Wednesday, February 29, 2012

याददाश्त कमजोर होने का खतरा ज्यादा खाने से Diet

ज़्यादा खाना कर रहा है बीमार, इस्लाम की सच्चाई की गवाही देती हुई एक रिसर्च

पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सिखाया है कि
  • अल्लाह के नज़दीक भरे हुए पेट से ज्यादा बुरा बर्तन कोई दूसरा नहीं है
  • अपने पेट का एक तिहाई हिस्सा खाने के लिए , एक तिहाई हिस्सा पानी के लिए और एक तिहाई हिस्सा हवाकेलिए रखो
यानि कि पेट भरकर मत खाओ वरना खाना तुम्हें ताक़त देने के बजाय बीमार कर देगा।
अब एक ताज़ा रिसर्च से भी यही बात साबित हुई है।
सुन्नत के तरीके में बेशक बरकत है।

देखिये:
http://aryabhojan.blogspot.in/2012/02/blog-post_29.html

नॉएडा में सामूहिक बलात्कार से उपजे सवाल Rape and it's solution

कुछ ग्रुप ऐसे होते हैं जो गुंडा एलिमेंट कहलाते हैं
वो कौन से कारण हो सकते हैं की बच्चे इस ग्रुप के लोगो से दोस्ती करते हैं । उनके साथ व्यवहार रखते हैं और मेल जोल रखते हैं ।
इसका अंजाम लडके और लड़की के लिये तकरीबन एक सा ही हो जाता हैं लड़का अपनी जान से हाथ धोता हैं और लड़की का बलात्कार होता हैं ।
नशा करना , जुआ खेलना , शराब पीना और सेक्स का प्रचलन अब आम हो गया हैं और अब ना बालिग इस का ज्यादा शिकार हो रहे हैं ।
अपना नज़रिया निसंकोच दे ताकि इस मानसिक उथल पुथल से बाहर आने का रास्ता मिले.

Sunday, February 26, 2012

अंदाज ए मेरा: लाल क्रांति के लिए दो अपने लाल!

अंदाज ए मेरा: लाल क्रांति के लिए दो अपने लाल!: ‘’हर घर से एक युवक दो या फिर मौत के लिए तैयार हो जाओ......’’ ये फरमान जारी किया है नक्‍सलियों ने और इस फरमान का असर है कि लोग अपनी धर...

Saturday, February 25, 2012

धन्यवाद !


धन्यवाद ! धन्यवाद ! धन्यवाद ! धन्यवाद ! धन्यवाद ! धन्यवाद ! 


आपके प्यार की बदौलत हमने हिन्दी ब्लॉगिंग गाइड के फेसबुक पेज समर्थकों का शतक पूरा कर लिया है... अब हम चाहेंगे कि ये समर्थन और भी ज्यादा बढ़ता जाये...

सफर की शुरुआत हो चुकी है 
और बढ़ रहा है कारवां...
एक कदम आप भी बढ़ाएँ 
के हम भी पा लेंगे अब अपना आसमां... 

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Thursday, February 23, 2012

क्या मैथुन के लिए हमें जानवर हो जान चाहिए ? -राम बंधु तिवारी

मानव प्राणी द्वारा विचार कर मैथुन करना ही, सभी प्राणियों में श्रेष्ठता प्रदान करती हैं|आख़िर मनुष्य और जानवर में फ़र्क क्या हैं? जानवर भी प्रेम, दोस्ती, समूह मे रहने की कला, लड़ना,झगड़ना,रोना हँसना आदि जानते है|यहाँ तक कि कभी-कभी जानवर विवेकशीलता का एसा उदाहरण प्रस्तुत करता हैं,जो मनुष्य के वश का नही होता ,फिर भी उन्न्हें जड़ जीव क्यों कहा जाता हैं? इसका मुख्य कारण कि वह संभोग के लिए रिश्तों मे भेद नहीं करते| वह कहीं भी,कभी भी,तथा किसी से भी अपने मैथुन भूख को मिटा लेते हैं| माँ,बहन,भाई, बाप आदि के रिश्तों को वह नही जानते|मैथुन के लिए वह सबको बराबर समझते हैं|

आजकल मानव भी अपने रिश्ते के अहमियत को भूल रहा हैं|भाई- बहन, बाप- बेटी आदि से संभोग रत होने का समाचार देखने और सुनने को मिल रहा हैं| तो क्या मैथुन के लिए हमें जानवर हो जान चाहिए ?कदापि नहीं|

NBT पर एक सुपरहिट पोस्ट-

मैथुन के लिए हमे जानवर हो जाना चाहिए?

राम बंधु तिवारी

Wednesday, February 22, 2012

लम्बे बच्चे कैसे पैदा करें ? Height

1-

लंबे बच्चे चाहिए तो दूर की बीवी लाएं

BBCसुनने में यह बात अजीब-सी लग सकती है, लेकिन पोलैंड के वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर पति और पत्नी एक ही शहर के हैं तो उनके बच्चे का कद नाटा रहेगा।





2-

सफ़ेद बाल काले कीजिए नीम से

नीम का तेल नाक के नथुनों में चंद क़तरे रोज़ाना टपकाएं आपके बाल अगर उम्र से पहले सफ़ेद हो गए हैं तो वे काले हो जाएंगे।

Tuesday, February 21, 2012

सूफ़ी दर्शन - Manoj Kumar

सूफ़ी दर्शन-2

वाजिबुल वुजूद

अल्लाह अजन्मा और अनश्वर है। उसके अलावा जो कुछ है सब परिवर्तनशील और नश्वर है। वह रचयिता है और सभी जीव उसी की एक रचना है। उसने उसे रूप देकर इस सृष्टि में पैदा किया। जीव का शरीर और आत्मा है। जिसके कारण भेद पैदा हो गया है। तमाम स्रोतों का मूल वाजिबुल वुजूद (जिसका अस्तित्व किसी दूसरे अस्तित्व का मुहताज न हो) से संबद्ध है।

मनुष्य के विभाग

सूफ़ियों ने मनुष्य के चार विभाग स्वीकार किए हैं :

1. नफ़्स

2. रूह

3. क़ल्ब

4. अक्ल

नफ़्स यानी विषयभोग वृत्ति या इंद्रिय या जड़ तत्व। मनुष्य के शरीर में समाहित यह तत्व उसका जड़ अंश बनाते हैं। अतः साधक का प्रथम लक्ष्य नफ़्स के साथ युद्ध होना चाहिए। रूह यानी आत्मा और क़ल्ब यानी हृदय द्वारा ही साधक अपनी साधना करता है। अक्ल या बुद्धि मनुष्य का चौथा विभाग है।

नफ़्स या जड़ आत्मा उसे कार्य में बाधा पहुंचाता है और उसे पाप की ओर ले जाने की चेष्टा करता है। किन्तु रूह या अजड़ आत्मा की ईश्वरीय शक्ति उसके कल्ब या हृदय के स्वच्छ दर्पण में परमेश्वर को प्रतिबिम्बित कर देती है और उसका अपने प्रियतम के साथ मिलन हो जाता है।

1. नफ़्स ए अम्मारा - यह इंसान को बुराई की प्रेरणा देता है।
2. नफ़्स ए लव्वामा - यह इंसान को बुराई करने पर कचोटता है।
3. नफ़्स ए मुतमइन्ना - साधना के बाद जब इंसान का नफ़्स मुतमइन हो जाता है। तब वह अपने रब के हरेक हुक्म पर मुतमइन हो जाता है। अपने नफ़्स को इस कैफ़ियत में लाने के लिए ही सूफ़ी लोग साधना करते हैं। रूहानी तरक्क़ी को वे अपने नफ़्स की कैफ़ियत से ही परखते हैं।

नफ़्स ए अम्मारा इंसान की साधना में बाधा पहुंचाता है और उसे पाप की ओर ले जाने की चेष्टा करता है। किन्तु रूह या आत्मा की ईश्वरीय शक्ति उसके कल्ब और हृदय के स्वच्छ दर्पण में परमेश्वर को प्रतिबिम्बित कर देती है और उसका अपने प्रियतम के साथ मिलन हो जाता है।

पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए लिंक पर जाएं-

सूफ़ियों ने विश्व-प्रेम का पाठ पढ़ाया अंक-7

Monday, February 20, 2012

ब्लॉगर्स मीट वीकली (31) Carrier in Homoeopathy

ब्लॉगर्स मीट वीकली (31) Carrier in Homoeopathy

Image

ज़िन्दगी ख़ुद क्या ‘फ़ानी’ यह तो क्या कहिये मगर।

मौत कहते हैं जिसे वो ज़िन्दगी का होश है॥


सबसे पहले मेरे सारे ब्लॉगर साथियों को प्रेरणा अर्गल का प्रणाम और सलाम / आप सभी का इस ब्लोगर्स मीट में स्वागत है /आप आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये /आप सभी का आशीर्वाद और स्नेह इस मंच को मिलता रहे यही कामना है /आभार /

Saturday, February 18, 2012

पुरस्‍कार और सम्‍मान की परम्‍परा -Ajit Gupta

‘आपका सूत्रधार‘ एक नया ब्लॉग सामने आया है और उसने ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ का लिंक अपनी एक ताज़ा पोस्ट पर दिया है जो कि ‘प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ‘ के शिखर पुरस्कार वितरण के संबंध है। हिंदी ब्लॉग जगत में इस पोस्ट ने काफ़ी हलचल मचाई है।

अजित गुप्ता जी एक मंझी हुई साहित्कार हैं। ब्लॉगिंग में बंट रहे पुरस्कारों पर उन्होंने अपने विचार प्रकट करते हुए जो कहा है, उसे भी इस पोस्ट पर उनके एक कमेंट में देखा जा सकता है।
  1. ओह, आपकी पोस्‍ट पर दिए लिंक से सारा माजरा समझ आया। पहले तो प्रब्‍लेस शब्‍द समझ नहीं आ रहा था, लेकिन अब सब कुछ स्‍पष्‍ट है। साहित्‍य में पुरस्‍कार और सम्‍मान की परम्‍परा इस आधुनिक युग में प्रारम्‍भ हुई थी तो प्रत्‍येक संस्‍था इसी उद्योग में लग गयी है। खुश होने दीजिए ऐसे लोगों को, स्‍वयं की खुशी से ज्‍यादा इन सम्‍मानों का और कोई अर्थ नहीं है।

Friday, February 17, 2012

सेहत की हिफ़ाज़त का आसान तरीक़ा

गुणवान की वाणी

सेहत की हिफ़ाज़त का आसान तरीक़ा

सुबह सूरज उगने से पहले उठें और पानी पीकर टहलने के लिए निकल जाएं।
नमाज़ पढ़तें हों तो नमाज़ पढें वर्ना तेज़ चाल से झपटकर चलें और जब सूरज निकल जाए तो कुछ देर उसे ध्यान से देखें।
भूख से कम खाएं, मौसमी फल सब्ज़ियां खाएं और अपने ख़यालात सकारात्मक बनाएं। नकारात्मक ख़याल आपके अंदर की ताक़त को खा जाते हैं।
आंवला, नींबू, लहसुन, प्याज़, पपीता और मछली का इस्तेमाल ज़रूर करें।
क़ब्ज़ हो तो रोज़ाना त्रिफला खाएं और पेट नर्म रहता हो तो अदरक इस्तेमाल करें।
लोगों से मुस्कुराकर मिलें।
जिस काम में बरकत चाहते हों तो आप उसे दिन के पहले घंटे में ज़रूर शुरू करें।
जिस काम की अहमियत ज़्यादा हो उसे पहले करें और वक्त निकाल कर दोस्तों और रिश्तेदारों से भी मिलें, आप डिप्रेशन की नामुराद बीमारी से हमेशा बचे रहेंगे।
आप इन कामों को करेंगे तो आपको ऑक्सीजन भरपूर मिलेगी और अपने खाने पीने से वे चीज़ें भी मिल जाएंगी जिनके ज़रिये आपका जिस्म लगातार ताक़त और ताज़गी पाता रहेगा।Dekhen - http://janhai.blogspot.in/2012/02/blog-post.html

Thursday, February 16, 2012

ब्लॉगर्स को प्रब्लेस शिखर सम्मान मुबारक हो ! Prize


Khushdeep Sehgal said...

दो दोस्तों ने फलों के कारोबार का फैसला किया...एक संतरे का टोकरा लेकर बैठ गया...एक केले का...दोनों ने फैसला किया सिर्फ कैश बिक्री करेंगे, उधार का कोई काम नहीं...थोड़ी देर बाद संतरे वाले को भूख लगी, उसने दो का सिक्का केले वाले को देकर केला लेकर खा लिया...केले वाले ने कहा, चलो बोहणी तो हुई...शाम तक दोनों के टोकरे खाली हो गए...पास ही संतरे और केले के छिलके के ढेर लग गए थे...दोनों ने कहा, चलो बिक्री तो बहुत बढ़िया हुई...अब कैश गिन लिया जाए...लेकिन ये क्या दोनों के पास कुल मिलाकर वो दो का सिक्का ही निकला...पूरा दिन वो एक दूसरे से कैश ले लेकर खुद ही सारे संतरे और केले चट कर गए थे....

भाई ख़ुशदीप सहगल जी ने यह कथा हमें एक पुरानी पोस्ट पर सुनाई थी। आज जब उस पोस्ट पर जाना हुआ तो लगा कि यह कथा तो हमारे हिंदी ब्लॉग जगत का सच है।
हमने तय किया था कि हम किसी को कुछ न कहेंगे और हमने काफ़ी बातों को नज़रअंदाज़ भी किया है।
आज हमें सूचना दी गई है कि
‘प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ‘ ने शिखर सम्मान की घोषणा कर दी है।

उत्सुकतापूर्वक हमने लिंक पर झांका तो वहां प्रमुख पुरस्कारों में हमें अपने श्री रवीन्द्र प्रभात जी और श्री अविनाश वाचस्पति जी के नाम नज़र आए।
अब हम बदल चुके हैं लिहाज़ा हम इन पुरस्कारों को न तो ‘उधार की चीनी के लेन देन से उपमा देंगे‘ और न ही ‘अंधे के रेवड़ी बांटने से‘।
वैसे भी अंधा इतनी ईमानदारी तो बरतता ही है कि रेवड़ियां अपनों को भले ही दे लेकिन ख़ुद कभी नहीं खाता।

यह ब्लॉगिंग भी बड़ी अजीब है,
यहां मेहनत भी करनी पड़ती है और फिर ख़ुद को पुरस्कृत भी स्वयं ही करना पड़ता है।
अगर ऐसा न किया जाए तो यहां कोई पुरस्कार देने वाला नहीं है चाहे वह कुमार राधारमण जी की तरह रोज़ाना सेहत पर लाभकारी जानकारी देता रहे या फिर अख़तर ख़ान अकेला की तरह निष्पक्ष ब्लॉगिंग करता रहे या फिर मासूम साहब की तरह ‘अमन का पैग़ाम‘ देता रहे या फिर वह 'भड़ास' की तरह सर्वाधिक पढ़ा जाने वाले ब्लॉग का संचालन ही करता रहे।
इतनी बात भी हम जाने क्यों कह गए ?
...लेकिन फिर हम यह भी सोचते हैं कि सच नहीं बोलेंगे तो आखि़र हम करेंगे क्या ?
वर्ना तो भाई दस पांच लोग आपस में मिलजुल कर ख़र्चा किसी पूंजीपति के ज़िम्मे थोप कर प्यार मुहब्बत से हंस बोल रहे हैं तो इसमें किसी का क्या जा रहा है ?
दूसरे भी इस तरह सम्मानित होना चाहें तो वे उन्हें रोक थोड़े ही रहे हैं।
अंत में हमें अपने चचा हकीम साहब याद आ गए। वे फल और सब्ज़ियों के आढ़ती वास्तव में ही हैं।
जो भी किसान अपना फल बेचने आता है। उसे बेचने से सबसे पहले वे उसमें से एक दो पीस अपने लिए रख लेते हैं।
...और भाई रखे भी क्यों न ?
दूसरा तो कोई इस बात का ख़याल करने से रहा कि बेचारा इतनी मेहनत करता है, इसे कोई पुरस्कार ही दे दो।

निरामिष ब्लॉग Niraamish.blogspot.in

वेद और शाकाहार के प्रचार में जुटा है ...


