Monday, January 30, 2012

1100 साल पहले हवा में उड़ा था अब्बास कासिम इब्ने फिरनास

अब्बास कासिम इब्न फिरनास



बच्चों को यह पढाया जाता है कि विमान के आविष्कारक राईट बंधु थे। लेकिन राईट बंधु से लगभग हजार साल पहले इब्ने फिरनास ने आकाश में उड़ने की कोशिश की थी। यह प्रयास ग्लाईडर के सहारे किया गया था।
सफल था वह प्रयोग
875 ईस्वी में, जब वह 65 साल का था तब इब्न फिरनास ने अपना ग्लाईडर बनाया और एक पहाड़ से कूदा। आकाश में उड़ते हुए जमीन पर उतरने का यह प्रयास लगभग सफल था। उसे आकाश से नीचे उतरते कई लोगों ने देखा। लेकिन, जमीन पर ठीक से वह लैंड नहीं कर पाया जिसके कारण वह घायल हो गया। इस प्रयोग के बारह साल बाद उसकी मौत हुई।
इब्न फिरनास का सम्मा
उसके सम्मान में लीबिया सरकार ने डाक टिकट जारी किया है। चांद पर एक बड़े गड्ढे का नाम इब्ने फिरनास क्रेटर रखा गया है।

See : 1100 साल पहले हवा में उड़ा था यह शख्स

Sunday, January 29, 2012

ट्रेन रिजर्वेशन से जुड़ी हर काम की बात Indian railway

अब आप अपने मोबाइल के जरिए बेहद आसानी से अपना टिकट बुक करवा सकते हैं। बस आपके मोबाइल में इंटरनेट होना चाहिए। इसके अलावा फेसबुक ने भी रेलवे का फेस बदला है। ट्रेन टिकट रिजर्वेशन के तमाम दांव-पेचों की जानकारी दे रहे हैं HBFI पर .
TRAIN RESERVATION
मोबाइल के जरिए ट्रेन रिजर्वेशन करवा सकते हैं।

See :
http://hbfint.blogspot.com/2012/01/indian-railway.html

Saturday, January 28, 2012

देवी देवताओं की पूजा उन लोगों का मौलिक अधिकार है जो कि उनकी पूजा में विश्वास रखते हैं - Anwer Jamal

वेद क़ुरआन में ईश्वर का स्वरूप God in Ved & Quran

शारदा देवी को एक वर्ग ज्ञान की देवी मानता है। आज उसकी पूजा की जा रही है। बहुत से ब्लॉगर्स ने इस पूजन-अर्चन को आज अपने लेख का विषय बनाया है और उसकी पूजा और प्रशंसा में गीत भी लिखे हैं।
देवी देवताओं की पूजा उन लोगों का मौलिक अधिकार है जो कि उनकी पूजा में विश्वास रखते हैं। लेकिन जब इस पूजा और विश्वास को इस महान देश की ज्ञान परंपरा में देखा जाता है तो पता चलता है कि वैदिक परंपरा में मूर्ति पूजा बाद के काल में शामिल हुई।
जो लोग ज्ञानी हैं वे जानते हैं कि अनंत ज्ञान का स्वामी ईश्वर नर और नारी नहीं है। जब इस धरती पर ज्ञान का आलोक था तब यहां मूर्ति पूजा भी नहीं थी। तत्व की बात तो यह है कि इस सृष्टि का संचालन कोई देवी देवता नहीं कर रहा है बल्कि एक सर्वशक्तिमान ईश्वर ही कर रहा है। जो लोग उसके बनाये नियमों का पालन करते हैं उन्हें वह ज्ञान देता है और जो लोग उसके नियमों की अवहेलना करते हैं, वे ज्ञान से वंचित रह जाते हैं।
आज भारत के युवा विदेशों में जाते हैं ज्ञान पाने के लिए, शिक्षा पाने के लिए जबकि विदेशों में शारदा और सरस्वती की वंदना-पूजा-उपासना सिरे से ही नहीं होती। वे लक्ष्मी और कुबेर की पूजा भी नहीं करते लेकिन वर्ल्ड बैंक पर क़ब्ज़ा उनका ही है और भारत के लोग उनसे आर्थिक सहायता पाने की गुहार लगाते रहते हैं।
ज्ञान, शिक्षा और धन विदेशियों को क्यों मिला और देवियों के पुजारियों से भी ज़्यादा क्यों मिला ?


‘तत्व ज्ञानी‘ आज भी यही बताते हैं कि सारी चीज़ों का स्वामी केवल एक परमेश्वर है और उसके गुणों को देवी और देवता बताने वाली बातें केवल कवियों की कल्पनाएं हैं. जब ईश्वर के सत्य स्वरूप को भुला दिया गया तो ईश्वर ने अरब के लोगों को अपने सत्य स्वरूप का बोध कराया. हमारी सफलता इसमें है कि हम परमेश्वर के मार्गदर्शन में चलें जो कि वास्तव में ही ज्ञान का देने वाला है। उसका परिचय वेद और क़ुरआन में इस तरह आया है-
...लै-इ-स कमिस्लिहि शैउन ...
अर्थात उसके जैसी कोई चीज़ नहीं है.
(पवित्र क़ुरआन, 42,11)

न तस्य प्रतिमा अस्ति ...
उस परमेश्वर की कोई मूर्ति नहीं बन सकती.
(यजुर्वेद, 32,3)
READ ENTIRE ARTICLE ON VED QURAN.

वेद क़ुरआन में ईश्वर का स्वरूप God in Ved & Quran

Wednesday, January 25, 2012

अंदाज ए मेरा: बकरी की हांक से पद्मश्री के धाक तक.....

अंदाज ए मेरा: बकरी की हांक से पद्मश्री के धाक तक.....: अपने गांव सुकुलदैहान में बकरी चराती फुलवासन ‘’एक छोटा सा गांव। गांव के कोने में एक खपरैल वाला छोटा सा मकान। इस मकान में एक परिवार। परिव...

काटजू ने रुश्दी के प्रशंसकों की आलोचना की, कहा कि समस्या यह है कि आज भारत के शिक्षित लोग औपनिवेशिक हीनभावना से ग्रस्त हैं


रुश्दी घटिया और दोयम दर्जे के लेखक: काटजू

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सलमान रश्दी
नई दिल्ली।। भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजू ने बुधवार को कहा कि सलमान रुश्दी घटिया और दोयम दर्जे के लेखक हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि विवादस्पद किताब 'सैटेनिक वर्सेज' से पहले उन्हें बहुत कम लोग जानते थे।

कुछ समय पहले तक सुप्रीम के जस्टिस रहे काटजू ने भारत में जन्मे और ब्रिटेन में रहने वाले रुश्दी के प्रशंसकों की आलोचना की। काटजू ने कहा कि वे औपनिवेशिक हीनभावना से ग्रस्त है इसलिए विदेश में रहने वाले हर लेखक को महान मान लेते हैं।

भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) के अध्यक्ष ने अपने बयान में कहा कि मैंने रुश्दी की कुछ पुस्तकें पढ़ी हैं और मेरा मानना है कि वह एक घटिया लेखक हैं और सैटेनिक वर्सेज से पहले उन्हें कम ही लोग जानते थे।

उन्होंने कहा कि यहां तक 'मिडनाइट्स चिल्ड्रन' को भी महान साहित्य कहना मुश्किल है। काटजू ने कहा कि समस्या यह है कि आज भारत के शिक्षित लोग औपनिवेशिक हीनभावना से ग्रस्त हैं। इसीलिए ऐसा है कि जो भी लंदन या न्यू यॉर्क में रहता है, वह महान लेखक हो जाता है, जबकि भारत में रहने वाले लेखक निम्न स्तर के माने जाते रहते हैं।
Source : http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/11629754.cms

Tuesday, January 24, 2012

हैवान बन जाता था डॉक्टर Gay

मेरठ के 'गे डॉक्टर' की मर्डर मिस्ट्री से पर्दा हटा

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मेरठ।। मेरठ के डॉक्टर अक्षय राजवंशी के मर्डर मामले में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पुलिस ने सोमवार को इस मर्डर से जुड़े एक राज़दार नूर मोहम्मद उर्फ चांदनी और हत्यारे साबिर को गिरफ्तार किया। नूर ने इस मर्डर मिस्ट्री के पीछे का जो किस्सा बयां किया, वह जानकर हर कोई हैरान है।

डॉक्टर के हंसमुख चेहरे के पीछे था हैवान
हंसमुख और मददगार डॉक्टर अक्षय राजवंशी के कैरक्टर का एक दूसरा पहलू भी था। नूर की मानें तो डॉक्टर समलैंगिक था और इसी वजह से उसकी जान गई। नूर और डॉक्टर अक्षय एक-दूसरे को कुछ समय से जानते थे। नूर के मुताबिक उसके एक साथी परवेज उर्फ वसीम ने उसे 14 जनवरी को डॉक्टर अक्षय से मिलवाया था। वह एलर्जी का इलाज कराने गया था।

