ही आगे आना होगा न मुझे इस काम में आपकी मदद सहयोग की जरूरत है करोगे ना .......अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

Saturday, November 12, 2011

शुक्रिया दोस्तों टार्गेट ब्लॉग पांच हजार पूरा


दोस्तों ..मेरे भाइयों आप सभी का में शुक्रगुज़ार हूँ के आपके प्यार और स्नेह से में अपना टार्गेट पूरा कर सका ..में ब्लोगिंग की दुनिया में प्रवेश के बाद संकल्प लिया था के में भी किसी भी कीमत पर ३१ दिसम्बर २०११ तक पांच हजार ब्लॉग लिख लूँगा ..मुझे आपका प्यार मिला,, दुलार मिला ,सीख़ मिली ,सुझाव मिले और मुझे आपने साहस दिया में पहले एक ब्लॉग से शुरू हुआ फिर सिक्स राउंड की तरह छ छ फायर करने लगा फिर ऐ के ४७ की तरह ब्लोगिं की फिर ऐ के ५६ की तरह ब्लोगिंग करने लगा इस बीच मेने पीछे मुड कर नहीं देखा मेरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ मेरे लक्ष्य टार्गेट पांच हज़ार पर थी ..फेस बुक पर मेरे पहले ही पांच हजार दोस्तों की सीमा पूरी हो चुकी है और अब आज अल्लाह के फ्ज्लो कर्म से आकी दुआओं से मुझे मेरे टार्गेट में कामयाबी मिली है ..............दोस्तों मेरा अब न्य टार्गेट कल से शुरू होगा अभी आपको मेरा टार्गेट छोटा मुंह बढ़ी बात और मजाक लगेगा लेकिन में क्क्प्को यकीन दिलाता हूँ के आप लोगों की दुआओं से में इंटरनेट पर फर्जी आई डी से खाते खोलने ,, अश्लीलता फेलाने और अभद्रता ,,साम्प्रदायिकता फेलाने वालों के खिलाफ कार्यवाही करवा कर रहूँगा मेने पहले भी चेताया है और एक बार फिर ऐसे मेरे भाइयों को चेताता हूँ के हंसी हंसी में इंटरनेट पर किसी का अपमान करना ..गलत फोटू प्रचारित करना फर्जी आई डी बनाना अच्छा लगता है और लोग सोचते हैं के उन्हें कोई पकड़ नहीं सकता लेकिन ऐसे लोग अगर मान गये उन्होंने अपनी गलत हरकतें छोड़ कर इंटरनेट का दुरूपयोग छोड़ कर सदुपयोग शुरू कर दिया तो ठीक वरना मुझे मजबूरी में मेरे कुछ साथियों की मदद से उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करना होगी और उसमे अगर वोह पकड़े गये तो फिर उनका जीवन बर्बाद भी हो सकता है क्योंकि अधिकतम ऐसे लोग सम्भ्रांत परिवार के ही होते हैं जिसका खिमियाज़ा परिवार को भुगतना पढ़ता है मेरे पास हाल ही में इंटरनेट दुरूपयोग का ऐसा केस है जिसमे मुंबई की पार्टी जो सम्भ्रांत है व्यापारी है वोह कोटा की जेल में बंद है और उनकी जमानत के लाले पढ़े है सो प्लीज़ माँ जाइये भाइयों .....एक बार फिर आप सभी का शुक्रिया मेरे ऊपर की गयी महरबानियों के लियें ............अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

Friday, November 11, 2011

ग़ज़लगंगा.dg: अब नहीं सूरते-हालात बदलने वाली.

अब नहीं सूरते-हालात बदलने वाली.

फिर घनी हो गयी जो रात थी ढलने वाली.


अपने अहसास को शोलों से बचाते क्यों हो

कागज़ी वक़्त की हर चीज है जलने वाली .


एक सांचे में सभी लोग हैं ढलने वाले

जिंदगी मोम की सूरत है पिघलने वाली.


फिर सिमट जाऊंगा ज़ुल्मत के घने कुहरे में

देख लूं, धूप किधर से है निकलने वाली.


एक जुगनू है शब-ए-गम के सियहखाने में

एक उम्मीद है आंखों में मचलने वाली.