इस पर एक अच्छी चर्चा चल रही है, जिसे देखना सभी ब्लॉगर्स के लिए एक सुखद अनुभव रहेगा।
इस पोस्ट पर अब तक 101 कमेंट हो चुके हैं और आपका सहयोग मिल जाए तो 40-50 कमेंट का और भी इज़ाफ़ा मुमकिन है।
आपको जाना होगा इस लिंक पर-
http://niraamish.blogspot.in/2011/12/blog-post.html


इसी के साथ ‘आर्य भोजन‘ ब्लॉग बता रहा है कि ‘

बथुआ तीनों दोषों को शांत करता है

... और इसी ब्लॉग पर डा. अरविंद मिश्रा जी की एक महत्पूर्ण टिप्पणी भी आपको चौंका देगी।
डा. साहब कहते हैं कि-
निरामिष अभियान इसलिए टायं टायं फिस होता गया है कि उसके ज्यादातर अनुयायी
कम अध्येता ,ज्यादा हो हल्ला मचाने वाले लोग होते हैं -
मैं तो मूलतः शकाहारी हूँ मगर ऐसी मूर्खताओं/उदघोष्नाओं के चलते सामिष ही होना चाहूँगा ..
यह कैसा नकारात्मक कैम्पेन है जो निरामिषों को भी सामिष बना रहा है ..

Tuesday, February 14, 2012

ज्योतिषियों और बाबाओं की तिलिस्मी तकनीक Gorakh Dhandha

भविष्य बताने वाले और कष्ट दूर करने वाले ज्योतिषियों और बाबाओं की तिलिस्मी तकनीक


रोज़ी रोटी की तो क्या यहां हलवा पूरी की भी कोई समस्या नहीं है
नज्म सितारे को कहते हैं और नूजूमी उसे जो सितारों की चाल से वाक़िफ़ हो।
सितारों की चाल के असरात ज़मीन की आबो हवा पर तो पड़ते ही हैं। शायद इसी से लोगों ने समझा हो कि हमारी ज़िंदगी के हालात पर भी सितारों की चाल का असर पड़ता है।
कुछ हमने भी यार दोस्तों के हाथों की लकीरें देखी हैं और इसी दौरान मनोविज्ञान से भी परिचित हुए।
कोई आदमी सितारों और उनकी कुंडलियों को न भी जानता हो लेकिन वह इंसान के मनोविज्ञान को जानता हो तो वह इस देश में ऐश के साथ बसर कर सकता है।
सच बोलने वाले का यहां जीना दुश्वार है लेकिन मिथ्याभाषण करने वाला राजा की तरह सम्मान पाता है।

ख़ैर, अपने प्रयोग के दौरान हमने यह जाना है कि लोग मुसीबत में हैं और उन्हें उससे मुक्ति चाहिए। इसी तलाश में आदमी हर तरफ़ जाता है और इसी दुख से मुक्ति की तलाश में वह अपना हाथ दिखाने या अपनी कुंडली बंचवाने आएगा।
1.कुंवारी को उत्तम वर चाहिए,
2.कुंवारे को रोज़गार चाहिए, उसके लिए लड़कियां बहुत हैं।
3. शादीशुदा औरत को पुत्र चाहिए।
4. बुढ़िया को अपनी बहू अपने वश में चाहिए।
5. बीमार को शिफ़ा अर्थात आरोग्य चाहिए।

बहरहाल जिस उम्र में जो चाहिए, एक बार आप वह पहचान लीजिए। इसके बाद आप शक्ल देखकर और उसकी बात सुनकर ही भांप जाएंगे कि आपके पास आने वाले को क्या चाहिए ?
अब आप बात यों शुरू करें कि
आप दिल के बहुत अच्छे हैं। सदा दूसरों की मदद करते हैं। किसी का कभी बुरा नहीं चाहते लेकिन फिर भी लोग आपको ग़लत समझते हैं और आपको धोखा देते हैं। आप दूसरों की मदद करते हैं चाहे ख़ुद के लिए कुछ भी न बचे।
उस आदमी का विश्वास आपके प्रति अटूट हो जाएगा कि यह आदमी वास्तव में ही ज्ञानी है। यह जान गया है जैसा कि मैं वास्तव में हूं।
हक़ीक़त यह है कि हरेक आदमी अपने अंदर एक आदर्श व्यक्ति के गुण कल्पित किए हुए है। आपकी बात उसके मन के विचार की तस्दीक़ करती है और बस वह आपका मुरीद हो जाएगा। अब आप उसे कोई क्रिया या कोई जाप आदि बताते रहें जिससे समय बीतता रहे।
समय हर दर्द की दवा है।

किस उम्र में क्या खाएं महिलाएं ? Age Factor

हर 10 साल में औरतों में मेटाबॉलिज्म रेट 2 से 8 पर्सेंट कम हो जाता है। इसका मतलब है कि 25 की उम्र में आपको जितनी कैलरी चाहिए थी, 35 की उम्र में उससे 100 कैलरी कम चाहिए होगी। फिटनेस ट्रेनर संजय मेहरा कहते हैं, 'वेट बैलेंस बनाए रखने के लिए आपको ज्यादा एक्सरसाइज करनी होगी। ज्यादा नहीं कर पा रही हैं, तो ब्रिस्क वाकिंग कीजिए। जॉगिंग करना भी फायदेमंद रहेगा। इस दौरान आपको अपनी डाइट में कैलरी कम करनी होगी और न्यूट्रीशियस प्रॉडक्ट्स ज्यादा शामिल करने होंगे। मीठा खाने का मन करे, तो फल खाइए। इस उम्र में चॉकलेट खाना भी अवॉइड कीजिए।'
See : http://upchar.blogspot.in/2012/02/blog-post_14.html

Monday, February 13, 2012

ब्लॉगर्स मीट वीकली (30) Sun & The Spirit

आर्य भोजन ब्लॉग पर

जिनके बाल झड़ते हों ,वे कच्चे पालक का सेवन करें




पथरी के रोगियों को केवल पालक की सब्जी नहीं खाना चाहिए | पालक और हरी पते वाली मेथी मिलाकर साग बनाकर खाने से पथरी नहीं बनती है |
अतः पालक खाएं और शरीर में ख़ून बढाएं।


ब्लॉगर्स मीट वीकली (30) Sun & The Spirit

सभी ब्लॉगर साथियों का ब्लॉगर्स मीट वीकली (30) में हार्दिक अभिनंदन है। जो लोग इस मीट में अपनी रचना देखना चाहते हैं वे हमें अपने लिंक भेज सकते हैं। उनका स्वागत है। लाभकारी लेखों को हिंदी पाठकों तक पहुंचाना ही हमारा ध्येय है।आप सभी आइये और अपने विचारों से हमें अवगत करिए /आप सभी का आशीर्वाद हमेशा इस मंच को मिलता रहे यही कामना है./आभार/

शिरडी में टूटा चढ़ावे का रेकॉर्ड Shirdi ke Sai Baba



मुंबई।। अब निसंदेह रूप से शिरडी के साईं बाबा भारत के दूसरे धनवान भगवान हो गए हैं। साईं के भक्तों ने शिरडी में आनेवाले चढ़ावे का रेकॉर्ड तोड़ दिया है। दिसंबर 2011 के अंतिम सप्ताह से जनवरी के पहले पखवाड़े तक देश-विदेश से आए साईं के भक्तों ने कुल 14 करोड़ 60 लाख का चढ़ावा दान में दिया। जबकि तिरुपति स्थित बालाजी मंदिर देश में सबसे अधिक चढ़ावा और दान पानेवाला मंदिर है।

साईं संस्थान ट्रस्ट के ट्रस्टी के सी पांडेय ने 'एनबीटी' को बताया कि इस साल साईं भक्तों ने दान में 11 करोड़ का चढ़ावा नकद, 1.25 करोड़ का सोना और 13.5 करोड़ की चांदी चढ़ाई है। पिछले साल (2011) में कुल मिलाकर 250 करोड़ रुपये साईं भक्तों ने चढ़ाए थे। पांडेय ने जानकारी दी कि साईं संस्थान ट्रस्ट अब तक विभिन्न अकाउंट में 500 करोड़ रुपये की रकम इन्वेस्ट कर चुका है, जबकि मंदिर ट्रस्ट के पास कुल 300 किलो सोना और करीब 3 हजार किलो चांदी है।