सेक्स के लिए शैतान बन जाता था डॉक्टर
नूर पिछले कई सालों से समलैंगिक संबंधों में शामिल था। उसकी एलर्जी की वजह भी यही थी। डॉक्टर अक्षय को वह आसान शिकार लगा और उसने उसे संबंध बनाने के लिए राजी कर लिया। डॉक्टर ने उसे दूसरे दिन बुलाया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। बदले में कुछ पैसे भी दिए। 16 जनवरी को भी डॉक्टर ने उसके साथ ऐसा ही किया। नूर के मुताबिक शारीरिक संबंध बनाते समय डॉक्टर सेक्सव‌र्द्धक गोलियां लेता था। इसके बाद वह हैवान बन जाता था। उसकी हैवानियत के चलते ही वह डॉक्टर से बुरी तरह से डर चुका था। डॉक्टर के इस रूप से डर चुके नूर ने अपने एक साथी भावनपुर के स्याल गांव के साबिर को डॉक्टर के पास भेजने की पेशकश की। डॉक्टर मान गया। वह साबिर को लेकर डॉक्टर के क्लीनिक पहुंचा।

...और कर दी डॉक्टर की हत्या
नूर ने बताया कि डॉक्टर और साबिर ने साथ बैठकर शराब पी। इसके बाद घिनौना खेल शुरू हुआ। डॉक्टर के वहशीपन को देख साबिर ने उसे अलग हटने को कहा, लेकिन डॉक्टर पर हवस सवार थी। साबिर को गुस्सा आ गए। साबिर ने हीटर के तार से डॉक्टर का गला घोंट डाला। हत्या के बाद उसने लूटपाट भी की। बाद में उसने साबिर ने नूर को सारा किस्सा बताया। लेकिन डॉक्टर की हत्या की मर्डर मिस्ट्री पर ज्यादा दिनों तक पर्दा नहीं पड़ा रह सका। पुलिस ने एक-एक कर सारे राज़ उगलवा लिए।

नूर की भी है अजब कहानी
डॉ. अक्षय की हत्या के सिलसिले में पकड़े गए नूर मोहम्मद का 2008 में मेरठ की गुलिस्ता से निकाह हुआ था। बकौल नूर, उसके शारीरिक रूप से अक्षम होने की वजह से पत्नी के संबंध छोटे भाई से हो गए। उससे एक बच्चा भी हुआ, लेकिन उसकी मौत हो गई और बीवी भी घर छोड़कर चली गई। इसके बाद से नूर 'चांदनी' बन गया। डांस-पार्टियों में गाने-बजाने के धंधे से जुड़ गया। इस दौरान वह समलैंगिकता का शिकार हो गया। चांदनी क्लब में आधा दर्जन ऐसे युवक हैं, जो समलैंगिक संबंधों में लिप्त हैं।

चांदनी क्लब की अपनी अलग दुनिया है। समलैंगिक युवकों की कॉल डिटेल से खुलासा हुआ है कि डॉक्टर, इंजिनियर से लेकर प्रफेसर तक इस क्लब की सेवा ले रहे हैं। आठ साल पहले एक कारखाने में काम के दौरान नूर की मुलाकात स्याल गांव के साबिर से हुई। साबिर से उसके शारीरिक संबंध बने। बकौल पुलिस, इसके बाद साबिर ने अपनी बीवी नसरीन और छह बच्चों को छोड़कर नूर से निकाह कर लिया।

फिलहाल नूर और साबिर पति-पत्नी के रूप में रह रहे थे। शाबिर अपराधी प्रवृत्ति का भी है। उसके खिलाफ लूट के तीन मामले दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक इनके गैंग में महताब सिनेमा निवासी परवेज भी शामिल था। परवेज ने ही नूर को डॉक्टर अक्षय से मिलवाया। ठेला लगाने का काम करने वाले परवेज ने बताया कि डॉ अक्षय से उसकी मुलाकात जगत सिनेमा के बाहर हुई थी। इसके बाद डॉक्टर ने उसे काम दिलाने के बहाने क्लीनिक पर बुलाया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। पुलिस खिवाई गांव के हसनैन की भी तलाश में है। हसनैन भी समलैंगिक है और इसी गैंग में शामिल है।
Source : http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/11611611.cms

Monday, January 23, 2012

महिला के शरीर में दो जननांग, पॉर्न इंडस्ट्री से Offer

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सौजन्य- द सन
लंदन।। ब्रिटेन में एक 'खास' शारीरिक दोष ने एक महिला को 1 मिलियन डॉलर (करीब 5 करोड़) का ऑफर दिला दिया है। ब्रिटेन के टैब्लॉइड 'द सन' के मुताबिक हेज़ल जोन्स नाम की इस महिला में शारीरिक दोष के कारण पूरी तरह विकसित दो वजाइना हैं। उनकी इस खासियत के कारण पॉर्न फिल्म इंडस्ट्री की उन पर नजर है।

हेज़ल अपनी इस खास शारीरिक बनावट पर कतई शर्मिंदा नहीं हैं। हेज़ल के पति रिकी को उन पर गर्व है। रिकी के मुताबिक, 'हेज़ल का शरीर उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। उनकी इस खासियत के बारे में आपको तब तक पता नहीं चलेगा, जब तक वह खुद नहीं बताएंगी। मैं नहीं चाहता कि हेज़ल में कोई बदलाव आए।' हेजल ने बताया कि उन्हें अपने इस शारीरिक दोष के बारे में किशोरवस्था में पता चला। हेज़ल ने दावा किया कि उन्होंने अपनी वर्जिनिटी दो बार खोई है।

उधर, पॉर्न इंडस्ट्री की नजरें हेज़ल पर टिक गई हैं। प्रड्यूसर उनकी इस खासियत को भुनाना चाहते हैं। विविड एंटरटेनमेंट के हेट स्टीव हाइरस ने अपनी पॉर्न फिल्म के लिए उन्हें 1 लाख मिलियन डॉलर ( करीब 5 करोड़ रुपये) की रकम का ऑफर दिया है।

हाइरश ने जोन्स को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें उसने कहा, 'आप निश्चित तौर पर एक असाधारण महिला हैं। मैं आपको अपनी फिल्म के लिए ऑफर देता हूं। हम आपको इसके लिए 1 मिलियन डॉलर देंगे।' यही नहीं जोन्स को फिल्म के लिए अपने पार्टनर चुनने की भी आजादी होगी। जोन्स ने इस ऑफर का अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।
Source : http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/11575448.cms
अंदाज ए मेरा: दीवाना राधे का.....: आज मेरी बिटिया ने फिर मेरा सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। उसके स्‍कूल में रविवार को वार्षिक उत्‍सव का कार्यक्रम था। पिछले साल अपनी कक्षा मे...

Friday, January 20, 2012

Best Blogger of the Week

Gajendra Pratap Singh

Best Blogger of the Week

जागरण जंक्शन ब्लॉग मंच पर

महिला अस्मिता और उनका आत्मसम्मान

अस्मिता पहचान के बारे में यह बात याद रखनी होगी कि वह कोई निजी या व्यक्तिगत चीज नहीं है। वह हमेशा सामाजिक परिपे्रक्ष्य में परिभाषित होती है यदि समाज में आपकी इज्जत नहीं है, तो स्वयः की नजरों में आपकी कोई इज्जत नहीं होगी। इस आलोच्य में कहा जाए तो समाज के हर स्तर पर महिलाओं को पुरूष जैसा आत्मसम्मान या पहचान नहीं मिल सकी है। उन्हें प्राकृतिक स्त्रियोचित गुण होने के कारण तथा उनके अपने मनोविज्ञान के कारण हमेशा ही पुरूष से नीचा माना जाता है। इससे महिलाओं के मनोस्थिति, चेतना के साथ-साथ उनके शरीर पर भी बुरा असर पड़ता है। उनकी देहभाषा ही बदल जाती है। एक तरफ मर्द सीना तानकर चलता है, तो दूसरी तरफ औरत झुककर। एक अध्ययन के अनुसार महिलाओं की रीढ़ की हड्डी मर्दों की रीढ़ की हड्डी की तरह सीधी नहीं होती, बल्कि झुकी हुई होती है, क्योंकि उन्हें झुककर चलना पड़ता है। इसका मतलब है कि अस्मिता कोई अर्मूत या हवाई चीज नहीं है। उसके न होने का असर महिलाओं के जिस्म पर और उनके हड्डियों के ढांचे पर भी पड़ता है। इस तरह अस्मिता को प्रश्न आत्मसम्मान के प्रश्न से अलग नहीं है और आत्मसम्मान का संबंध केवल मनोविज्ञान से ही नहीं बल्कि दोनों चीजें सामाजिक, सांस्कृतिक और इन दोनों का संबंध समाज की अर्थव्यवस्था और राजनीति से है। वहीं अक्सर यह देखा जाता है कि समाज की वास्तविकता को न देखते हुए उनकी स्थिति की बात हमारे समाज में खूब होती है। मसलन, किसी पंडित से पूछिए कि भारतीय समाज में स्त्री की स्थिति क्या है, तो वह वेदों और पुराणों में से उदाहरण दे-देकर बतायेगा कि हमारे यहां तो स्त्रियों का बड़ा मान-सम्मान होता है, उनकी पूजा की जाती है, वगैरह। यानी भारतीय स्त्रियों बराबरी से ऊपर की जिंदगी जी रही हैं। लेकिन हकीकत क्या है, सब जानते हैं।
लिंक : महिला अस्मिता और उनका आत्मसम्मान