----देवेंद्र गौतम

प्रिय प्रवीण शाह जी का एक यादगार कमेंट Eid ul azha

ब्लॉगिंग की दुनिया में ऐसा कम ही होता है कि कोई कमेंट एक यादगार कमेंट बन जाए।
इल्म ए जफर का उसूल है कि हरेक सवाल में ही उसका जवाब छिपा होता है।
हमारे प्रिय प्रवीण शाह जी के कमेंट को देखकर हमें यही नज़र आया है कि हां, सच में ही अगर सवाल करने वाला अपने सवाल पर ही ढंग से ग़ौर कर ले तो उसका सवाल ही उसे जवाब दे सकता है।
प्रिय प्रवीण जी का यह कमेंट हमारी बहन शिल्पा मेहता जी के सवाल के जवाब में है , आप भी देखिए -
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" मैंने यह पोस्ट आपके धर्म पर आक्षेप लगाने को लिखी है - क्योंकि मैंने इसके लिए नहीं लिखी - यह मैं और मेरे ईश्वर जानते हैं ( जिन्हें आप अल्लाह के नाम से बुलाते हैं - उन्हें मैं ईश्वर के नाम से बुलाती हूँ ) उन्ही ईश्वर की प्रेरणा पर ही मैंने यह पोस्ट लिखी है - उन्ही की प्रेरणा पर मैं हर कार्य करती हूँ | तो जब लोग मुझ पर "आक्षेप करने" का आक्षेप लगाते हैं - तो वे ( अनजाने में ही सही ) मुझ पर नहीं बल्कि उसी परवरदिगार पर आक्षेप लगाते हैं | अल्लाह सिर्फ आपके ही नहीं - मेरे भी अल्लाह हैं, रहीम हैं - मुझे बुरा भला कहना भी उनके ही एक बन्दे को बुरा भला कहना है |"

आदरणीय शिल्पा जी,

विनम्रता पूर्वक यह कहना चाहता हूँ कि मैं कहीं पर भी बात को घुमाने का प्रयास नहीं कर रहा... आपके इस आलेख में मुझे दो अलग अलग किस्म की आस्थाओं का टकराव दिख रहा है साफ-साफ और उसी को रेखांकित किया है मैंने... अब ऊपर उद्धरित अपनी ही पंक्तियों को देखिये... ईमान पर कायम, पाँच वक्त का नमाजी कोई मुसलमान अगर यह कहे कि-
" यह सोचना गलत है कि मैंने यह कुरबानी आपके धर्म या संवेदनाओं पर चोट लगाने को दी है - क्योंकि मैंने इसके लिए नहीं दी - यह मैं और मेरे खुदा जानते हैं ( जिन्हें आप ईश्वर के नाम से बुलाते हैं - उन्हें मैं अल्लाह के नाम से बुलाता हूँ ) उन्ही अल्लाह की प्रेरणा पर ही मैंने यह कुरबानी की है - उन्ही की प्रेरणा पर मैं हर कार्य करता हूँ | तो जब लोग मुझ पर कुरबानी कर कुछ गलत करने का आक्षेप लगाते हैं - तो वे ( अनजाने में ही सही ) मुझ पर नहीं बल्कि उसी परवरदिगार पर आक्षेप लगाते हैं | ईश्वर सिर्फ आपके ही नहीं - मेरे भी अल्लाह हैं, रहीम हैं - मुझे बुरा भला कहना या मेरे कृत्य पर सवाल उठाना भी उनके ही एक बन्दे को बुरा भला कहना व उस पर सवाल उठाना है।"

तो किसी भी किनारे पर खड़े प्रेक्षक के लिये आप दोनों की बातों का वजन बराबर होगा... आप दोनों ही सही कह रहे हैं... बस दोनों की आस्थायें अलग-अलग हैं... इसीलिये मैंने मित्र गौरव को कहा कि हमारे निष्कर्ष भी हमारी 'आस्था' से ही प्रभावित होते हैं...

एक पत्र पेट्रोल के नाम

Thursday, November 10, 2011

वतन की राह में वतन के नौजवाँ शहीद हों....- Dr. Divya Shriwastawa

क्या दिव्या जी भारत आएंगी अपने वतन पर शहीद होने के लिए ?

ZEAL: वतन की राह में वतन के नौजवाँ शहीद हों....
यह आह्वान कर रही हैं डा. दिव्या श्रीवास्तव जी।
अच्छी प्रेरणा है।
पोस्ट पढ़ने के लिए गए तो देखा कि 39 कमेंट भी हो गए हैं लेकिन किसी ने भी यह नहीं कहा कि वतन की नौजवां तो आप भी हैं, आप भी शहीद होने के लिए अपने वतन आ जाईये न !

इसी का नाम है पर उपदेश कुशल बहुतेरे !!
आजकल के नेता लोग इसी तरकीब से काम चला रहे हैं।
खुद को बचाए रखेंगे और लोगों से कहेंगे कि ‘चढ़ जा बेटा सूली पर राम भली करेगा‘
लेकिन अब जनता की आंखें कुछ कुछ खुलने लगी हैं।
वह चाहती है कि जो शहीद होने की प्रेरणा दे रहा है पहले इस रास्ते पर वह खुद तो चलकर दिखाए !!!