ट्रस्टी के सी पांडेय ने बताया कि 1992 में स्थापित साईं संस्थान ट्रस्ट का कुल 200 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट है। इसे हॉस्पिटल, शिरडी के आसपास नई इमारतों और सड़कों के निर्माण, धर्मादा और सामजिक कामों, मेडिकल कैंप, जरूरतमंदों रोगियों की मदद इत्यादि पर खर्च किया जाता है। उन्होंने बताया की इसी योजनाओं के तहत शिर्डी में एक सुपर स्पेशिऐलिटी हॉस्पिटल और 350 करोड़ के खर्च से 'प्रसादालय' (डायनिंग हॉल) का निर्माण किया जा चुका है।

कोट्स
शिर्डी के सुपर स्पेशिऐलिटी हॉस्पिटल में मामूली खर्च पर रोगियों का ऑपरेशन किया जाता है। यहां होने वाले हार्ट ऑपरेशनों की सफलता प्रतिशत को काफी सराहा जा रहा है।
- के . सी . पांडे , ट्रस्टी , साईं संस्थान ट्रस्ट
Source : http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/11862993.cms

Saturday, February 11, 2012

अंदाज ए मेरा: शर्मनाक.....शर्मनाक.... शर्मनाक: कैप्‍टन बाना सिंह‍ जी गर्व की बात है... हम उस देश में पैदा हुए , जिस देश की मिट्टी को माथे पर लगाया जाता है। गर्व की बात है..... हम उ...

Wednesday, February 8, 2012

हम तो चले तिहाड़ जेल दोस्तों !


आज में सरकार से इस पोस्ट के माध्यम से पूछना/जानना  चाहता हूँ कि अगर एक सभ्य ईमानदार व्यक्ति दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को रिश्वत नहीं दें तो क्या वो अधिकारी मात्र एक महिला के कहने से बिना सबूतों के ही गम्भीर आरोप लगाकर मामला दर्ज कर सकता है ? क्या किसी व्यक्ति का पक्ष सिर्फ रिश्वत देने पर ही सुना जायेगा? क्या सारी महिलाएं सच्ची है और सारे पुरुष झूठे व अत्याचारी होते हैं? 
मेरा भारत देश की न्याय व्यवस्था से विश्वास ही उठ गया है. अब आप मुझे बेशक मेरे खिलाफ झूठी एफ.आई.आर के संदर्भ में फांसी की सजा दे दें. मैं वोट की राजनीति खेलने वाले देश में अपनी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में "अपील" या "दया याचिका" भी नहीं लगाऊंगा. भारत देश की न्याय व्यवस्था अफजल गुरु और कसाब जैसे अपराधी के अधिकारों की रक्षा करती है. यहाँ संविधान की धाराओं का लाभ सिर्फ अमीरों व राजनीतिकों मिलता है या दिया जाता है. जिनके पास वकीलों की मोटी-मोटी फ़ीस देने के लिए और संबंधित अधिकारियों को मैनेज करने के लिए लाखों-करोड़ों रूपये है. गरीबों को "न्याय" देना न्याय व्यवस्था के बस में ही नहीं है. मुझे आज भारत देश की न्याय व्यवस्था की कार्य शैली पर बहुत अफ़सोस हो रहा है. न्याय व्यवस्था की अब तक की कार्यशैली के कारण भविष्य में मुझे न्याय मिलने की उम्मीद भी नहीं है. अपने खिलाफ दर्ज केस के संदर्भ में बस इतना ही कहना है कि -
१. हाँ, मैंने बिना दहेज लिये ही कोर्ट मैरिज करके बहुत बड़ा अपराध किया है.
२. हाँ, मैंने कोर्ट मैरिज करके अपने माता-पिता का दिल दुखाकर भी बहुत बड़ा अपराध किया है.
३. हाँ, मैंने अपनी पत्नी की बड़ी-बड़ी गलती पर उसको माफ़ करके बहुत बड़ा अपराध किया है.
४. हाँ, मैंने अपनी पत्नी को मारने के उद्देश्य से कभी भी ना छूकर बहुत बड़ा अपराध किया है.
५. हाँ, मैंने गरीब होते हुए भी भारत देश की न्याय व्यवस्था से "न्याय" की उम्मीद करने का अपराध किया है. 
 तिहाड़ जेल में हमारे पास न मोबाईल होगा और न फेसबुक होगी. तब मेरे पास क्या होगा, यह जानने के लिए नीचे लिखा पत्र देखें.

Tuesday, February 7, 2012

क्या दिल्ली हाईकोर्ट के जज पूरी तरह से ईमानदार है ?

दोस्तों ! एक बार जरा मेरी जगह अपने-आपको रखकर सोचो और पढ़ो कि-एक पुलिस अधिकारी रिश्वत न मिलने पर या मिलने पर या सिफारिश के कारण अपने कार्य के नैतिक फर्जों की अनदेखी करते हुए मात्र एक महिला के झूठे आरोपों(बिना ठोस सबूतों और अपने विवेक का प्रयोग न करें) के चलते हुए किसी भी सभ्य, ईमानदार व्यक्ति के खिलाफ झूठा केस दर्ज कर देता है. फिर सरकार द्वारा महिला को उपलब्ध सरकारी वकील, जांच अधिकारी, जज आदि को मुहँ मांगी रिश्वत न मिले. इसलिए सिर्फ जमानत देने से इंकार कर देता है. उसके बाद क्या एक सभ्य व्यक्ति द्वारा देश की राष्ट्रपति और दिल्ली हाईकोर्ट से इच्छा मृत्यु की मांग करना अनुचित है. एक गरीब आदमी कहाँ से दिल्ली हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के अपनी याचिका लगाने के लिए पैसा लेकर आए ? क्या वो किसी का गला काटना शुरू कर दें ? क्या एक पुलिस अधिकारी या सरकारी वकील या जांच अधिकारी या जज की गलती की सजा गरीब को मिलनी चाहिए ? हमारे भारत देश में यह कैसी न्याय व्यवस्था है ? क्या हमारे देश में दीमक की तरह फैले भ्रष्टचार ने हमारी न्याय व्यवस्था को खोखला नहीं कर दिया है ? क्या आज हमारी अव्यवस्थित न्याय प्रणाली सभ्य व्यक्तियों को भी अपराधी बनने के लिए मजबूर नहीं कर रही है ? इसका जीता-जागता उदाहरण मेरा "सच का सामना" ब्लॉग है और मेरे द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट को लिखा पत्र (नीचे) देखें. क्या दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यरत सभी जज पूरी तरह से देश और देश की जनता के प्रति ईमानदार है ? मेरे पत्र को देखे और उसके साथ स्पीड पोस्ट(www.sach-ka-saamana.blogspot.in/2011/06/blog-post_18.html) की रसीद को देखें. मेरे द्वारा 137 दस्तावेजों के साथ 15 फोटो वाला 760 ग्राम का पैकेट 13/06/2011 को भेजने के बाद भी आज तक संज्ञान नहीं लिया या यह कहूँ देश के राजस्व की उन्हें कोई चिंता नहीं है. उनको सिर्फ अपनी सैलरी लेने तक का ही मतलब है. क्या देश की अदालतों में भेदभाव नहीं नीति नहीं अपनाई जाती है. अगर मेरे जैसा ही अगर किसी महिला ने एक पेज का भी एक पत्र दिल्ली हाईकोर्ट में लिख दिया होता तो दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ न्यायादिश के साथ अन्य जज भी उसके पत्र पर संज्ञान लेकर वाहवाही लूटने में लग जाते है, इसके अनेकों उदाहरण अख़बारों में आ चुके है. क्या भारत देश में एक सभ्य ईमानदार व्यक्ति की कोई इज्जत नहीं ? 
भारत देश की न्याय व्यवस्था ने मेरे परिवार के साथ हमेशा अन्याय किया है. आजतक इन्साफ मिला ही नहीं है और न भविष्य में किसी गरीब को देश की अदालतों से इंसाफ मिलने की उम्मीद है.
मेरे प्रेम-विवाह करने से पहले और बाद के जीवन में आये उतराव-चढ़ाव का उल्लेख करती एक आत्मकथा पत्नी और सुसरालियों के फर्जी केस दर्ज करने वाले अधिकारी और रिश्वत मांगते सरकारी वकील,पुलिस अधिकारी के अलावा धोखा देते वकीलों की कार्यशैली,भ्रष्ट व अंधी-बहरी न्याय व्यवस्था से प्राप्त अनुभवों की कहानी का ही नाम है "सच का सामना"आज के हालतों से अवगत करने का एक प्रयास में इन्टरनेट संस्करण जिसे भविष्य में उपन्यास का रूप प्रदान किया जायेगा.
1. एक आत्मकथा-"सच का सामना"
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/03/blog-post.html
2. मैं देशप्रेम में "सिरफिरा" था, "सिरफिरा" हूँ और "सिरफिरा" रहूँगा
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/03/blog-post_14.html
3. मैंने अपनी माँ का बहुत दिल दुखाया है
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/04/blog-post.html
4. मेरी आखिरी लड़ाई जीवन और मौत की बीच होगी
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/04/blog-post_22.html
5. प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/04/blog-post_29.html
6. माननीय राष्ट्रपति जी मुझे इच्छा मृत्यु प्रदान करके कृतार्थ करें
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/06/blog-post.html
7. मैंने पत्नी की जो मानसिक यातनाएं भुगती हैं
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/06/blog-post_12.html
8.कोई खाकी वर्दी वाला मेरे मृतक शरीर को न छूने की कोशिश भी न करें
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/06/blog-post_13.html
9. एक पत्र दिल्ली के उच्च न्यायालय में लिखकर भेजा है कि-
मैं खाली हाथ आया और खाली हाथ लौट जाऊँगा
ज्यादा पढ़ने के लिए किल्क करके पढ़ें.
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/06/blog-post_18.html
10. भगवान महावीर स्वामी की शरण में गया हूँ
http://sach-ka-saamana.blogspot.in/2011/09/blog-post.html
11. मेरी लम्बी जुल्फों का कल "नाई" मालिक होगा.
http://sach-ka-saamana.blogspot.in/2011/11/blog-post.html
12.सरकार और उसके अधिकारी सच बोलने वालों को गोली मारना चाहते हैं.
http://sach-ka-saamana.blogspot.in/2011/11/blog-post_02.html
13.मेरी शिकायत उनकी ईमानदारी पर एक प्रश्नचिन्ह है
http://rksirfiraa.blogspot.in/2011/06/blog-post.html