Thursday, January 19, 2012

ZEAL के लव-जेहाद के जवाब में,

लव जिहाद का चर्चा फिर उठाया जा रहा है और इसके नाम पर इस्लाम और मुसलमान को बदनाम किया जा रहा है.
लड़के लड़कियां साथ साथ पढ़ रहे हैं, काम काज भी साथ साथ ही कर रहे हैं. इन्हें अपने मां बाप की इज़्ज़त का भी ख़याल होता है। ऐसे में वे अपनी शादियां अपने मां बाप की पसंद से ही करते हैं या फिर अपनी पसंद उन्हें बताकर उनकी रज़ामंदी ले लेते हैं और कुछ ऐसे भी हैं जो उनसे ऊपर होकर ख़ुद अपनी शादी कर लेते हैं या फिर लिव इन रिलेशन में रहने लगते हैं।
क्या दूसरे समुदाय के लड़के और लड़कियों को ‘लिव इन रिलेशन‘ में रहने की प्रेरणा भी मुसलमान युवक ही देते हैं ?
इसमें इस्लाम और जिहाद कहां से आ गया ?
हिंदू और मुस्लिम की दूरियां अब ख़त्म होनी चाहिएं. जो बेहतर हो उसे सब करें और जो ग़लत हो उसे कोई भी न करे और नफ़रत फैलाने की बात तो कोई भी न करे.
सब आपस में प्यार करें.
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2012/01/love-jihad.html

एक Interview तेजेन्द्र शर्मा से

तेजेन्द्र शर्मा ब्रिटेन में हिदी के महत्वपूर्ण रचनाकार हैं। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी तेजेन्द्र शर्मा का प्रीत अरोड़ा द्वारा लिया साक्षात्कार-

प्रश्न–क्या आप विदेश में रहकर वहाँ की संस्कृति,सभ्यता,रीति-रिवाज और भाषा से स्वयं को जुड़ा हुआ महसूस कर पाते हैं ?

उत्तर–पहली पीढ़ी के प्रवासी के लिये यह आसान नहीं होता कि वह अपने अपनाए हुए देश की संस्कृति, सभ्यता और रीति-रिवाज से पूरी तरह जुड़ पाए। उसकी जड़ें अपनी मातृभूमि, संस्कारों एवं भाषा से जुड़ी होती हैं। उससे इस बात की अपेक्षा भी नहीं की जानी चाहिये। हां यह आवश्यक है कि उसे इन सब बातों के प्रति कोई रिज़र्वेशन भी नहीं होनी चाहिये। सौभाग्यवश मैं जिस देश में रहता हूं वहां की भाषा मुझे स्थानीय लोगों से बेहतर आती है। दिल्ली विश्वविद्यालय से एम।ए. अंग्रेज़ी में की है। शायद वही मेरे काम भी आ रही है। सच तो यह है कि स्थानीय लोग कभी कभी मेरे अंग्रेज़ी ज्ञान के प्रति ईर्ष्या व्यक्त कर चुके हैं। लंदन में विविधता इतनी है कि कोई एक सभ्यता ना तो दिखाई देती है और ना ही सुनाई। यदि हमें इंगलैण्ड की पुरानी परंपराओं को समझना है तो हमें बड़े शहरों से बाहर जाना होगा। मैं ब्रिटेन की कुछ बातों का क़ायल हूं। यहां आम आदमी की बहुत क़दर है। यहां इन्सान को इन्सान समझा जाता है। यहां टुच्चा भ्रष्टाचार नहीं है। एक हज़ार पाउण्ड के घोटाले के लिये भी सांसदों को त्यागपत्र देना पड़ता है बल्कि जेल तक भी हो गई है। विकलांगों के लिये जो सुविधाएं यहां मौजूद हैं उनको देख कर लगता है कि ना जाने हम किस ग्रह पर रह रहे हैं। हम जिस भारतीय संस्कृति की डींगें मारते हैं, वो संस्कृति यहां प्रेक्टिकल रूप में दिखाई दे जाती है। सच्चा समाजवाद अगर कहीं देखा है तो सामंतवाद के इस गढ़ में देखा है।

Go to :

http://www.pravasiduniya.com/videsho-mein-hindi-bhasha-aur-sahitya-ko-sthapit-karme-menin-prayasrat-hoon-tejender-sharma#comment-1956

Monday, January 16, 2012

नाबालिग लड़की के साथ रेप Father arrested

rape.jpg
विशेष संवाददाता ।। नई दिल्ली
साउथ दिल्ली के सरोजनी नगर थाना इलाके में 16 साल की नाबालिग लड़की के साथ रेप करने के आरोप में उसके ही पिता को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि रेप के आरोप में पीड़ित लड़की रेखा (बदला हुआ नाम) के पिता सदन (बदला हुआ नाम) को गिरफ्तार किया गया है।

सदन अपने परिवार के साथ आरके पुरम इलाके में एक सर्वेंट क्वॉर्टर में रहता है। एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने वाले सदन ने शुक्रवार शाम रेखा को घर में अकेली पाकर रेप किया। उस वक्त रेखा की मां, बड़ी बहन और छोटा भाई बाहर गए हुए थे।

मां के आने पर रेखा ने सारी बात बताई। एक एनजीओ की मदद से मामला पुलिस थाने में गया। लड़की का सफदरजंग हॉस्पिटल में मेडिकल कराया गया। रेप की पुष्टि होने के बाद शुक्रवार शाम को ही सदन को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप है कि सदन काफी समय से रेखा से रेप करता आ रहा था। 
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/11492081.cms
 

12 लोगों को फांसी दी गई ईरान में Punishment for rape in Islam

तेहरान।। ईरान के अधिकारियों का कहना है कि दक्षिणी शहर शीराज में 12 लोगों को फांसी दी गई है।
समाचार एजेंसी महर के मुताबिक फांसी दिए सात लोगों को नशीले पदार्थों की तस्करी का दोषी करार दिया गया था। अन्य लोग बलात्कार, अपहरण और हथियारों की डकैती के मामले में दोषी थे।
इन लोगों को फांसी दिए जाने के साथ ही ईरान में अब तब 15 लोगों को फांसी दी जा चुकी है। यूरोपीय संघ ने पिछले दिनों इस पर चिंता जताई थी। 
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/11501294.cms 
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अब आप बताएं कि ईरान का करना जायज़ है या कि संयुक्त राष्ट्र की चिंता ?

खबरगंगा: शाबाश! अभिनव प्रकाश!

हाल के वर्षों में बिहार झारखंड के कस्बाई इलाकों की कई प्रतिभाओं ने राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर यह साबित किया है कि ऊंची उड़ान कहीं से भी लगाई जा सकती है. इसके लिए महानगरों में जन्म लेना या वहां की आबो-हवा में पलना ज़रूरी नहीं है. ऐसा ही एक कारनामा कर दिखाया है बिहार के भोजपुर जिला मुख्यालय आरा के एक मध्यमवर्गीय परिवार से आये युवक अभिनव प्रकाश ने.उसने कैट की 2012 की परीक्षा में 99 .98 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सबको चौंका दिया है. उसके पिता अनिल कुमार सिन्हा और मां गीता सिन्हा का सीना तो गर्व से चौड़ा हो ही गया है. पूरे सूबे के लोग स्वयं को गर्वान्वित महसूस कर रहे हैं.
अभिनव आरा के राजेंद्र नगर का रहना वाला है. उसने डीएवी, आरा से 10 वीं और डीएवी खगौल से 12 वीं पास किया. सुपर 30 के जरिये उसने कोचिंग की और 2005 में आईआईटी-जेईई की प्रतियोगी परीक्षा पास कर आईआईटी, बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय में दाखिला लिया. वर्ष 2009 में वहां की पढाई पूरी की. कैम्पस प्लेसमेंट के तहत उसे कोल इंडिया लिमिटेड में मैनेजमेंट ट्रेनी के लिए चयनित किया गया. उसने कोल इंडिया में योगदान दिया लेकिन उसे अभी और ऊंची उड़ान भरनी थी लिहाज़ा 2010 में उसे छोड़ कर जेडएस एसोसिएट्स, नई दिल्ली को ज्वाइन कर लिया. इस बीच जमकर तैयारी की और 2012 में कैट की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया. अब उसकी अगली उड़ान क्या होगी यही देखना है.
----देवेंद्र गौतम

Sunday, January 15, 2012

ग़ज़लगंगा.dg: खून में डूबे हुए थे रास्ते सब इस नगर के

खून में डूबे हुए थे रास्ते सब इस नगर के.