क्या दिव्या जी भारत आएंगी अपने वतन पर शहीद होने के लिए ?
इसे हम भी पूछ रहे हैं और आप भी पूछिए .
अगर वे नहीं आतीं और खुद थाईलैंड में रहकर विदेशी मुद्रा कमा रही हैं तो दूसरों को भी बताएं कि वे अपना देश छोड़कर कैसे अपना भविष्य बेहतर बना सकते हैं ?
जिस काम का उन्हें तजुर्बा है, उस काम की सलाह देना ज़्यादा ठीक है बनिस्बत शहादत की प्रेरणा देने के , कि जो काम उन्होंने न तो किया है और न ही कभी करना है।

अंदाज ए मेरा: इमरजेंसी लगी है घर में......!!!!

अंदाज ए मेरा: इमरजेंसी लगी है घर में......!!!!: मेरे घर का माहौल कल से खराब है ! मेरी पत्‍नी थोडी थोडी देर में चिल्‍ला रही है ! जिस वक्‍त देश में इमरजेंसी लगी थी उस वक्‍त मैं महज चार ...

Wednesday, November 9, 2011

हरिद्वार में भगदड़

पंडित श्री राम शर्मा आचार्य की जन्मशताब्दी समारोह के अवसर पर लोगों की भीड़ के कारण हुए हादसे में २२ लोगों के मारे जाने के बाद हमें इस बात पर फिर से विचार करने की ज़रुरत है कि इस तरह के बड़े आयोजन करने के लिए संस्थाएं व्यवस्था तो कर सकती हैं पर बहुत से ऐसे लोग जो केवल धर्म लाभ के लिए ऐसी जगहों पर जाते हैं और उन्हें इस तरह की संस्थाओं से कुछ भी मतलब नहीं होता है और वे इनकी गतिविधियों से पूरी तरह से अनभिज्ञ होते हैं जिनके कारण ही कई बार ऐसी अव्यवस्था फैल जाया करती है. इस बारे में अभी तक शांति कुञ्ज हरिद्वार के अनुशासन की सभी जगह तारीफ़ होती थी कि इनके कार्यकर्ता कितने भी बड़े आयोजन को बिना किसी अव्यवस्था के संपन्न कराने की क्षमता रखते हैं पर इस बार कहीं से कुछ कमी अवश्य रह गयी जिस कारण से ऐसी दुर्घटना हो गयी. इस बात पर अब शांतिकुंज में अवश्य ही मंथन किया जायेगा कि आख़िर किस स्तर पर कौन सी कमी रह गयी जिसने यह सब करा दिया
http://seedhikharibaat.blogspot.com/2011/11/blog-post_09.html?utm_source=feedburner&utm_medium=feed&utm_campaign=Feed%3A+SeedhiKhariBaat+%28Seedhi+Khari+Baat...++%3F%3F%3F%3F+%3F%3F%3F+%3F%3F%3F%29

चर्चा मंच: "दिल को देखो : चेहरा न देखो ! " (चर्चा मंच-693)

चर्चा मंच: "दिल को देखो : चेहरा न देखो ! " (चर्चा मंच-693)
हम चर्चा मंच के नियमित पाठक हैं। पिछले बुधवार की चर्चा में भाई अरूणेश दवे जी ने हमारे विरूद्ध लिखी एक पोस्ट को प्रमुखता से यहां पेश किया लेकिन हमने उस पर टिप्पणी नहीं दी क्योंकि एक व्यंग्यकार को हक़ है कि वह जो कहना चाहता है कहे।
अरूणेश जी को शायद हमसे ऐसी ख़ामोशी की अपेक्षा नहीं थी। सो वह अगले बुधवार की प्रतीक्षा करते रहे और आज यहां उन्होंने हमारे विरूद्ध लिखी व्यंग्यात्मक पोस्ट्स के लिंक भी दिए और यह भी बताया कि हमारा नज़रिया क्या है ?
अपनी पोस्ट्स के और दूसरों की पोस्ट्स के लिंक्स देना तो उनका हक़ है लेकिन उन्होंने हमारा नज़रिया जो बताया है वह एक अनाधिकार चेष्टा है।
सभी ब्लॉगर्स यह अच्छी तरह जानते हैं कि
1. मौलाना वस्तानवी का विरोध करने वाले आलिमों को हमने ऐलानिया ग़लत कहा।
2. अन्ना हजारे का विरोध करने पर हमने मौलाना अहमद बुख़ारी साहब के नज़रिये और तरीक़े को ग़लत कहा।
3. इंडिया इस्लामिक सभागार दिल्ली में नाच गाना होने के बाद हमने कहा कि ‘मुसलमानों का परम चरम पतन‘ हो चुका है।