Monday, February 6, 2012

Hijab is the new symbol of woman’s liberation

How, Sara Bokker, a former actress, model, fitness instructor and activist gave up the glamorous Miami lifestyle for Islam and found true liberation with Islam and the Islamic dress code for women.

Sara Bokker, Former Actress and Model, USA

Sara Bokker

I am an American woman who was born in the midst of America’s “Heartland”. I grew up, just like any other girl, being fixated with the glamour of life in “the big city”. Eventually, I moved to Florida and on to South Beach of Miami, a hotspot for those seeking the “glamorous life”. Naturally, I did what most average Western girls do. I focused on my appearance and appeal, basing my self-worth on how much attention I got from others. I worked out rigorously and became a personal trainer, acquired an upscale waterfront residence, became a regular “exhibiting” beach-goer and was able to attain a “living-in-style” kind of life.

तीन तलाक़ एक साथ देने वालों की पीठ पर कोड़े बरसाए जाते थे Khilafat Period

सोने पे सुहागा पर देखिये :

तीन तलाक़ एक साथ देने वाले की पीठ पर कोड़े बरसाते थे इस्लामी ख़लीफ़ा

आवारगी को औरत की आजादी का नाम न दें : आलिम-ए-खवातीन

आवारगी को औरत की आजादी का नाम न दें : आलिम-ए-खवातीन

एक मुश्त तीन तलाक़ देना ‘बिदअत‘ है, गुनाह है, तलाक़ का मिसयूज़ है। यह कमी मुस्लिम समाज की है न कि इस्लाम की। अल्लाह की नज़र में जायज़ चीज़ों में सबसे ज़्यादा नापसंद तलाक़ है। जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव आते हैं, बहुत से अलग-अलग मिज़ाजों के लोगों के सामने बहुत तरह की समस्याएं आती हैं। जब दोनों का साथ रहना मुमकिन हो और दोनों तरफ़ के लोगों के समझाने के बाद भी वे साथ रहने के लिए तैयार न हों तो फिर समाज के लिए एक सेफ़्टी वाल्व की तरह है तलाक़। तलाक़ का आदर्श तरीक़ा कुरआन में है। कुरआन की 65 वीं सूरह का नाम ही ‘सूरा ए तलाक़‘ है। तलाक़ का उससे अच्छा तरीक़ा दुनिया में किसी समाज के पास नहीं है। हिन्दू समाज में तलाक़ का कॉन्सेप्ट ही नहीं था। उसने इस्लाम से लिया है तलाक़ और पुनर्विवाह का सिद्धांत। इस्लाम को अंश रूप में स्वीकारने वाले समाज से हम यही कहते हैं कि इसे आप पूर्णरूपेण ग्रहण कीजिए। आपका मूल धर्म भी यही है।
तलाक़ का सही तरीक़ा क़ुरआन की सूरा ए तलाक़ में बता दिया गया है। एक साथ तीन तलाक़ देना क़ुरआन का तरीक़ा नहीं है। इस तरीक़े को पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद स. ने सख्त नापसंद फ़रमाया है और जो आदमी एक साथ तीन तलाक़ दिया करता था, इस्लामी ख़लीफ़ा इसे इस्लामी शरीअत के साथ खिलवाड़ मानते थे और इसे औरत का हक़ मारना समझते थे। ऐसे आदमी की पीठ पर कोड़े बरसाए जाते थे। लिहाज़ा इस्लामी ख़लीफ़ाओं के काल में तीन तलाक़ एक साथ देने की हिम्मत कोई न करता था। आज भी ऐसे लोगों की पीठ पर कोड़े बरसाए जाएं तो औरत के जज़्बात के साथ खिलवाड़ तुरंत रूक जाएगा।
औरत के जज़्बात का सबसे बड़ा रक्षक है क़ुरआन।

अब...मेरी माँ को कौन दिलासा देगा ?