हम जो गलियों में छुपे थे, घाट के थे और न घर के.


ठीक था सबकुछ यहां तो लोग अपनी हांकते थे

खतरा मंडराने लगा तो चल दिए इक-एक कर के.


हादिसा जब कोई गुज़रा या लुटा जब दिल का चैन

यूं लगा कि कोई रावण ले गया सीता को हर के.



ग़ज़लगंगा.dg: खून में डूबे हुए थे रास्ते सब इस नगर के:

'via Blog this'

Friday, January 13, 2012

टिप्पणियों का जवाब देने की सुविधा

अंदाज ए मेरा: उमर बढ गई या कम हो गई.......?????

अंदाज ए मेरा: उमर बढ गई या कम हो गई.......?????: आज मन में यह ख्‍याल आ रहा है कि खुशियां मनाऊं या गम.... ? आज जन्‍मदिन है मेरा। उम्र एक साल बढ गई.... या कम हो गई....., क्‍या कहूं, क्‍...

Thursday, January 12, 2012

पुष्पेश पंत कहते हैं निशाने पर है Iran

अमेरिका की गलतफहमी की जड़ यह है कि वह दुनिया में कहीं भी घटनाक्रम को मनचाहे ढंग से प्रभावित कर सकता है-या तो सीधे हस्तक्षेप से या किसी मोहरे के माध्यम से। ईरान में दोनों ही तरीके आजमाए जा चुके हैं। कभी किसी ‘हादसे’ में उस देश के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े वैज्ञानिक का देहांत हो जाता है या वह पागल हत्यारे का निशाना बनता है, ईरान पर नित नए प्रतिबंध लगाए जाते हैं या उसे धमकी दी जाती है कि इस्राइल उसके परमाणु ठिकानों पर हमला कर उन्हें ध्वस्त कर देगा। चुनाव के वक्त नए सामाजिक माध्यमों का भरपूर उपयोग वैधानिक तरीके से चुनी सरकार को अस्थिर करने के लिए किया गया।

अमेरिका का प्रयास यह भी रहा है कि वह भारत समेत दूसरे देशों को ईरान से विमुख कर सके। दुर्भाग्य से भारत इस जाल में फंस चुका है। अपने ऐतिहासिक संबंधों की अनदेखी कर अमेरिका के कहे अनुसार ईरान के पक्ष में मत न देकर उसने नाहक ईरान को खिन्न किया है। यह सुझाना बेमानी है कि उसने ऐसा अपने विवेक से या राष्ट्रहित में किया है, क्योंकि ईरान पाकिस्तान के एटमी कार्यक्रम को मदद देता रहा है। सच तो यह है कि इस खतरनाक तस्करी में हमारा अव्वल नंबर का आर्थिक साझीदार चीन और खुद अमेरिका भागीदार रहे हैं।

जहां तक ईरान का प्रश्न है, वहां इसलाम का स्वरूप सदियों से उदार, समन्वयात्मक और आध्यात्मिक-रहस्यवादी रहा है। हमारी संस्कृति को समृद्ध बनाने वाले तमाम सूफी ईरान से ही भारत आए थे। भाषा, भोजन, वेश-भूषा, भवन निर्माण जाने कहां-कहां ईरान के दर्शन अनायास भारत में होते हैं। हमारे लिए अपने राष्ट्रहित की हिफाजत के लिए अमेरिकी चश्मे से तत्काल निजात पाना बेहद जरूरी है।

हमारी संस्कृति के मूल आधार ही अब हमारे नहीं रहे ?

देखिये  पल्लवी  जी  का  लेख 
आज आज़ादी के इतने सालों बाद भी मुझे तो ऐसा लगता है कि आगे बढ़ने के बाजये और पिछड़ गए हैं हम, क्यूंकि हमारी संस्कृति के मूल आधार ही अब हमारे नहीं रहे। जिसमें झलकती थी हमारे देश कि संस्कृति और सभ्यता की खुशबू अब उसकी जगह ले ली है आपसी मतभेद और नकल ने फिर उसका क्षेत्र चाहे जो हो वो मायने नहीं रखता। जिस देश के नेता भ्रष्ट हों ,जिस देश कि आने वाली नस्लें खुद अपना ही देश छोड़ के जाने पर आमादा हों, जिस देश के लोगों में अपनी मात्र भाषा को लेकर द्वंद मचा रहता हो। क्या ऐसे देशवासियों को अधिकार है राष्ट्रीय त्योहार मनाने का आज़ादी के गीत गाने का ???? खुद को सच्चा हिन्दुस्तानी कहने का ...??? यदि मेरे इन सवालों का कोई जवाब आपके पास हो तो कृपया ज़रूर अवगत करायें ....

Tuesday, January 10, 2012

कुपोषण की ऊंची दर राष्‍ट्र के लिए शर्मनाक : P. M.


Embarrassing for the nation high rate of malnutrition
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि के बावजूद भी कुपोषण की दर में इजाफा होने को शर्मनाक बताया.
प्रधानमंत्री ने मंगलवार को यहां बच्चों में भूख तथा कुपोषण की समस्या पर एक सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद कुपोषण की ऊंची दर पूरी तरह अस्वीकार्य है और यह राष्ट्र के लिए शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि आज देश में छह वर्ष से कम आयु के करीब 16 करोड बच्चे हैं। ये 16 करोड़ बच्चे ही कल देश का भविष्य हैं।
ये ही किसान, शिक्षक, डाटा आपरेटर और सेवा प्रदाता आदि बनेंगे। कुपोषण की ऊंची दर के साथ कोई देश एक स्वस्थ भविष्य की उम्मीद नहीं कर सकता। प्रधानमंत्री ने रिपोर्ट को इस अर्थ में चिंताजनक और उत्साहवर्द्धक दोनों बताया कि नौ राज्यों के 112 जिलों में 73000 परिवारों से बातचीत पर आधारित यह सर्वेक्षण एक ओर जहां कुपोषण की ऊंची दर की जानकारी देती है, वहीं यह भी बताती है कि इनमें से 100 जिलों में पिछले सात साल में हर पांचवें बच्चे का वजन पर्याप्त उचित अनुपात में बढा है।
Source : http://www.amarujala.com/national/nat-Embarrassing-for-the-nation-high-rate-of-malnutrition-21291.html

विधवाओं के मरने के बाद उनके शरीर के टुकड़े -टुकड़े करके स्वीपरों द्वारा जूट की थैलियों में भर कर यूं ही फेंक दिया जाता है वृन्दावन में


स्वराज करूँ अपने ब्लॉग दिल की बात पर 

कृष्ण कन्हैया की धरती पर यह कैसा कलंक ?

खबर  आयी है कि भगवान कृष्ण कन्हैया की पवित्र भूमि वृन्दावन में संचालित सरकारी आश्रय गृहों की अनाथ विधवाओं के मरने के बाद उनके शरीर के टुकड़े -टुकड़े करके स्वीपरों द्वारा जूट की थैलियों में भर कर यूं ही फेंक दिया जाता है !   यह समाचार कल एक हिन्दी सांध्य दैनिक 'छत्तीसगढ़ ' में प्रकाशित हुआ है, जो अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू ' में छपी खबर का अनुवाद है.  अगर यह खबर सच है तो  यह भयंकर अमानवीय और शर्मनाक करतूत हमारे लिए राष्ट्रीय शर्म की बात  है .  क्या आज का इंसान इतना गिर चुका है कि किसी मानव के निर्जीव शरीर को सदगति देने के बजाय वह उसके टुकड़े-टुकड़े कर  किसी गैर ज़रूरी सामान की तरह कचरे में फेंक दे ? 
   छपी खबर  के अनुसार वहाँ ऐसा इसलिए होता है ,क्योंकि इन असहाय और अनाथ महिलाओं की मौत के बाद उनके सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए कोई वित्तीय प्रावधान नहीं है.
इस पर आई कुछ प्रतिक्रियाएं भी आप देखें और ब्लॉग पर जाकर अपने विचार दें .


ह्रदय को झकझोरनेवाली खबर दी है आपने.सत्य को परखने की बात मत कीजिये बात सत्य ही होगी. इस निर्मूल्य होते मानवीय संबंधों के लिए कुछ करने के लिए अन्ना जैसे आन्दोलन की जरूरत है और उससे पहले अपने हृदयों को स्वक्छ करने की भी

रेखा said...