इसी सिलसिले में हमने एक पोस्ट में कहा है कि उच्च शिक्षा को समस्याओं का समाधान समझा जाता है लेकिन जैसे जैसे उच्च शिक्षा बढ़ रही है, युवा वर्ग और देश की समस्याएं भी बढ़ रही हैं। इसका मतलब यह है कि इस आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं कुछ कमी ज़रूर है।
4. हमने कहा है कि
जब हम मुसलमानों को दूध का धुला साबित नहीं कर रहे हैं तो फिर आप कैसे कुछ भी कह सकते हैं ?
‘लिव इन रिलेशनशिप‘ में रहने वाली लड़कियां सभी उच्च शिक्षित हैं।
आधुनिक शिक्षा भारतीय नौजवान लड़कियों को यह बना रही है।
इमोशनल अत्याचार नामक सीरियल में देखो कि क्या कर रहे हैं पढ़े लिखे हिंदू ?
...................
हमारा कहना यह है कि इन्होंने हिंदू का लेबल लगा लिया है लेकिन हिंदू होने के लिए कुछ साधना करनी पड़ती है वह इन्होंने की ही नहीं है। अगर ये उस साधना को करते तो ये इन कुकर्मों को कभी न करते।
बताओ हमारी बात कहां ग़लत है ?
यही बात जरायम पेशा मुसलमानों के लिए कहता हूं कि मुसलमान का केवल लेबल लगा लिया है। इस्लामी क़ायदे क़ानून पर चलते तो वे दूसरों की तबाही का ज़रिया न बनते।
देखिए लिंक :
http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/BUNIYAD/entry/%E0%A4%95-%E0%A4%AF-%E0%A4%AE%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%B9-%E0%A4%B9-%E0%A4%89%E0%A4%9A-%E0%A4%9A-%E0%A4%B6-%E0%A4%95-%E0%A4%B7-%E0%A4%A4-%E0%A4%B9-%E0%A4%A8-%E0%A4%A6-%E0%A4%AF-%E0%A4%B5

...और लुत्फ़ की बात यह है कि यह पूरी पोस्ट एक समाचार मात्र है जिसमें हमारी लिखी हुई केवल 3 पंक्तियां हैं और उन तीनों पंक्तियों में एक शब्द भी हिंदू धर्म की आलोचना में नहीं है।
......और यह भी सही है कि हम लोगों के विरोध को सकारात्मक रूप में ही देखते हैं और अपने विरोधियों को हमेशा अपने प्रचारक के रूप में ही देखते हैं। इनसे हमें अभी तक लाभ ही हुआ है। यही वजह है ज़्यादातर विरोधियों से हमारे दोस्ताना ताल्लुक़ात हैं।
वैसे भी हम इन्हें दिल का बुरा नहीं मानते, बस ग़लतफ़हमी का शिकार ही मानते हैं।

चर्चा मंच के व्यवस्थापक , पाठक और सभी लेखकों को शुभकामनाएं।
भाई अरूणेश दवे जी को विशेष तौर पर शुभकामनाएं !!!

Tuesday, November 8, 2011

अहिंसा के नाम पर इस्लाम के खि़लाफ़ दुष्प्रचार क्यों ?

ZEAL: 'लाश' खाने के शौक़ीन हैं आप ?
डा. दिव्या जी का स्टाइल यह है कि जो उनके जी में आता है, वह कल्पना कर लेती हैं और फिर उस कल्पना को सच मान लेती हैं। इसके बाद वे उसे लेकर दो चार पोस्ट तैयार कर लेती हैं और फिर उन्हें अपने ब्लॉग पर छापती रहती हैं। पिछले साल की तरह इस बार भी उन्होंने इस्लामी क़रबानी पर ऐतराज़ जताया और निहायत भौंडे अंदाज़ से जताया। उन्हें पता था कि उनकी इस घिनौनी हरकत को हम हरगिज़ पसंद नहीं करेंगे, लिहाज़ा उन्होंने हमारी शख्सियत पर भी कीचड़ उछालना ज़रूरी समझा और जब हमने बताया कि जो वह समझती हैं , हक़ीक़त उसके खि़लाफ़ है तो उन्होंने हमारे कमेंट को पब्लिश ही नहीं किया। वह कमेंट यह है -

डाक्टर दिव्या श्रीवास्तव साहिबा !
1- बदगुमानियों का तो कोई इलाज होता ही नहीं है। हम ने पोपट लाल नाम के किसी ब्लॉगर के बारे में आज ही सुना है और किलर झपाटा बनकर भी हम नहीं लिखते इसे किलर झपाटा जी भी जानते हैं और वह ईश्वर भी जो कि हरेक कर्म का साक्षी है।
अश्लील गालियां हमने अपने किसी विरोधी को आज तक नहीं दीं और न ही हम इसे जायज़ समझते हैं।
झूठ हम बोलते नहीं और सच का यक़ीन आप न करें तो आपकी मर्ज़ी।
किलर झपाटा जी को हमने एक बार आपको गाली देने से मना किया था तो उन्होंने इसी जुर्म में खुद हमें और हमारे परिवार को कई दिनों तक गंदी गालियां बकी थीं। इसे भी शायद आपने देखा होगा।