अब हमें भी पता नहीं कितने दिन जेल की सलाखों को पकड़कर खड़ा रहना होगा, क्योंकि हमारे देश में कानून पूंजीपतियों, राजनीतिज्ञों और महिलाओं की बाप की जागीर बन गया है.
लो दोस्तों, हमारा आपका बस थोड़े से ही दिनों का साथ था. मैं अक्सर कहता था कि देशप्रेम में पागल और सिरफिरे लोगों का स्वागत फ़िलहाल "जेल" में किया जाता है. अब हम तो जेल में जा रहे हैं. हम अपनी पत्नी के द्वारा धारा 498A और 406 के तहत दर्ज करवाए झूठे केसों (एफ.आई.आर नं. 138/2010 थाना-मोतीनगर,दिल्ली) में आठ फरवरी को तीस हजारी के कमरे नं. 138 में आत्मसमपर्ण कर रहे हैं. पुलिस के पास सबूत नहीं थें. इसलिए आज तक मुझे गिरफ्तार नहीं किया था. अब केस दर्ज हुए लगभग दो साल हो चुके है. अब कोर्ट का वारंट पुलिस लेकर आई थीं. कल संयोगवश घर पर नहीं था. तब वारंट देकर चली गई. कोर्ट का सम्मान करना मेरा फर्ज है. पिछले नौ महीने से बिलकुल बेरोजगार बैठा हूँ और सारा काम भी लगभग चार साल से बंद था. बिना वकील के ही जज को अपनी गिरफ्तारी दे रहा हूँ. जेल जाने की तारीख निश्चित है मगर भष्ट और अव्यवस्था के कारण वापिस का कोई पता नहीं है. 
मेरी गिरफ्तारी का वारण्ट
अपनी हिम्मत तो रखे हुए हूँ लेकिन विधवा माँ को हिम्मत रखने वाले शब्द नहीं बोल पा रहा हूँ. उसके लिए कहाँ से वो शब्द लेकर आऊ जो उसको दिलासा दें ? माँ तो कसूरवार बेटे का सदमा सहन नहीं कर पाती है फिर वेकसुर बेटे के लिए जेल जाने का सदमा कैसे सहन करें, कल से मम्मी से ठीक से खाना भी नहीं खाया जा रहा है. क्या करूँ कुछ समझ नहीं आ रहा है ? कल (चार फरवरी) ही मेरे पिताजी की चौथी पुण्यतिथि थीं. जब पुलिस आई थीं, तब काफी परेशान हो गई थीं. हर रोज थोड़ी देर बैठकर माँ-बेटा अपना दुःख दर्द कह लेते थें.एक-दूसरे को दिलासा दे लेते थें और हिम्मत बढ़ा दिया करते थें. अब......मेरी माँ को कौन दिलासा देगा और हिम्मत बढ़ेगा ?  
आज कुछ लड़कियाँ और उसके परिजन धारा 498A और 406 को लेकर इसका दुरूपयोग कर रही है. हमारे देश के अन्धिकाश भोगविलास की वस्तुओं के लालच में और डरपोक पुलिस अधिकारी व जज इनका कुछ नहीं बिगाड पाते हैं क्योंकि यह हमारे देश के सफेदपोश नेताओं के गुलाम बनकर रह गए हैं. इनका जमीर मर चुका है. यह अपने कार्य के नैतिक फर्ज भूलकर सिर्फ सैलरी लेने वाले जोकर बनकर रह गए हैं. असली पीड़ित लड़कियाँ तो न्याय प्राप्त करने के लिए दर-दर ठोकर खा रही हैं. 
मेरी जमानत तीन बार ख़ारिज हो चुकी है और अश्लील वीडियो फिल्म बनाने का और दहेज का सामान (स्त्रीधन) न लोटने के झूठे आरोपों के कारण जमानत नहीं मिल रही हैं. उत्तमनगर थाने, थाना बिंदापुर और मोतीनगर आदि से लेकर थाना कीर्ति नगर, दिल्ली के वोमंस सैल, सरकारी वकील, जांच अधिकारी, जज को रिश्वत न दे पाने के कारण झूठे सबूतों के आधार पर केस भी दर्ज हो गए और दर्ज केस में मुझे जमानत नहीं मिली. आँखों के अंधे-बहरे जज और पुलिस अधिकारी बिना सबूत मामला दर्ज करते है और जमानत नहीं देते हैं. 
दोस्तों ! बस दुआ करना कि मेरी विधवा माँ का स्वास्थ्य ठीक रहे.जब तक मुझे जेल में रहना पड़े. 72 साल की है, घर के कार्य के सिवाय कुछ नहीं करती है. मेरे बाद में मेरे बड़े भाई के पास रहेगी. लेकिन बड़ा भाई अपने काम पर सवेरे छह बजे चला जाता है और रात को दस बजे आता हैं. खर्च की चिंता नहीं है मगर मानसिक रूप से दिलासा देने की जरूरत है. मेरी मम्मी अनपढ़ है. ज्यादा जानकारी नहीं है. इसलिए ज्यादा डरी हुई है. आप मिलने आने का कष्ट मत उठाये फोन करें, तब बता देना कि आपके बेटे के दोस्त बोल रहे हैं.मेरी मम्मी हिंदी ही समझती है. आपके सहयोग और प्यार के लिए धन्यवाद
दोस्तों ! अगर आपके पास समय हो तो कभी-कभी मेरी माँ के पास मेरा ही एक अन्य फोन नं. 9868566374 पर बात कर लेना और दिलासा देने के साथ ही हिम्मत भी दे देना. आप ज्यादा जानकारी के लिए मेरे ब्लोगों की सभी पोस्टें और मेरी फेसबुक की "वाल" पढ़ें/देखें-www.sach-ka-saamana.blogspot.com (आत्मकथा)

Friday, February 3, 2012

नारी स्वयं नारी के लिए संवेदनहीन क्यों ? NAARI

जागरण की वेबसाइट पर बेस्ट ब्लॉगर इस हफ़्ते

SATYA SHEEL AGRAWAL

एक महिला दूसरी महिला के लिए कितनी संवेदनहीन होती है इसके अनेको उदाहरण विद्यमान हैं .अनेक युवतियां अपना विवाह न हो पाने की स्तिथि में अथवा अपनी मनपसंद का लड़का न मिलने पर किसी विवाहित युवक से प्रेम प्रसंग करती है और बात आगे बढ़ने पर उससे विवाह रचा लेती है .उसके क्रिया कलाप से सर्वाधिक नुकसान एक महिला का ही होता है .एक विवाहिता का परिवार बिखर जाता है उसके बच्चे अनाथ हो जाते हैं .जिसकी जिम्मेदार भी एक महिला ही होती है .फ़िल्मी हस्तियों के प्रसंग तो सबके सामने ही हैं .जहाँ अक्सर फ़िल्मी तारिकाएँ शादी शुदा व्यक्ति से ही विवाह करती देखी जा सकती हैं. ऐसी महिलाये सिर्फ अपना स्वार्थ देखती हैं जिसका लाभ पुरुष वर्ग उठता है .महिला समाज कोयदि समानता का अधिकार दिलाना है, तो अपने महत्वपूर्ण फैसले लेने से पहले सोचना चाहिए की उसके निर्णय से किसी अन्य महिला पर अत्याचार तो नहीं होगा ,उसका अहित तो नहीं हो रहा.
उदहारण संख्या आठ ;
त्रियाचरित्र ,महिलाओं में व्याप्त ऐसा अवगुण है जो पूरे महिला समाज को संदेह के कठघरे में खड़ा करता है ,कुछ शातिर महिलाएं त्रियाचरित्र से पुरुषों को अपने माया जाल में फंसा लेती हैं और अपना स्वार्थ सिद्ध करती रहती हैं ,शायद अपनी इस आडम्बर बाजी की कला को अपनी योग्यता मानती हैं . परन्तु उनके इस प्रकार के व्यव्हार से पूरे महिला समाज का कितना अहित होता है उन्हें शायद आभास भी नहीं होता .उनके इस नाटकीय व्यव्हार से पूरे महिला समाज के प्रति अविश्वास की दीवार खड़ी हो जाती है . जिसका खामियाजा एक मानसिक रूप से पीड़ित महिला को भुगतना पड़ता है . परिश्रमी ,कर्मठ ,सत्चरित्र परन्तु मानसिक व्याधियों की शिकार महिलाएं अपने पतियों एवं उनके परिवार द्वारा शोषित होती रहती हैं .क्योंकि पूरा परिवार उसके क्रियाकलाप को मानसिक विकार का प्रभाव न मान कर उस की त्रियाचरित्र वाली आदतों को मानता रहता है .इसी भ्रम जाल में फंस कर कभी कभी बीमारी इतनी बढ़ जाती है की वह मौत का शिकार हो जाती है .
अतः प्रत्येक महिला को अपने व्यव्हार में पारदर्शिता लाने की आवश्यकता है. साथ ही पूरे नारी समाज को तर्क संगत एवं न्यायपूर्ण व्यव्हार के लिए प्रेरित करना चाहिए,तब ही नारी सशक्तिकरण अभियान को सफलता मिल सकेगी .
Source :

नारी स्वयं नारी के लिए संवेदनहीन क्यों?