आपकी खबर से तो मैं कांप गई हूँ ...क्या ऐसा भी कहीं हो सकता है ?
बहुत ही मार्मिक और हृदयविदारक प्रसंग

Sunday, January 8, 2012

Facebook पर जलवा लड़की का


नेहा नाम की देवी ने Facebook पर एक
Scrap पोस्ट किया जिसमे मात्र ये
लिखा हुआ था "hello"....
देखकर मुझे हसी आ गयी ,सोचा पागल है ये.....
और जब डेढ़ घंटे बाद जब मैंने
... ये पोस्ट देखा तो सुन्न रह गया ... पोस्ट
को 58 लोग लाइक कर चुके थे और 63
कमेंट भी आ गए ... पोस्ट को लाइक करने
वाले... सभी cool dude थे.... और इन
मूर्खो की
व्याकुलता देखिये की एक dude
दो दो बार कमेंट कर रहा था ... नेहा कोई
जवाब
नहीं दे रही थी ... और ये ऐसे बेचेन हो रहे थे
जैसे जल बिन मछली ... अंत
में नेहा ने एक छोटा सा पर भावो से
भरा हुआ कमेंट फेक दिया। सब ऐसे खुश हो
गए जैसे कुत्ते को हड्डी मिल गयी हो .अंत में
जब शांति सी छाई तो इस पोस्ट
को 78 लोग लाइक कर चुके थे,,, तो ये है
हमारे युवा...लड़कियो की कितनी भी
खिशी पिटी शायरी की पोस्ट हो ...
इतनी बार वाह वाह कहेंगे की लड़की खुद
को गालिब समझने लगती है..... 
हर समय इन जैसे  कुछ मूढ़ो के दिमाग में 
यही हलचल चलती रहती है॥ 
ग्रुप चैट पर
कितनी भी गंभीर धार्मिक
या देशभक्ति की बात चल
रही हो ,,, ये आते है लड़की को देखते ही hiii
neha hiiii puja करने लगते है
... और गलती से लड़की इन्हे hiiiii बोल
देती है तो बस फूलकर कुप्पा हो
जाते है।और जब कही किसी पोस्ट पर
गहरी बहस चल रही हो .... और कोई लड़की
मूर्खता के कमेंट कर रही हो ... तो ये उच्च
कोटि के लोग बिना सोचे समझे ही
पूछ हिलाते हुये उसका समर्थन करने लगते
है......बेशक वोह गलत हो ये उसके
लिए जमाने से लड़ने को लड़ने को तैयार
हो जाते है। पूरी तरह से नारिभक्त बन
जाते है ये लोग..... 
धिक्कार है तुम जैसे युवाओ पर .... 
जो तुम्हारी नज़रें
ज्ञान, देशभक्ति को छोडकर हर क्षण
गिद्ध की तरह वही लगी रहती है।
अब तो कुछ
शर्म करना..यारो .... हम चाहे
कितना भी अच्छे  से अच्छा पोस्ट कर ले ... 
हमें अल्पमत ही मिलते है ... वो तो हो नहीं पाता 
वरना अगर Facebook पर
कोई लड़की
ब्लैंक पोस्ट भी कर दे ... तो ये वनमानुष उसे
भी लाइक करके और एक दो कमेंट
करके फूले नहीं समाएंगे....... 
भगवान बचाए...
-जय श्री राम

शर्म निरपेक्ष पार्टी


ग़ज़लगंगा.dg: तमन्नाओं की नगरी को कहीं फिर से बसा लूंगा

तमन्नाओं की नगरी को कहीं फिर से बसा लूंगा.
यही दस्तूरे-दुनिया है तो खुद को बेच डालूंगा.

तुझे खंदक में जाने से मैं रोकूंगा नहीं लेकिन
जहां तक तू संभल पाए वहां तक तो संभालूंगा.

----देवेंद्र गौतम

Saturday, January 7, 2012

हुस्न की हिफ़ाज़त और सेक्स पॉवर की कुंजी Golden key

त्वचा पर माहौल के अलावा खान पान का असर भी पड़ता है।
हमारी ही तरह हमारी त्वचा भी पोषण मांगती है।
यह सीधे ही ग्रहण करती है।
अंडा इसके लिए एक उपयुक्त आहार है।
इसे आप दो लिंक्स पर देखें-

1- स्किन को भी चाहिए स्पेशल फूड Special Food
http://aryabhojan.blogspot.com/2011/06/special-food.html

2- क्या दफ्तर में आप उनींदे रहतें हैं ? यदि हाँ तो चौकन्ना रहने के लिए खाइए अंडे.
http://sb.samwaad.com/2012/01/blog-post.html 
 

अब साइंसदान एग यलो के गुण गायन में कह रहें हैं- यदि कामकाजी स्थल पर आप उनींदे रहते हैं जब तब नैप के लपेटे में आते है तब चुस्त दुरुस्त चौकन्ने बने रहने के लिए बस एक अंडा रोज़ खाइए इसके सफ़ेद भाग में मौजूद प्रोटीन आप को सचेत बनाए रहेगी.

http://aryabhojan.blogspot.com/2012/01/impotency.html

 http://hbfint.blogspot.com/2012/01/egg-eating.html

अंदाज ए मेरा: स्‍कूल के माथे कलंक का टीका.....!!!!!!

अंदाज ए मेरा: स्‍कूल के माथे कलंक का टीका.....!!!!!!: फोटो साभार: हरिभूमि अमानवीय....... ! शर्मनाक..... ! दुर्भाग्‍यजनक......... ! मानवता को कलंकित करने का काम किया है एक स्‍कूल ने।...

Friday, January 6, 2012

जागरण जंक्शन पर गाली गलौच के ख़िलाफ़ एक ब्लॉगर S. P. Singh

आदरणीय टीम जागरण जंक्शन,
महोदय, मैंने काफी चिंतन करने के पश्चात यह महसूस किया कि जागरण फोरम पर अधिकतर पाठक बंधू या टिप्पणी करने वाले प्रबुद्ध सज्जन लोग केवल एक पार्टी विशेष के फेवर में लेखों या टिप्पणियों को पसंद करते है विरोध में या तटस्थ लेखों या टिप्पणियों पर आगबबुला हो कर अनर्गल प्रलाप करते हुए गाली गलौच पर उतर आते है यह तो कोई उचित बात नहीं है ? 
चूँकि जैसा की महा कवि कबीर दास ने कहा है ” निंदक नियरे रखिये आँगन कुटी छावय | बिन पानी बिन तेल के निर्मल करे सुहाय || तो मेरे लेख और टिप्पणियां भी कबीर से प्रभावित हैं ?
चूँकि मेरे लेखों और टिप्पणियों में मेरी अपनी सोच और विचार जो मेरे अपने स्वयं के है जो कि मेरी अपनी शिक्षा, संस्कार, एवं सरकारी नौकरी प्रशासनिक अनुभव और सार्वजनिक जीवन के अनुभव पर आधार्रित होते है वह न तो किसी के विरोध में होते है और न ही किसी के फेवर में वह केवल तटस्थ श्रेणी में होते है लेकिन आपके फोरम के लोगों को पसंद नहीं आते तो ऐसे लेखों को लिखने का औचित्य क्या है ?
चूँ वर्तमान में सर्वश्री बाबु राव उर्फ़ अन्ना हजारे एवं राम सेवक यादव उर्फ़ योग गुरु बाबा राम देव के विषय में मैंने जो कुछ भी लिखा था या लिख रहा हूँ वह शतप्रतिशत अभी तक सही साबित हुआ है.

फेसबुक के दोस्तों को अलविदा !

लो दोस्तों, आपने पुराने साल को विदा कर दिया है. अब मुझे भी विदा करों. ज्यादा जानकारी एक दो दिन में दूँगा. अपनी विदाई पर इन शब्दों के साथ कर रहा हूँ. गौर कीजियेगा कि:- "अरी ओ फेसबुक, अगर जिन्दा रहे तो तेरे पास आ जायेंगे, वरना नए डाक्टरों के रिसर्च* (शोध) के काम आ जायेंगे" 
हाँ, दोस्तों यह बिल्कुल सच है. लौट सके तो नए शब्दों की रचना करेंगे. वरना...अब तक लिखे को ही दोस्त पढ़ते रह जायेंगे. श्री अहमद फ़राज़ साहब का कहना कि:-चलो कुछ दिनों के लिये दुनिया छोड़ देते है ! सुना है लोग बहुत याद करते हैं चले जाने के बाद !! 
*सिखने/सिखाने के उद्देश्य की जाने वाली चीरफाड़.
क्या आदमी को बुजदिलों की मौत मरना चाहिए या वीरों की ? 
शीर्षक में पूछे प्रश्न का उत्तर कहूँ या टिप्पणी दें. 
 दोस्तों, फेसबुक की मेरी वाल पर और ब्लोगों पर इतना है कि अगले चार महीने में पूरा पढ़ भी नहीं पायेंगे. आप और आपकी दुआओं से जीवन रहा तो आप लोगों का "सिर-फिराने" के लिए हाजिर हो जायेगें.यह दुनियाँ ही चला-चली की है. मैं जाऊँगा तब ही तो दूसरा आएगा.आज हममें भोग-विलास की वस्तुओं से मोह ज्यादा है.जब भी समय मिले तब ब्लॉग और वाल जरुर पढ़ें.मैं जानता हूँ कि लोग अभी नहीं पढ़ेंगे लेकिन मेरी मौत के बाद एक-एक शब्द पढेंगे.यह मुझे मालूम है. शायद आपको पता हो कि-हमें डिप्रेशन और डिमेंशिया की बीमारी है. अब अगले चार महीनों में उस पर विजय भी प्राप्त कर लेंगे.
पूरा लेख यहाँ पर क्लिक करके पढ़ें.