2-आपने हमारे किस लेख से समझा कि हम तिलमिला गए हैं ?
तिलमिलाहट और झल्लाहट तो आपके लेख और आपकी टिप्पणियों में नज़र आ रही है। इसी झल्लाहट में आप यह भी न देख पाईं कि कायस्थ भी मांस खाते हैं।
आपने जिस जाति में जन्म लिया उसी को राक्षस और दरिंदा घोषित कर दिया ?
समुद्रतटीय प्रदेशों में बसने वाले हिंदुओं का आहार भी मछली आदि जलीय जीव ही हैं। आपको कुछ भी कहने से पहले भारत की संस्कृति और भारतीयों के खान-पान की विविधता को भी जान लेना चाहिए था।

आज आपकी टिप्पणी देखी तो इतना लिखना ज़रूरी समझा।
अब चाहे आप इसे छापना या मत छापना।
ख़ैर आज बक़रीद है और आज ब्लॉगर्स मीट वीकली की 16 वीं क़िस्त भी है।
आपकी पोस्ट भी इसमें सुशोभित है,
तशरीफ़ लायें।
साभार !!!

Monday, November 7, 2011

ब्लॉगर्स मीट वीकली (16) Baqar Eid Mubarak

जब तक तन में प्राण रहेगा, हार नहीं मानूँगा।
कर्तव्यों के बदले में, अधिकार नहीं मागूँगा।।
http://hbfint.blogspot.com/2011/11/16-eid-mubarak.html


Sunday, November 6, 2011

अरे भई साधो......: टीम अन्ना को संयम और समन्वय की ज़रूरत

अन्ना हजारे ने अपना ब्लॉग बंद करने का ऐलान किया है. उनकी नाराजगी का कारण उनका पत्र समय से पहले सार्वजनिक कर दिया जाना है. उनहोंने जिस पत्रकार को ब्लॉग के संचालन का जिम्मा दिया था उसने यह गलती की है. इसे आपसी समन्वय का अभाव और अति उत्साह का नतीजा ही कहेंगे. टीम अन्ना के सदस्य किसी मसले पर आपस में सलाह मश्वरा करना और सार्वजनिक बयान देने अन्ना से बात करने या सोचने समझने की ज़रूरत नहीं समझते. उनहोंने अपने को भ्रष्टाचार विरोध का चैम्पियन और भारतीय जनमानस की आवाज़ मान लिया है. यही कारण है कि वे विवादास्पद बयान जारी कर दे रहे हैं. प्रशांत भूषण कश्मीर पर विचार प्रकट कर पीटाई खा जा रहे हैं तो अरविंद केजरीवाल जूते का प्रहार झेल रहे हैं. बयान देने के मामले में स्वयं अन्ना भी संयम नहीं बरत रहे. अडवाणी की रथयात्रा के पूर्व उनकी सलाह ठीक ऐसी ही थी. अडवाणी की यह कोई पहली रथयात्रा नहीं थी. यह उनकी राजनैतिक शैली का हिस्सा रही है. यदि वे भ्रष्टाचार के विरोध में रथयात्रा कर रहे थे तो यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार था. अन्ना को कोई भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन का कॉपी राईट नहीं मिल गया है. इस बात को समझना चाहिए.
अन्ना के आंदोलन में जो अपार जनसमूह उमड़ पड़ा था वह इसलिए कि उन्होंने आम जनता के आक्रोश को स्वर दिया था. उनकी छवि साफ़ सुथरी थी और उनके अन्दर परिवर्तन की लम्बी लड़ाई के नेतृत्त्व की क्षमता दिखी थी. लेकिन वे यह बात नहीं समझ पाए कि उनकी लड़ाई बड़े ही भ्रष्ट और शातिर किस्म के लोगों के साथ है जो पल में तोला और पल में रत्ती करने की कला में माहिर हैं. दरअसल टीम अन्ना अपनी प्रारंभिक जीत को पचा नहीं पाई और अति-उत्साह में उल-जुलूल हरकतें करने लगी. कांग्रेस उनके छिद्रान्वेषण में लगी रही और कुछ छिद्र ढूंड भी निकाले. निश्चित रूप से यह सबक सिखाने का अभियान था. इसके जरिये कांग्रेस ने अपने असली चरित्र को ujagar किया. उसने बताया कि काला धन वापस लाने की बात करोगे तो आधी रात को पीटाई होगी और भ्रष्टाचार विरोध करोगे तो तुम्हारी चड्ढी भी उतार फेकेंगे. इस किस्म के लोगों से लड़ने के लिए बड़े धैर्य और कूटनीतिक दक्षता की ज़रूरत होती है. यह माफियाई किस्म के आर्थिक लुटेरों का गिरोह है. इसके हाथ में दानवी ताक़त है. सीधे-सादे लोगों को ये नचाकर फेंक देंगे.
लेकिन यह भी सच है कि अब भारत के लोग राजनीति की माफियाई और मायावी संस्कृति को ज्यादा दिनों तक नहीं बर्दास्त कर पाएंगे. उन्हें विकल्प की तलाश है. टीम अन्ना यदि विकल्प बन दे पाई तो ठीक नहीं तो कोई दूसरी ताक़त मैदान में आएगी. परिवर्तन की जन-आकांक्षा कोई swaroop तो ग्रहण करेगी ही.