वेद में हज़रत मुहम्मद (स.) का ज़िक्र


वेद भाष्य ऋग्वेद 1,1,2 के अन्तर्गत पं. दुर्गाशंकर महिमवत् सत्यार्थी
वेद में सरवरे कायनात स. का ज़िक्र हैस्वर्गीय आचार्य शम्स नवेद उस्मानी की प्रख्यात रचना ‘अगर अब भी न जागे तो ...‘ (प्रस्तुति: एस. अब्दुल्लाह तारिक़) ने इस संदर्भ में एक पृथकतः स्वतंत्र अध्याय पाया जाता है।
सरवरे कायनात (स.) ही इस सृष्टि का प्रारंभ हैं।

सबसे पहले मशिय्यत के अनवार से,
नक्शे रूए मुहम्मद (.) बनाया गया
फिर उसी नक्श से मांग कर रौशनी
बज़्मे कौनो मकां को सजाया गया
-मौलाना क़ासिम नानौतवी
संस्थापक दारूल उलूम देवबंद

हदीसों (= स्मृति ग्रंथों ?) से केवल इतना ही ज्ञात नहीं होता कि रसूलुल्लाह (स.) की नुबूव्वत भगवान मनु के शरीर में आत्मा डाले जाने से पहले थी, प्रत्युत हदीसों से यह भी प्रमाणित होता है कि हज़रत मुहम्मद मुज्तबा (स.) का निर्माण संपूर्ण सृष्टि, देवों, द्यावापृथिवी और अन्य सृष्टियों और परम व्योम (= मूल में ‘अर्शे इलाही‘) से भी पहले हुई थी और फिर नूरे-अहमद (स.) ही को ईशान परब्रह्म परमेश्वर ने अन्य संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति का माध्यम बनाया।
(‘अगर अब भी न जागे तो ...‘ पृ. सं. 105 उर्दू से अनुवाद, दुर्गाशंकर महिमवत् सत्यार्थी।)
उक्त पुस्तक और कतिपय अन्य पुस्तकों में भी यह प्रमाणित करने के प्रयत्न किए गए हैं कि वेद में हुज़ूर स. का उल्लेख नराशंस के नाम से पाया जाता है।
Source : Dr. Ayaz Ahmad का ब्लॉग 'सोने पे सुहागा'
http://drayazahmad.blogspot.in/2012/02/blog-post_03.html


Thursday, February 2, 2012

blogspot.in और blogspot.com को समझिये

| Edit Post

अगर आपके ब्लॉग पते पर blogspot.com की blogspot.in जगह दिखाई दे रहा है तो घबराइए मत
आपका ब्लॉगर सुरक्षित है बस गूगल ने ब्लॉगर के लिए नयी तकनीक ccTLD ( redirected to a country-code top level domain ) शुरू कर दी है ।
मान लीजिये आपको छत्‍तीसगढ ब्‍लागर्स चौपाल के ब्लॉग जिसका पता अभी http://hamarchhattisgarh.blogspot.in इस तरह दिखाई दे रहा है उसे पुराने रूप blogspot.com के साथ देखना है तो आपको नया पता

http://hamarchhattisgarh.blogspot.com/ncr

इस तरह टाइप करना होगा यानि पते के बाद /ncr जोड़ना होगा ।
Source :

ब्लॉगर में blogspot.in और blogspot.com को समझिये


Wednesday, February 1, 2012

क्षत्रिय ममेरी फुफेरी बहनों से विवाह करते हैं Bal vivah


ये हैं जय और जिया... उम्र महज दो साल...रिश्ता, भावी पति-पत्नी...यह बात अलग है जय की मां मीना जिया के पिता राम की बहन है...यानी जय और जिया ममेरे-फुफेरे भाई-बहन हैं...रविवार को इन दोनों की सगाई हो गई...ये दोनों गुजरात के लेउवा पटेल समाज के हैं...


इस समाज में प्रति हजार लड़कों पर महज 750 लड़कियां हैं...समाज में भाई-बहन के बीच सगाई की इस पहली घटना को लिंगानुपात के अंतर से जोड़कर देखा जा रहा है...इस कार्यक्रम में पूर्व सांसद वीरजीभाई ठुमर भी मौजूद थे...उन्होंने लेउवा पटेलों को क्षत्रियों का वंशज बताते हुए कहा, जब क्षत्रियों में आज भी ऐसा चलन है तो इनमें ऐसे संबंध क्यों नहीं किए जा सकते...

बाबरा तहसील के चमारडी गांव में रहने वाले लेउवा पटेल समाज के सरपंच जादवभाई वस्तरपरा ने अपनी दो वर्षीय पोती जिया की सगाई अपनी बेटी मीनाबेन के दो वर्षीय पुत्र जय के साथ करवाई... इस बारे में जादवभाई का कहना है कि उन्होंने मामा-बुआ के बच्चों के बीच वैवाहिक संबंध स्थापित कर एक नई प्रथा की शुरुआत की है...

लेउवा पटेल समाज के अग्रणियों के अनुसार दरअसल लेउवा पटेल मूल क्षत्रियों के वंशज हैं और क्षत्रियों में आज भी यह रिवाज प्रचलन में है...इसलिए लेउवा पटेल समाज में इस परंपरा की शुरुआत कर उन्होंने कुछ गलत नहीं किया...

इधर दो वर्षीय जिया के बड़े पापा और उद्योगपति गोपालभाई का कहना है कि यह परंपरा क्षत्रिय वंश की परंपरा है और दूसरी मुख्य बात यह कि पारिवारिक विवाह संबंध से लड़कियों को भी भविष्य में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा...इस प्रसंग पर लेउवा पटेल समाज की कई दिग्गज हस्तियों के साथ पूर्व सांसद वीरजीभाई ठुमर भी मौजूद थे...

सरपंच जादवभाई के अनुसार उन्हें मामा-बुआ के बच्चों के वैवाहिक रिश्तों को लेकर किसी तरह की आलोचना का भय नहीं है...उनके अनुसार इस रिश्ते के संबंध में उन्हें लेउवा पटेल समाज का समर्थन प्राप्त है और वे पूरे लेउवा समाज से इस प्रथा को आगे बढ़ाने का भी आह्वान करेंगे...

Source : http://www.deshnama.com/2012/01/blog-post_31.html
यह जानकारी दी है भाई ख़ुशदीप जी ने अपने ब्लॉग पर। यह बाल विवाह हिंदू संस्कृति की प्रयोगशाला में होना भी अपने आप में कुछ सोचने लिए मजबूर करता है।

In Vedas ‘सृष्टि का अध्यक्ष‘ कौन है ?

वेद के रहस्य को आप अपनी बुद्धि से समझना चाहेंगे तो कभी न समझ सकेंगे। उसकी प्रामाणिक व्याख्या ‘सृष्टि के अध्यक्ष‘ के द्वारा की जा चुकी है।
‘सृष्टि का अध्यक्ष‘ कौन है ?, जिसकी महिमा वेद बताते हैं,
यह जानने के लिए आप हमारा लेख

वेद में सरवरे कायनात स. का ज़िक्र है Mohammad in Ved Upanishad & Quran Hadees



वेद भाष्य ऋग्वेद 1,1,2 के अन्तर्गत पं. दुर्गाशंकर महिमवत् सत्यार्थी
इयं विसृष्टिर्यत आबभूव यदि वा दधे यदि वा न। यो अस्याध्यक्षः परमेव्योमन्तसो अंग वेद यदि वा वेद।
वेद 1,10,129,7
यह विविध प्रकार की सृष्टि जहां से हुई, इसे वह धारण करता है अथवा नहीं धारण करता जो इसका अध्यक्ष है परमव्योम में, वह हे अंग ! जानता है अथवा नहीं जानता।
सामान्यतः वेद भाष्यकारों ने इस मंत्र में ‘सृष्टि के अध्यक्ष‘ से ईशान परब्रह्म परमेश्वर अर्थ ग्रहण किया है, किन्तु इस मंत्र में एक बात ऐसी है जिससे यहां ‘सृष्टि के अध्यक्ष‘ से ईशान अर्थ ग्रहण नहीं किया जा सकता। वह बात यह है कि इस मंत्र में सृष्टि के अध्यक्ष के विषय में कहा गया है - ‘सो अंग ! वेद यदि वा न वेद‘ ‘वह, हे अंग ! जानता है अथवा नहीं जानता‘। ईशान के विषय में यह कल्पना भी नहीं की जा सकती कि वह कोई बात नहीं जानता। फलतः यह सर्वथा स्पष्ट है कि ईशान ने यहां सृष्टि के जिस अध्यक्ष की बात की है, वह सर्वज्ञ नहीं है। मेरे अध्ययन के अनुसार यही वेद में हुज़ूर स. का उल्लेख है।
http://vedquran.blogspot.in/2012/01/mohammad-in-ved-upanishad-quran-hadees.html

सूफ़ियों की ज़िंदगी के गहरे राज़ Sufi world

देखिए हिंदी ब्लॉगिंग की एक रचनात्मक महा लेख माला सूफ़ियों के जीवन संघर्ष पर
मनोज कुमार जी की क़लम से
जाएं और सराहें
सूफ़ियों ने विश्व-प्रेम का पाठ पढ़ाया अंक-5