हिंदी अति सरल और मीठी भाषा हैं

 युधवीर सिंह लाम्बा भारतीय का कहना कि-हिंदी अति सरल और मीठी भाषा हैं। हिंदी भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। तभी तो देश के बाहर भी हिंदी ने अपना स्थान बना सकने में सफलता हासिल किया है। फ़िजी, नेपाल, मोरिशोस, गयाना, सूरीनाम यहाँ तक चाइना और रसिया में भी हिंदी अच्छी तरह बोली और पढ़ी जाती है।
*हिन्दी के प्रभाव और क्षमता को अब विश्व की बड़ी-बड़ी कंपनियां भी सलाम कर रही है। विश्व में मोबाइल की सबसे बड़ी कंपनी नोकिया ने हाल ही लन्दन में अपने तीन नए मॉडल बाजार में उतारे। आपको ये जानकर खुशी होगी कि इन तीनो मॉडल्स को कंपनी ने हिन्दी का नाम दिया है। इन्हें अमेरिका, यूरोप और एशिया यानी पूरी दुनिया में आशा-300 और आशा-200 मॉडल के फोन लांच किए जाएंगे।
*अटल बिहारी वाजपयी वे पहले भारतीय थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ (1977) में हिंदी में भाषण देकर भारत को गौरवान्वित किया था। (अटल बिहारी वाजपयी 1977 में विदेश मंत्री थे)
*जुरासिक पार्क जैसी अति प्रसिध्द हॉलीवुड फ़िल्म को भी अधिक मुनाफ़े के लिए हिंदी में डब किया जाना जरूरी हो गया । इसके हिंदी संस्करण ने भारत में इतने पैसे कमाए जितने अंग्रेजी संस्करण ने पूरे विश्व में नहीं कमाए थे ।
*अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने 114 मिलियन डॉलर की एक विशेष राशि अमरीका में हिंदी, चीनी और अरबी भाषाएं सीखाने के लिए स्वीकृत की है । इससे स्पष्ट होता है कि हिंदी के महत्व को विश्व में कितनी गंभीरता से अनुभव किया जा रहा है ।
*हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।
*बह्म समाज के नेता बंगला-भाषी केशवचंद्र सेन ने भी हिन्दी का समर्थन किया था।
* गुजराती भाषा-भाषी स्वामी दयानंद सरस्वती ने जनता के बीच जाने के लिए 'जन-भाषा' हिन्दी सीखने का आग्रह किया ।
*गुजराती भाषा-भाषी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने मराठी-भाषा-भाषी चाचा कालेलकर जी को सारे भारत में घूम-घूमकर हिन्दी का प्रचार-प्रसार करने का आदेश दिया।
*सुभाषचंद्र बोस की 'आजाद हिन्द फौज' की राष्ट्रभाषा हिन्दी ही थी।
*श्री अरविंद घोष हिन्दी-प्रचार को स्वाधीनता-संग्राम का एक अंग मानते थे।
* नागरी लिपि के प्रबल समर्थक न्यायमूर्ति श्री शारदाचरण मित्र ने तो ई. सन् 1910 में यहां तक कहा था - यद्यपि मैं बंगाली हूं तथापि इस वृद्धावस्था में मेरे लिए वह गौरव का दिन होगा जिस दिन मैं सारे भारतवासियों के साथ, 'साधु हिन्दी' में वार्तालाप करूंगा।
* अहिन्दी-भाषी-मनीषियों में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय और ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने भी हिन्दी का समर्थन किया था।
*अनेक देश हिंदी कार्यक्रम प्रसारित कर रहे हैं, जिनमें बीबीसी, यूएई क़े 'हम एफ-एम' ,जर्मनी के डॉयचे वेले, जापान के एनएचके वर्ल्ड और चीन के चाइना रेडियो इंटरनेशनल की हिंदी सेवा विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
पूरा लेख यहाँ पर क्लिक करके पढ़ें.

दोस्त के नाम पर कलंक है सिरफिरा

म दोस्त के नाम पर कलंक है. चलो कुछ तो है. हम तो खुद को किसी काबिल समझते ही नहीं थें. आज फख्र हो रहा है कि हम कलंक के काबिल तो है.
लो दोस्तों ! मैं आपको पहले ही कहता था कि मैं अनपढ़ और गंवार/ सिरफिरा इंसान किसी भी काबिल नहीं हूँ. मगर आप अपने प्यार और स्नेह से मुझे खजूर के पेड़ पर चढाते रहे. हम आप सब अनेकों बार कहते रहे कि आप तुच्छ इंसान को तुच्छ ही रहने दो. हमें खजूर के पेड़ पर मत चढाओं. हममें भी अनेकों अवगुण है. हम भी गलतियों के पुतले है. हमसे भी गलतियाँ होती है. मगर आप तो हमारी चापलूसी करते थें शायद.  फेसबुक के प्रयोगकर्त्ता हमारे इस लिंक (जरा देखें-http://www.facebook.com/note.php?note_id=271490346234943)पर टिप्पणी की है. श्री गोपाल झा जी (http://facebook.com/gopaljha73) तो यह कहते हैं कि "सिरफिरा जी आप काफी घमंडी है और इतना घंमड ठीक नहीं होता है दोस्ती के लिये आप दोस्त के नाम पर कलंक है. आप लोग को भ्रमित करते है. जिनका स्वयं (Gopal के बारे में) के बारें में कहना है कि-निगान्हे निगाहों से मिला कर तो देखो,हम से रिश्ता बना कर तो देखो. अपनी प्रशंसा मैं स्वयं कैसे करूँ ? निन्दा करना मुझे आता नहीं. अब बताए कौन सही कह रहा है और कौन झूठ कह रहा है. इसका फैसला कैसे करूँ ? कुछ मुझे रास्ता दिखाए आप सभी.
         दोस्तों, मुझे तो लगता है कि मुझे अपना बहुत बड़ा आलोचक मिल गया. आपकी क्या राय है ? अब देखिये आलोचक द्वारा कुछ देने पर समर्थकों का भडकना स्वाभाविक है. जैसे-सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ "जन लोकपाल" कानून बनाने की नीयत अच्छी ना होने के श्री अन्ना हजारे के ब्यान पर सरकार के मंत्रियों ने भटकना शुरू कर दिया. कुछ बुध्दिजीवी वर्ग के नेता तो असभ्य और सभ्य भाषा में फर्क तक भूलकर लगे आरोप लगाने अन्ना टीम पर. इसलिए दोस्तों अपनी बात कहते हुए सयम रखना. लोगों को भी पता चले कि सिरफिरा के दोस्त सभ्य भाषा में अपने विचारों की अभिव्यक्ति करना जानते है.  आप मेरे एक नौजवान(इनकी उम्र कम और थोडा जवानी का जोश भी है) मित्र ने ऑनलाइन वार्तालाप में गलती कर दी थी. इसलिए उसकी वार्तालाप भी डाल रहा हूँ. पूरा लेख यहाँ पर क्लिक करके पढ़ें.

तुम मुझे वोट दो, मैं तुम्हारे अधिकारों के लिए अपना खून बहा दूँगा !