-----देवेंद्र गौतम
अरे भई साधो......: टीम अन्ना को संयम और समन्वय की ज़रूरत

अरे भई साधो......: टीम अन्ना को संयम और समन्वय की ज़रूरत

अन्ना हजारे ने अपना ब्लॉग बंद करने का ऐलान किया है. उनकी नाराजगी का कारण उनका पत्र समय से पहले सार्वजनिक कर दिया जाना है. उनहोंने जिस पत्रकार को ब्लॉग के संचालन का जिम्मा दिया था उसने यह गलती की है. इसे आपसी समन्वय का अभाव और अति उत्साह का नतीजा ही कहेंगे. टीम अन्ना के सदस्य किसी मसले पर आपस में सलाह मश्वरा करना और सार्वजनिक बयान देने अन्ना से बात करने या सोचने समझने की ज़रूरत नहीं समझते. उनहोंने अपने को भ्रष्टाचार विरोध का चैम्पियन और भारतीय जनमानस की आवाज़ मान लिया है. यही कारण है कि वे विवादास्पद बयान जारी कर दे रहे हैं. प्रशांत भूषण कश्मीर पर विचार प्रकट कर पीटाई खा जा रहे हैं तो अरविंद केजरीवाल जूते का प्रहार झेल रहे हैं......

ग़ज़लगंगा.dg: बेबसी चारो तरफ फैली रही

बेबसी चारो तरफ फैली रही.

जिंदगी फिर भी सफ़र करती रही.


अब इसे खुलकर बिखरने दे जरा

रौशनी सदियों तलक सिमटी रही.



----देवेंद्र गौतम ग़ज़लगंगा.dg: बेबसी चारो तरफ फैली रही

Friday, November 4, 2011

में तो अकेला चला था जानिबे मंजिल ................


जी हाँ जनाब किसी ने कहा है के में तो अकेला चला था जानिबे मंजिल लोग चलते गये और कारवां बनता गया सही कहावत है कहते है कोई काम नहीं है मुश्किल जब किया इरादा पक्का ....दोस्तों में इंटरनेट और कम्प्यूटर की ऐ बी सी डी से भी वाकिफ नहीं हूँ ..और हकीक़त यह है के में इंटरनेट या कम्प्यूटर पर हिंदी टाइपिंग भी नहीं जानता हूँ भला हो गूगल सेवाओं का जिनके कारण में अपनी भावना हिंदी भाषा में लिख कर आप लोगों के सामने प्रदर्शित कर रहा हूँ ..मेर बेटे शाहरुख खान ने जब मई २०१० में मेरा ब्लॉग बनाया तो मुझे पता नहीं था के मुझे फेस बुक को भी फेस करना होगा और गूगल की जी मेल सेवा का भी मुझे लाभ प्राप्त होगा ..दोस्तों में हिंदी ब्लोगिंग करता रहा मेरी कभी आलोचना हुई तो कभी मुझे सराहा गया में फेस बुक से जुड़ा मुझे एक जूनून स्वर हुआ के में बहुत जल्द फेसबुक के पांच हजार दोस्तों की हद पर कर लूँ और आप लोगों के आशीर्वाद से फेसबुक पर में आज पांच हजार मित्रों की हदें बहुत काम वक्त में पार कर चूका हूँ यह सब आप दोस्तों और भाइयों बहनों के प्यार के कारण ही संभव हो सका है दोस्तों मेरा सपना है के में हिंदी ब्लोगिंग में भी सबसे तेज़ लिक्खड़ की तरह कम वक्त में पांच हजार पोस्टें लिखने वाला लिक्खड़ ब्लोगर बन जाऊं ..........मुझे याद है मुझे बेस्ट ब्लोगर भाई ललित शर्मा मिले थे और जब मेरी पांच सो पोस्टें पूरी हुईं तो में ख़ुशी से फुला नहीं समा रहा था तब मुझे भाई ललित शर्मा ने ब्लोगिंग की ऐ बी सी डी से अवगत कराते हुए साहस दिलाया के पांच हजार पोस्ट लिखो तो मुझे बताता में खुद तुम्हारे ऊपर पोस्ट लिखूंगा दोस्तों बात निकली थी ब्लोगिंग समझ से लेकिन दिल को चुभ गयी और तब से में अपने महत्वपूर्ण कामों को भी नज़र अंदाज़ कर जब भी मुझे फुर्सत मिली लिखता रहा लिखता रहा और आज मुझे गर्व है के मेरे ब्लॉग के ४८०० आर्टिकल पुरे हो गये है और खुदा ने अगर मुझे ज़िंदा रखा और सब कुछ ठीक चलता रहा तो वर्ष २०११ में दिसम्बर तक में पूरी पांच हजार पोस्ट पूरा कर सबसे तेज़ लिखने वाला लिक्खड़ बन सकूंगा इस दोड़ में में अकेला ही नहीं हूँ मुझे कभी दिनेश राय द्विवेदी जी ने झकझोरा तो कभी भाई अनवर जमाल ..भाई मासूम ..भाई रमेश सिरफिरा .....भाई शाहनवाज़ ..बहन रश्मि शर्मा ..वन्दना गुप्ता सहित करिव पञ्च सो से भी अधिक ब्लोगर साथियो ने मुझे हिमात दिलाई और में आज इस दोड़ में अव्वल हूँ और एक अव्वल रिकोर्ड बनाने के प्रयास में हूँ खुदा करे भाई ललित शर्मा का आशीर्वाद में पूरा कर सकूं और इसी वर्ष २०११ में पूरी पांच हजार पोसते लिख सकूं देखिये अभी मेरी कुल ४८०० पोस्टें पूरी हुई है मेरे पास कहने वक्त है अगर कुदरत ने मुझे वक्त दिया और सब कुछ ठीक रखा तो खुदा मुझे कामयाब कर देगा और में खुद अपनी कामयाबी पर हेरान सा मेरे दोस्तों भाइयों और बहनों के प्यार मोहब्बत और मार्गदर्शन का एहसानमंद होकर उनके बोझ तले खुद को खुशनसीब समझता रहुगा काश ऐसा हो जाए और जल्दी से जल्दी हो जाए ........................अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