इस्लाम में सूफ़ीमत का विकास किसी धर्म में होने वाले रहस्यवादी आंदोलन (Mystic Movement) की सफलता और लोकप्रियता का महत्त्वपूर्ण और दिलचस्प इतिहास है। धीरे-धीरे नक़्शब, तिर्मीज़, नीशापुर, बुस्ताम, बग़दाद और शीराज़ सूफ़ीमत के अन्य प्रमुख केन्द्र बने। जैसे-जैसे इस्लाम अरब की सीमाओं से बाहर निकलकर पर्शिया, ईराक़, सीरिया, मिस्र और विश्व के अन्य देशों में फैलता चला गया, वैसे-वैसे मुसलमानों की संख्या-वृद्धि के साथ-साथ ही उन लोगों की संख्या में भी वृद्धि होती गई, जो इस्लाम में पूर्ण आस्था के बावज़ूद अपनी आत्मा में मचलते हुए प्रभु-प्रेम के फलस्वरूप अपने अंतःचक्षु द्वारा प्रिय के दर्शन करने में लगे हुए थे।

एक मत के रूप में सूफ़ीमत नौवीं शताब्दी में उभरा। सूफ़ीमत इस्लामी विधान का उल्लंघन नहीं करता। यह दौर इस्लाम के अत्यधिक प्रभाव का दौर था।

... भारतीय दर्शन में ‘अनल हक़‘ के समानार्थी ‘अहं ब्रह्मस्मि‘ है। अद्वैत दर्शन को सूफ़ी मंसूर की पहचान माना जाता है लेकिन हक़ीक़त है यह कि राहे विलायत से गुज़रने वाले हरेक साधक को इस मक़ाम से गुज़रना पड़ता है।
...
सूफ़ियों के सिलसिलों की संख्या निश्चित करना कठिन है, पर उनमें से कई भारत में पाए जाते हैं। इनमें प्रमुख हैं – चिश्ती, सुहरवर्दी, क़ादिरी, शतारी, नक्शबंदी, फिरदौसी, आदि। अकबर के ज़माने का मशहूर विद्वान अबुल फजल ने “आइन-ए-अकबरी” में चौदह सूफ़ी सिलसिलों का ज़िक्र किया है।
Source : http://www.testmanojiofs.com/2012/02/2.html?showComment=1328070899526#c117346338345762996

‘ब्लॉग की ख़बरें‘

1- क्या है ब्लॉगर्स मीट वीकली ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_3391.html

2- किसने की हैं कौन करेगा उनसे मोहब्बत हम से ज़्यादा ?
http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

3- क्या है प्यार का आवश्यक उपकरण ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

4- एक दूसरे के अपराध क्षमा करो
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

5- इंसान का परिचय Introduction
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/introduction.html

6- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

8- बेवफा छोड़ के जाता है चला जा
http://kunwarkusumesh.blogspot.com/2011/07/blog-post_11.html#comments

9- इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक
http://www.hamarianjuman.com/2011/07/blog-post.html

10- दुआ की ताक़त The spiritual power
http://ruhani-amaliyat.blogspot.com/2011/01/spiritual-power.html

11- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

12- शकुन्तला प्रेस कार्यालय के बाहर लगा एक फ्लेक्स बोर्ड-4
http://shakuntalapress.blogspot.com/

13- वाह री, भारत सरकार, क्या खूब कहा
http://bhadas.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

14- वैश्विक हुआ फिरंगी संस्कृति का रोग ! (HIV Test ...)
http://sb.samwaad.com/2011/07/blog-post_16.html

15- अमीर मंदिर गरीब देश
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

16- मोबाइल : प्यार का आवश्यक उपकरण Mobile
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/mobile.html

17- आपकी तस्वीर कहीं पॉर्न वेबसाइट पे तो नहीं है?
http://bezaban.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

18- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम अब तक लागू नहीं
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

19- दुनिया में सबसे ज्यादा शादियाँ करने वाला कौन है?
इसका श्रेय भारत के ज़ियोना चाना को जाता है। मिजोरम के निवासी 64 वर्षीय जियोना चाना का परिवार 180 सदस्यों का है। उन्होंने 39 शादियाँ की हैं। इनके 94 बच्चे हैं, 14 पुत्रवधुएं और 33 नाती हैं। जियोना के पिता ने 50 शादियाँ की थीं। उसके घर में 100 से ज्यादा कमरे है और हर रोज भोजन में 30 मुर्गियाँ खर्च होती हैं।
http://gyaankosh.blogspot.com/2011/07/blog-post_14.html

20 - ब्लॉगर्स मीट अब ब्लॉग पर आयोजित हुआ करेगी और वह भी वीकली Bloggers' Meet Weekly
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/bloggers-meet-weekly.html

21- इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
http://www.sahityapremisangh.com/2011/07/blog-post_3678.html

22- इसलाम में आर्थिक व्यवस्था के मार्गदर्शक सिद्धांत
http://islamdharma.blogspot.com/2012/07/islamic-economics.html

23- मेरी बिटिया सदफ स्कूल क्लास प्रतिनिधि का चुनाव जीती
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_2208.html

24- कुरआन का चमत्कार

25- ब्रह्मा अब्राहम इब्राहीम एक हैं?

26- कमबख़्तो ! सीता माता को इल्ज़ाम न दो Greatness of Sita Mata

27- राम को इल्ज़ाम न दो Part 1

28- लक्ष्मण को इल्ज़ाम न दो

29- हरेक समस्या का अंत, तुरंत

30-
अपने पड़ोसी को तकलीफ़ न दो

साहित्य की ताज़ा जानकारी

1- युद्ध -लुईगी पिरांदेलो (मां-बेटे और बाप के ज़बर्दस्त तूफ़ानी जज़्बात का अनोखा बयान)
http://pyarimaan.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

2- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

3- आतंकवादी कौन और इल्ज़ाम किस पर ? Taliban
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/taliban.html

4- तनाव दूर करने की बजाय बढ़ाती है शराब
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

5- जानिए श्री कृष्ण जी के धर्म को अपने बुद्धि-विवेक से Krishna consciousness
http://vedquran.blogspot.com/2011/07/krishna-consciousness.html

6- समलैंगिकता और बलात्कार की घटनाएं क्यों अंजाम देते हैं जवान ? Rape
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/rape.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

8- ख़ून बहाना जायज़ ही नहीं है किसी मुसलमान के लिए No Voilence
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/no-voilence.html

9- धर्म को उसके लक्षणों से पहचान कर अपनाइये कल्याण के लिए
http://charchashalimanch.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

10- बाइबिल के रहस्य- क्षमा कीजिए शांति पाइए
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

11- विश्व शांति और मानव एकता के लिए हज़रत अली की ज़िंदगी सचमुच एक आदर्श है
http://dharmiksahity.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

12- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

13- ‘इस्लामी आतंकवाद‘ एक ग़लत शब्द है Terrorism or Peace, What is Islam
http://commentsgarden.blogspot.com/2011/07/terrorism-or-peace-what-is-islam.html

14- The real mission of Christ ईसा मसीह का मिशन क्या था ? और उसे किसने आकर पूरा किया ? - Anwer Jamal
http://kuranved.blogspot.com/2010/10/real-mission-of-christ-anwer-jamal.html

15- अल्लाह के विशेष गुण जो किसी सृष्टि में नहीं है.
http://quranse.blogspot.com/2011/06/blog-post_12.html

16- लघु नज्में ... ड़ा श्याम गुप्त...
http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

17- आपको कौन लिंक कर रहा है ?, जानने के तरीके यह हैं
http://techaggregator.blogspot.com/

18- आदम-मनु हैं एक, बाप अपना भी कह ले -रविकर फैजाबादी

19-मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत

20- मौत कहते हैं जिसे वो ज़िन्दगी का होश है Death is life

21- कल रात उसने सारे ख़तों को जला दिया -ग़ज़ल Gazal

22- मोम का सा मिज़ाज है मेरा / मुझ पे इल्ज़ाम है कि पत्थर हूँ -'Anwer'

23- दिल तो है लँगूर का

24- लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी - Allama Iqbal

25- विवाद -एक लघुकथा डा. अनवर जमाल की क़लम से Dispute (Short story)

26- शीशा हमें तो आपको पत्थर कहा गया (ग़ज़ल)