दोस्तों ! आपको पता है या नहीं मुझे पता नहीं है. मैंने दो बार चुनाव लड़े है. अगर आप मेरे सारे ब्लोगों की एक-एक पोस्ट को पढ़ें. तब आपको काफी जानकारी मिल जायेगी. हमने दो बार निर्दलीय चुनाव लड़े है. चुनाव चिन्ह "कैमरा" यानि तीसरी आँख से दोनों बार हारा हूँ. मगर अफ़सोस नहीं मुझे जितनी भी मुझे वोट मिले वो मेरी कार्यशैली और विचारधारा से मिली थी। इस बात खुशी है कि मैंने वोट लेने के लिए किसी को दारू नहीं पिलाई और न किसी को धमकाया या किसी प्रकार का लालच नहीं दिया. सब लोगों ने अपने विवेक से वोट दिया था.
मेरे पास भारत देश को लेकर बहुत बड़ी सोच (विचारधारा+योजना) है। जिसका प्रयोग करके 'सोने की चिडियाँ" कहलवाने वाले भारत देश को "अमरीका" जैसे बीसियों देशों से आगे ले जाकर खड़ा कर दूँगा. हाँ, मैं जैसे यहाँ (गूगल,फेसबुक) पर नियमों को लेकर बहुत सख्त हूँ. उसी प्रकार से "हिटलर" जैसा तानाशाही प्रधानमंत्री बन देश को सिर्फ दो साल चलाना चाहता हूँ. उसके बाद जनता की अनुमति के बाद अगले तीन साल देश की बागडोर संभालूँगा. आज मेरे पास कुछ निजी कारणों से ( जिनसे शायद आप नहीं अधिकत्तर समूह के सदस्य और दोस्त कहूँ या पाठक परिचित भी है) पार्टी बनाने के लिए एक चवन्नी भी नहीं है. मगर देखो ख्याब देश को चलाने का और प्रधानमंत्री बनने का देख रहा हूँ. इसको कहते हैं ना हैं...हौंसला. बस मुझे ऐसे ही सिर्फ फ़िलहाल पूरे देश से 545 "सिरफिरे" भूखें-नंगे लोगों की जरूरत है. जिनको मैं सिर्फ रोटी-कपड़ा-मकान दूँगा. उनके अंदर मेरे हिसाब से वो गुणवत्ता होनी चाहिए. जिसकी मुझे चाह है. फिर आप देखते रह जायेंगे. समृद्ध भारत देश का नाम पूरे विश्व में एक नया उदाहरण देने वाला के रूप में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा. अब आप बताये भूखे-नंगे सिरफिरे लोगों आप अपनी वोट डालने के लिए जायेंगे. घर पर बैठकर चाय की चुस्कियां लेते हुए टी.वी. पर फिल्म तो नहीं देखेंगे. अगर आप लोग देखते रह गए. तब 545 सिरफिरे चुनाव में हार जायेंगे और फिर कोई दल चुनाव जीतकर अपने स्विस के बैंक भर लेगा.
आज श्री अन्ना हजारे जी और बाबा रामदेव जी राजनीति में आने का कोई स्पष्ट इशारा नहीं दें रहें है. मेरे पास कुछ नहीं है.मगर अपने हौंसले के कारण बिना किसी सहारे के बिलकुल स्पष्ट इशारा देते हुए कह रहा हूँ कि-बिना गंदगी में उतरे गंदगी की सफाई नहीं की जा सकती है. मैंने दोनों व्यक्तियों के पास अपनी विचारधारा पहुँचाने के प्रयास किये मगर वहाँ से किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं मिली. श्री अन्ना हजारे जी को लिखा पत्र तो मेरे ब्लॉग पर भी है.

Thursday, January 5, 2012

उड़ीसा हो या जापान, मछली शाकाहारी भोज है ? Fish eating culture

उड़ीसा हो या जापान, मछली को शाकाहार में ही गिना जाता है Vegetarianism  

आचार्य गजेंद्र कुमार पंडा जी का हम सभी ने बड़ी गर्मजोशी से स्वागत किया।


यह फ़ोटो उसी पहले दिन का है। फ़ोटो के पीछे 2 जून 1998 लिखा है।
इस वर्ग का आयोजन हमने जैन इंटर कॉलिज में किया था.
आचार्य पंडा जी से मिलना अपने आप में एक आनंद देता है। ‘हास-परिहास‘ का सेंस भी उनमें ग़ज़ब का है। हंसी मज़ाक़ के दौरान मात्र 10 घंटों में ही वह आदमी को संस्कृत बोलने के लायक़ बना देते हैं।
रामपुर में उन्होंने बताया कि हमारे पिताजी शुद्ध नैष्ठिक ब्राह्मण हैं। अगर उन्हें पता चला कि हम मुसलमानों के घर खा पी कर आ रहे हैं तो वह हमें घर में घुसने ही नहीं देंगे।
उन्हें शुद्ध खाने में शाकाहारी भोज दिया गया।
दो दिन बाद वह बोले कि ‘मछली बनवाओ।‘
उनके भोजन का इंतेज़ाम सैयद साहब के घर पर था। उन्होंने उनके लिए मछली बनवाई, उन्होंने उसे खाया।
हम समझे कि वह मांसाहारी हैं। अगले दिन उनके लिए मुर्ग़ा बनवाया गया।
उसे देखकर उन्होंने खाने से इंकार कर दिया।
बोले हम मांस नहीं खाते।
उन्हें याद दिलाया गया कि कल आपने मछली खाई थी न।
बोले कि हां, लेकिन मछली को तो हम आलू की तरह मानते हैं।

भारत में भी अलग अलग इलाक़े के शाकाहारियों के भोजन का मेन्यू अलग अलग है।
भारत में ही नहीं विदेशों में भी ऐसा ही है। जापान में भी मछली को शाकाहारी भोजन में ही गिना जाता है।
ब्लॉगर रचना बैंकॉक गईं तो उन्होंने खाने के लिए वेज बर्गर मंगाया। मैक्डोनल्ड ने उन्हें बीफ़ बर्गर दिया। वहां गाय का मांस शाकाहार ही माना जाता है।
भारतीय संस्कृति की तरह ही विश्व संस्कृति भी बड़ी अद्भुत है।

Wednesday, January 4, 2012

हम बुध्दिजीवी कब से एक धर्म के हो गए ?

क्या हम सब बुध्दिजीवी एक दूसरे के घर्म को नीचा दिखाने के लिए सोशल वेबसाइट (फेसबुक, गूगल, ब्लॉग और ऑरकुट आदि) एकत्रित हुए है ? हम बुध्दिजीवी कब से एक धर्म के हो गए ? क्या हम सब धर्म से बढ़कर "इंसानियत" को ही अपना सबसे बड़ा धर्म नहीं मानते हैं ?
मैंने अपने पिछले दो सालों की रिसर्च (शोध) कार्य में महसूस किया कि कोई(कुछ) हिंदू, मुस्लिम धर्म की बुराई कर रहा और कोई मुस्लिम भाई, हिंदू धर्म की बुराई कर रहा है. इसी प्रकार हर(कुछ) धर्म के अनुयायी सोशल वेबसाइटों को उपयोग दूसरे धर्मों की बुराई करने के कर रहा है. हम आखिर कब देश को आगे लेकर जाने के लिए विचार करना और लिखना शुरू करेंगे. 
यह मेरे विचार है कि हम बुध्दिजीवी अगर कुछ नहीं कर सकते है. तब किसी धर्म, जाति, व्यक्ति विशेष को नीचा दिखाने का कार्य भी नहीं करना चाहिए. देश में फैली बुराइयों को खत्म करने के लिए "कुछ" कहूँ या थोडा-सा कार्य करना चाहिए.
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नववर्ष 2012 की हार्दिक शुभकामनाएँ

आओ दोस्तों ! नववर्ष 2012 में प्रतिज्ञा लें कि "एक दीया तुम जलाओ, एक दीया हम जलाएं. कुछ अँधेरा तुम मिटाओ, कुछ अँधेरा हम मिटाएं" आप व आपके परिवार के सभी सदस्यों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ. 
नव वर्ष 2012 आपके एवं आपके परिवार के लिए सुख, शांति, सम्पन्नता, समृद्धि एवं सफलता लेकर आए । ईश्वर से नववर्ष पर यही कामना है।
   एक संकलन रचना पर गौर कीजिए:-
"चंद लम्हे ही सही"
चंद लम्हे ही सही , तेरा मेरा साथ चले ,
जब भी यारों में चले , तेरी मेरी बात चले ।
लोग हँसते रहें , खामोश हम अकेले में
देखते जाएँ जो तूफान और बरसात चले ।
बस तू एक बार ठहर जाओ मेरी बाहों में
अब्र में चाँद जो चाहे तो सारी रात चले ।
और सिरफिरा तुझे क्या चाहिए जमाने से
जब तलक चल सके ये पागले हालात चले ।
 
*******************
"उच्च आदर्शों के पुष्प चढ़ाएँ"
नए साल की प्रातः बेला में,
आओ मिलकर दिया जलाएँ;
ईश्वर से हम करें प्रार्थना,
उच्च आदर्शों के पुष्प चढ़ाएँ.
सरक जाता है जिस तरह रेत
समझ ले मानव मुठ्ठी से,
निकल गया यह कालखंड भी
सरककर आज हमारी मुठ्ठी से;
दुर्गुणों पर विजय करें हम
देश का जग में मान बढाएँ;
नए साल की प्रातः बेला में,
आओ मिलकर दिया जलाएँ.
क्या खोया क्या पाया हमने,
देखी प्रभु की माया हमने?
भटक रहे हम जिसकी खोज में
क्या उसे पाकर भी पाया हमने?
भटक गए हम स्वयं के अरण्य में
आओ खुद का पता लगाएँ;
नए साल की प्रातः बेला में,
आओ मिलकर दिया जलाएँ.
क्या सीखा हमने इस बीते वर्ष से?
क्या किया हमने इस बीते वर्ष में?
सोंचा है कभी शांतचित्त होकर
करना क्या है नए वर्ष में?
आओ मिलकर सोंचें-विचारें
नववर्ष की योजना बनाएँ;
नए साल की प्रातः बेला में,
आओ मिलकर दिया जलाएँ.
 