पाकिस्तान ने अंततः भारत को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दे दिया

भारत-पाक रिश्तों में कारोबारी बयार

पाकिस्तान ने अंततः भारत को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दे दिया। इस बात का फैसला सितम्बर के आखिरी हफ्ते में मुम्बई में दोनों देशों के व्यापार मत्रियों की बातचीत के बाद हो गया था। पर मुम्बई में औपचारिक घोषणा नहीं की गई थी। पाकिस्तान ने दुनिया के सौ देशों को इस किस्म का दर्जा दे रखा है। भारत उसे 1996 में यह दर्जा दे चुका है। विश्व व्यापार संगठन बनने के बाद से दुनियाभर के देश एक-दूसरे के साथ कारोबार बढ़ाने को उत्सुक रहते हैं, पर दक्षिण एशिया के इन दो देशों की राजनीति कारोबार के रास्ते पर चलती तो इस इलाके में खुशहाली की बयार बहती। बहरहाल महत्वपूर्ण बात यह है कि इस फैसले को सेना की स्वीकृति भी प्राप्त है।
See :
http://pramathesh.blogspot.com/2011/11/blog-post_04.html

Wednesday, November 2, 2011

; तमस: टेलीविजन से फिल्म तक !!


प्रिय मित्र 
एक समय के विख्यात धारावाहिक को फिल्म में बदला जा रहा है . इसी विषय पर  इंटरवल में मेने अपनी बात रखने की कोशिश की है .
कृपया अपनी भावनाओ से अवगत करावे . धन्यवाद .
रजनीश जे जैन 
यह सूचना रजनीश जी द्वारा भेजी गयी है .

‘ब्लॉग की ख़बरें‘

1- क्या है ब्लॉगर्स मीट वीकली ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_3391.html

2- किसने की हैं कौन करेगा उनसे मोहब्बत हम से ज़्यादा ?
http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

3- क्या है प्यार का आवश्यक उपकरण ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

4- एक दूसरे के अपराध क्षमा करो
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

5- इंसान का परिचय Introduction
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/introduction.html

6- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

8- बेवफा छोड़ के जाता है चला जा
http://kunwarkusumesh.blogspot.com/2011/07/blog-post_11.html#comments

9- इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक
http://www.hamarianjuman.com/2011/07/blog-post.html

10- दुआ की ताक़त The spiritual power
http://ruhani-amaliyat.blogspot.com/2011/01/spiritual-power.html

11- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

12- शकुन्तला प्रेस कार्यालय के बाहर लगा एक फ्लेक्स बोर्ड-4
http://shakuntalapress.blogspot.com/

13- वाह री, भारत सरकार, क्या खूब कहा
http://bhadas.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

14- वैश्विक हुआ फिरंगी संस्कृति का रोग ! (HIV Test ...)
http://sb.samwaad.com/2011/07/blog-post_16.html

15- अमीर मंदिर गरीब देश
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

16- मोबाइल : प्यार का आवश्यक उपकरण Mobile
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/mobile.html

17- आपकी तस्वीर कहीं पॉर्न वेबसाइट पे तो नहीं है?
http://bezaban.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

18- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम अब तक लागू नहीं
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

19- दुनिया में सबसे ज्यादा शादियाँ करने वाला कौन है?
इसका श्रेय भारत के ज़ियोना चाना को जाता है। मिजोरम के निवासी 64 वर्षीय जियोना चाना का परिवार 180 सदस्यों का है। उन्होंने 39 शादियाँ की हैं। इनके 94 बच्चे हैं, 14 पुत्रवधुएं और 33 नाती हैं। जियोना के पिता ने 50 शादियाँ की थीं। उसके घर में 100 से ज्यादा कमरे है और हर रोज भोजन में 30 मुर्गियाँ खर्च होती हैं।
http://gyaankosh.blogspot.com/2011/07/blog-post_14.html

20 - ब्लॉगर्स मीट अब ब्लॉग पर आयोजित हुआ करेगी और वह भी वीकली Bloggers' Meet Weekly
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/bloggers-meet-weekly.html

21- इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
http://www.sahityapremisangh.com/2011/07/blog-post_3678.html

22- इसलाम में आर्थिक व्यवस्था के मार्गदर्शक सिद्धांत
http://islamdharma.blogspot.com/2012/07/islamic-economics.html

23- मेरी बिटिया सदफ स्कूल क्लास प्रतिनिधि का चुनाव जीती
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_2208.html

24- कुरआन का चमत्कार

25- ब्रह्मा अब्राहम इब्राहीम एक हैं?

26- कमबख़्तो ! सीता माता को इल्ज़ाम न दो Greatness of Sita Mata

27- राम को इल्ज़ाम न दो Part 1

28- लक्ष्मण को इल्ज़ाम न दो

29- हरेक समस्या का अंत, तुरंत

30-
अपने पड़ोसी को तकलीफ़ न दो

साहित्य की ताज़ा जानकारी

1- युद्ध -लुईगी पिरांदेलो (मां-बेटे और बाप के ज़बर्दस्त तूफ़ानी जज़्बात का अनोखा बयान)
http://pyarimaan.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

2- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

3- आतंकवादी कौन और इल्ज़ाम किस पर ? Taliban
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/taliban.html

4- तनाव दूर करने की बजाय बढ़ाती है शराब
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

5- जानिए श्री कृष्ण जी के धर्म को अपने बुद्धि-विवेक से Krishna consciousness
http://vedquran.blogspot.com/2011/07/krishna-consciousness.html

6- समलैंगिकता और बलात्कार की घटनाएं क्यों अंजाम देते हैं जवान ? Rape
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/rape.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

8- ख़ून बहाना जायज़ ही नहीं है किसी मुसलमान के लिए No Voilence
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/no-voilence.html

9- धर्म को उसके लक्षणों से पहचान कर अपनाइये कल्याण के लिए
http://charchashalimanch.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

10- बाइबिल के रहस्य- क्षमा कीजिए शांति पाइए
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

11- विश्व शांति और मानव एकता के लिए हज़रत अली की ज़िंदगी सचमुच एक आदर्श है
http://dharmiksahity.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

12- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

13- ‘इस्लामी आतंकवाद‘ एक ग़लत शब्द है Terrorism or Peace, What is Islam
http://commentsgarden.blogspot.com/2011/07/terrorism-or-peace-what-is-islam.html

14- The real mission of Christ ईसा मसीह का मिशन क्या था ? और उसे किसने आकर पूरा किया ? - Anwer Jamal
http://kuranved.blogspot.com/2010/10/real-mission-of-christ-anwer-jamal.html

15- अल्लाह के विशेष गुण जो किसी सृष्टि में नहीं है.
http://quranse.blogspot.com/2011/06/blog-post_12.html

16- लघु नज्में ... ड़ा श्याम गुप्त...
http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

17- आपको कौन लिंक कर रहा है ?, जानने के तरीके यह हैं
http://techaggregator.blogspot.com/

18- आदम-मनु हैं एक, बाप अपना भी कह ले -रविकर फैजाबादी

19-मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत

20- मौत कहते हैं जिसे वो ज़िन्दगी का होश है Death is life

21- कल रात उसने सारे ख़तों को जला दिया -ग़ज़ल Gazal

22- मोम का सा मिज़ाज है मेरा / मुझ पे इल्ज़ाम है कि पत्थर हूँ -'Anwer'

23- दिल तो है लँगूर का

24- लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी - Allama Iqbal

25- विवाद -एक लघुकथा डा. अनवर जमाल की क़लम से Dispute (Short story)

26- शीशा हमें तो आपको पत्थर कहा गया (ग़ज़ल)