आया है समय नए अवसर लेकर 
करें प्रयत्न हम नव निर्माण का;
बीते दिनों के ध्वंस भुलाकर
करें स्वागत हम नवविहान का;
जाना है हमें मंजिल तक
आओ मिलकर कदम बढाएँ;
नए साल की प्रातः बेला में,
आओ मिलकर दिया जलाएँ;
ईश्वर से हम करें प्रार्थना,
उच्च आदर्शों के पुष्प चढ़ाएँ.
*********************
     मुझे अपनी वहकी हुई और पत्रकारिता की लक्ष्मण रेखा पार करती मेरी "कलम" के लिए मुझे फाँसी की भी सजा होती है।तब मैं अपनी फाँसी के समय से पहले ही फाँसी का फंदा चूमने के लिए तैयार रहूँगा और देश के ऊपर कुर्बान होने के लिए अपनी खुशनसीबी समझूंगा. इसके साथ ही मृत देह (शरीर) को दान करने की इच्छा है और अपनी हडियों की "कलम" बनवाकर देशहित में लिखने वाले पत्रकारों को बांटने की वसीयत करके जाऊँगा.  
http://shakuntalapress.blogspot.com/2012/01/blog-post.html

Tuesday, January 3, 2012

अनल हक़ से आगे मंज़िलें और भी हैं

सूफ़ी साधना से आध्यात्मिक उन्नति आसान है Sufi silsila e naqshbandiya

सूफ़ी दर्शन क्या है और सूफ़ी कौन होता है ?
सूफ़ी दर्शन को ‘तसव्वुफ़‘ कहा जाता है। सूफ़ी शब्द की उत्पत्ति को लेकर बहुत से मत हैं। कुछ विद्वानों का मत है कि सूफ़ी शब्द ‘सफ़ा‘ से निकला है, जिसका अर्थ है विशुद्धता, मन-विचार और कर्म की विशुद्धता। जिन लोगों के बारे में यह शब्द बोला जाता है उनका चित्त शुद्ध होता है और ख़ुदा की मुहब्बत के साथ साथ उनके दिल में उसके बंदों के लिए भी मुहब्बत पाई जाती है। अमीर की अमीरी और किसी ग़रीब की ग़ुरबत इनके लिए कोई मायने नहीं रखती। अमीरों से पहले ये लोग ग़रीबों को अपने क़रीब करते हैं।
अनल हक़ से आगे मंज़िलें और भी हैं
अपने शैख़ की रहनुमाई में जो लोग इस मंज़िल से आगे निकल जाते हैं। वे यह जान लेते हैं कि ‘अल्लाह वराउलवरा है।‘ जो भी चीज़ नज़र में आती है या इंसान के ख़याल में समाती है, अल्लाह उस जैसा नहीं है। कोई भी चीज़ अल्लाह जैसी नहीं है। अल्लाह हर चीज़ से परे है। योगियों में भी जो यह जान लेते हैं कि परब्रह्म अचिन्त्य, अविज्ञेय और कल्पनातीत है, वे  ब्रह्म को परब्रह्म कहते हैं।
मुस्लिम सूफ़ी पहली कैफ़ियत को ‘तश्बीह‘ और दूसरी कैफ़ियत को ‘तन्ज़ीह‘ कहते हैं।

‘ब्लॉग की ख़बरें‘

1- क्या है ब्लॉगर्स मीट वीकली ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_3391.html

2- किसने की हैं कौन करेगा उनसे मोहब्बत हम से ज़्यादा ?
http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

3- क्या है प्यार का आवश्यक उपकरण ?
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

4- एक दूसरे के अपराध क्षमा करो
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

5- इंसान का परिचय Introduction
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/introduction.html

6- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

8- बेवफा छोड़ के जाता है चला जा
http://kunwarkusumesh.blogspot.com/2011/07/blog-post_11.html#comments

9- इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक
http://www.hamarianjuman.com/2011/07/blog-post.html

10- दुआ की ताक़त The spiritual power
http://ruhani-amaliyat.blogspot.com/2011/01/spiritual-power.html

11- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

12- शकुन्तला प्रेस कार्यालय के बाहर लगा एक फ्लेक्स बोर्ड-4
http://shakuntalapress.blogspot.com/

13- वाह री, भारत सरकार, क्या खूब कहा
http://bhadas.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

14- वैश्विक हुआ फिरंगी संस्कृति का रोग ! (HIV Test ...)
http://sb.samwaad.com/2011/07/blog-post_16.html

15- अमीर मंदिर गरीब देश
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

16- मोबाइल : प्यार का आवश्यक उपकरण Mobile
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/mobile.html

17- आपकी तस्वीर कहीं पॉर्न वेबसाइट पे तो नहीं है?
http://bezaban.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html

18- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम अब तक लागू नहीं
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

19- दुनिया में सबसे ज्यादा शादियाँ करने वाला कौन है?
इसका श्रेय भारत के ज़ियोना चाना को जाता है। मिजोरम के निवासी 64 वर्षीय जियोना चाना का परिवार 180 सदस्यों का है। उन्होंने 39 शादियाँ की हैं। इनके 94 बच्चे हैं, 14 पुत्रवधुएं और 33 नाती हैं। जियोना के पिता ने 50 शादियाँ की थीं। उसके घर में 100 से ज्यादा कमरे है और हर रोज भोजन में 30 मुर्गियाँ खर्च होती हैं।
http://gyaankosh.blogspot.com/2011/07/blog-post_14.html

20 - ब्लॉगर्स मीट अब ब्लॉग पर आयोजित हुआ करेगी और वह भी वीकली Bloggers' Meet Weekly
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/bloggers-meet-weekly.html

21- इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
http://www.sahityapremisangh.com/2011/07/blog-post_3678.html

22- इसलाम में आर्थिक व्यवस्था के मार्गदर्शक सिद्धांत
http://islamdharma.blogspot.com/2012/07/islamic-economics.html

23- मेरी बिटिया सदफ स्कूल क्लास प्रतिनिधि का चुनाव जीती
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_2208.html

24- कुरआन का चमत्कार

25- ब्रह्मा अब्राहम इब्राहीम एक हैं?

26- कमबख़्तो ! सीता माता को इल्ज़ाम न दो Greatness of Sita Mata

27- राम को इल्ज़ाम न दो Part 1

28- लक्ष्मण को इल्ज़ाम न दो

29- हरेक समस्या का अंत, तुरंत

30-
अपने पड़ोसी को तकलीफ़ न दो

साहित्य की ताज़ा जानकारी

1- युद्ध -लुईगी पिरांदेलो (मां-बेटे और बाप के ज़बर्दस्त तूफ़ानी जज़्बात का अनोखा बयान)
http://pyarimaan.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

2- रमेश कुमार जैन ने ‘सिरफिरा‘ दिया
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

3- आतंकवादी कौन और इल्ज़ाम किस पर ? Taliban
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/taliban.html

4- तनाव दूर करने की बजाय बढ़ाती है शराब
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

5- जानिए श्री कृष्ण जी के धर्म को अपने बुद्धि-विवेक से Krishna consciousness
http://vedquran.blogspot.com/2011/07/krishna-consciousness.html

6- समलैंगिकता और बलात्कार की घटनाएं क्यों अंजाम देते हैं जवान ? Rape
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/rape.html

7- क्या भारतीय नारी भी नहीं भटक गई है ?
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

8- ख़ून बहाना जायज़ ही नहीं है किसी मुसलमान के लिए No Voilence
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/07/no-voilence.html

9- धर्म को उसके लक्षणों से पहचान कर अपनाइये कल्याण के लिए
http://charchashalimanch.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

10- बाइबिल के रहस्य- क्षमा कीजिए शांति पाइए
http://biblesmysteries.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

11- विश्व शांति और मानव एकता के लिए हज़रत अली की ज़िंदगी सचमुच एक आदर्श है
http://dharmiksahity.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

12- दर्शनों की रचना से पूर्व मूल धर्म
http://kuranved.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

13- ‘इस्लामी आतंकवाद‘ एक ग़लत शब्द है Terrorism or Peace, What is Islam
http://commentsgarden.blogspot.com/2011/07/terrorism-or-peace-what-is-islam.html

14- The real mission of Christ ईसा मसीह का मिशन क्या था ? और उसे किसने आकर पूरा किया ? - Anwer Jamal
http://kuranved.blogspot.com/2010/10/real-mission-of-christ-anwer-jamal.html

15- अल्लाह के विशेष गुण जो किसी सृष्टि में नहीं है.
http://quranse.blogspot.com/2011/06/blog-post_12.html

16- लघु नज्में ... ड़ा श्याम गुप्त...
http://mushayera.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html

17- आपको कौन लिंक कर रहा है ?, जानने के तरीके यह हैं
http://techaggregator.blogspot.com/

18- आदम-मनु हैं एक, बाप अपना भी कह ले -रविकर फैजाबादी

19-मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत

20- मौत कहते हैं जिसे वो ज़िन्दगी का होश है Death is life

21- कल रात उसने सारे ख़तों को जला दिया -ग़ज़ल Gazal

22- मोम का सा मिज़ाज है मेरा / मुझ पे इल्ज़ाम है कि पत्थर हूँ -'Anwer'

23- दिल तो है लँगूर का

24- लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी - Allama Iqbal

25- विवाद -एक लघुकथा डा. अनवर जमाल की क़लम से Dispute (Short story)

26- शीशा हमें तो आपको पत्थर कहा गया (ग़ज़ल)